Showing posts with label Shankar hussain. Show all posts
Showing posts with label Shankar hussain. Show all posts

Jan 22, 2018

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की-शंकर हुसैन १९७७

इस गीत में एक जगह पर जिक्र है-दांतों तले ऊँगली दबाने का.
इस गीत को सुन कर ही दांतों तले उँगलियाँ दबाने की इच्छा
होती है. ये कमाल अमरोही का लिखा हुआ गीत है. संगीत
खय्याम का है और इसे रफ़ी ने गाया है.

कमाल अमरोही के नाम ज्यादा गीत नहीं हैं फिल्म संगीत के
खजाने में अतः उनका ये गीत किसी प्रोफेशनल गीतकार की
स्टाइल में लिखा होना सोचने पर मजबूर अवश्य करता है कि
ये क्या वाकई उन्होंने लिखा है या फिर उन्होंने ज्यादा गीत
क्यूँ नहीं लिखे फिल्मों के लिए.



गीत के बोल:

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की
बहुत खूबसूरत
बहुत खूबसूरत मगर सांवली सी
बहुत खूबसूरत

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की

मुझे अपने ख़्वाबों की बाहों में पा कर
कभी नींद में मुस्कुराती तो होगी
उसी नींद में कसमसा कसमसा कर
सरहाने से तकिये गिराती तो होगी

वही ख़्वाब दिन की मुंडेरों पे आ के
उसे मन ही मन में लुभाते तो होंगे
कई साज़ सीने की खामोशियों में
मेरी याद से झनझनाते तो होंगे
वो बेसाख्ता धीमे-धीमे सुरों में
मेरी धुन में कुछ गुनगुनाती तो होगी

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की


चलो खत लिखें जी में आता तो होगा
मगर उंगलियां कँपकँपाती तो होंगी
कलम हाथ से छूट जाता तो होगा
उमंगें कलम फिर उठाती तो होंगी
मेरा नाम अपनी किताबों पे लिख कर
वो दांतों में उँगली दबाती तो होगी

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लड़की

ज़बान से अगर उफ़ निकलती तो होगी
बदन धीमे धीमे सुलगता तो होगा
कहीं के कहीं पांव पड़ते तो होंगे
 ज़मीन पर दुपट्टा लटकता तो होगा
कभी सुबह को शाम कहती तो होगी
कभी रात को दिन बताती तो होगी

कहीं एक मासूम नाज़ुक सी लुड़की


हर  एक चीज हाथों से गिरती तो होगी
तबियत पे हर काम खलता तो होगा
…………………………………………………………..
Kahin ek masoom nazuk si ladki-Shankar Hussain 1977

Artist: Kanwaljeet

Read more...

Sep 17, 2017

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे-शंकर हुसैन १९७७

सन १९७७ की एक फिल्म शंकर हुसैन से लाता मंगेशकर का गाया
मधुर गीत सुनते हैं. जान निसार अख्तर के लिखे गीत के लिए तर्ज़
बनाई है खय्याम ने.

फिल्म के प्रमुख कलाकार हैं कंवलजीत और मधुचंदा. आपने कंवलजीत
का नाम अवश्य ही सुना होगा.



गीत के बोल:

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे
आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे
दिल से कदमों की आवाज़ आती रही
आहटों से अंधेरे चमकते रहे
रात आती रही रात जाती रही
आप यूँ

गुनगुनाती रहीं मेरी तनहाईयाँ
दूर बजती रहीं कितनी शहनाईयाँ
दूर बजती रहीं कितनी शहनाईयाँ
ज़िंदगी ज़िंदगी को बुलाती रही

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे
दिल से कदमों की आवाज़ आती रही
आप यूँ

कतरा कतरा पिघलता रहा आस्माँ
कतरा कतरा पिघलता रहा आस्माँ
रूह की वादियों में न जाने कहाँ
इक नदी
इक नदी दिलरुबा गीत गाती रही

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे
दिल से कदमों की आवाज़ आती रही
आप यूँ

आप की गर्म बाहों में खो जायेंगे
आप की नर्म ज़ानों पे सो जायेंगे
सो जायेंगे
मुद्दतों रात नींदें चुराती रही

आप यूँ फ़ासलों से गुज़रते रहे
दिल से कदमों की आवाज़ आती रही
आहटों से अंधेरे चमकते रहे
रात आती रही रात जाती रही
आप यूँ आप यूँ आप यूँ आप यूँ
.........................................................................
Aap yun faaslon se-Shankar Hussain 1977

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP