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Jul 26, 2020

आँखों से दिल में उतर कर-फरेब १९९६

आज बहुत सी बॉलीवुड हस्तियों के जन्मदिन हैं. इनमें
से एक हैं सुमन रंगनाथन. घुंघराले बालों वाली सुमन
अपने समय की अभिनेत्रियों से थोड़ी अलग दिखती थीं.
हालांकि अलग लुक्स का उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हुआ
जहाँ तक हिंदी फिल्मों का सवाल है.

२६ जुलाई १९७४ को बैंगलोर में जन्मी सुमन ने कन्नड़
फिल्म सी बी आई शंकर से अपने फ़िल्मी कैरियर की
शुरुआत की थी. ये १९८९ में आई थी.

हिंदी फिल्म जगत में और उन्हें बड़े बैनर की फिल्मों
में प्रमुख नायिका के रोल कम मिले. अधिकतर फिल्मों
में सुमन सहायक भूमिकाओं में नज़र आईं. ये भी हो
सकता है कि दूसरी भारतीय भाषाओँ में फ़िल्में करने की
वजह से उन्हें समय ना मिल पाया हो.

वैसे वजह तो ये भी बतलाई जाती है कि वे फिल्मों के
बजाये इतर कारणों से ज्यादा चर्चा में रहीं जिसमें अफेयर
और असफल से रहे रिश्ते भी शामिल हैं.

आज सुनते हैं नीरज का लिखा हुआ फिल्म फरेब का गीत
जिसकी धुन जतिन ललित ने तैयार की हैं कुमा सानू और
अलका याग्निक ने इसे गाया है. फिल्म के नायक का नाम
फराज़ खान है.

फिल्म फरेब, अनलाफुल एंट्री(१९९२) का देसी संस्करण है.
अनलॉफुल एंट्री में जो रोल रे लियोट्टा ने निभाया था वो
देसी संस्करण में मिलिंद गुनाजी ने निभाया है.




गीत के बोल:

आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
मेरे यार मेरे प्यार तेरी महक मेरे तन-मन में है
आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
मेरे यार मेरे प्यार तेरी महक मेरे तन-मन में है
आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
आँखों से दिल में उतर के तू मेरी धडकन में है.
…………………………………………………..
Aankhon se dil mein utar ke-Fareb 1996

Artists: Suman Ranganathan, Faraaz Khan

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Jul 19, 2020

अपने होंठों की बंसी बना ले मुझे-गैम्बलर १९७१

कई दिन से लॉग इन में दिक्कत आ रही है.

Device not recognized

का मेसेज आता है. क्या दूसरे ब्लोगर्स को भी ऐसी
कुछ दिक्कत आई? गूगल भाई बतलायेंगे उनको
क्या समस्या है?
............................................................................

आज कवि गोपालदास नीरज की पुण्यतिथि है. वे
हमसे दो साल पहले ही बिछड़े थे. कवी सम्मेलनों की
शान रहने वाले नीरज ने हिंदी फिल्मों के लिए सत्तर
के दशक में काफी गीत लिखे.

उनकी लेखनी का लोहा हिंदी फ़िल्मी गाने सुनने वाले
भी मानते हैं.

उनकी कलम से निकला एक युगल गीत सुनते हैं फिल्म
गैम्बलर से जो सन १९७१ की फिल्म है.

लता और किशोर के गाये इस गीत की धुन तैयार की
है सचिन देव बर्मन ने.





गीत के बोल:

अपने होंठों की बंसी बना ले मुझे
.
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Apne honthon ki bansi bana le-Gambler 1971

Artists: Dev Anand, Zahida



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Aug 24, 2019

आज मदहोश हुआ जाए रे-शर्मीली १९७१

सुनते हैं एक मधुर युगल गीत फिल्म शर्मीली से. एस डी बर्मन
के संगीत वाले युगल गीत काफी कसावट लिए होते हैं. पिछली
काफी सारी पोस्ट पहले हमने एक रिपीट वैल्यू थ्योरी की बात
की थी, उस अनुसार इस गीत की रिपीट वैल्यू ज़बरदस्त है.

नीरज गीतकार हैं और इसे लता मंगेशकर और किशोर कुमार
ने गाया है. शशि कपूर और राखी पर इसे फिल्माया गया है.
फिल्म में राखी डबल रोल में हैं.



गीत के बोल:

आज मदहोश हुआ जाए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन
बिना ही बात मुस्कुराए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन

ओ री कली सजा तू डोली
ओ री लहर पहना तू पायल
ओ री नदी दिखा तू दर्पन
ओ री किरण उड़ा तू आँचल
एक जोगन है बनी आज दुल्हन हो ओ
आओ उड़ जाएं कहीं बन के पवन
आज मदहोश हुआ जाए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन

शरारत करने को ललचाए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन

ऐ यहाँ हमें ज़माना देखे
तो
आओ चलो कहीं छुप जाएं
अच्छा
यहाँ हमें ज़माना देखे
आओ चलो कहीं छुप जाएं
कैसे कहो प्यासे रह जाएं
तू मेरी मैं हूँ तेरा तेरी क़सम हो ओ

मैं तेरी तू मेरा मेरी क़सम हो ओ
आज मदहोश हुआ जाए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन

रोम रोम बहे सुरधारा
अँग अँग बजे शहनाई
जीवन सारा मिला एक पल में
जाने कैसी घड़ी ये आई
छू लिया आज मैंने सारा गगन हो ओ
नाचे मन आज मोरा झूम छनन छनन हो ओ ओ ओ
आज मधोश हुआ जाए रे
मेरा मन मेरा मन मेरा मन

शरारत करने को ललचाए रे
बिना ही बात मुस्कुराए रे
मेरा मन
मेरा मन
मेरा मन
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Aaj madhosh hua jaaye re-Sharmili 1973

Artists: Shashi Kapoor, Rakhi

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Dec 24, 2018

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार-कन्यादान १९६८

संडे मंडे हिट्स के अंतर्गत एक गीत सुनते हैं फिल्म कन्यादान
से. महेंद्र कपूर की आवाज़ वाला ये गीत नीरज ने लिखा है.

