ओ मेरी जान(युगल गीत)-मंजिल मंजिल १९८४
सुनवाए हैं अभी तक. तीसरा भी लगे हाथ सुन लीजिए.
फिल्म रिलीज़ के वक्त और उसके कुछ साल बाद तक
इस फिल्म के गीत नियमित रूप से सुनाई देते रहे कई
जगह पर. अब इन्हें सुनना दुर्लभ अनुभव हो चला है.
नासिर हुसैन निर्मित-निर्देशित इस फिल्म में प्रेम कथा
है और उससे एक कबीला भी जुडा हुआ है. नासिर हुसैन
के कई फिल्मों में आपको कबीला मिलेगा. याददाश्त
खोने वाला मामला भी मेरे हिसाब से उनकी २-३ फिल्मों
में मौजूद है. एक तो है शायद-प्यार का मौसम.
आवाजें आशा भोंसले और शैलेन्द्र सिंह की हैं, गीत के बोल
मजरूह के और संगीत आर डी बर्मन का है. नायक नायिका
को आप पहचान ही लेंगे. नायिका द्वारा गाये गीत के दो
अंतरे सुनने के बाद नायक जोश में आ जाता है और पुल
पर चढ जाता है, हालांकि पीछे पहाड़ भी है. गाना तीन से
चार मिनट का है इसलिए वो पुल पर ही गीत गा के काम
चला लेता है, पहाड़ पर बाद में चढ़ने का विचार कर के.
गीत के बोल:
ओ मेरी जान ओ मेरी जान
ओ मेरी जान ओ मेरी जान
अब नहीं रहना तेरे बिना
हो ओ ओ अब नहीं रहना तेरे बिना
ओ मेरी जान ओ मेरी जान
हारी मैं तुझसे मुँह फेर के
आँखें खुली पर ज़रा देर से
हो ओ ओ हारी मैं तुझसे मुँह फेर के
आँखें खुली पर ज़रा देर से
कोई मेरा तुझसा कहाँ
अब नहीं रहना तेरे बिना
हो ओ ओ ओ अब नहीं रहना तेरे बिना
ओ मेरी जान ओ मेरी जान
तू है तो ठोकर खा लूंगी मैं
कांटों में जीवन बिता लूंगी मैं
हो ओ ओ ओ तू है तो ठोकर खा लूंगी मैं
कांटों में जीवन बिता लूंगी मैं
ले चल मुझे चाहे जहाँ
अब नहीं रहना तेरे बिना
हो ओ ओ अब नहीं रहना तेरे बिना
ओ मेरी जान ओ मेरी जान
जिस दिन से देखा यारा तुझे
मंज़िल मंज़िल पुकारा तुझे
हो ओ ओ ओ जिस दिन से देखा यारा तुझे
मंज़िल मंज़िल पुकारा तुझे
तेरे सिवा जाना कहाँ
अब नहीं रहना तेरे बिना
हो ओ ओ ओ अब नहीं रहना तेरे बिना
ओ मेरी जान ओ मेरी जान
अब नहीं रहना तेरे बिना
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O meri jaan(duet)-Manzil manzil 1984
Artists: Dimple Kapadia, Sunny Deol

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