Showing posts with label Noorjahan. Show all posts
Showing posts with label Noorjahan. Show all posts

Aug 11, 2019

हाय रे उड़ उड़ जाए-मिर्ज़ा साहिबां १९४७

बैलगाडी किसी गीत में देखे हमें काफी दिन हो गए हैं. आज
सुनते हैं गांव की प्रष्ठभूमि में फिल्माया गाया एक गीत १९४७
की फिल्म मिर्ज़ा साहिबां से. इस फिल्मे में दो संगीतकारों की
सेवाएं हैं-पंडित अमरनाथ और हुस्नलाल-भगतराम की जोड़ी की.

जो विवरण मिलते हैं उनमें ये स्पष्ट नहीं होता है कि किसने किस
गीत की धुन तैयार की है. वाद्य यन्त्र के संयोजन के हिसाब से
सोचें तो यह गीत पंडित अमरनाथ का लगता है. हम यही समझ
लेते हैं जब तक कोई ज्ञानी श्रोता इसमें करेक्शन नहीं सुझाता.

कमर जलालाबादी के बोल हैं और इसे नूरजहाँ, शमशाद बेगम
और जोहराबाई अम्बालेवाली ने गाया है. ३  गायिकाओं की
आवाज़ वाला एक दुर्लभ गीत है ये. बैलगाडी में जो सबसे ज्यादा
गोल और बड़ा चेहरा दिख रहा है वो हैं नूरजहाँ और पैदल
सवार का नाम है त्रिलोक कपूर. बाकियों को आप पहचानिये.




गीत के बोल:

हाय रे उड़ उड़ जाए हाय रे उड़ उड़ जाए
मेरा रेशमी दुपट्टवा दुपट्टवा हो हो ओ दुपट्टवा
हाय रे उड़ उड़ जाए हाय रे उड़ उड़ जाए
मेरा रेशमी दुपट्टवा दुपट्टवा हो हो ओ दुपट्टवा
हाय रे उड़ उड़ जाए

एक हवा का मीठा झोंका कह गया मीठी बात
कह गया मीठी बात
भूले से कहीं थाम ना लेना परदेसी का हाथ
हो ओ ओ परदेसी का हाथ
ये बात मुझे समझाए दुपट्टा रेशम का
ये बात मुझे समझाए दुपट्टा रेशम का
हो दुपट्टा रेशम का

हाय रे उड़ उड़ जाए हाय रे उड़ उड़ जाए
मेरा रेशमी दुपट्टवा दुपट्टवा हो हो ओ दुपट्टवा
हाय रे उड़ उड़ जाए

पीछे पीछे आने वाले हो पीछे न रे चलना
पीछे न रे चलना
डर है यूँ ही बीत ना जाए साजन समां सुहाना
साजन समां सुहाना
ये मीठा गीत सुनाये दुपट्टा रेशम का
ये मीठा गीत सुनाये दुपट्टा रेशम का
हो दुपट्टा रेशम का

हाय रे उड़ उड़ जाए हाय रे उड़ उड़ जाए
मेरा रेशमी दुपट्टवा दुपट्टवा हो हो ओ दुपट्टवा
हाय रे उड़ उड़ जाए

डूब रहा है सूरज अपने दिल में ले कर आस
हो ओ ओ दिल में ले कर आस
दूर दूर हैं दो दिल बोलो कैसे आयें पास
हो ओ ओ कैसे आयें पास
दो बिछड़े दिल मिलवाए दुपट्टा रेशम का
दो बिछड़े दिल मिलवाए दुपट्टा रेशम का
हो दुपट्टा रेशम का

हाय रे उड़ उड़ जाए हाय रे उड़ उड़ जाए
मेरा रेशमी दुपट्टवा दुपट्टवा हो हो ओ दुपट्टवा
हाय रे उड़ उड़ जाए
……………………………………………
Haye re ud ud jaaye-Mirza Sahiban 1947

Artists: Noorjahan, Trilok Kapoor, Unknown1, Unknown 2

Read more...

Aug 26, 2018

आवाज़ दे कहाँ है-अनमोल घडी १९४६

इस शब्द में कितनी कशिश है, कितना दम है. इस को
ले कर बने मुखड़े अधिकाँश हिट साबित हुए हैं-आवाज़.

इस गाने की तारीफ में आप ना जाने कितने पन्ने और
किताबें पढ़ चुके हैं, वो सब कम हैं क्या जो और विवरण
की तलाश में हैं.