कभी कभी शंकर जयकिशन के ६० के दशक के उत्तरार्ध और
७० के दशक के पूर्वार्ध के कई गीतों को सुन कर ऐसा लगता
है कि शोरगुल बढ़ता गया उनके संगीत में. वो क्लेरिटी जिसके
लिए वो जाने जाते थे वो कुछ गीतों में नदारद लगी. या तो
पहले जैसी रिकॉर्डिंग वाली सुविधाओं का अभाव रहा या दूसरे
नई पीढ़ी के संगीतकारों के देखा देखी वे भी नॉइज़ लेवल
को बढ़ाने लग गए. इस चक्कर में मेलोडी कंटेंट दबना शुरू
हो गया.





गीत के बोल:

रु रु रु रु रु रु रु रु रु
रु रु रु रु रु रु रु रु रु
ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ हो मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
हो वन डे न जाने अब क्या होगा

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा

दिल की किताब होगी
होगी होगी होगी होगी
हो लफ़्ज़ा अफ़साना होगा
होगा होगा होगा होगा
छिप छिप कर मिलना होगा
होगा होगा होगा होगा
कॉलेज बहाना होगा
होगा होगा होगा होगा
कॉलेज बहाना होगा
होगा होगा होगा होगा होगा

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ हो मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
हो वन डे न जाने अब क्या होगा

जन्मदिन व्ही व्ही ओ ओ ओ ओ ओ
जन्मदिन व्ही व्ही ओ ओ ओ ओ ओ

ए मेरी जाने वफ़ा
जाने वफा जाने वफ़ा
नज़रें चुरा के न जा
न जा न जा
हम हैं दीवाने तेरे
दामन बचा के न जा
न जा न जा

संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा
सनन रिन व्ही व्ही
हो ओ ओ ओ ओ ओ
सनन रिन व्ही व्ही
हो ओ ओ ओ ओ ओ

ऐसे न देखो सनम
मौसम आवारा है
चाहे जब ये ले लो
दिल ये तुम्हारा है

संडे को प्यार हुआ हो ओ मंडे इक़रार हुआ हो ओ
हो संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
संडे को प्यार हुआ मंडे इक़रार हुआ
वन डे न जाने अब क्या होगा
वन डे न जाने अब क्या होगा
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
………………………………………….
Sunday ko pyar hua-kanyadan 1968

Artists:

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Dec 15, 2018

फूलों की महक लहरों की लचक-कन्यादान १९६८

नारी को समर्पित है ये गीत फिल्म कन्यादान का
जो फिल्म को सार्थकता प्रदान करता है. फिल्म का
कथानक थोड़ा कन्फ्यूज कराने वाला है. रहस्य पर
से पर्दा काफी देर बाद उठता है.

आदमी की गैर ज़िम्मेदाराना क्रियाकलापों के ऊपर
इसमें रौशनी डाली गसी है और समस्यापूर्ति भी है
नारी के लिए गीत की अंतिम पंक्तियों में. आखिर कब
तक सहे और चुप रहे वो. उसे जीवन के अंधियारों
से बाहर निकलना ही होगा.

पुरुष प्रधान समाज नारी की प्रगतिशीलता को स्वीकार
नहीं कर पाता. पीढ़ी दर पीढ़ी जो सोच चली आई है
वो उसे नारी को अपने से आगे बढ़ते नहीं देख पाती.

कविवर नीरज का लिखा गीत है जिसे महेंद्र कपूर
ने गाया है शंकर जयकिशन की धुन पर.



गीत के बोल:

फूलों की महक लहरों की लचक
बिजली की चुरा कर अंगडाई
जो शकल बनाई कुदरत ने
औरत वो यहाँ बन कर आई
बन कर आई
बेटी वो बनी पत्नी वो बनी
माता वो बनी साथी वो बनी
परमेश्वर
परमेश्वर मान पति को और
मंदिर में दिया बाती वो बनी
यूं इंतज़ार स्वामी का किया
खिड़की पे शमा सी जलती रही
वो बाहर रास रचता रहा
ये घर में हाय सिसकती रही
सिसकती रही

हाय क्यों रूठी हो जाने बहार बोलो ना
और अब होगा नहीं इंतज़ार बोलो ना
हाय क्यों रूठी हो जाने बहार बोलो ना
पहलू में आ जा साँसों में घुल जा
बाहों में सो जा जाम में ढल जा
ओ पहलू में आ जा साँसों में घुल जा
बाहों में सो जा जाम में ढल जा
रात आयेगी ना ये बार बार बोलो ना
हाय क्यों रूठी हो जाने बहार बोलो ना
और अब होगा नहीं इंतज़ार बोलो ना

और फिर आ ही गया दिन भी वो मनहूस कि जब
मर्द की प्यास ने ये रंग नया दिखलाया
आशियां अपना जो था हाय पराया वो हुआ
भंवरा और एक और नई तितली लिये घर आया

मौत के सिवा गरीब के ज़ख्म का नहीं कोई इलाज
वाह री ओ दुनिया बेशरम वाह रे ओ बेहया समाज
कितनी कलियाँ तेरी राह में
खिल के भी न मुस्कुरा सकीं
कोई जा की कोठे पे चढ़ी
कोई हाय डूब कर मरी

हाय औरत है चीज़ क्या तू भी
खा के ठोकर भी प्यार करती है
जिसके हाथों तू लूटी जाती है
उसपे ही जान निसार करती है
तू नहीं जानती है इतना भी
खुदकुशी खुद नरक की राह है एक
ज़ुल्म करना ही बस गुनाह नहीं
ज़ुल्म सहना भी तो गुनाह है एक
भूल कर अपना फ़र्ज़ जब मांझी
खुद ही कश्ती डुबा दे पानी में
तब किसी और नाव पर जाना
है नहीं पाप ज़िंदगानी में
उठ कोई और हमसफ़र चुन ले
जोड़ रिश्ता नई कहानी से
है अँधेरे में जो तेरी बहनें
मौत को उनकी ज़िंदगानी दे
………………………………………………..
Phoolon ki mahak-Kanyadan 1968

Artist:

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Jul 21, 2018

कैसा है मेरे दिल तू खिलाडी-गैम्बलर १९७१

कविवर नीरज की स्मृति में एक गीत सुनते हैं आज जिसे हमने
फिल्म गैम्बलर से चुना है हमारे पाठकों के लिए. क्या खूब कहा
था उन्होंने- आदमी को आदमी बनाने के लिए जिंदगी में प्यार की
कहानी चाहिए.

