चाँद अकेला जाये-आलाप १९७७
जनता कम जाया करती है, ये दस्तूर आज भी ज़ारी है. आजकल
कला फ़िल्में बनती ही कहाँ हैं ? सन १९७७ की फिल्म आलाप
अमिताभ बच्चन और रेखा जैसे कलाकारों से सजी फिल्म है. आम
जनता में अमिताभ के जो भी मुरीद हैं उनमें से २५ टका तो इस
फिल्म को देख आये. बाकी के नाम सुन के और फिल्म की रिपोर्ट
सुन के जाऊं-ना जाऊं करते रह गए. ऋषिकेश मुखर्जी के फैन भी
ज़रूर इस फिल्म को देख आये होंगे. एक श्रेणी के फैन रह गए वो
हैं अभिनेत्री रेखा के फैन. उन्होंने भी फिल्म देखी होगी और दुखी
हुए होंगे फिल्म देख कर.
फिल्म का संगीत अच्छा है और इसके गीत आप सुन सकते हैं
कभी कभार. एक गीत सुनिए जो राही मासूम रज़ा का लिखा हुआ
है. इसे येसुदास ने गाया है जयदेव की बनाई तर्ज़ पर. गाना सुनते
हैं इस फिल्म पर चर्चा बाद में करेंगे.
गीत के बोल:
चाँद अकेला जाये सखी री
काहे अकेला जाये सखी री
मन मोरा घबराये री
सखी री सखी री, ओ सखी री
चाँद अकेला जाये सखी री
वो बैरागी वो मनभावन
कब आयेगा मोरे आँगन
इतना तो बतलाये री
सखी री सखी री, ओ सखी री
चाँद अकेला जाये सखी री
अंग अंग में होली दहके
मन में बेला चमेली महके
ये ऋतु क्या कहलाये री
भाभी री भाभी री, ओ भाभी री
चाँद अकेला जाये सखी री
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Chand akela jaaye-Alaap 1977

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