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Aug 3, 2020

ये दिल और उनकी-प्रेम पर्वत १९७३

आज संगीतकार जयदेव का जन्मदिन है और हम इस
अवसर पर सुनेंगे फिल्म प्रेम पर्वत से एक गीत जो कि
एक बेहद लोकप्रिय गीत है. इसे जान निसार अख्तर
ने लिखा है.

समय के साथ भिन्न और अज्ञात कारणों से नष्ट हुई
फिल्मों में से एक है प्रेम पर्वत. ये अफसोसजनक है,
मगर क्या किया जाए.




गीत के बोल:

ये दिल और उनकी निगाहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये

पहाड़ों को चंचल किरण चूमती है
पहाड़ों को चंचल किरण चूमती है
हवा हर नदी का बदन चूमती है
हवा हर नदी का बदन चूमती है
यहाँ से वहाँ तक हैं चाहों के साये
यहाँ से वहाँ तक हैं चाहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये ...
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये

लिपटते ये पेड़ों से बादल घनेरे
लिपटते ये पेड़ों से बादल घनेरे
ये पल पल उजाले ये पल पल अंधेरे
ये पल पल उजाले ये पल पल अंधेरे
बहुत ठंडे ठंडे हैं राहों के साये
बहुत ठंडे ठंडे हैं राहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये

धड़कते हैं दिल कितनी आज़ादियों से
धड़कते हैं दिल कितनी आज़ादियों से
बहुत मिलते जुलते हैं इन वादियों से
बहुत मिलते जुलते हैं इन वादियों से
मुहब्बत की रंगीं पनाहों के साये
मुहब्बत की रंगीं पनाहों के साये
ये दिल और उनकी निगाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये
मुझे घेर लेते हैं बाहों के साये
……………………………………..
Ye dil aur unki nigahon ke-Pram parbat 1973

Artist:

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Jul 9, 2020

तुम्हे देखती हूँ-तुम्हारे लिए १९७८

आज ९ जुलाई संजीव कुमार का जन्मदिन है. एक ऐसे कलाकार
जिनसे सिनेमा की दुनिया धन्य है. हाईप्ड अभिनेता तो हमने
बहुतेरे देख लिए जो अभिनय कम और ढिंढोरे में ज्यादा यकीन
रखते हैं मगर ऐसे बिरले कलाकार कम जो अपने अभिनय के दम
पर लोगों के दिल में हमेशा के लिए जगह बना लेते हों.

ऐसे कलाकारों को चैनलों पे ठुमके नहीं लगाना पड़ते, गोरा काला
करने वाली क्रीम नहीं बेचना पड़ती. स्कैंडलों में नहीं उलझना होता,
सौम्यता के लिए ढोंग नहीं करना पड़ता.

चर्चा जारी रहेगी, एक गीत सुन लेते हैं पहले. ये अलौकिक गीत
है सन १९७८ की फिल्म तुम्हारे लिए से जिसमें संजीव कुमार के
साथ विद्या सिन्हा हैं. इस यादगार गीत की धुन जयदेव ने तैयार
की है.

बासु चटर्जी ने फिल्म का निर्देशन किया था. फिल्म की कहानी
पुनर्जन्म की अवधारणा को समेटे हुए है. दूसरी इस प्रकार की
फिल्मों से ये अलग है और निर्देशक की कुशलता है कि सभी
कलाकारों ने अच्छा अभिमय किया है. संजीव कुमार तो सहज
कलाकार थे ही, विद्या सिन्हा भी सहज अभिनय कर लेती थीं.
आज दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं.


गीत के बोल:

तुम्हें देखती हूँ तो लगता है ऐसे
के जैसे युगों से तुम्हे जानती हूँ
तुम्हें देखती हूँ तो लगता है ऐसे
के जैसे युगों से तुम्हे जानती हूँ
अगर तुम हो सागर
अगर तुम हो सागर मैं प्यासी नदी हूँ
अगर तुम हो सावन मैं जलती कली हूँ 
पिया तुम हो सागर

मुझे मेरी नींदें
मुझे मेरी नींदें मेरा चैन दे दो
मुझे मेरी सपनों की इक रैन दे दो ना
यही बात पहले
यही बात पहले भी तुमसे कही थी
वोही बात फिर आज दोहरा रही हूँ
पिया तुम हो सागर

तुम्हें छू के पल में बने धूल चन्दन
तुम्हें छू के पल में बने धूल चन्दन
तुम्हारी महक से महकने लगे तन
महकने लगे तन
मेरे पास आओ
मेरे पास आओ गले से लगाओ
पिया और तुमसे मैं क्या चाहती हूँ

मुरलिया समझ कर मुझे तुम उठा लो
बस इक बार होंठों से अपने लगा लो ना
कोई सुर तो जागे
कोई सुर तो जागे मेरी धड़कनों में
के मैं अपनी सरगम से रूठी हुई हूँ

तुम्हें देखती हूँ तो लगता है ऐसे
के जैसे युगों से तुम्हे जानती हूँ
अगर तुम हो सागर मैं प्यासी नदी हूँ
अगर तुम हो सावन मैं जलती कली हूँ 
पिया तुम हो सागर
.....................................................................
Tumhen dekhti hoon-Tumhare liye 1978

Artists: Sanjeev Kumar, Vidya Sinha

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May 3, 2018

हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से-आलाप १९७७

सन १९७७ की आलाप फिल्म से एक गीत सुनते हैं जिसे
असरानी ने गाया है. अमिताब बच्चन को असरानी ट्रेनिंग
दे रहे हैं और इस गीत में डर के प्रकार भी बतलाते हैं.
इस गंभीर किस्म की फिल्म में जो हास्य वाले दुर्लभ दृश्य
हैं उनमें से ये एक है.