जीवन की आपाधापी में बहुत कुछ छूट जाता है. कोई पैसे कमाने
से रह जाता है तो कोई खुशियों के पल. सम्पूर्णता जीवन में शायद
ही किसी को नसीब होती हो. कुछ ना कुछ तो कमी रह ही जाती
है. दृष्टिकोण पर भी निर्भर करता है. चाह बहुत अधिक हो तो
व्यक्ति प्यासा सा ही रहता है. संतोष जीवन की एक बड़ी कुंजी है
जिससे बड़ी बड़ी समस्याएं सुलझ जाती हैं.

फिल्म के नायक को पैसे की डरकर थी, वो उसे मिल गया फिर
उसे अब किस बात की कमी है, जाने के लिए सुनते हैं ये गीत.
देव आनंद पर फिल्माया गया ये गीत अपने गति परिवर्तन के
लिए जाना जाता है. दो मूड हैं इस गीत में. गीत का संगीत तैयार
किया है एस डी बर्मन ने.




गीत के बोल:

कैसा है मेरे दिल तू खिलाड़ी
भर के भी है तेरा प्याला खाली
.
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Kaisa hai mere dil too khiladi-Gambler 1971


Artist: Dev Anand

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Mar 15, 2018

लिखे जो ख़त तुझे-कन्यादान १९६८

फिल्म कन्यादान से आप दो गीत सुन चुके हैं.
रफ़ी का गाया दूसरा गीत सुनते हैं इस फिल्म
से. पिछला गीत हसरत जयपुरी का लिखा हुआ
था. इसे नीरज ने लिखा है.

खत, कोरियर, पार्सल श्रेणी का ये एक उम्दा गीत
है और बेहद लोकप्रिय भी.




गीत के बोल:

लिखे जो ख़त तुझे वो तेरी याद में
हज़ारों रंग के नज़ारे बन गए
लिखे जो ख़त तुझे वो तेरी याद में
हज़ारों रंग के नज़ारे बन गए
सवेरा जब हुआ तो फूल बन गए
जो रात आई तो सितारे बन गए
लिखे जो ख़त तुझे

कोई नगमा कहीं गूँजा कहा दिल ने के तू आई
कहीं चटकी कली कोई मैं ये समझा तू शरमाई
कोई ख़ुशबू कहीं बिख़री लगा ये ज़ुल्फ़ लहराई

लिखे जो ख़त तुझे वो तेरी याद में
हज़ारों रंग के नज़ारे बन गए
सवेरा जब हुआ तो फूल बन गए
जो रात आई तो सितारे बन गए
लिखे जो ख़त तुझे

फिज़ा रंगीन अदा रंगीन ये इठलाना ये शरमाना
ये अंगड़ाई ये तन्हाई ये तरसा कर चले जाना
बना देगा नहीं किसको जवां जादू ये दीवाना

लिखे जो ख़त तुझे वो तेरी याद में
हज़ारों रंग के नज़ारे बन गए
सवेरा जब हुआ तो फूल बन गए
जो रात आई तो सितारे बन गए
लिखे जो ख़त तुझे

जहाँ तू है वहाँ मैं हूँ मेरे दिल की तू धड़कन है
मुसाफ़िर मैं तू मंज़िल है मैं प्यासा हूँ तू सावन है
मेरी दुनिया ये नज़रें हैं मेरी जन्नत ये दामन है

लिखे जो ख़त तुझे वो तेरी याद में
हज़ारों रंग के नज़ारे बन गए
सवेरा जब हुआ तो फूल बन गए
जो रात आई तो सितारे बन गए
लिखे जो ख़त तुझे
.................................................................
Likhe jo khat tujhe-Kanyadaan 1968

Artists: Shashi Kapoor, Asha Parekh

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Aug 8, 2017

ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली-शर्मीली १९७१

सुनते हैं फिल्म शर्मीली का शीर्षक गीत. गीत के शुरू में ऐसा
लगता है मानो गाने वाले के ऊपर एक बाल्टी ठंडा पानी डाल
दिया गया हो और उसे तुरंत गाने को कहा गया हो. गायन में
जितने प्रयोग किशोर कुमार और मन्ना डे के ऊपर किये गए
शायद ही और गायकों को ये अवसर मिले हों.

गीत अपने में काफी लोकप्रिय रहा है और आज भी कभी कभार
सुनाई दे जाता है. नीरज का लिखा गीत किशोर कुमार ने गाया
है एस डी बर्मन के संगीत निर्देशन में. गीत में गीतकार का नाम
भी एक बार आता है चाहे आँखों की तारीफ़ के बहाने ही हो.



गीत के बोल:

ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
आओ ना  तरसाओ ना
आओ ना  तरसाओ ना
ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली

तेरा काजल लेकर रात बनी  रात बनी
तेरी मेंहदी लेकर दिन उगा  दिन उगा
तेरी बोली सुन कर सुर जगे  सुर जगे
तेरी खुशबू लेकर फूल खिला  फूल खिला
जानेमन तू है कहाँ
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली

तेरी राहों से गुज़रे जब से हम  जब से हम
मुझे मेरी डगर तक याद नहीं  याद नहीं
तुझे देखा जब से दिलरुबा  दिलरुबा
मुझे मेरा घर तक याद नहीं  याद नहीं
जानेमन तू है कहाँ
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली

ओ नीरज नयना आ ज़रा  आ ज़रा
तेरी लाज का घूँघट खोल दूं  खोल दूं
तेरे आँचल पर कोई गीत लिखूँ  गीत लिखूँ
तेरे होंठों में अमृत घोल दूँ  घोल दूँ
जानेमन तू है कहाँ
ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
आओ ना  तरसाओ ना
आओ ना  तरसाओ ना
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मीली
…………………………………..
O meri sharmili-Sharmili 1971

Artist: Shashi Kapoor, Rakhi

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Jul 5, 2017

मेरा मन तेरा प्यासा-गैम्बलर १९७१

एक गीत की ब्यूटी यही है कि शब्द कैसे भी हों उसका
भाव बदल जाए. इस गीत के मुखड़े में प्यासा शब्द है,
अगर इस पर कोई डिस्को गीत बना होता तो भाव कुछ
अलग होते.

