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Aug 21, 2018

आई आई घड़ी ये सुहानी-दिल १९४६

बचपन जाता है और जवानी आती है वाकई बड़ी
सुहानी घडी होती है जब मन में सब घंटे घड़ियाल
बजना शुरू हो जाते हैं. साँसों में सारे तार वाद्यों की
आवाजें आना शुरू हो जाती हैं. दिल की उमंगें कूद
कर बाहर आने को बेताब रहती हैं.

नूरजहाँ का गाया हुआ गान सुनते हैं फिल्म दिल से
जिसे शम्स लखनवी ने लिखा है और इसकी तर्ज़
तैयार की है ज़फर खुर्शीद ने. फिल्म में दो और
गीतकारों ने गीत लिखे हैं-अर्श हैदरी और राज़ीउद्दीन
ने. हम मान लेते हैं इसे शम्स लखनवी ने लिखा है
जब तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल जाए.




गीत के बोल:

आई आई घड़ी ये सुहानी
आई आई घड़ी ये सुहानी
गया मेरा बचपन अब आई जवानी
गया मेरा बचपन अब आई जवानी
आई आई
आई आई घड़ी
आई आई घड़ी ये सुहानी
आई आई घड़ी ये सुहानी

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
बागों में जाऊँ फूलों से खेलूँ
बागों में जाऊँ फूलों से खेलूँ
बुलबुलों की सुनूँ मैं कहानी
बुलबुलों की सुनूँ मैं कहानी

आई आई घड़ी
आई आई घड़ी ये सुहानी
आई आई घड़ी ये सुहानी

देखूँ तो
देखूँ तो गुल और कली
गाती है क्या रागिनी
देखूँ तो
देखूँ तो गुल और कली
गाती है क्या रागिनी
दुनिया में क़ायम मुहब्बत रहेगी
दुनिया में क़ायम मुहब्बत रहेगी
बाक़ी है जो कुछ वो फ़ानी
बाक़ी है जो कुछ वो फ़ानी

आई आई घड़ी
आई आई घड़ी ये सुहानी
आई आई घड़ी ये सुहानी
गया मेरा बचपन अब आई जवानी
गया मेरा बचपन अब आई जवानी
आई, आई
आई आई घड़ी
आई आई घड़ी ये सुहानी
आई आई घड़ी ये सुहानी
…………………………………………………
Aai aai ghadi ye suhani-Dil 1946

Artist: Noorjahan

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May 5, 2018

यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे-लाल हवेली १९४४

कवि क्या कहना चाहता है इसे समझ पाने के लिए कवि जैसा
दिमाग चाहिए या कॉमन सेन्स चाहिए ये समझ नहीं पड़ा. एक
तो लिखने वाला क्या लिखता है और दिखाने वाला क्या दिखाता
है इसमें भी अंतर आ जाता है. मसलन- दूर से देखा तो अंडे उबल
रहे थे पास जा के देखा तो गंजे उछल रहे थे,

हेरा फेरी का मतलब अलग है, हेर फेर का भी वही मतलब होता
है. हेरा फेरा का मतलब भी यही समझ लिया जाए. इसे ह्यूमर
वाले सेन्स में लिया गया है.



गीत के बोल:

यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे
हसीनों की गलियों के हों हेरे-फेरे
हसीनों की गलियों के हों हेरे-फेरे
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे

मेरे जज़्ब-ए-दिल की कशिश देख लेना
मेरे जज़्ब-ए-दिल की कशिश देख लेना
के ख़ुद ही चले आयेंगे पास मेरे
के ख़ुद ही चले आयेंगे पास मेरे
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे

ज़मीं पर उतर आया चाँद आसमाँ से
ज़मीं पर उतर आया चाँद आसमाँ से
ग़रीबों के घर आज होंगे बसेरे
ग़रीबों के घर आज होंगे बसेरे
यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे

कोई बात पूछे न पूछे हमें क्या
कोई बात पूछे न पूछे हमें क्या
दर-ए-यार पर अब लगाये हैं डेरे
दर-ए-यार पर अब लगाये हैं डेरे

यही फ़िक़्र है शाम पिछले सवेरे
हसीनों की गलियों के हों हेरे-फेरे
हसीनों की गलियों के हों हेरे-फेरे
………………………………………………………………
Yahi fikr hai-Lal aveli 1944

Artist: Surendra, Yakub

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May 3, 2018

मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल-लाल हवेली १९४४

हवेली शब्द से से किसी भूतिया फिल्म का आभास होता
है. फिल्म तो नहीं अलबत्ता एक शब्द से ज़रूर भाषा का
भूत परेशान कर रहा है- गीत में गोल है के खोल है.
वैसे उस समय नूरजहाँ का चेहरा गोल ही नज़र आता
थे. फिल्म में सस्पेंस हो ना हो इस बात में ज़रूर है. वैसे
भी उम्र होने पर कान बजने शुरू हो जाते हैं, भैरवी के
साथ भीमपलासी सुनाई देने लगती है.

सुरेन्द्र और नूरजहाँ ने इस गीत को परदे पर और परदे
के पीछे दोनों जगह गाया है. शम्स लखनवी के बोल हैं
और मीर साहब का संगीत.





गीत के बोल:

मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल
सुन्दर मुखडा गोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
पंछी डार डार ना डोल
पंछी डार डार ना डोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल

मन को हो किस तरह दिलासा
मन को हो किस तरह दिलासा
कुआं पास और फिर भी प्यासा
कुआं पास और फिर भी प्यासा
रूप बड़ा अनमोल रूप बड़ा अनमोल
सुन्दर मुखडा गोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल

हाल जो तेरा वही है मेरा
हाल जो तेरा वही है मेरा
एक जगह दोनों का बसेरा
एक जगह दोनों का बसेरा
प्रेम का अमृत घोल

प्रेम का अमृत घोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल
पंछी डार डार ना डोल
पंछी डार डार ना डोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल
.........................................................
Mohaniya sundar mukhda khol-Lal Haveli 1944

Artists: Surendra, Noorjahan

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