गीत राही मासूम रज़ा ने लिखा है और इसका संगीत तैयार
किया है जयदेव ने.



गीत के बोल:

हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे

फूँक फूँक के पांव धरूं मैं फिर भी पायल बाजे
ओ रामा फिर भी पायल बाजे
अरे फूँक फूँक के पांव धरूं मैं फिर भी पायल बाजे
ओ रामा फिर भी पायल बाजे
सैयां जी के घर का कोई खड़ा मेरे दरवाजे
खड़ा मेरे दरवाजे

चले जवानी पीछे पीछे चले जवानी
अरे चले जवानी पीछे पीछे बचपन आगे आगे
रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे

अंग अंग में चन्दन महके ये कैसी ऋतु आई
ओ रामा ये कैसी ऋतु आई
अरे अंग अंग में चन्दन महके ये कैसी ऋतु आई
ओ रामा ये कैसी ऋतु आई
चाहे जैसी हवा चले पर मोहे लगे पुरवाई
ओ श्यामा मोहे लगे पुरवाई
नैना दिन भर सपना देखें
नैना अरे नैना अरे नैना
अजी नैना दिन भर सपना देखें काजल रात को डाले
रामा डर लागे

ओ लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे
अरे रामा डर लागे

डर किरने प्रकार के होते हैं उनको ख्वाबों में देखिये
लज्जा ईर्ष्या क्रोध वीभत्स हा हा हा
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे
अरे रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
……………………………………………….
Ho rama dar laage apni umariya se-Alaap 1977

Artists: Asrani, Amitabh Bachchan, Rekha

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Feb 13, 2018

ये दावा आज-लैला मजनू १९७६

प्रेमी प्रेमिकाओं के ऐतिहासिक किस्से रोचक हैं तो दु:खद भी.
लैला मजनू की कहानी काफी प्रसिद्ध है और इसपर कई फिल्मों
का निर्माण हो चुका है.

आज सुनते हैं फिल्म का एक कम सुना गया गीत जिसे रफ़ी ने
गाया है. बोल साहिर के हैं और संगीत जयदेव का. मदन मोहन
के निधन के बाद जयदेव ने फिल्म के २-३ गीत कम्पोज किये
थे, ये शायद उन्हीं में से एक है.




गीत के बोल:

क़ज़ा ज़ालिम सही
ये ज़ुल्म वो भी कर नहीं सकती
जहाँ में क़ैस ज़िंदा है
तो लैला मर नहीं सकती

ये दावा आज ये दावा आज
ये दावा आज दुनिया भर से मनवाने की ख़ातिर आ
ये दावा आज दुनिया भर से मनवाने की ख़ातिर आ
ये दावा आज दुनिया भर से मनवाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है ज़िद
ये दीवाने की ज़िद
हाँ ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ

तेरे दर से मैं खाली लौट जाऊँ क्या क़यामत है
तेरे दर से
तेरे दर से मैं खाली लौट जाऊँ क्या क़यामत है
तू मेरी रूह का काबा
तू मेरी रूह का काबा मेरी जान-ए-इबादत है
मेरी जान-ए-इबादत है
ज़बीन-ए-शौक ज़बीन-ए-शौक
ज़बीन-ए-शौक के सजदों को अपनाने की ख़ातिर आ
ज़बीन-ए-शौक के सजदों को अपनाने की ख़ातिर आ
ज़बीन-ए-शौक के सजदों को अपनाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ

मेरी दीवानगी
मेरी दीवानगी की मेरी वहशत की क़सम तुझको
मेरी दीवानगी की मेरी वहशत की क़सम तुझको
मेरी दीवानगी
ग़ुरूर-ए-इश्क़ की नाज़-ए-मोहब्बत की क़सम तुझको
ग़ुरूर-ए-इश्क़ की नाज़-ए-मोहब्बत की क़सम तुझको
ज़माने को ज़माने को
ज़माने को वफ़ा की शान दिखलाने की ख़ातिर आ
ज़माने को वफ़ा की शान दिखलाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है ज़िद
ये दीवाने की ज़िद है ज़िद है ज़िद है ज़िद
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ

मैं तेरे हुस्न का सदका उतारूँ सामने आ जा
मैं तेरे हुस्न का सदका उतारूँ सामने आ जा
तू मेरे सामने आ जा तू मेरे सामने आ जा
गिरेबाँ धज्जियाँ कर कर के वारूँ सामने आ जा
गिरेबाँ धज्जियाँ कर कर के वारूँ सामने आ जा
शिकस्तापर शिकस्तापर
शिकस्तापर परेशाँ-हाल परवाने की ख़ातिर आ
शिकस्तापर परेशाँ-हाल परवाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
ज़बीन-ए-शौक के सजदों को अपनाने की ख़ातिर आ
ज़माने को वफ़ा की शान दिखलाने की ख़ातिर आ
ये दीवाने की ज़िद है अपने दीवाने की ख़ातिर आ
तू बस एक बार आ अपने दीवाने की ख़ातिर आ
तू बस एक बार आ अपने दीवाने की ख़ातिर आ
तू बस एक बार
…………………………………………………………..
Ye daava hai aaj-Laila Majnu 1976

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Jan 12, 2018

नई री लगन-आलाप १९७७

हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय और अशोक कुमार की जुगलबंदी आपको
अगर याद हो फिल्म आशीर्वाद में, उसके बाद आपको हृषिकेश मुखर्जी
की ही एक और फिल्म याद दिलवाते हैं जिसमें अलग अलग धारा के
ढेर सारे लोग एक छत के नीचे जमा थे-बावर्ची. अब आते हैं फिल्म
नमक हराम की ओर जिसमें दो दोस्त हैं एक अमीर एक गरीब साथ
एक मुफलिसी का शिकार शायर है.