गैम्बलर फिल्म का ये गीत सौम्य और सॉफ्ट सा है.
इस एक शब्द के अलावा पूरा गीत सीधा साधा सा है
इसलिए सुनने में कानों को आराम देता है. धुन और
इसमें प्रयुक्त वाद्य यंत्रों की ध्वनियाँ भी गुदगुदाने वाली
हैं. नीरज जा गीत है, एस डी बर्मन का संगीत और
रफ़ी की मोहक आवाज़. परदे पर देव आनंद इस गीत
पर संगीतमय कसरत कर रहे हैं.



गीत के बोल:

मेरा मन तेरा प्यासा  मेरा मन तेरा
मेरा मन तेरा प्यासा  मेरा मन तेरा
पूरी कब होगी आशा 
मेरा मन तेरा
मेरा मन तेरा प्यासा  मेरा मन तेरा

जबसे मैंने देखा तुझे मेरा मन नहीं रहा  मेरा
दे दे अपना हाथ मेरे हाथों में क्या जाए  तेरा
जबसे मैंने देखा तुझे मेरा मन नहीं रहा  मेरा
दे दे अपना हाथ मेरे हाथों में क्या जाए  तेरा
अब तो न तोड़ो आशा
मेरा मन तेरा प्यासा  मेरा मन तेरा

ज़िन्दगी है मेरी इक दाँव  तू है हार-जीत  मेरी
ऐसे वैसे कैसे भी तू खेल हमसे जैसे मर्ज़ी  तेरी
ज़िन्दगी है मेरी इक दाँव  तू है हार-जीत  मेरी
ऐसे वैसे कैसे भी तू खेल हमसे जैसे मर्ज़ी  तेरी
कितनी है भोली आशा
मेरा मन तेरा प्यासा  मेरा मन तेरा

पता नहीं कौन हूँ मैं  क्या हूँ और कहाँ मुझे  जाना
अपनी वो कहानी जो अंजानी हो के बन गई  फ़साना
पता नहीं कौन हूँ मैं  क्या हूँ और कहाँ मुझे  जाना
अपनी वो कहानी जो अंजानी हो के बन गई  फ़साना
जीवन क्या है  तमाशा
मेरा मन तेरा प्यासा  मेरा मन तेरा
…………………………………………………………
Mera man tera pyasa-Gambler 1971

Artist: Dev Anand

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Jul 1, 2017

दिल आज शायर है-गैम्बलर १९७१

सन १९७१ की फिल्म गैम्बलर का शायद सबसे लोकप्रिय गीत
किशोर कुमार का गाया गीत ही लगता है. वैसे तो फिल्म के
और भी गीतों ने तहलका मचाया था मगर ये सबसे ज्यादा
सुनाई दिया अभी तक.

अच्छे गीतों में गलतियाँ नहीं निकाली जातीं इसलिए गीत की
एक पंक्ति में हम और मैं शब्द के एक साथ प्रयोग को हम भी
नज़र अंदाज़ करते हुए इसे बरसों से सुन रहे हैं. फिल्म का हीरो
पैसे वाला अर्थात रईस बन चुका है, वो कुछ भी कर सकता है.

नीरज के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है एस डी बर्मन ने.



गीत के बोल:

दिल आज शायर है ग़म आज नग़मा है
शब ये ग़ज़ल है सनम
दिल आज शायर है ग़म आज नग़मा है
शब ये ग़ज़ल है सनम
गैरों के शेरों को ओ सुनने वाले
हो इस तरफ़ भी करम

आ के ज़रा देख तो तेरी खातिर
हम किस तरह से जिये
आ के ज़रा देख तो तेरी खातिर
हम किस तरह से जिये
आँसू के धागे से सीते रहे हम
जो ज़ख्म तूने दिये
चाहत की महफ़िल में ग़म तेरा लेकर
क़िस्मत से खेला जुआ
दुनिया से जीते पर तुझसे हारे
यूँ खेल अपना हुआ

है प्यार हमने किया जिस तरह से
उसका न कोई जवाब
है प्यार हमने किया जिस तरह से
उसका न कोई जवाब
ज़र्रा थे लेकिन तेरी लौ में जल कर
हम बन गये आफ़ताब
हमसे है ज़िंदा वफ़ा और हम ही से
है तेरी महफ़िल जवाँ
हम जब न होंगे तो रो रो के दुनिया
ढूँढेगी मेरे निशां

रे प्यार कोई खिलौना नहीं है
हर कोई ले जो खरीद
रे प्यार कोई खिलौना नहीं है
हर कोई ले जो खरीद
मेरी तरह ज़िन्दगी भर तड़प लो
फिर आना इसके करीब
हम तो मुसाफ़िर हैं कोई सफ़र हो
हम तो गुज़र जाएँगे ही
लेकिन लगाया है जो दांव हमने
वो जीत कर आएँगे ही
वो जीत कर आएँगे ही
वो जीत कर आएँगे ही
……………………………………………………………………..
Dil aaj shayar hai-Gambler 1971

Artists: Dev Anand, Zahida

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May 30, 2017

कहता है जोकर-मेरा नाम जोकर १९७०

मेरा नाम जोकर फिल्म के कुछ गीत जीवन दर्शन पर
आधारित हैं. फिल्म कुछ ज्यादा ही गंभीर हो चली थी
समय के लिहाज से, लिहाजा, जनता ने इसे ज्यादा
तवज्जो नहीं दी रिलीज़ के वक्त. धीरे धीरे समय के
साथ इस फिल्म ने हिंदी फिल्म इतिहास की सबसे
बड़ी क्लासिक फिल्मों में जगह बना ली. मूल फिल्म
की लम्बाई कुछ ज्यादा थी. इसे बाद में सम्पादित कर
दोबारा रिलीज़ किया गया.