गीत के बोल:

आवाज़ दे कहाँ है दुनिया मेरी जवाँ है
आबाद मेरे दिल में उम्मीद का जहाँ है
दुनिया मेरी जवाँ है
आवाज़ दे कहाँ है

आ रात जा रही है यूं जैसे चाँदनी की बारात जा रही है
आ रात जा रही है यूं जैसे चाँदनी की बारात जा रही है

चलने को अब फ़लक से तारों का कारवाँ है
चलने को अब फ़लक से तारों का कारवाँ है
ऐसे में तू कहाँ है
दुनिया मेरी जवाँ है
आवाज़ दे कहाँ है

किस्मत पे छा रही है क्यों रात की सियाही
किस्मत पे छा रही है क्यों रात की सियाही
वीराँ है मेरी नींदें तारों से ले गवाही
वीराँ है मेरी नींदें तारों से ले गवाही
बरबाद मैं यहाँ हूँ आबाद तू कहाँ है
बरबाद मैं यहाँ हूँ आबाद तू कहाँ है
बेदर्द आसमाँ है
दुनिया मेरी जवाँ है

आवाज़ दे कहाँ है
आवाज़ दे कहाँ है
…………………………………………………..
Aawaz de kahan hai-Anmol ghadi 1946

Artist: Noorjahan

Read more...

Aug 21, 2018

आई आई घड़ी ये सुहानी-दिल १९४६

बचपन जाता है और जवानी आती है वाकई बड़ी
सुहानी घडी होती है जब मन में सब घंटे घड़ियाल
बजना शुरू हो जाते हैं. साँसों में सारे तार वाद्यों की
आवाजें आना शुरू हो जाती हैं. दिल की उमंगें कूद
कर बाहर आने को बेताब रहती हैं.

नूरजहाँ का गाया हुआ गान सुनते हैं फिल्म दिल से
जिसे शम्स लखनवी ने लिखा है और इसकी तर्ज़
तैयार की है ज़फर खुर्शीद ने. फिल्म में दो और
गीतकारों ने गीत लिखे हैं-अर्श हैदरी और राज़ीउद्दीन
ने. हम मान लेते हैं इसे शम्स लखनवी ने लिखा है
जब तक कोई ठोस प्रमाण नहीं मिल जाए.




गीत के बोल:

आई आई घड़ी ये सुहानी
आई आई घड़ी ये सुहानी
गया मेरा बचपन अब आई जवानी
गया मेरा बचपन अब आई जवानी
आई आई
आई आई घड़ी
आई आई घड़ी ये सुहानी
आई आई घड़ी ये सुहानी

ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
बागों में जाऊँ फूलों से खेलूँ
बागों में जाऊँ फूलों से खेलूँ
बुलबुलों की सुनूँ मैं कहानी
बुलबुलों की सुनूँ मैं कहानी

आई आई घड़ी
आई आई घड़ी ये सुहानी
आई आई घड़ी ये सुहानी

देखूँ तो
देखूँ तो गुल और कली
गाती है क्या रागिनी
देखूँ तो
देखूँ तो गुल और कली
गाती है क्या रागिनी
दुनिया में क़ायम मुहब्बत रहेगी
दुनिया में क़ायम मुहब्बत रहेगी
बाक़ी है जो कुछ वो फ़ानी
बाक़ी है जो कुछ वो फ़ानी

आई आई घड़ी
आई आई घड़ी ये सुहानी
आई आई घड़ी ये सुहानी
गया मेरा बचपन अब आई जवानी
गया मेरा बचपन अब आई जवानी
आई, आई
आई आई घड़ी
आई आई घड़ी ये सुहानी
आई आई घड़ी ये सुहानी
…………………………………………………
Aai aai ghadi ye suhani-Dil 1946

Artist: Noorjahan

Read more...

May 3, 2018

मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल-लाल हवेली १९४४

हवेली शब्द से से किसी भूतिया फिल्म का आभास होता
है. फिल्म तो नहीं अलबत्ता एक शब्द से ज़रूर भाषा का
भूत परेशान कर रहा है- गीत में गोल है के खोल है.
वैसे उस समय नूरजहाँ का चेहरा गोल ही नज़र आता
थे. फिल्म में सस्पेंस हो ना हो इस बात में ज़रूर है. वैसे
भी उम्र होने पर कान बजने शुरू हो जाते हैं, भैरवी के
साथ भीमपलासी सुनाई देने लगती है.

सुरेन्द्र और नूरजहाँ ने इस गीत को परदे पर और परदे
के पीछे दोनों जगह गाया है. शम्स लखनवी के बोल हैं
और मीर साहब का संगीत.





गीत के बोल:

मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल
सुन्दर मुखडा गोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
पंछी डार डार ना डोल
पंछी डार डार ना डोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल

मन को हो किस तरह दिलासा
मन को हो किस तरह दिलासा
कुआं पास और फिर भी प्यासा
कुआं पास और फिर भी प्यासा
रूप बड़ा अनमोल रूप बड़ा अनमोल
सुन्दर मुखडा गोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल

हाल जो तेरा वही है मेरा
हाल जो तेरा वही है मेरा
एक जगह दोनों का बसेरा
एक जगह दोनों का बसेरा
प्रेम का अमृत घोल

प्रेम का अमृत घोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल
पंछी डार डार ना डोल
पंछी डार डार ना डोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा खोल
मोहनिया सुन्दर मुखडा गोल
.........................................................
Mohaniya sundar mukhda khol-Lal Haveli 1944

Artists: Surendra, Noorjahan

Read more...