इन तीन फिल्मों के कुछ घटक ले लीजिए और कुछ क्लासिकल संगीत
की मात्रा ज्यादा कर दीजिए, हो गया फिल्म आलाप का मसाला तैयार.
फिल्म की कहानी. इसके अलावा लेकिन और भी बहुत है इस फिल्म में
जो थोडा आम आदमी के दायें बायें से निकल जाता है. गरीबी, संघर्ष,
स्वाभिमान, संगीत और सुबह का भूला शाम को घर ये की वर्ड्स हैं इस
फिल्म को समझने के लिए. फिल्म में ओमप्रकाश और अमिताभ बच्चन
दोनों ही रूटीन से हट कर भूमिकाओं में हैं. 



गीत के बोल:

नई री लगन और मीठी बतियाँ
पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
किस किस बात पे
किस किस बात पे
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
नई री लगन और

बाल भी उलझे हैं सपने भी
बाल भी उलझे हैं सपने भी
दूजे लागे हैं अपने भी
हो गये हम क्यों ऐसे दीवाने
हो गये हम क्यों ऐसे दीवाने

पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
नई री लगन और

ऐसो चित नगर करे बरजोरी
ऐसो चित नगर करे बरजोरी
और करो जी ??????????

कागा जा जा जा जा
जा रे कागा जा
जा जा जा जा रे
जा जा जा जा रे
जा जा जा जा रे
जा रे कागा जा
ना दे मोरे पिया को संदेसवा
पिया नाहीं आये
पिया नाहीं आये
मोरे आली कैसे करे मन कब जाऊँ
पिया नाहीं आये
पिया नाहीं आये
...............................................................
Nayi ri lagan-Alaap 1977

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Dec 25, 2017

जहर देता है मुझे कोई दवा(आशा)-वोही बात १९७७

आज फिर से वही शख्स याद आये zoom zoom waale.
zoomta मौसम मस्त महीना, zalebi खाने वाले, zamun के
शौक़ीन और zatke दे दे के गाने वाले. वो zab याद आये
बहुत याद आये.

नक्श लायलपुरी की लिखी एक बढ़िया रचना सुनते हैं
फिल्म वोही बात से. इस फिल्म से आपको एक गीत हम
पहले सुनवा चुके हैं.



गीत के बोल:

जहर देता है मुझे कोई दवा देता है
जहर देता है मुझे कोई दवा देता है
जो भी मिलता है मिलता है
जो भी मिलता है मेरे गम को बढ़ा देता है
जहर देता है मुझे कोई

क्यों सुलगती हैं मेरे दिल में पुरानी यादें
क्यों सुलगती हैं मेरे दिल में पुरानी यादें
कौन बुझते हुये शोलों को हवा देता है
जहर देता है मुझे कोई

हाल हँस हँस के बुलाता है कभी बाहों में
हाल हँस हँस के बुलाता है कभी बाहों में
कभी माझी मुझे रो रो के सदा देता है
जहर देता है मुझे कोई दवा देता है
जो भी मिलता है मेरे गम को बढ़ा देता है
जहर देता है मुझे कोई
…………………………………………………
Zehar deta hai mujhe koi(Asha)-Wohi baat 1977

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Oct 13, 2017

ज़िन्दगी में जब तुम्हारे ग़म नहीं थे-दूरियां १९७९

सन १९७८ की ऑफ-बीट फिल्म दूरियां से एक गीत सुनते हैं. फिल्म
में बंगाली सिनेमा जगत के सुप्रसिद्ध कलाकार उत्तम कुमार मौजूद हैं
बतौर नायक. साथ में शर्मिला टैगोर नायिका हैं. इन दोनों पर ही ये
गीत फिल्माया गया है. इसे अनुराधा पौडवाल और भूपेंद्र ने गाया है.

गीत काफी चर्चित रहा था अपने समय में. आज भी इसे कभी कभार
सुनवा दिया जाता है रेडियो चैनलों पर. ७० और ८० के दशक की काफी
सारी ऑफ-बीट और आड़े-टेढ़े नाम वाली फिल्मों में जयदेव ने संगीत
दिया है जिनमें ‘किस्सा कुर्सी का’ फिल्म भी शामिल है.

सुनते हैं सुदर्शन फाकिर की ये रचना. वक्त पढ़ने पर खुशकिस्मतों को
ही अपनों से मदद मिला करती है. विकट प्रारब्ध वालों के लिए ऊपर
वाला दूसरा रास्ता खोल कर रखता है जिसमें अजनबी ही ज्यादा
मददगार हुआकरते हैं.

ये आपने भी महसूस किया होगा कि जिंदगी में क्वालिटी की मदद और
समय पर काम आने वाली मदद हमेशा अनजान लोगों से मिला करती
है.




