हंस के पुकार के-परछाईयाँ १९७२
हूँ टी. वी. पर-जी क्लासिक चैनल पर आ रहे पंचम
पर विशेष कार्यक्रम में. गीत गा रहे हैं-सुदेश भोंसले.
वाद्य यंत्रों के अनूठे प्रयोग पर, पिछले कुछ समय से
इस कार्यक्रम में, काफी प्रकाश डाला गया है.
कार्यक्रम में भानु गुप्ता माउथ ऑर्गन पर शोले की एक
क्लिप बजा रहे हैं. कार्यक्रम खत्म होने का वक्त हो चला
है. माहौल ग़मगीन सा हो उठा है श्रोताओं के बीच.
शानदार कार्यक्रम था ये एक, आयोजकों को बधाई.
पंचम का संगीत पिछली सदी की सबसे बड़ी फिल्म-
शोले का हिस्सा है. फिल्म के संगीत चाहे वो गीत
हों या पार्श्व-संगीत के टुकड़े आज भी जनता-जनार्दन
को अचंभित करता है. निस्संदेह वो समय से आगे
का और अजब संगीत है.
आज उनका ७६ वां जन्मदिन है. पंचम भक्तों के लिए
ये दिन किसी त्यौहार से कम नहीं है. हर साल उन्हें
इस दिन का बेसब्री से इंतज़ार रहता है.
पंचम के संगीत की धडकन वास्तव में किशोर कुमार
ही थे. किशोर के अवसान के बाद पंचम के संगीत
पर इसका असर स्पष्ट दिखा. किशोर जो अपने आप
में एक करिश्माई गायक थे, उनका साथ छूटना एक
बहुत बड़ी घटना रही उनके जीवन की.
बहुत सी ऐसी फ़िल्में रहीं जिनमें बढ़िया गीत होने के
बावजूद वे चली नहीं. शक्ति सामंत, रमेश तलवार और
गुलज़ार के अलावा उन्हें संगीत की समझ वाले फिल्म
निर्देशकों का लंबा साथ नहीं मिला. स्पष्ट भाषा में बोला
जाए तो हिट फ़िल्में बनाने वाले निर्देशकों का साथ उन्हें
नहीं प्राप्त हुआ. फिल्म उद्योग की केमिस्ट्री भी अजीब है.
इसे अच्छे अच्छे ज्ञानी नहीं समझ पाए आज तक.
आज आपको एक ऐसा गीत सुनवाते हैं जिसमें पंचम के
संगीत की लगभग सारी खूबियाँ मौजूद हैं. लता-किशोर
की आवाजें हैं, मजरूह साहब के बोल हैं. विनोद खन्ना
और बिंदु पर इसे फिल्माया गया है. जनता कुछ भी कहे
इन दोनों की स्क्रीन प्रेजेंस ज़बरदस्त हुआ करती थी. एक
संयोग ये भी है-दोनों की मुस्कराहट आला दजे की है.
सन १९७२ की फिल का गीत है ये मगर आज भी ताज़ा
सा लगता है.
गीत के बोल:
हो, रैना अँधेरी है
आ जा सजनिया, मोरी चंदनिया रे
हंस के पुकार के,
हंस के पुकार के,
दो बोल प्यार के,
झूठो भी कह दे तो
सांच मोहे लागे रे
ऐसे से प्रीत लागी राम
हो, हंस के पुकार के,
दो बोल प्यार के,
झूठो भी कह दे तो
सांच मोहे लागे रे
ऐसे से प्रीत लागी राम
सच है सजनी प्यार का वादा
शाम ही से जले मोरा मनवा
गले से लग जा, तेरे बदन से
पाए ठंडक हमारो बदनवा
गरवा यूँ लागे जैसे कटारी लागे
झटके जो बैयाँ और मोहे प्यारी लागे
हूँ तेरे पीछे बदनाम
हो, हंस के पुकार के,
हंस के पुकार के
दो बोल प्यार के,
झूठो भी कह दे तो
सांच मोहे लागे रे
ऐसे से प्रीत लागी राम
आज मिले हो मोहे अकेले
अब चलेगा न कोई बहाना
हो थाम के बैयाँ मैं नहीं छोडूं
छूट जाए रे चाहे ज़माना
उलझा के अब तो नैना झुकाना नहीं
लाये न तू तो होश में भी आना नहीं
अब तो रे तू ही मोहे थाम
हंस के पुकार के,
हंस के पुकार के
दो बोल प्यार के,
झूठो भी कह दे तो
सांच मोहे लागे रे
ऐसे से प्रीत लागी राम
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Hans ke pukar ke-Parchhaiyan 1972
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