Dec 11, 2017

यहाँ बदला वफ़ा का बेवफ़ाई-जुगनू १९४७

जुगनू सन १९४७ में रिलीज़ हुई फिल्म है. इस वर्ष हमारा देश
अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हुआ था.

ये एक दुर्लभ युगल गीत है. दुर्लभ इस वजह से कि रफ़ी और
नूरजहाँ का गाया युगल गीत है. पार्टीशन के बाद नूरजहाँ पडोसी
देश में चली गयीं और उसके बाद नूरजहाँ की आवाज़ में गाने
गवाने का देसी संगीत निर्देशकों का ख्वाब अधूरा रह गया.

प्रस्तुत गीत के बोल हैं तनवीर नकवी के और संगीत तैयार किया
है फ़िरोज़ निज़ामी ने. इस गीत को दिलीप कुमार और नूरजहाँ पर
फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

यहाँ बदला वफ़ा का बेवफ़ाई के सिवा क्या है
मोहब्बत कर के भी देखा मोहब्बत में भी धोखा है

कभी सुख है कभी दुख है अभी क्या था अभी क्या है
यूँ ही दुनिया बदलती है इसी का नाम दुनिया है
कभी सुख है कभी दुख है अभी क्या था अभी क्या है
तड़पने भी नहीं देती हमें मजबूरियाँ अपनी

मोहब्बत करने वालों का तड़पना किसने देखा है
यहाँ बदला वफ़ा का बेवफ़ाई के सिवा क्या है

यूँ ही दुनिया बदलती है इसी का नाम दुनिया है
कभी सुख है कभी दुख है अभी क्या था उभी क्या है
मोहब्बत कर के भी देखा मोहब्बत में भी धोखा है

भुला दो वो ज़माना जब मुझे अपना बनाया था
भुला दो मुँह में उल्फ़त जब तुम्हारे लब पे आया था
भुला दो वो कसम जो दिलाई थी कभी तुमने
भुला दो वो कसम जो कि खाई थी कभी तुमने
भुला दो दिल से तुम गुज़रे हुए रँगीन ज़माने को
भुला दो हाँ भुला दो इश्क़ के सज़ा फ़साने को
तमन्नाओं की बस्ती में अंधेरा ही अंधेरा है
किसे अपना कहूँ कोई जो अपना था पराया है
यूँ ही दुनिया बदलती है इसी का नाम दुनिया है
कभी सुख है कभी दुख है अभी क्या था अभी क्या है
मोहब्बत करने वालों का तड़पना किसने देखा है
यहाँ बदला वफ़ा का बेवफ़ाई के सिवा क्या है
…………………………………………………………..
Yahan badla wafa ka-Jugnu 1947

Artists: Dilip Kumar, Noorjahan

Read more...

Feb 15, 2017

आ जा मेरी बरबाद मोहब्बत-अनमोल घडी १९४६

आ जा-इन शब्दों से काफी लोकप्रिय गीत बने हैं. उन गीतों
में कुछ ज्यादा ही लोकप्रिय हैं. एक ऐसा ही गीत सुनेंगे हम
अनमोल घडी फिल्म से. नूरजहाँ का गाया ये गीत आज भी
आपको किसी रेडियो चैनल पर सुनाई देगा.

तनवीर नकवी के बोल हैं और नौशाद का संगीत है. फिल्म में
दो गायिका-नायिकायें मौजूद हैं अपने समय की. नूरजहाँ और
सुरैया. दोनों कलाकार फिल्म संगीत के इतिहास में ऊंचा स्थान
रखते हैं. नूरजहाँ ने पडोसी देश में वो मुकाम हासिल किया
जो हमारे यहाँ लता मंगेशकर को हासिल है. नूरजहाँ गायन
के क्षेत्र में लता मंगेशकर से पहले आयीं.




गीत के बोल:

आ जा आ जा
आ जा मेरी बरबाद मोहब्बत के सहारे
है कौन जो बिगड़ी हुई तक़दीर संवारे
आ जा मेरी बरबाद मोहब्बत के सहारे
है कौन जो बिगड़ी हुई तक़दीर संवारे

आये भी ना थे खुश्क हुए आँखों में आँसू
हाय आँखों में आँसू
आये भी ना थे खुश्क हुए आँखों में आँसू
हाय आँखों में आँसू
निकले भी ना थे लुट गये अरमान बेचारे
है कौन जो बिगड़ी हुई तक़दीर संवारे

अंजाम-ए-मोहब्बत हमें मालूम है लेकिन
हमें मालूम है लेकिन
अंजाम-ए-मोहब्बत हमें मालूम है लेकिन
हमें मालूम है लेकिन
लेते हैं तेरे ग़म में उम्मीदों के सहारे
है कौन जो बिगड़ी हुई तक़दीर संवारे

था दिल को फ़कत तेरी मोहब्बत का सहारा
मोहब्बत का सहारा
हमने इसी उम्मीद पे दिन अपने गुज़ारे
है कौन जो बिगड़ी हुई तक़दीर संवारे

आ जा आ जा
आ जा मेरी बरबाद मोहब्बत के सहारे
है कौन जो बिगड़ी हुई तक़दीर संवारे
...........................................................................
Aa ja meri barbad mohabbat-Anmol ghadi 1946

Artist: Noorjahan

Read more...

