गैरों पे करम अपनों पे सितम-आँखें १९६८
सर्वाधिक लोकप्रिय गीत हैं उनमें फिल्म आँखें का प्रस्तुत गीत
सूची में काफी ऊपर आता है. ए मेरे दिल-ए-नादान के बाद
शायद से सबसे ज्यादा सुना गया गीत हो सकता है, मेरे ख्याल
में.
गैर शब्द से ये गीत शुरू होता है मगर कुछ कुछ अपना सा ही
लगता है. करम और सितम दोनों का मुखड़े में प्रयोग साहिर ने
इस खूबसूरत अंदाज़ से किया है कि सुनने वाले पर सीधा असर
कर जाता है. शब्द बेहद नपे तुले हैं गीत के और कुछ अलग
हट के शब्दों का प्रयोग है जो ध्यान से सुनने पर आपको चौंका
देगा.
रामानंद सागर निर्देशित इस फिल्म ने लोकप्रियता के शिखर को
छुआ था. इस फिल्म के गाने भी बेतहाशा बजे, चारों ओर. फिल्म
के कहानी जासूसी है. धर्मेन्द्र ने एक जासूस की भूमिका निभाई
है. प्रस्तुत गीत में माला सिन्हा अपनी उपेक्षा के लिए नायक से
शिकायत कर रही हैं.
गीत के बोल:
गैरों पे करम, अपनों पे सितम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
गैरों पे करम, अपनों पे सितम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
गैरों पे करम, अपनों पे सितम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
रहने दे अभी थोडा सा भरम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
ये ज़ुल्म न कर
गैरों पे करम, अपनों पे सितम
हम चाहने वाले हैं तेरे
यूँ हमको जलाना ठीक नहीं
महफ़िल में तमाशा बन जाए
इस दर्जा सताना ठीक नहीं
इस दर्जा सताना ठीक नहीं
मर जायेंगे हम मिट जायेंगे हम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
गैरों पे करम, अपनों पे सितम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
ये ज़ुल्म न कर
गैरों के थिरकते तानों पर
ये हाथ गवारा कैसे करें
गैरों के थिरकते तानों पर
ये हाथ गवारा कैसे करें
हर बात गवारा है लेकिन
ये बात गवारा कैसे करें
ये बात गवारा कैसे करें
तुझको तेरी बेदर्दी की कसम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
गैरों पे करम, अपनों पे सितम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
ये ज़ुल्म न कर
हम भी थे तेरे मंज़ूर-ए-नज़र
दिल चाहे तो अब इकरार ना कर
सौ तीर चला सीने पे मगर
बेगानों से मिलकर वार ना कर
बेगानों से मिलकर वार ना कर
बेमौत कहीं मर जाएँ न हम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
गैरों पे करम, अपनों पे सितम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
रहने दे अभी थोडा सा भरम
ए जान-ए-वफ़ा ये ज़ुल्म न कर
ये ज़ुल्म न कर
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Gairon pe karam-Aaankhen 1968
Artists: Mala Sinha, Dharmendra

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