अजब है ये दुनिया अजब जिंदगी है-नया आदमी १९५६
निर्देशकों का कोलेबोरेशन है. एक से बढ़ कर एक गीत हैं फिल्म
में. दक्षिण भारत की नामचीन अभिनेत्री अंजलि देवी पर फिल्माया
गया एक गीत सुनते हैं राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ जिसका संगीत
मदन मोहन ने तैयार किया है. श्वेत श्याम युग पर प्यानो पर
बैठ कर नायकों ने ज्यादा गीत गाये थे, नायिकाओं ने कम, इस
हिसाब से ये रेयर गीतों में से एक हुआ.
गीत के बोल:
अजब है ये दुनिया अजब जिंदगी है
अजब है ये दुनिया अजब जिंदगी है
अजब रंग बिरंगी ये महफ़िल लगी है
अजब है ये दुनिया
कोई अपनी दौलत पे इतरा रहा है
कोई अपनी दौलत पे इतरा रहा है
कोई दिल बेहयाई पे इतरा रहा है
ना जाने कहाँ से
ना जाने कहाँ से हवा ये चली है
अजब रंग बिरंगी ये महफ़िल लगी है
अजब है ये दुनिया
बदल के यहाँ भेस कितने ही बैठे
बदल के यहाँ भेस कितने ही बैठे
हैं बहरूपिये सब ये जितने हैं बैठे
हैं बहरूपिये सब ये जितने हैं बैठे
यहाँ होश के नाम
यहाँ होश के नाम दीवानगी है
अजब रंग बिरंगी ये महफ़िल लगी है
अजब है ये दुनिया
यहाँ दे ना कोई सहारा किसी को
यहाँ दे ना कोई सहारा किसी को
मोहाब्त किसी से इशारा किसी को
मोहाब्त किसी से इशारा किसी को
मोहब्बत का मतलब
मोहब्बत का मतलब अब दिल्लगी है
अजब रंग बिरंगी ये महफ़िल लगी है
अजब है ये दुनिया
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Ajab hai ye duniya-Naya aadmi 1956
Artist: Anjali Devi

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