गर्मी का मौसम है इसलिए जनता दही ज़माती है. कुछ
लोग सेहत बनाने के लिए काज़ू खाते हैं. ये वही हैं जो
Joker को ज्यादा इज्ज़त बख्शते हुए Zoker बोलते हैं.
उनकी zab zab याद आ zaati है ऐसे गीत याद आ जाते
हैं जिनके मुखड़ों में ‘ज’ शब्द का इस्तेमाल हुआ है.

प्रस्तुत गीत मुकेश का गाया हुआ है. नीरज के बोल हैं
और शंकर जयकिशन का संगीत. सारा ज़माना जो है
वो वाकई में आधी हकीकत और आधा फ़साना है.




गीत के बोल:

कहता है जोकर सारा ज़माना
आधी हक़ीकत  आधा फ़साना
चश्मा उतारो  फिर देखो यारो
दुनिया नयी है  चेहरा पुराना
कहता है जोकर

अपने पे हँस कर जग को हँसाया
बनके तमाशा मेले में आया
हिन्दु न मुस्लिम  पूरब न पश्चिम
मज़हब है अपना हँसना हँसाना

कहता है जोकर सारा ज़माना
आधी हक़ीकत  आधा फ़साना
कहता है जोकर

धक्के पे धक्का  रेले पे रेला
है भीड़ इतनी पर दिल अकेला
ग़म जब सताये  सीटी बजाना
पर मसखरे से दिल न लगाना
कहता है जोकर सारा ज़माना
आधी हक़ीकत  आधा फ़साना
कहता है जोकर
............................................................
Kehta hai joker-Mera naam joker 1970

Artist: Raj Kapoor

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May 28, 2017

कैसे कहें हम प्यार ने हमको-शर्मीली १९७१

शशि कपूर पर फिल्माया गया किशोर कुमार का गीत.

फिल्म: शर्मीली
वर्ष: १९७१
गीतकार: नीरज
गायक: किशोर कुमार
संगीत: एस डी बर्मन



गीत के बोल:

कैसे कहें हम  प्यार ने हमको  क्या क्या खेल दिखाये
कैसे कहें हम  प्यार ने हमको  क्या क्या खेल दिखाये
 यूं शरमाई  किस्मत हमसे  खुद से हम शरमाये

बागों को तो पतझड़ लूटे  लूटा हमें बहार ने
दुनिया मरती मौत से लेकिन  मारा हमको प्यार ने
अपना वो हाल हैं बीच सफ़र में जैसे कोई लुट जाये
कैसे कहें हम प्यार ने हमको क्या क्या खेल दिखाये

तुम क्या जानो
तुम क्या जानो  क्या चाहा था क्या लेकर आये हम
टूटे सपने घायल नगमे कुछ शोले कुछ शबनम
इतना कुछ है पाया हमने कहें तो कहा ना जाये
कैसे कहें हम प्यार ने हमको क्या क्या खेल दिखाये

ऐसे बजी शहनाई घर में  अब तक सो ना सके हम
अपनों ने हमको इतना सताया  रोये तो रो ना सके हम
अब तो करो कुछ ऐसा यारों होश ना हमको आये
कैसे कहें हम प्यार ने हमको क्या क्या खेल दिखाये
यूं शरमाई किस्मत हमसे खुद से हम
………………………………………...................
Kaise kahen ham-Sharmili 1971

Artist: Shashi Kapoor

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Apr 24, 2017

धीरे से जाना खटियन में-छुपा रुस्तम १९७३

सचिन देव बर्मन के बरसों पहले गाये हुए एक गैर फ़िल्मी गीत-धीरे से
जाना बगियन में’ का हास्य संस्करण मौजूद है फिल्म छुपा रुस्तम में.

पहले पहल मुझे ये फिल्म का शीर्षक गीत सा लगता था-इसकी वजह-
इसमें छुपा शब्द का प्रयोग होना. मुझे इसमें रुस्तम शब्द नहीं मिला
इसलिए संदेह ही बना रहा जब तक फिल्म का असल शीर्षक गीत नहीं
सुनलिया. फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत भी यही है.

गोपालदास नीरज ने ये गीत लिखा है और किशोर कुमार ने गाया है.
एस डी बर्मन फिल्म के संगीतकार हैं.

नीरज  को आम तौर पर धीर गंभीर कवी माना जाता है मगर फिल्म
वालों ने उनसे लिखवा ही लिया हास्य गीत. गीत में खटमल शब्द के
अलावा साहित्य का उम्दा दर्जे का सामान भी मौजूद है अतः इसे ध्यान
से सुनिए.





गीत के बोल:

धीरे से जाना खटियन में ओ खटमल
धीरे से जाना खटियन में
धीरे से जाना खटियन में ओ खटमल
धीरे से जाना खटियन में
सोई है राजकुमारी  सोई है
सोई है राजकुमारी  देख रही मीठे सपने
जा जा छुप जा
जा जा छुप जा तकियन में
ओ खटमल  धीरे से जाना खटियन में

वीरान थी अपनी ज़िन्दगी और सूना था अपना मकान
हाय  हाय रे किस्मत

मिले मुश्किल से ये मेहमान
हो भी जाते शायद मेहरबान
मिले मुश्किल से ये मेहमान
हो भी जाते शायद मेहरबान
आग लगा दी है सुखन में
हो खटमल धीरे से जाना खटियन में
धीरे से जाना खटियन में ओ खटमल
धीरे से जाना खटियन में

कोमल है इनका बदन
काँटे सी तेरी चुभन
कोमल कोमल है इनका बदन
काँटे सी तेरी चुभन
बाधा डाले निंदियन में
ओ खटमल धीरे से जाना खटियन में
ए ए किधर जाता है
खबर खबरदार हाँ छुप छुप के

क्यों छुप छुप के प्यार करे तू
बड़ा छुपा हुआ रुस्तम है तू
क्यों छुप छुप के प्यार करे तू
बड़ा छुपा हुआ रुस्तम है तू
ले ले हमको भी शरण में
ले ले हमको भी शरण में ओ खटमल
धीरे से जाना खटियन में
धीरे से जाना खटियन में ओ खटमल
धीरे से जाना चटियन में
धीरे से जाना
धीरे से जाना बगियन में रे भँवरा
धीरे से जाना बगियन में
…………………………………………………
Dheere se jaana khatiyan mein-Chhupa rustam 1973

Artist: Dev Anand, Hema Malini

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Feb 25, 2017

फूलों के रंग से-प्रेम पुजारी १९७०

इस गीत के बारे में इतनी कसीदाकारी की जा चुकी है बातों
की, ज्यादा कुछ कहना उस कसीदाकारी की तौहीन होगी. ये
जुर्रत हम नहीं कर सकते हैं. उस कसीदाकारी में जो कुछ
छूट गया है वो हम बतलाये देते हैं-गीत में जो ट्रेन आप
देखेंगे वो सुन्दर है. ये ट्रेन है स्विट्ज़रलैंड की.  ट्रेन का
सस्पेंशन सिस्टम बढ़िया क्वालिटी का है. शूटिंग के वक्त
कैमरा और देव आनंद ना के बराबर हिल रहे हैं गीत में.