गीत के बोल:

ज़िन्दगी में जब तुम्हारे ग़म नहीं थे
ज़िन्दगी में जब तुम्हारे ग़म नहीं थे
इतने तन्हा
इतने तन्हा थे कि हम भी हम नहीं थे

वक़्त पर जो लोग काम आए हैं अक्सर
वक़्त पर जो
वक़्त पर जो लोग काम आए हैं अक्सर
अजनबी थे वो मेरे हमदम नहीं थे
अजनबी थे वो मेरे हमदम नहीं थे

ज़िन्दगी में जब तुम्हारे ग़म नहीं थे
ज़िन्दगी में

बेसबब था तेरा मिलना रहगुज़र में
बेसबब था तेरा मिलना रहगुज़र में
रहगुज़र में
हादसे हर मोड़ पर कुछ कम नहीं थे
हादसे हर मोड़ पर कुछ कम नहीं थे

ज़िन्दगी में जब तुम्हारे ग़म नहीं थे
ज़िन्दगी में

हमने ख़्वाबों में ख़ुदा बन कर भी देखा
हमने ख़्वाबों में ख़ुदा बन कर भी देखा
आप थे बाहों में दो आलम नहीं थे
आप थे बाहों में दो आलम नहीं थे

ज़िन्दगी में जब तुम्हारे ग़म नहीं थे
ज़िन्दगी में

सामने दीवार थी ख़ुद्दारियों की
सामने दीवार थी ख़ुद्दारियों की
वरना रस्ते प्यार के पुरख़म नहीं थे
वरना रस्ते प्यार के पुरख़म नहीं थे

ज़िन्दगी में जब तुम्हारे ग़म नहीं थे
इतने तन्हा
इतने तन्हा थे कि हम भी हम नहीं थे
ज़िन्दगी में
……………………………………………….
Zindagi mein jab tumhare gham-Dooriyan 1978

Artists: Uttam Kumar, Sharmila Tagore

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Sep 12, 2017

अजीब सानेहा-गमन १९७९

जो लीक पर चला करते हैं उन्हें धन ज्यादा मिलता है और जो
अलग हट के कुछ करने की कोशिश करते हैं उन्हें वाह वाह ही
ज्यादा मिला करती है. संगीतकार जयदेव के साथ भी ऐसा ही
कुछ था. उन्होंने कई प्रतिभाओं को मौके दिए. एक नाम उनमें
है-हरिहरन.

सुनते हैं शहरयार का लिखा एक गीत फिल्म गमन से. इसे सुन
कर आपको फिल्म हम दोनों का एक गीत याद आएगा-कभी खुद
पे कभी हालत पे रोना आया.




गीत के बोल:

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साये से
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
अजीब सानेहा

हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला
हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला
हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो
हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो
अजीब सानेहा

भटक रही थी जो
भटक रही थी जो कश्ती वो ग़क़र-ए-आब हुई
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो
अजीब सानेहा

वो कौन था
वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो

अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
अजीब सानेहा
……………………………………………………….
Ajeeb saneha-Gaman 1979

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Jul 9, 2017

धीरे-धीरे शाम आ रही है-जुम्बिश १९८६

संगीतकार जयदेव उन बिरले संगीतकारों में से एक हैं जिन्होंने
कई ऑफ बीट और कुछ कमर्शियल फिल्मों में संगीत दिया. वे
एक और बात के लिए जाने जाते हैं-नयी प्रतिभाओं को मौका
देने के लिए.

सन १९८६ की फिल्म जुम्बिश का एक गीत है जो उस समय की
उदयीमान गायिका पीनाज़ मसानी और एक अनजान गायिका
शैला गुलवाडी ने गाया है. फिल्म में गीत सलाउद्दीन परवेज़ ने
लिखे हैं जिहोने नर्गिस फिल्म के गीत भी लिखे जिसका संगीत
बासु मनोहारी ने तैयार किया था.




गीत के बोल:

धीरे-धीरे धीरे-धीरे
शाम आ रही है
धीरे-धीरे धीरे-धीरे
शाम आ रही है
धीरे-धीरे धीरे-धीरे धीरे-धीरे

शाम की किताबों में
पतझड़ों की साँसों में
धुँधली धुँधली आँखों में
शाम बढती आ रही है

धीरे-धीरे धीरे-धीरे धीरे-धीरे
शाम आ रही है
धीरे-धीरे धीरे-धीरे धीरे-धीरे
शाम आ रही है
धीरे-धीरे धीरे-धीरे धीरे-धीरे

नींद एक गाँव है नींद की तलाश में
आवाज़ें आ रही है
नींद एक गाँव है नींद की तलाश में
आवाज़ें आ रही है
पाँवों खड़ा बहने
सत सत गा रहे है
शख वाले रंग लिये मोरों के पंखों से
सभ्यता को लिख रहे है
पीपल के पात हरे
धीरे-धीरे गिर रहे हैं 
मिट्टी के ढिबले में
खोये खोये जल रहे हैं
पीपल के पात हरे
धीरे-धीरे गिर रहे हैं 
धीरे-धीरे गिर रहे हैं 
धीरे-धीरे शाम आ रही हैं 

मिट्टी बरस ले के शंख चीखने लगे हैं
मिट्टी बरस ले के शंख चीखने लगे हैं
मर्द सब रिवाज़ से बँधे हुए   
सरल सपाट उँगलियों से
अपने अपने घर की साहिबान में
अपने अपने घर की साहिबान में
अपने अपने देवताओं के शबीहे लिख रहे हैं
औरतें हथेलियों से चाँद बुन रही हैं
औरतें हथेलियों से चाँद बुन रही हैं
दूध की कटोरियों से सूरजों की आत्मायें
मथ रही हैं
धीरे-धीरे जल रही हैं
धीरे-धीरे बुझ रही हैं
धीरे-धीरे रात आ गयी है
धीरे-धीरे धीरे-धीरे रात आ गयी है
धीरे-धीरे धीरे-धीरे धीरे-धीरे
..............................................................
Dheere dheere shaam aa rahi hai-Jumbish 1986

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Jul 2, 2017

मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन-चंद्रग्रहण १९७७

लता का ही गाया एक और मधुर गीत सुनते हैं सन १९७७
की दुर्लभ फिल्म चंद्रग्रहण से.