Dec 27, 2016

लो चल दिए वो-गुलनार १९५३

नूरजहाँ का गाया एक गीत सुनते हैं ५० के दशक से. नूरजहाँ
का वही स्थान है पडोसी देश में जो हमारे यहाँ लता मंगेशकर
का है. वहाँ के संगीत प्रेमी दोनों के गीत बड़े चाव से सुनते हैं.

फिल्म गुलनार के इस गीत को लिखा है कातिल शिफाई ने और
इसकी धुन बनाई है गुलाम हैदर ने.





गीत के बोल:

लो चल दिए वो हमको तसल्ली दिए बग़ैर
एक चाँद छुप गया है उजाला किए बग़ैर
लो चल दिए

उनसे बिछड़ के हमको तमन्ना है मौत की
उनसे बिछड़ के हमको तमन्ना है मौत की
आ आती नहीं है मौत भी लेकिन जिये बग़ैर
लो चल दिए

माँगे से मिल सकी न हमें कभी ख़ुशी
हमें कभी ख़ुशी
आ पाए हैं लाख रंज तमन्ना किए बग़ैर
लो चल दिए

ए वक़्त-ए-इश्क़ यार न ले इम्तिहान-ए-ग़म
ए वक़्त-ए-इश्क़ यार न ले इम्तिहान-ए-ग़म
आ आ आ हम रो रहे हैं नाम किसी का लिए बग़ैर
लो चल दिए
..............................................................
Lo chal diye wo-Gulnar 1953

Read more...

Oct 2, 2016

चाँदनी रातें-दुपट्टा १९५२

कुछ कुछ संगीत के टुकड़े ऐसे हैं कि बनाने वाले, गाने वाले सबको
दाद देने को जी करता है. नूरजहाँ का एक गीत है फिल्म दुपट्टा से
जो सन १९५२ की फिल्म है. मुशीर काज़मी एक लिखे बोलों को धुन
पहनाई है फिरोज़ निज़ामी ने.

इसी गीत को आपने सन १९९९ के आसपास सुना होगा इंडीपॉप के
रूप में. बाली सागू ने इसे तैयार किया था और शमसा कँवल ने
गाया था. मूल धुन और संगीत संयोजन में ज्यादा अंतर नहीं था.
समय के हिसाब से नया संस्करण बढ़िया बना था और ये काफी
लोकप्रिय हुआ.

नूरजहाँ के गाये गीत में बोलों के हिसाब से जो भाव हैं वो नए
वर्ज़न से गायब हैं. मूल धुन आकर्षक है इसलिए इसपर आधारित
कितने भी गीत आप बना लो सुनने में अच्छे लगेंगे.



गीत के बोल:

एक टीस जिगर में उठती है
इक दर्द सा दिल में होता है
हम रातों को उठ कर रोते हैं
जब सारा आलम सोता है

ओ ओ ओ चाँदनी चाँदनी रातें
सब जग सोये  हम जागें
तारों से करें बातें
चाँदनी रातें चाँदनी रातें

तकते तकते छूटी जाये
आस पिया न आये रे
तकते तकते
शाम सवेरे दर्द अनोखे
उठें जिया घबराये रे
शाम सवेरे
रातों ने मेरी नींद लूट ली
रातों ने मेरी नींद लूट ली
दिल के चैन चुराये
दिल के चैन चुराये
दुखिया आँखें ढूँढ रही हैं
वही प्यार की घातें

चाँदनी रातें हो ओ चाँदनी रातें
सब जग सोय  हम जागे
तारों से करें बातें
चाँदनी रातें हो ओ ओ चाँदनी रातें

पिछली रात में हम उठ उठ कर
चुपके चुपके रोये रे पिछली रात में
पिछली रात में हम उठ उठ कर
चुपके चुपके रोये रे पिछली रात में
चुपके नींद में मीत हमारे
देश पराये सोये रे चुपके नींद में
दिल की धड़कनें तुझे पुकारें
दिल की धड़कनें तुझे पुकारें
आ जा बालम आई बहारें
आ जा बालम आई बहारें
बैठ के तनहाई में कर ले
सुख-दुख की दो बातें
चाँदनी रातें हो ओ ओ चाँदनी रातें

सब जग सोये हम जागें
तारों से करे बातें
चाँदनी रातें हो ओ ओ चाँदनी रातें
......................................................................
Chandni ratein-Dupatta 1952

Read more...

Aug 27, 2016

आहें न भरीं शिकवे-ज़ीनत १९४५

कुछ गीतों का क्रेज बन जाता है. उसके पीछे की वजह कुछ
भी हो सकती है. कभी कभी बिना वजह भी कोई गीत चर्चित
हो जाता है.

इस गीत के प्रसिद्ध होने के पीछे ऑफिशियल वजह क्या है मुझे
नहीं मालूम मगर जो थोड़े से ज्ञानी हो जाते हैं संगीत के क्षेत्र
में वे इस गीत के नाम से ही आह-आह और वाह-वाह करने
लगते हैं.

एक बड़ी वजह जो मुझे समझ आई वो है इसके फेमस होने
में-ये महिला कव्वाली है और शायद उस समय तक किसी हिंदी
फिल्म में टोटल महिला कव्वाली नहीं आई थी. नूरजहाँ और
जीनत बेगम तो उस समय की नामचीन गायिकाएं थीं मगर
कल्याणी का नाम उतना चर्चित नहीं था.

हम भी एडवांस में वाह वाह कर लेते हैं और आपको गीत
सुनवाते हैं. तीन गायिकाएं-नूरजहाँ, जोहरा बाई अम्बालेवाली
और कल्याणी इस गीत को गा रही हैं. नक्शब जराचवी के
लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है मीर साहब ने.



गीत के बोल:

आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया
आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया
कुछ भी न जुबां से काम लिया
आहें न भरीं शिकवे न किए
आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया
कुछ भी न जुबां से काम लिया
कुछ भी न जुबां से काम लिया
इस पर भी मोहब्बत छुप न सकी
जब तेरा किसीने नाम लिया
दिल को पकड़ कर बैठ गए
हाथों से कलेजा थाम लिया

पूछा जो किसी ने हाल तो हम
पूछा जो किसी ने हाल तो हम
कुछ कह न सके कुछ कह भी गए
कुछ कह न सके अजी हाँ हाँ
रोके तो बहुत आँसू लेकिन
कुछ रुक भी गए कुछ बह भी गए
कुछ रुक भी गए कुछ
कुछ रुक भी गए कुछ बह भी गए
अफ़साना कहा और लब न हिले
अश्कों से जहाँ का काम लिया

आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया

रोने से भला क्या दिल रुकता
क्या दिल रुकता
क्या दिल रुकता
दुनिया को तड़प कर तड़पाता
दुनिया को तड़प कर हाँ हाँ
दुनिया को तड़प कर तड़पाता
सच पूछिये वो तो ख़ैर हुई
सच पूछिये वो तो ख़ैर हुई
महफ़िल में तमाशा बन जाता
महफ़िल में तमाशा बन जाता
महफ़िल में तमाशा बन जाता
कुछ आप अदाएं रोक गए
कुछ ज़ब्त से हम ने काम लिया
कुछ आप अदाएं रोक गए
कुछ ज़ब्त से हम ने काम लिया

वो लाख तुम्हारे ज़ुल्म सहे
हाँ ज़ुल्म सहे
अजी ज़ुल्म सहे
पर आँख से आँसू बह न सका
बीमार-ए-मोहब्बत ऐ नक्शब
कुछ और तो मुँह से कह न सका
इक ठण्डी सी लम्बी आह भरी
चुपके से किसी का नाम लिया
इक ठण्डी सी लम्बी आह भरी
चुपके से किसी का नाम लिया


आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया
आहें न भरीं शिकवे न किए
कुछ भी न जुबां से काम लिया
...................................................................
Aahen na bahri shikwe na kiye-Zeenat 1945

Read more...

Aug 21, 2016

आ इंतज़ार है तेरा-बड़ी माँ १९४५

सन १९४५ को गुज़रे ६१ साल हो गए लेकिन उस युग के
गीत सुनो तो अब भी ताजे लगते हैं. आइये आज सुनें
नूरजहाँ का गाया हुआ एक मधुर गीत जिसे जिया सरहदी
ने लिखा और दत्ता कोरगाँवकर ने संगीत से संवारा.

फिल्म का नाम है बड़ी माँ जिसमें ईश्वरलाल और नूरजहाँ
की प्रमुख भूमिकाएं हैं. ये फिल्म वर्ष १९४५ की टॉप पांच
फिल्मों में से एक है. फिल्म गीतों से भरपूर है और इसमें
१० गीत हैं.



गीत के बोल:

आ इंतज़ार है तेरा
दिल बेक़रार है मेरा
आ इंतज़ार है तेरा
दिल बेक़रार है मेरा

आ जा न सता और
आ जा न रुला और
आ जा न सता और
आ जा न रुला और

आ जा कि तू ही है मेरी उम्मीद का तारा
उम्मीद का तारा
उम्मीद का तारा
आ जा कि तू ही है मेरी उम्मीद का तारा
संगम मेरी ख़ुशियों का निगाहों का सहारा
संगम मेरी ख़ुशियों का निगाहों का सहारा

आ इंतज़ार है तेरा
दिल बेक़रार है मेरा

आ कर मेरी जागी हुई रातों को सुला दे
खो जाऊँ
खो जाऊँ मुझे ऐसा कोई गीत सुना दे
आ इंतज़ार है तेरा
दिल बेक़रार है मेरा
आ जा आ जा

अब और सितम
अब और सितम हम से उठाए नहीं जाते
उठाए नहीं जाते
और राज़ मोहब्बत के
और राज़ मोहब्बत के छुपाए नहीं जाते
छुपाये नहीं जाते

आ इंतज़ार है तेरा
दिल बेक़रार है मेरा
दिल बेक़रार है मेरा
…………………………………………………….
Aa intazar hai tera-Badi Maa 1945

Read more...