गीत के बोल और धुन दोनों बढ़िया हैं मगर जिस शब्द ने
जनता को सबसे ज्यादा आकर्षित किया वो है-मदिर. कुछ
गीत हमने आपको सुनवाए हैं जिनमें नायक कार या जीप
में और नायिका ट्रेन में बैठी नज़र आती है. इसमें स्तिथि
उलट है. नायक ट्रेन में बैठा है.

गीत नीरज का है और संगीत एस डी बर्मन का.




गीत के बोल:

पल पल मुझे तू सताती
तेरे ही सपने  लेकर के सोया
तेरी ही यादों में जागा
तेरे खयालों में उलझा रहा यूँ
जैसे के माला में धागा
हाँ  बादल  बिजली  चंदन  पानी
जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार
हाँ  इतना मदिर  इतना मधुर
तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार

साँसों की सरगम  धड़कन की बीना
सपनों की गीताँजली तू
मन की गली में  महके जो हरदम
ऐसी जूही की कली तू
छोटा सफ़र हो  लम्बा सफ़र हो
सूनी डगर हो या मेला
याद तू आए  मन हो जाए
भीड़ के बीच अकेला
हाँ  बादल  बिजली  चंदन  पानी
जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार
हाँ  इतना मदिर  इतना मधुर
तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार

पूरब हो पच्छिम  उत्तर हो दक्खिन
तू हर जगह मुस्कुराए
जितना ही जाऊँ  मैं दूर तुझसे
उतनी ही तू पास आए
आँधी ने रोका  पानी ने टोका
दुनिया ने हँस कर पुकारा
तस्वीर तेरी  लेकिन लिये मैं
कर आया सबसे किनारा
हाँ  बादल  बिजली  चंदन  पानी
जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार
हाँ  इतना मदिर  इतना मधुर
तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमें
कई कई बार...................................................................
Phoolon ke rang se-Prem pujari 1970

Artists: Dev Anand, Zahida

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Feb 17, 2017

रेशमी उजाला है-शर्मीली १९७१

हिंदी फिल्म को पूर्ण मसाला फिल्म पहले भी कहा जाता था और
आज भी. बस मसालों के प्रकार और जनता का टेस्ट बदल गया
है समय के साथ. आज कई लोग नूडल्स के साथ आने वाले टेस्ट
मेकर को आदर्श मसाला माने लगे हैं और स्वाद की परिभाषा कहीं
खो सी गई है. बैंगन के भरते में चाट मसाला डाला जाने लगा है.

इस फिल्म को बड़े परदे पर देख लेने का मौका मिला था एक बार.
इस गीत पर दर्शक कुर्सी से बार बार उठते से प्रतीत होते थे. गीत
आशा भोंसले के लोकप्रिय गीतों में से एक है. ७० के दशक तक हमने
हर दूसरी फिल्म में एक कैबरे नृत्य या क्लब सॉंग देखा. शुद्ध किस्म
की पारिवारिक फिल्म में भी कहीं जबरन घुसेडा गया था कैबरे गीत.

गीत नीरज ने लिखा है और इसका संगीत तैयार किया है बर्मन दादा
ने. जयश्री टी इस गीत पर आपको केब्रास्टिक्स करती नज़र आएँगी.
गीत में जिमनास्टिक्स नामक खेल में प्रयुक्त होने वाली रिंग्स आपको
दिखलाई देंगी. गीत के अंत में जहाज़ के कर्मचारी सरीखा एक युवक
दिखलाई देता है जिसके सूखते हुए कपडे कोई बन्दर ले गया था शायद.



गीत के बोल:

रेशमी उजाला है, मखमली अंधेरा
आज की रात, ऐसा कुछ करो
रेशमी उजाला है, मखमली अंधेरा
आज की रात, ऐसा कुछ करो
हो नहीं, हो नहीं, हो नहीं सवेरा

ऐसी तो रात रोज़ नहीं आये
आँखों से कोई रोज़ ना पिलाये
आज तो जाम से हमारे
पी ले, पी ले, पी ले ज़रा
ज़रा ज़रा ज़रा ज़रा ज़रा

रेशमी उजाला है, मखमली अंधेरा
आज की रात, ऐसा कुछ करो
हो नहीं, हो नहीं, हो नहीं सवेरा

ऐसा रे शबाब और है कहाँ
मेरी ज़ुल्फ़ों का आशिक़ है जहाँ
देखी ना होगी कहीं तूने, ऐसी, ऐसी, ऐसी
अदा अदा अदा अदा अदा

रेशमी उजाला है, मखमली अंधेरा
आज की रात, ऐसा कुछ करो
हो नहीं, हो नहीं, हो नहीं सवेरा

आ मेरे पास सोचता है क्या
आज है मुआफ़ तेरी हर खता
दीवाना तेरे लिये कब से, दिल है दिल है
मेरा मेरा मेरा मेरा मेरा

रेशमी उजाला है, मखमली अंधेरा
आज की रात, ऐसा कुछ करो
हो नहीं, हो नहीं, हो नहीं सवेरा
............................................................
Reshmi ujala hai-Sharmili 1971

Artists: Jayshri T, Shashi Kapoor, Raakhi

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Feb 10, 2017

आदम का लहू-तू ही मेरी जिंदगी १९६५

दुर्लभ फिल्मों के दुर्लभ गीतों में से एक और पेश है सन १९६५ की
फिल्म तू ही मेरी जिंदगी से. फिल्म के प्रमुक कलाकार हैं देव मुखर्जी
और निवेदिता. निवेदिता वही जो फिल्म धरती कहे पुकार के में प्यानो
पर बैठ के ‘दिए जलाएं प्यारे के’ गीत गा रही थीं.