कैफी आज़मी के बोल हैं और जयदेव की अलौकिक धुन.






गीत के बोल:

मैं जानूं नाहीं
मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन कैसे होई री
आये मोरे सजना फिर गए अंगना
आये मोरे सजना फिर गए अंगना 
मैं अभागन
मैं अभागन रही सोई री 

मैं जानूं नाहीं प्रभु को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं

निस बासर मोहे बिरहा सतावे
निस बासर मोहे बिरहा सतावे
कल ना परत पल मोए री
कल ना परत पल मोए री
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
मीरा के प्रभु गिरधर नागर
मिल बिछडो मत
मिल बिछडो मत कोई री

मैं जानूं नाहीं
मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं

आये मोरे सजना फिर गए अंगना 
मैं अभागन
मैं अभागन रही सोई री 
मैं जानूं नाहीं प्रभु को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं पिया को मिलन कैसे होई री
मैं जानूं नाहीं
..............................................................................
Main janoon naahin-Chandra graham 1977

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Jun 19, 2017

कभी ख़ुद पे कभी हालात पे-हम दोनों १९६१

देव आनंद के डबल डोज़ वाली फिल्म है हम दोनों. फिल्म
का एक गीत है जो नायक के हालात बयां कर रहा है. ये
गीत इतना अपना सा लगने लगता है सुनने वाले को खास
कर के आखिरी अंतरे को सुनने के बाद कि सुनने वाला
इसका दीवाना हो जाता है.

साहिर लुधियानवी का ये सरल सा गीत जयदेव की आकर्षक
धुन में बंधा है. इसे रफ़ी ने गाया है. अंत में एक जुमला और
ठोंक देते हैं पोस्ट में-जब कुछ समझ ना आये तो एक लाइन
लिख दो साहिर के १००% सर्टिफाइड फैन की तरह(जैसे किसी
देसी डेरी का देसी शुद्ध घी होता है १०० टका शुद्ध) -साहिर का है
अंदाज़-ए-बयां और.......कईयों को तो मैंने साहिर के गीतों में
वर्णित जीवन की स्तिथियों के पैरेलल ड्रा करते करते पैरेललोग्राम
बनाते देखा है.




गीत के बोल:

कभी ख़ुद पे
कभी ख़ुद पे  कभी हालात पे रोना आया
कभी ख़ुद पे
कभी ख़ुद पे  कभी हालात पे रोना आया
बात निकली  तो हर इक बात पे रोना आया
बात निकली  तो हर इक बात पे रोना

हम तो समझे थे के हम भूल गए हैं उनको
हम तो समझे थे
हम तो समझे थे के हम भूल गए हैं उनको
क्या हुआ आज  ये किस बात पे रोना आया
क्या हुआ आज  ये किस बात पे रोना आया
कभी ख़ुद पे  कभी हालात पे रोना

किसलिये जीते हैं हम
किसलिये जीते हैं हम किसके लिये जीते हैं
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया
कभी ख़ुद पे

कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त
कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया
कभी ख़ुद पे
कभी ख़ुद पे  कभी हालात पे रोना आया
बात निकली  तो हर इक बात पे रोना आया
कभी ख़ुद पे
……………………………………………………………
Kabhi khud pe kabhi halaat pe-Ham dono 1961

Artist: Hum dono

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May 3, 2017

ज़िन्दगी हम तेरे हाल पर-वोही बात १९७७

नक्श लायलपुरी का लिखा एक उम्दा गीत सुनते हैं.

फिल्म: वोही बात
वर्ष: १९७७
गीतकार: नक्श लायलपुरी
गायिका:आशा भोंसले
संगीत:जयदेव




गीत के बोल:

ज़िन्दगी हम तेरे हाल पर मुस्कुराएँ के रोया करें
दर्द की धूप ढलती नहीं कैसे राहों में साया करें

भर के दामन में रुसवाईयाँ हम पे हँसती हैं तन्हाईयाँ
हाय रे आलम-ए-बेबसी तू ही कह दे के हम क्या करें

रात ग़म की है ठहरी हुई हम हैं बाँहों में तूफ़ान की
कोई शमा जले किस तरह दिल में कैसे उजाला करें
……………………………………………………………..
Zindagi ham tetre haal par-Wohi baat 1977

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Feb 16, 2017

सुरमई रात है सितारे हैं-जोरू का भाई १९५५

सन १९५५ की फिल्म जोरू का भाई महाशक्ति फिल्म्स नामक
संस्था ने बनाई और इसका निर्देशन चेतन आनंद ने किया .
विजय आनंद, शीला रमानी, बलराज सहनी और जॉनी वॉकर
इसके प्रमुख कलाकार हैं.

फिल्म में जयदेव का संगीत है और फिल्म में दो गीतकारों के
गीत हैं-साहिर और विश्वामित्र आदिल. प्रस्तुत गीत साहिर का
लिखा हुआ है. इसे लाता मंगेशकर ने गाया है और ये गीत
तलत महमूद की आवाज़ में भी उपलब्ध है फिल्म में.