Jul 17, 2015

तू कौन सी बदली में मेरे चाँद-खानदान १९४२

दीना नाथ मधोक स्टार गीतकार हुआ करते थे
काली-पीली(श्वेत श्याम) फिल्मों के युग में. उनका
लिखा एक गीत सुनते हैं आज नूरजहाँ का गाया
हुआ. गौरतलब है किसी गायिका के नाम के आगे
मैडम नहीं लगा. ये रुतबा केवल नूरजहाँ को हासिल
है. उनके चाहने वालों की कोई कमी नहीं है.

इस गीत में नायिका चाँद और ईद को याद कर रही
है. संगीत तैयार किया है गुज़रे हुए ज़माने के नामचीन
संगीतकार गुलाम हैदर ने.



गीत के बोल:

तू कौन सी बदली में मेरे चांद है आ जा
तारे हैं मेरे ज़ख्म-ए-जिगर, इनमें समा जा
तू कौन सी बदली में मेरे चांद है आ जा

दिल ढूंढ रहा है के मेरा चांद कहाँ है
छोटी सी झलक दे के मेरी ईद बना जा
तारे हैं मेरे ज़ख्म-ए-जिगर, इनमें समा जा

पहलू में लिये बैठी हूँ मैं दर्द भरा दिल
मर जाऊं या जीती रहूं ये तो बता जा
तारे हैं मेरे ज़ख्म-ए-जिगर, इनमें समा जा
……………………………………………………………
Too kaun si badli mein mere chand-Khandan 1942

Read more...

Jul 24, 2011

बैठी हूँ तेरी याद का ले कर के सहारा-विलेज गर्ल १९४५

आपको फिल्म विलेज गर्ल के दो गीत सुनवाए थे पहले, आशा है
पसंद आये होंगे. अब सुनते हैं तीसरा गीत. ये भी नूरजहाँ की मधुर
और बुलंद आवाज़ में है. नायिका इतनी बेचैन है कि सीढ़ी चढ कर
घास फूस के बने मचान के ऊपर बैठ गयी है और गा रही है-बैठी हूँ
तेरी याद का लेकर सहारा.



गीत के बोल:


बैठी हूँ तेरी याद का ले कर के सहारा
आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा

दिन रात जला करती हूँ फ़ुरकत में तुम्हारी
हर साँस धुआँ बनके निकलता है हमारा

आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा

चुप चाप सहे जाती हूँ मैं दर्द की चोटें
ले ले के जिये जाती हूँ मैं नाम तुम्हारा

आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा

अक्सर मेरी आँखों ने तुझे नींद में ढूँडा
उठ उठ के तुझे दिल ने कई बार पुकारा

आ जाओ के चमके मेरी क़िस्मत का सितारा
........................................
Baithi hoon teri yaad ka-Village girl 1945

Read more...

Jul 19, 2011

ये कौन हँसा किसने सितारों को-विलेज गर्ल १९४५

मैडम नूरजहाँ (जी हैं जैसे कि नूरजहाँ की आवाज़ के दीवाने उनको
पुकारते हैं), की आवाज़ में अगला गीत सुनिए फिल्म विलेज गर्ल से.
बोल एक बार फीस वाली साहब के हैं और संगीत श्याम सुन्दर का.

मैडम का संबोधन आपने और किसी गायिका के लिए नहीं सुना होगा.
कितनी मैडमें आयीं और गयीं मगर हिंदी उर्दू सिनेमा संगीत के इतिहास
में केवल एक ही मैडम हैं-वो हैं नूरजहाँ.

ये फिल्म अविभाजित भारत के फिल्म जगत बम्बई में बनायीं गयी थी.
विभाजन के बाद कई फ़िल्मी हस्तियाँ दूसरे देश में चली गयीं उनमें एक
नूरजहाँ भी हैं.





गीत के बोल:

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया
ये कौन

रहता है मेरी आँखों में आशाओं का मेला
रहता है मेरी आँखों में आशाओं का मेला
सपनों में हुआ करता है बालम से झमेला, होय
सपनों में हुआ करता है बालम से झमेला
नैनों की मधुर बीना पे
नैनों की मधुर बीना पे क्या राग सुनाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया
ये कौन

भाती नहीं है अब मुझे सावन की जवानी
भाती नहीं है अब मुझे सावन की जवानी
होंठों पे सदा रहती है साजन की कहानी, होय
होंठों पे सदा रहती है साजन की कहानी
इस प्रेम मिलन ने
इस प्रेम मिलन ने मुझे दीवाना बनाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया

ये कौन
ये कौन हँसा किसने सितारों को हँसाया
चुपके से मेरे नैनों की गलियों में आया
ये कौन
........................................
Ye kaun hansa-Village Girl 1945

Read more...

