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May 3, 2018

हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से-आलाप १९७७

सन १९७७ की आलाप फिल्म से एक गीत सुनते हैं जिसे
असरानी ने गाया है. अमिताब बच्चन को असरानी ट्रेनिंग
दे रहे हैं और इस गीत में डर के प्रकार भी बतलाते हैं.
इस गंभीर किस्म की फिल्म में जो हास्य वाले दुर्लभ दृश्य
हैं उनमें से ये एक है.

गीत राही मासूम रज़ा ने लिखा है और इसका संगीत तैयार
किया है जयदेव ने.



गीत के बोल:

हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे

फूँक फूँक के पांव धरूं मैं फिर भी पायल बाजे
ओ रामा फिर भी पायल बाजे
अरे फूँक फूँक के पांव धरूं मैं फिर भी पायल बाजे
ओ रामा फिर भी पायल बाजे
सैयां जी के घर का कोई खड़ा मेरे दरवाजे
खड़ा मेरे दरवाजे

चले जवानी पीछे पीछे चले जवानी
अरे चले जवानी पीछे पीछे बचपन आगे आगे
रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे

अंग अंग में चन्दन महके ये कैसी ऋतु आई
ओ रामा ये कैसी ऋतु आई
अरे अंग अंग में चन्दन महके ये कैसी ऋतु आई
ओ रामा ये कैसी ऋतु आई
चाहे जैसी हवा चले पर मोहे लगे पुरवाई
ओ श्यामा मोहे लगे पुरवाई
नैना दिन भर सपना देखें
नैना अरे नैना अरे नैना
अजी नैना दिन भर सपना देखें काजल रात को डाले
रामा डर लागे

ओ लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे
अरे रामा डर लागे

डर किरने प्रकार के होते हैं उनको ख्वाबों में देखिये
लज्जा ईर्ष्या क्रोध वीभत्स हा हा हा
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
ओ रामा डर लागे अरे श्यामा डर लागे
अरे रामा डर लागे
हो रामा डर लागे अपनी उमरिया से
……………………………………………….
Ho rama dar laage apni umariya se-Alaap 1977

Artists: Asrani, Amitabh Bachchan, Rekha

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Jan 12, 2018

नई री लगन-आलाप १९७७

हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय और अशोक कुमार की जुगलबंदी आपको
अगर याद हो फिल्म आशीर्वाद में, उसके बाद आपको हृषिकेश मुखर्जी
की ही एक और फिल्म याद दिलवाते हैं जिसमें अलग अलग धारा के
ढेर सारे लोग एक छत के नीचे जमा थे-बावर्ची. अब आते हैं फिल्म
नमक हराम की ओर जिसमें दो दोस्त हैं एक अमीर एक गरीब साथ
एक मुफलिसी का शिकार शायर है.

इन तीन फिल्मों के कुछ घटक ले लीजिए और कुछ क्लासिकल संगीत
की मात्रा ज्यादा कर दीजिए, हो गया फिल्म आलाप का मसाला तैयार.
फिल्म की कहानी. इसके अलावा लेकिन और भी बहुत है इस फिल्म में
जो थोडा आम आदमी के दायें बायें से निकल जाता है. गरीबी, संघर्ष,
स्वाभिमान, संगीत और सुबह का भूला शाम को घर ये की वर्ड्स हैं इस
फिल्म को समझने के लिए. फिल्म में ओमप्रकाश और अमिताभ बच्चन
दोनों ही रूटीन से हट कर भूमिकाओं में हैं. 



गीत के बोल:

नई री लगन और मीठी बतियाँ
पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
किस किस बात पे
किस किस बात पे
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
किस किस बात पे धड़के छतियाँ
पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
नई री लगन और

बाल भी उलझे हैं सपने भी
बाल भी उलझे हैं सपने भी
दूजे लागे हैं अपने भी
हो गये हम क्यों ऐसे दीवाने
हो गये हम क्यों ऐसे दीवाने

पिया जाने और जिया मोरा जाने सखी
नई री लगन और

ऐसो चित नगर करे बरजोरी
ऐसो चित नगर करे बरजोरी
और करो जी ??????????