गीत के बोल:

सुरमई रात है सितारे हैं
आज दोनों जहाँ हमारे हैं
सुबह का इंतज़ार कौन करे
सुबह का इंतज़ार कौन करे

फिर यह रुत ये समा मिले न मिले
फिर यह रुत ये समा मिले न मिले
आरज़ू का चमन खिले न खिले
वक़्त का ऐतबार कौन करे
सुबह का इंतज़ार कौन करे

ले भी लो हम को अपनी बाहों में
ले भी लो हम को अपनी बाहों में
रूह बेचैन है निगाहों में हाय
इल्तजा बार बार कौन करे

इल्तजा बार बार कौन करे
सुबह का इंतज़ार कौन करे
सुबह का इंतज़ार कौन करे
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Surmayi raat hai-Jori ka bhai 1955

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Dec 14, 2016

पी कहाँ पी कहाँ-सोलहवां सावन १९७९

सन १९७९ की फिल्म सोलहवां सावन अभिनेत्री श्रीदेवी के नायिका
के रूप में पहली हिंदी फिल्म है. इस फिल्म का जिक्र इसी रूप में
होता आया है. इसे देखने के सौभाग्य जिन जिन को मिला है वे ही
इसके कथानक के बारे में कुछ बतला सकते हैं. श्रीदेवी इसके पहले 
हिंदी फिल्म जूली में बाल कलाकार के रूप में काम कर चुकी थीं.
फिल्म जूली की नायिका हैं लक्ष्मी.

फिल्म के निर्देशक हैं भारती राजा जिनकी एक फिल्म से गीत आपको
२-३ दिन पहले सुनवाया था. फिल्म सोलहवां सावन की कहानी भी
गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित है. सुनते हैं इस फिल्म से एक गीत
वाणी जयराम का गाया हुआ जिसे नक्श लायलपुरी ने लिखा है.
फिल्म के संगीतकार हैं जयदेव.



गीत के बोल:

पी कहाँ पी कहाँ पी कहाँ
धीरे से हौले से सुन मेरिये
मेरे कानों में कह दे री पवन
पी है कहाँ मेरा पी है कहाँ
धीरे से हौले से सुन मेरिये
मेरे कानों में कह दे री पवन
पी है कहाँ मेरा पी है कहाँ
पी कहाँ पी कहाँ पी कहाँ
पी कहाँ पी कहाँ पी कहाँ

छन छन लहराए झूमे
छन छन लहराए झूमे
कोयल बावरिया झूमे
कारी बदरिया झूमे
बस्ती नगरिया झूमे
मस्ती में झूमे धरा तो क्या गगन
पूछे मेरा मन पी है कहाँ
मेरे कानों में कह दे री पवन
पी है कहाँ मेरा पी है कहाँ
पी कहाँ पी कहाँ पी कहाँ
पी कहाँ पी कहाँ पी कहाँ
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Pee kahan pee kahann-Solva sawan 1979

Artist: Sridevi

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Sep 28, 2016

देख ली तेरी खुदाई-किनारे किनारे १९६३

आज सुनते हैं तलत महमूद का गाया एक गीत किनारे किनारे
फिल्म से जिसे न्याय शर्मा ने लिखा है और इसकी धुन बनाई
है जयदेव ने.

तलत महमूद के गाये ५० के दशक के गीत लाजवाब हैं. उसके
बाद के गीत भी बढ़िया हैं मगर जो बात ५० के दशक के गीतों
में है वो बाद वालों में नहीं उसकी वजह आवाज़ में बदलाव जो
सभी गायकों की आवाजों में होता है. किसी किसी की आवाज़ में
ज़ल्दी होता है तो किसी की आवाज़ में देर से थकावट के भाव
प्रकट होते हैं.

प्रस्तुत गीत ६० के दशक में तलत के द्वारा गाये बेहतर गीतों में
से एक है और ये काफी लोकप्रिय भी हुआ. इसे आज भी उतने
ही चाव से सुना जाता है.




गीत के बोल:

देख ली तेरी खुदाई
बस मेरा दिल भर गया
देख ली तेरी खुदाई
तेरी रहमत चुप रही
तेरी रहमत चुप रही
मैं रोते रोते मर गया
देख ली तेरी खुदाई

मेरे मालिक क्या कहूँ
तेरी दुआओं का फरेब
मेरे मालिक क्या कहूँ
तेरी दुआओं का फरेब
मुझपे यूँ छाया के मुझको
मुझपे यूँ छाया के मुझको
घर से बेघर कर गया
देख ली तेरी खुदाई

वो बहारें नाचती थी
झूमती थी बदलियाँ
वो बहारें नाचती थी
झूमती थी बदलियाँ
अपनी किस्मत याद आते
अपनी किस्मत याद आते
ही मेरा जी डर गया

देख ली तेरी खुदाई
बस मेरा दिल भर गया
देख ली तेरी खुदाई
तेरी रहमत चुप रही
तेरी रहमत चुप रही
मैं रोते रोते मर गया
देख ली तेरी खुदाई
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Dekh li teri khudai-Kinare kinare 1963

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Sep 17, 2016

नदी नारे ना जाओ श्याम-मुझे जीने दो १९६३

सरल धुनें सर चढ कर बोलती हैं. जयदेव राग रागिनियों पर
आधारित सरल धुनें रचने के लिए विख्यात थे. देसी खुशबू
वाला उनका संगीत सुने काफी दिन हो गए हैं.

आज सुनते हैं मुझे जीने दो से एक गीत आशा भोंसले का
गाया हुआ. ट्रेडिशनल साहब ने इसे लिखा है. वहीदा रहमान
पर इसे फिल्माया गया है. 

गीत की श्रेणियों पर बात करें. नदी हिट्स, श्याम हिट्स, पैयां
पडूं हिट्स. पारंपरिक गीत है ये इसका अर्थ ये है कि ऐसे गीत
प्रचलन में काफी पुराने समय से हैं और किसने रचे उनका
विवरण उपलब्ध नहीं होता. पीढ़ी दर पीढ़ी इसे लोग गाते चले
जाते हैं.