Jun 2, 2011

किस तरह भूलेगा दिल-विलेज गर्ल १९४५

आपको फिल्म विलेज गर्ल का एक गीत सुनवाया था ४-५ दिन पहले।
अब दूसरा गीत सुनिए जो खासा लोकप्रिय हुआ। नूरजहाँ की दिलकश
आवाज़ और मोहक अदाओं भरा ये गीत सदा जवान गीतों की श्रेणी
में आता है। प्यार समर्पण और इबादत का दूसरा नाम है, गीत की
अंतिम पंक्तियाँ इसी बात को समर्थन देती प्रतीत होती हैं। दिल तोड़ने
वाले के लिए दुआएं निकल रही हैं।





गीत के बोल:

किस तरह भूलेगा दिल
उनका ख़याल आया हुआ
जा नहीं सकता अभी
शीशे में बाल आया हुआ

ओ घटा काली घटा, अब के बरस तू ना बरस
ओ घटा काली घटा, अब के बरस तू ना बरस
मेरे प्रीतम को अभी परदेस है भाया हुआ

किस तरह भूलेगा दिल उनका ख़याल आया हुआ

आ चमन से, हे ऐ ऐ ऐ
आ चमन से दूर बुलबुल
जाके रोयें, रोयें साथ साथ
तेरा दिल भी चोट है मेरी तरह खाया हुआ
तेरा दिल भी चोट है मेरी तरह खाया हुआ

किस तरह भूलेगा दिल उनका ख़याल आया हुआ

ख़ुश रहे दुनिया में वो जिसने है तोड़ा दिल मेरा
दे रहा है ये दुआ आँखों में अश्क आया हुआ

किस तरह भूलेगा दिल उनका ख़याल आया हुआ
..................................
Kis tarah bhoolega dil-Village girl 1945

Read more...

May 22, 2011

सैयां सलोने से नैन मिला के-विलेज गर्ल १९४५

जोर का झटका धीरे से। आपको सन १९५० के भी पीछे लिए
चलते हैं। आज आपको विलेज गर्ल अर्थात 'गाँव की गोरी' फिल्म
का गीत सुनवाते हैं। वली साहब के गीत की धुन तैयार की
है संगीतकार श्याम सुन्दर ने। गाने और वाद्य संयोजन में
पंजाबियत बरकरार है। श्याम सुन्दर पंजाबी मूल के संगीतकार
थे। शेम सुन्दर ने कम फिल्मों में संगीत दिया मगर वे अपनी
अलग छाप छोड़ गये फिल्म जगत पर। गाना मेहँदी और लीपापोती
की रस्म के बाद गियर बदलता है और एक मस्त गीत सुनाई देने
लगता है। जिस कलाकार को मेहँदी लगायी जा रही है उसका नाम
है नूरजहाँ जिनके कई गीत आपने सुने होंगे। नजीर नाम के शख्स
दूल्हा बने हैं और घोड़ी के आगे नाचने वाली कलाकार का नाम है
गीता निजामी। गीत गाया है अमीर बाई कर्नाटकी ने। इस ब्लॉग पर
श्याम सुन्दर का ये गीत सुनिए आपको उनके संगीत को पहचानने
में मदद मिलेगी-ऐसे रसिया का-ढोलक ।

नूरजहाँ के हाव भाव देख कर ऐसा लग रहा है की उनको मेहँदी लगवाने
में आनंद आ रहा है। उल्लेखनीय है कि ये फिल्म नूरजहाँ की शुरुआती
कुछ फिल्मों में से एक है।



गीत के बोल:

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई

सैयां सलोने से नैन
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई

सैयां सलोने से नैन

हो, रावी किनारे
रावी किनारे मोरा छोटा सा गाँव
रावी किनारे मोरा छोटा सा गाँव
पतझड़ की धूप छांव
तारों की छांव
पतझड़ की धूप छाँव
तारों की छांव
सूनी नगरिया बसो मोरे राजा हो
मोरे सैयां हो
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
सैयां सलोने से नैन, मिला के, प्रीत लगा के
हाय, जान गई
सैयां सलोने से नैन

हो नैनों के गाँव
नैनों के गाँव में आजा रे बालम
नैनों के गाँव में आजा रे बालम
सपनों की दुनिया बसा जा रे बालम
सपनों की दुनिया बसा जा रे बालम
फिर मुझको गरवा लगा मोरे राजा हो
मोरे सैयां हो
मेरी जान गई जान गई जान गई
मेरी जान गई जान गई जान गई

सैयां सलोने से नैन
....................................
Saiyan salone se nain-Village girl 1945

Read more...

Nov 17, 2010

जवां है मोहब्बत-अनमोल घडी १९४६

हर दौर के कुछ प्रतिनिधि गीत होते हैं। उन गीतों से उस
समय के चलन का अंदाजा होता है। हर एक दशक में थोड़े
बदलाव आ जाते हैं। एक ऐसा ही प्रतिनिधि गीत है ४० के
उत्तरार्ध का। अनमोल घडी एक सफल फिल्म थी और इसके
गीत खूब बजे थे। बजे थे क्या यूँ कहिये आज भी चाव से सुने
जाते हैं। अंकल जी, आंटी जी , दादाजी और दादीजी सुना करते
हैं। चुन्नू-मुन्नू तो रीमिक्स सुनते हैं ना !