कागा जा जा जा जा
जा रे कागा जा
जा जा जा जा रे
जा जा जा जा रे
जा जा जा जा रे
जा रे कागा जा
ना दे मोरे पिया को संदेसवा
पिया नाहीं आये
पिया नाहीं आये
मोरे आली कैसे करे मन कब जाऊँ
पिया नाहीं आये
पिया नाहीं आये
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Nayi ri lagan-Alaap 1977

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Oct 27, 2016

हम तो हैं परदेस में-गैर फ़िल्मी गीत

परदेस और परदेसी हिट्स का अपना अलग आकर्षण है श्रोताओं के
बीच. फ़िल्मी और गैर फ़िल्मी गीतों ने बराबर की लोकप्रियता अर्जित
की है. यकीनन चिट्ठी आई है के पदार्पण के पहले तक शायद इसे
सबसे ज्यादा सुना जाता था.

डा. राही मासूम रज़ा का लिखा ये गीत जगजीत और चित्रा सिंह ने
गाया है और धुन भी जगजीत सिंह की है. प्रस्तुत  वीडियो रॉयल
के लाइव प्रोग्राम का है.



गीत के बोल:


हम तो हैं परदेस में
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
अपनी रात की छत पे कितना तन्हा होगा चांद हो
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेस में

चांद बिना हर दिन यूँ बीता जैसे युग बीतें हो
चांद बिना हर दिन यूँ बीता जैसे युग बीतें हो
मेरे बिना किस हाल में होगा
मेरे बिना किस हाल में होगा कैसा होगा चांद हो

हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद

रात ने ऐसा पेंच लगाया टूटी हाथ से डोर हो
रात ने ऐसा रात ने ऐसा
रात ने ऐसा पेंच लगाया टूटी हाथ से डोर
आँगन वाले नीम में जाकर
आँगन वाले नीम में जाकर अटका होगा चांद हो
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
हम तो हैं परदेस में देस में निकला होगा चांद
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Ham to hain pardes mein-Non film song

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Mar 5, 2016

ज़िन्दगी को सँवारना होगा-आलाप १९७७

सुनिए येसुदास का गया एक गीत जिसे लिखा है
डॉक्टर राही मासूम रज़ा ने और जिसकी धुन
बनायीं है जयदेव ने. फिल्म का नाम है आलाप
जो सन १९७७ के एक फिल्म है. अमिताभ बच्चन
और रेखा इस फिल्म में प्रमुख कलाकार हैं.



गीत के बोल;

ज़िन्दगी रात नहीं  रात की तसवीर नहीं
ज़िन्दगी सिर्फ़ किसी ज़ुल्फ़ की ज़ंजीर नहीं
ज़िन्दगी बस कोई बिगड़ी हुई तक़दीर नहीं
ज़िन्दगी को निखारना होगा

ज़िन्दगी को सँवारना होगा
दिल में सूरज उतारना होगा

ज़िन्दगी धूप नहीं  साया-ए-दीवार भी है
ज़िन्दगी ज़ार नहीं  ज़िन्दगी दिलदार भी है
ज़िन्दगी प्यार भी है  प्यार का इक़रार भी है
ज़िन्दगी को उभारना होगा

ज़िन्दगी को सँवारना होगा
दिल में सूरज उतारना होगा
…………………………………………………….
Zindagi ko sanwaarna hoga-Alaap 1977