गीत का विवरण कई जगह पर यूँ मिलता है-नदी नारे ना जाओ
शाम. इसका अर्थ ये हुआ शाम के समय नदी के पास ना जाओ.
ये हिदायत सरीखा लगता है. दूसरा विवरण है वो श्याम से आग्रह
जैसा है. जो आपको समझ आये उसे अपना लें.



गीत के बोल:

नदी नारे न जाओ श्याम पैयाँ पडूं
पैयाँ पडूं श्याम पैयाँ पडूं
पैयाँ पडूं श्याम पैयाँ पडूं

नदी नारे न जाओ श्याम पैयाँ पडूं
नदी नारे जो जाओ तो जईबे करो
बीच धारे
बीच धारे न जाओ श्याम पैयाँ पडूं

बीच धारे जो जाओ तो जईबे करो
जईबे करो श्याम जईबे करो
बीच धारे जो जाओ तो जईबे करो
उस पारे न जाओ श्याम पैयाँ पडूं
उस पारे न जाओ श्याम पैयाँ पडूं
तोरे पैयां पडूं
उस पारे जो जाओ तो जईबे करो
उस पारे जो जाओ तो
उस पारे हाय उस पारे हो ओ ओ
उस पारे जो जाओ तो जईबे करो
जईबे करो जईबे करो
संग सवतिया हाय
संग सवतिया न लाओ श्याम पैयाँ पडूं
संग सवतिया न लाओ श्याम पैयाँ पडूं
पैयां पडूं तोरे पैयां पडूं
पैयां पडूं तोरे पैयां पडूं
संग सवतिया न लाओ श्याम पैयाँ पडूं
संग सवतिया जो लाओ
संग सवतिया जो लाओ तो लइबे करो
संग सवतिया जो लाओ तो लइबे करो
लइबे करो लइबे करो लइबे करो
हमका न मिलाओ श्याम पैयाँ पडूं
हमका न मिलाओ श्याम पैयाँ पडूं
हमका न मिलाओ श्याम पैयाँ पडूं

नदी नारे न जाओ श्याम पैयाँ पडूं
नदी नारे न जाओ श्याम पैयाँ पडूं
नदी नारे न जाओ श्याम पैयाँ पडूं
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Nadi naare na jao Shyam-Mujhe jeene do 1963

Artists:Waheeda Rehman, Sunil Dutt

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Sep 13, 2016

सुलग उठी दिल की लगी-किनारे किनारे १९६३

फिल्म किनारे किनारे का निर्माण शुरू हुआ ५० के दशक
में और बनते बनते फिल्म सरक गयी ६० के दशक में
और अंततः रिलीज़ हुई १९६३ में. फिल्म के गीतों में जो
कोमलता है वो ५० के दशक वाली है.

जयदेव का संगीत वैसे भी कानों को गुदगुदाने वाला ही है.
अनावश्यक शोरगुल उनके संगीत में आपको बहुत कम
या नहीं के बराबर मिलेगा. हाँ, राग रागिनियों की बात
करें या शास्त्रीय संगीत में प्रयुक्त होने वाले वाद्य यंत्र तो
ये सब उनके संगीत में दिल खोल कर प्रयोग होता था.

प्रस्तुत गीत को कुछ ही खुशकिस्मतों ने फिल्म में देखा
होगा जिन्होंने इसे सिनेमा हॉल में देखा है या दूरदर्शन पर.
अब ये चक्रियों में देखने को उपलब्ध नहीं है. धन्य हो
सी डी और डी वी डी टेक्नोलोजी.


   

गीत के बोल:

सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने
सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने
रोती हैं तकदीरें हँसते हैं अफ़साने
सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने

इक आंधी ऐसी भी इस दिल पर छाई है
इक आंधी ऐसी भी इस दिल पर छाई है
अपनों का जिक्र ही क्या जरचे हैं बेगाने

सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने

शाम भी है ज़ज्बे भी दिल भी है मस्ती भी
शाम भी है ज़ज्बे भी दिल भी है मस्ती भी
आ भी जा तेरी राह तकते हैं वीराने

सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने
रोती हैं तकदीरें हँसते हैं अफ़साने
सुलग उठी दिल की लगी जलते हैं परवाने
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Sulag uthi dil ki lagi-Kinare kinare 1963

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Jul 24, 2016

चले जा रहे हैं मोहब्बत के मारे-किनारे किनारे १९६३

कुछ अनयूजुअल कास्टिंग भी देखने को मिली है हिंदी
फिल्मों में. अनयूजुअल-दर्शकों के हिसाब से. देव आनंद
को मीना कुमारी के साथ आपने शायद ही किसी फिल्म
में देखा होगा. देव आनंद के साथ बहुत सा अनयूजुअल
सा है जिस पर चर्चा करेंगे उनकी ९० के दशक की किसी
फिल्म के गीत सुनवाते वक्त. 

फिल्म किनारे किनारे संगीतकार जयदेव और गीतकार
न्याय शर्मा की जुगलबंदी से निर्मित हुआ एक खूबसूरत
फूलों का गुलदस्ता है जिसमें भाँति भाँति के फूल पिरोये
हुए हैं करीने से. फिल्म में लगभग सभी प्रमुख गायकों
के गाये गीत हैं. देव आनंद के मुरीदों को शायद एक बात
पर अफ़सोस हो-इसमें किशोर का गाया एक भी गीत नहीं
है. गौरतलब है ये ६४ की फिल्म है.