नीरज के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है रोनोदेव मुखर्जी ने और इसे रफ़ी
ने गाया है.




गीत के बोल:

मायूस न हो ऐ मेरे वतन
आँसू से न धो ये लाल कफ़न
मिटकर भी नहीं मिट पाता है
आदम का लहू, आदम का लहू   
आदम का लहू, आदम का लहू   

ये मसली हुई कंवारी कलियाँ
ये मसली हुई कंवारी कलियाँ
ये बिछड़ा हुआ माँ से बचपन
दुल्हन से ये रूठे हुए कंगन
पथराये हुए ये प्यासे नयन
तू ही आजादी लाता है
आदम का लहू, आदम का लहू   

हिंदू वो नहीं मुसलिम वो नहीं   
हिंदू वो नहीं मुसलिम वो नहीं   
इनसान रे बस इनसान है वो
नफ़रत जो करे शैतान है वो
ग़र प्यार करे भगवान है वो
कतरे में समंदर लाता है
आदम का लहू, आदम का लहू
आदम का लहू, आदम का लहू
.............................................................................
Aadam ka lahu-Tu hi meri zindagi 1965

Artist: Deb Mukherji

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Jan 30, 2017

खिलते हैं गुल यहाँ (लता)-शर्मीली १९७१

किशोर वाला तर्जुमा खुशनुमा था. लता वाला वर्ज़न दो रंग
साथ में लिए है जिसमें दुःख की लकीर थोड़ी बड़ी है.

फिल्म के कथानक में नायिका कहीं गायब हो जाती है.
नायक उसकी तलाश में है. एक दिन वो यकायक कहीं
से गीत गाती प्रकट होती है. नायक जो घायल है वो
लकड़ी के सहारे चलता हुआ आवाज़ को फोलो करता
हुआ जंगल में पहुँचता है और नायिका से उसका सामना
होता है. नायिका दार्शनिक अंदाज़ में उसे जवाब देते
हुआ अपना गाना जारी रखती है. बाकी का हाल जानने
के लिए फिल्म देखें.




खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ मिल के बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
खिलते हैं गुल यहाँ

कल रहे ना रहे  मौसम ये प्यार का
कल रुके न रुके  डोला बहार का
कल रहे ना रहे  मौसम ये प्यार का
कल रुके न रुके  डोला बहार का
चार पल मिले जो आज  प्यार में गुज़ार दे

खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ मिल के बिछड़ने को
खिलते हैं

हो झीलों के होंठों पर 
झीलों के होंठों पर  मेघों का राग है
फूलों के सीने में  ठंडी-ठंडी आग है
दिल के आइने में तू  ये समां उतार ले

खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ मिल के बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ

प्यासा है दिल सनम  प्यासी ये रात है
होंठों मे दबी-दबी  कोई मीठी बात है
इन लम्हों पे आज तू  हर खुशी निसार दे

खिलते हैं गुल यहाँ खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ मिल के बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ
..................................................................
Khilte hain gul yahan-Sharmili 1971

Artists: Rakhi, Shahsi Kapoor

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Jan 26, 2017

ताकत वतन की हमसे है-प्रेम पुजारी १९७०

देश भक्ति गीत सुनते हैं आज २६ जनवरी के अवसर पर. जो
ज़ज्बाई झोंका १५ अगस्त और २६ जनवरी को आता है अगर
वो साल भर कायम रहे तो सभी के मन में देशभक्ति और
देश प्रेम के भाव जाग्रत बने रहेंगे. हमारे जवान अगर हमारी
सीमाओं की सुरक्षा कर के हमें चैन की नींद सोने का अवसर
देते हैं तो हमारा भी ये दायित्व है हम अपने देश से प्रेम करें
और इसे स्वच्छ, स्वस्थ और खुशहाल बनाये रखने में अपना
योगदान दें.

फिल्म प्रेम पुजारी के लिए इस गीत को लिखा है नीरज ने और
इसकी धुन बनाई है एस डी बर्मन ने. मन्ना डे और रफ़ी के
संग कोरस ने इस गीत को गाया है.



गीत के बोल:

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

पहरेदार हिमालय के हम झोंके हैं तूफ़ान के
सुन कर गरज हमारी सीने फट जाते चट्टान के
पहरेदार हिमालय के हम झोंके हैं तूफ़ान के
सुन कर गरज हमारी सीने फट जाते चट्टान के

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

सीना है फौलाद का अपना फूलों जैसा दिल है
तन में विन्ध्याचल का बल है मन में ताजमहल है
सीना है फौलाद का अपना फूलों जैसा दिल है
तन में विन्ध्याचल का बल है मन में ताजमहल है

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

देकर अपना खून सींचते देश की हम फुलवारी
बंसी से बन्दूक बनाते हम वो प्रेम पुजारी
देकर अपना खून सींचते देश की हम फुलवारी
बंसी से बन्दूक बनाते हम वो प्रेम पुजारी

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

आकर हमको कसम दे गई राखी किसी बहन की
देंगे अपना शीश न देंगे मिट्टी मगर वतन की
आकर हमको कसम दे गई राखी किसी बहन की
देंगे अपना शीश न देंगे मिट्टी मगर वतन की

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

खतरे में हो देश अरे तब लड़ना सिर्फ धरम है
मरना है क्या चीज़ आदमी लेता नया जनम है
खतरे में हो देश अरे तब लड़ना सिर्फ धरम है
मरना है क्या चीज़ आदमी लेता नया जनम है

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले

एक जान है एक प्राण है सारा देश हमारा
नदियाँ चल कर थकी रुकी पर कभी न गंगा धारा
एक जान है एक प्राण है सारा देश हमारा
नदियाँ चल कर थकी रुकी पर कभी न गंगा धारा

ताकत वतन की हमसे है हिम्मत वतन की हमसे है
इज्ज़त वतन की हमसे है इंसान के हम रखवाले
………………………………………………………..
Taqat watan ki hamse hai-Prem pujari 1970.

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Jan 24, 2017

खिलते हैं गुल यहाँ(किशोर)-शर्मीली १९७१

आपको रफ़ी के गाये कुछ गीत सुनवाए, एक दो मुकेश
के सुनवाए अब सुनिए किशोर कुमार का गाया एक गीत.
बेहद लोकप्रिय गीत है ये. फिल्म का नाम है शर्मीली.

कुछ हीरो खूबसूरत है, कुछ हीरोईन खूबसूरत है, कुछ इस
गाने के बोल, कुछ गाने का संगीत, कुछ किशोर कुमार की
आवाज़ और बाकी का इस गीत के तीसरे अंतरे का शानदार
फिल्मांकन. लाजवाब. गीत खत्म होते नायिका हिप्नोटिज्म
का शिकार हो जाती है.

फिल्म के निर्देशक हैं समीर गांगुली जिन्होंने सन १९७५ की
फिल्म जग्गू का निर्देशन भी किया. सन १९६७ की फिल्म
शागिर्द से निर्देशन शुरू करने वाले समीर की दृष्टि पैनी है
और पकड़ मजबूत. गीतों के उनके फिल्मांकन के तरीके
में मैंने ये बात महसूस की. 




गीत के बोल:

खिलते हैं गुल यहाँ  खिल के बिखरने को
खिलते हैं गुल यहाँ  खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ  मिल के बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ

कल रहे ना रहे  मौसम ये प्यार का
कल रुके न रुके  डोला बहार का
कल रहे ना रहे  मौसम ये प्यार का
कल रुके न रुके  डोला बहार का
चार पल मिले जो आज  प्यार में गुज़ार दे

खिलते हैं गुल यहाँ  खिल के बिखरने को
खिलते हैं गुल यहाँ 

झीलों के होंठों पर  मेघों का राग है
फूलों के सीने में  ठंडी-ठंडी आग है
झीलों के होंठों पर  मेघों का राग है
फूलों के सीने में  ठंडी-ठंडी आग है
दिल के आइने में तू  ये समा उतार दे

खिलते हैं गुल यहाँ  खिल के बिखरने को
खिलते हैं गुल यहाँ 

प्यासा है दिल सनम  प्यासी ये रात है
होंठों मे दबी-दबी  कोई मीठी बात है
प्यासा है दिल सनम  प्यासी ये रात है
होंठों मे दबी-दबी  कोई मीठी बात है
इन लम्हों पे आज तू  हर खुशी निसार दे

खिलते हैं गुल यहाँ  खिल के बिखरने को
मिलते हैं दिल यहाँ  मिल के बिछड़ने को
खिलते हैं गुल यहाँ
.........................................................
Khilte hain gul yahan-Sharmili 1971

Artists: Shashi Kapoor, Rakhi

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Jan 23, 2017

मेघा छाए आधी रात-शर्मीली १९७१

ये गीत लता के सबसे बढ़िया गीतों में शुमार है. एक
ही बात इस गीत को लेकर मुझे समझने में दिक्कत हुई
कि क्या इसे थोड़े नीचे स्केल पर नहीं गवाया जा सकता
था. इसका जवाब किसी संगीत रसिक ने मुझे दिया-नीचे
के स्केल पर इसकी ब्यूटी खत्म हो जाती. इस गाने में
लता मंगेशकर को भी काफी दिक्कत आई होगी सुनकर
ही हम अनुमान लगा सकते हैं. संगीत प्रतियोगिताओं के
प्रतियोगियों को भी इसे गाने में पसीना आ जाता है.

नीरज की लिखी एक उत्तम कोटि की रचना जिसे लंबे
समय तक याद किया जायेगा. नीरज के लिखे गीत कई
हाईप्ड गीतकारों के गीतों से बेहतर हैं. उन्हें बॉलीवुडिया
प्रसिद्धि की ज़रूरत कभी नहीं पड़ी क्यूंकि वे एक स्थापित
साहित्यकार हैं. ये एक संयोग है कि उन्होंने दादा बर्मन,
रोशन और शंकर जयकिशन जैसे गुणी संगीतकारों के साथ
गीत लेखन किया.

प्रस्तुत गीत राग पटदीप पर आधारित है जो कि काफ़ी थाट
का राग है और जो ताल गीत में प्रयुक्त है वो है रूपक ताल.
फिल्म में नायिका का डबल रोल है. एक घरेलू लड़की तो
दूसरी आधुनिका. दोनों के चरित्र के मुताबिक़ इस गीत का
संगीत चलता है पश्चिमी और भारतीय शैली की जुगलबंदी
सरीखा. इन सब प्रयोगों के बावजूद हर चीज़ संतुलित है
इस गीत में.



आपको इस गीत का एक इन्स्ट्रुमेन्टल वर्ज़न भी सुनवाते हैं
जिसे सुन कर आपका आनंद दुगना हो जायेगा.



गीत के बोल:

मेघा छाए आधी रात
बैरन बन गई निंदिया
मेघा छाए आधी रात
बैरन बन गई निंदिया
बता दे मैं क्या करूँ
मेघा छाए आधी रात
बैरन बन गई निंदिया

सबके आंगन दिया जले रे मोरे आंगन जिया
हवा लागे शूल जैसी ताना मारे चुनरिया
सबके आंगन दिया जले रे मोरे आंगन जिया
हवा लागे शूल जैस ताना मारे चुनरिया
आई है आँसू की बारात बैरन बन गई निंदिया
बता दे मैं क्या करूँ
मेघा छाए आधी रात
बैरन बन गई निंदिया

रूठ गये रे सपने सारे टूट गयी रे आशा
नैन बहे रे गंगा मोरे फिर भी मन है प्यासा
रूठ गये रे सपने सारे टूट गयी रे आशा
नैन बहे रे गंगा मोरे फिर भी मन है प्यासा
किसे कहूँ मैं मन की बात बैरन बन गई निंदिया
बता दे मैं क्या करूँ
मेघा छाए आधी रात
बैरन बन गई निंदिया
.................................................................
Megha chhaye aadhi raat-Sharmili 1971

Artist: Rakhi

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