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Dec 8, 2015

चाँद अकेला जाये-आलाप १९७७

कलाकृतियों पर बनी फ़िल्में या कला पर बनी फ़िल्में देखने आम
जनता कम जाया करती है, ये दस्तूर आज भी ज़ारी है. आजकल
कला फ़िल्में बनती ही कहाँ हैं ? सन १९७७ की फिल्म आलाप 
अमिताभ बच्चन और रेखा जैसे कलाकारों से सजी फिल्म है. आम
जनता में अमिताभ के जो भी मुरीद हैं उनमें से २५ टका तो इस
फिल्म को देख आये. बाकी के नाम सुन के और फिल्म की रिपोर्ट
सुन के जाऊं-ना जाऊं करते रह गए. ऋषिकेश मुखर्जी के फैन भी 
ज़रूर इस फिल्म को देख आये होंगे. एक श्रेणी के फैन रह गए वो
हैं अभिनेत्री रेखा के फैन. उन्होंने भी फिल्म देखी होगी और दुखी
हुए होंगे फिल्म देख कर.

फिल्म का संगीत अच्छा है और इसके गीत आप सुन सकते हैं
कभी कभार. एक गीत सुनिए जो राही मासूम रज़ा का लिखा हुआ
है. इसे येसुदास ने गाया है जयदेव की बनाई तर्ज़ पर. गाना सुनते
हैं इस फिल्म पर चर्चा बाद में करेंगे.



गीत के बोल:

चाँद अकेला जाये सखी री
काहे अकेला जाये सखी री
मन मोरा घबराये री
सखी री सखी री, ओ सखी री
चाँद अकेला जाये सखी री

वो बैरागी वो मनभावन
कब आयेगा मोरे आँगन
इतना तो बतलाये री
सखी री सखी री, ओ सखी री
चाँद अकेला जाये सखी री

अंग अंग में होली दहके
मन में बेला चमेली महके
ये ऋतु क्या कहलाये री
भाभी री भाभी री, ओ भाभी री
चाँद अकेला जाये सखी री
...................................................................................
Chand akela jaaye-Alaap 1977

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Jul 29, 2011

काहे मनवा नाचे हमरा-आलाप १९७७

फिल्म आलाप से एक गीत और सुना जाए। लीक से
हटकर बनी और बॉक्स ऑफिस की पटरी से ज़ल्द ही
उतरी फिल्म में अमिताभ और रेखा की जोड़ी है।

प्रस्तुत गीत रेखा पर फिल्माया गया है जिसे गाया है
लाता मंगेशकर ने। रेखा की भूमिका सेमी-देहाती किस्म
की है फिल्म में अतः गीत के बोलों में थोड़ी खड़ी बोली
के शब्द समाहित हैं। फिल्म के कथानक अनुसार वो एक
गायक की बीबी हैं अतः उनका गाना भी ज़रूरी है। गीत
कर्णप्रिय है जिसका संगीत तैयार किया है जयदेव ने।

ऋषिकेश मुखर्जी निर्देशित फिल्मों में से यही शायद सबसे
कम चलने वाली फिल्म थी। फिल्म का कथानक अच्छा होते
हुए भी ऐसा लगता है कि कहानी अधूरी सी है या फिर एक
छोटी सी कहानी को किसी सास बहू सीरियल की तरह लम्बा
खींचा गया हो ।



गीत के बोल:


काहे मनवा नाचे हमरा
काहे मनवा नाचे हमरा
सखी री कोई इसे अब समझाए

काहे मनवा नाचे हमरा

नैनं कजरा डालन बैठी
नैनं कजरा डालन बैठी
माथे पे सूरज पालन बैठी
बीच में आये देखो सपने कासे

काहे मनवा नाचे हमरा
काहे मनवा नाचे हमरा
सखी री कोई इसे अब समझाए

काहे मनवा नाचे हमरा

नस नस में ये कौन उतरा है
नस नस में ये कौन उतरा है
दिल में किसका दिल धडका है
नाम अनाम का निस दिन बांचे

काहे मनवा नाचे हमरा
काहे मनवा नाचे हमरा
सखी री कोई इसे अब समझाए

काहे मनवा नाचे हमरा
..........................
Kaahe manwa nache hamra-Alaap 1977

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