किशोर कुमार ६० के दशक में उतने सक्रिय नहीं रहे.
सन १९६३ में किशोर के केवल चार गाने सुनने को मिले
फिल्म एक राज़ में जिसमें उन्होंने अभिनय भी किया था.
एक राज़ के गीत काफी चर्चित हैं, विशेषकर “पायलवाली
देखना”. इस फिल्म में संगीत चित्रगुप्त ने दिया है.
बावजूद इसके किशोर के सन १९६४ में २३ गीत आये ६
फिल्मों के लिए. संगीतकार हंसराज बहल तक ने एक
गीत गवा लिया किशोर से फिल्म एक दिन का बादशाह
के लिए. जयदेव ने फिल्म हम दोनों में भी देव आनंद
के लिए रफ़ी की आवाज़ चुनी थी. इधर एक बात गौर
करने लायक है प्रस्तुत गीत मन्ना डे का गाया हुआ है.



गीत के बोल:

चले जा रहे हैं मोहब्बत के मारे
किनारे किनारे किनारे किनारे
चले जा रहे हैं मोहब्बत के मारे
किनारे किनारे किनारे किनारे
चले जा रहे हैं

ना साहिल की परवाह
ना तूफ़ान का डर है
न ज़ुल्मों का शिकवा
ना गम का असर है
ना साहिल की परवाह
ना तूफ़ान का डर है
न ज़ुल्मों का शिकवा
ना गम का असर है
उम्मीदों के पल पल दिलों के सहारे
चले जा रहे हैं किनारे किनारे
चले जा रहे हैं

तमन्ना यही है के लहरों से खेलें
नसीबों की गर्दिश को
हंसी हंस के झेले
तमन्ना यही है के लहरों से खेलें
नसीबों की गर्दिश को
हंसी हंस के झेले
उमंगों की राहों में बिछा के सितारे
चले जा रहे हैं किनारे किनारे
चले जा रहे हैं
....................................................................
Chale ja rahe hain-Kinare kinare 1963

Artist: Dev Anand, Meena Kumari

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Jun 13, 2016

माता सरस्वती शारदा-आलाप १९७७

कलाकृतियों पर बनी फ़िल्में या कला पर बनी फ़िल्में देखने आम
जनता कम जाया जाती है, इन फिल्मों का अपना एक दर्शक वर्ग
होता है जो ‘आर्ट; शब्द सुन के चल पढता है फिल्म देखने. यह
दस्तूर आज भी ज़ारी है. आजकल कला फ़िल्में बनती ही कहाँ हैं?
जो बनती भी हैं उनको देख के समझ पाना मुश्किल होता है कौन
से जेनर की फिल्म है.

सन १९७७ की फिल्म आलाप  अमिताभ बच्चन और रेखा जैसे
कलाकारों से सजी फिल्म है. आम जनता में अमिताभ के जो भी
मुरीद हैं उनमें से २५ टका तो इस फिल्म को देख आये. बाकी के
नाम सुन के और फिल्म की रिपोर्ट सुन के जाऊं-ना जाऊं करते
रह गए. ऋषिकेश मुखर्जी के फैन भी  ज़रूर इस फिल्म को देख
आये होंगे. एक श्रेणी के फैन रह गए वो हैं अभिनेत्री रेखा के फैन.
उन्होंने भी फिल्म देखी होगी और दुखी हुए होंगे फिल्म देख कर.

फिल्म का संगीत अच्छा है और इसके गीत आप सुन सकते हैं कभी
कभार. एक सरस्वती वंदना सुनिए फिल्म से. इसे येसुदास ने गाया
है लता मंगेशकर, दिलराज कौर और मधु रानी के साथ, जयदेव की
बनाई तर्ज़ पर.




गीत के बोल:

माता सरस्वती शारदा
माता सरस्वती शारदा
हे माता सरस्वती शारदा

विद्या दानी, दयानी, दुःख हरिणी
जगत जननी ज्वालामुखी
माता सरस्वती शारदा
माता सरस्वती शारदा


कीजे सुदृष्टि, कीजे सुदृष्टि
सेवक जान अपना
इतना वरदान दीजे
तान, ताल और आलाप
बुद्धि अलंकार, शारदा
हे माता सरस्वती शारदा
विद्या दानी, दयानी, दुःख हरिणी
जगत जननी ज्वालामुखी
माता सरस्वती शारदा
माता सरस्वती शारदा
हे माता सरस्वती शारदा
हे माता सरस्वती शारदा
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Mata Saraswati Sharda-Alaap 1977

Artists-Amitabh Bachchan

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Mar 5, 2016

ज़िन्दगी को सँवारना होगा-आलाप १९७७

सुनिए येसुदास का गया एक गीत जिसे लिखा है
डॉक्टर राही मासूम रज़ा ने और जिसकी धुन
बनायीं है जयदेव ने. फिल्म का नाम है आलाप
जो सन १९७७ के एक फिल्म है. अमिताभ बच्चन
और रेखा इस फिल्म में प्रमुख कलाकार हैं.



गीत के बोल;

ज़िन्दगी रात नहीं  रात की तसवीर नहीं
ज़िन्दगी सिर्फ़ किसी ज़ुल्फ़ की ज़ंजीर नहीं
ज़िन्दगी बस कोई बिगड़ी हुई तक़दीर नहीं
ज़िन्दगी को निखारना होगा

ज़िन्दगी को सँवारना होगा
दिल में सूरज उतारना होगा

ज़िन्दगी धूप नहीं  साया-ए-दीवार भी है
ज़िन्दगी ज़ार नहीं  ज़िन्दगी दिलदार भी है
ज़िन्दगी प्यार भी है  प्यार का इक़रार भी है
ज़िन्दगी को उभारना होगा

ज़िन्दगी को सँवारना होगा
दिल में सूरज उतारना होगा
…………………………………………………….
Zindagi ko sanwaarna hoga-Alaap 1977

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