ये एक सदाबहार गीत है और आज भी युवा लगता है।
गौर फरमाएं भारी आवाज़ वाली गायिकाएं फिर से हिंदी
फिल्म संगीत में पैर ज़माने लगी हैं। बस फर्क उस दौर
और आज के दौर में ये है कि गाने की पट्टी थोड़ी ऊंची हो
गई है और शोरगुल ज्यादा हो गया है। जो हमें शोर लगता
है वही आज की पीढ़ी को झकास म्यूजिक लगता है।

अनमोल घडी के इस गीत को लिखा है तनवीर नकवी ने और
धुन बनाई है नौशाद ने। परदे पर और उसके पीछे दोनों जगह
नूरजहाँ ही इस गीत को गा रही हैं। नूरजहाँ के करियर में यह
गीत एक मील का पत्थर है। पिछला गीत आपने सुना था
सुरिंदर कौर का, उससे इस गीत की तुलना करिए और दोनों
गायिकाओं की आवाज़ में अंतर पता लगाइए तब तक मैं एक
और पोस्ट का मसाला बनाता हूँ।




गीत के बोल:

जवां है मोहब्बत हसीं है ज़माना
लुटाया है दिल ने ख़ुशी का खज़ाना

जवां है मोहब्बत हसीं है ज़माना
लुटाया है दिल ने ख़ुशी का खज़ाना

मोहब्बत करे खुश रहे मुस्कुराये
खुश रहे मुस्कुराये
मोहब्बत करे खुश रहे मुस्कुराये
खुश रहे मुस्कुराये

ना सोचे हमें क्या कहेगा ज़माना
क्या कहेगा ज़माना

जवां है मोहब्बत हसीं है ज़माना
लुटाया है दिल ने ख़ुशी का खज़ाना

अभी तक मुझे याद है वो कहानी
याद है वो कहानी
अभी तक मुझे याद है वो कहानी
याद है वो कहानी

ना भूलेगा बचपन का रंगीन ज़माना
हाँ रंगीन ज़माना

जवां है मोहब्बत हसीं है ज़माना
लुटाया है दिल ने ख़ुशी का खज़ाना

यहाँ आँखों आँखों में बात हुई है
यहाँ आँखों आँखों में बात हुई है

किसी ने ना देखा किसी ने ना जाना
हाँ किसी ने ना जाना

जवां है मोहब्बत हसीं है ज़माना
लुटाया है दिल ने ख़ुशी का खज़ाना

तुम आये के बचपन मेरा लौट आया
लौट आया
तुम आये के बचपन मेरा लौट आया
लौट आया

मिला है मुझे ज़िन्दगी का बहाना
ज़िन्दगी का बहाना

जवां है मोहब्बत हसीं है ज़माना
लुटाया है दिल ने ख़ुशी का खज़ाना

Read more...

Jan 25, 2010

पिंजरे दे विच क़ैद- गुल-ऐ-बकावली १९३९

एक पंजाबी गीत पेश है नूरजहाँ की आवाज़ में। संगीत गुलाम हैदर
का है। गुलाम हैदर के संगीतबद्ध नग्मे हम आगे और भी शामिल करेंगे
इस ब्लॉग पर।

फिल्म: गुल-ऐ-बकावली (पंजाबी)
वर्ष: 1939
संगीतकार : गुलाम हैदर
गीतकार : वली साहब
गायिका : नूरजहाँ
कलाकार : नूरजहाँ



गीत के बोल:

पिंजरे दे विच क़ैद जवानी
पिंजरे दे विच क़ैद जवानी
मस्तानी
क़ैद जवानी, क़ैद जवानी
क़ैद जवानी, क़ैद जवानी
मस्तानी

पिंजरे दे विच क़ैद जवानी
आपे हसना आपे रोना
आपे हसना आपे रोना
आपे हंजुआँ हार परोणा
आपे कैनी आपे सुनणी
आपे कैनी आपे सुनणी
हंजुआँ भरी कहानी
हंजुआँ भरी कहानी
पिंजरे दे विच क़ैद जवानी
पिंजरे दे विच क़ैद जवानी
मस्तानी

हाए जवानी मस्तानी
तूं वी रोगी
मैं वी रोगण
इक दूजे दी पीड़ वंडाईये
इक दूजे दी पीड़ वंडाईये
कद्दियाँ बैके दिल दियाँ लगियाँ
हंजुआँ नाल बुझाईये
कद्दियाँ बैके दिल दियाँ लगियाँ
हंजुआँ नाल बुझाईये
अग विच गेडे पाणी
पिंजरे दे विच क़ैद जवानी
पिंजरे दे विच क़ैद जवानी
मस्तानी

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP