वो तो चले गए ऐ दिल-संगदिल १९५२
हैं. सज्जाद की धुन है और राजेंद्र कृष्ण के बोल हैं. सज्जाद
उन गिनती के संगीतकारों में से एक थे जो काफी बारीकी
से और करीने से धुन को बनाया करते थे. कसीदाकारी कह
सकते हैं इसे.
संगीतकार सज्जाद स्वाभाव के कड़क थे इसलिए ज्यादा काम
उन्हें मिला नहीं और वे अपनी शर्तों पर काम किया करते थे.
कहें तो वही कहावत-करेला नीम चढा. ऐसे लोग मगर, एक
मिसाल होते हैं दूसरों के लिए डिसिप्लिन के मामले में.
सज्जाद की अनिल बिश्वास जैसे वरिष्ठ संगीतकार ने मुक्त कंठ
से तारीफ की थी. अनिल बिश्वास का आकलन मायने रखता है.
सज्जाद एक बढ़िया मेंडोलिन प्लेयर भी थे. वैसे संगीत के
और गायकों के आकलन के बारे में आपको अनिल बिश्वास,
ओ पी नैयर और सलिल चौधरी के वक्तव्य कहीं पढ़ने को मिलें
तो ज़रूर पढियेगा. नैयर अपनी बेबाकी और दो टूक कहने
के लिए फेमस थे.
गीत के बोल:
वो तो चले गये ऐ दिल
याद से उनकी प्यार कर
वो तो चले गये ऐ दिल
याद से उनकी प्यार कर
जीने में क्या मज़ा रहा
मौत का इंतज़ार कर
वो तो चले गये ऐ दिल
याद से उनकी प्यार कर
तुझको खुशी से क्या गरज़
ग़म है तेरे नसीब में
तुझको खुशी से क्या गरज़
ग़म है तेरे नसीब में
खुशियों की आस छोड़ दे
ग़म को गले का हार कर
जीने में क्या मज़ा रहा
मौत का इंतज़ार कर
वो तो चले गये ऐ दिल
याद से उनकी प्यार कर
भूल जा दिन बहार के
देख ना ख्वाब प्यार के
भूल जा दिन बहार के
देख ना ख्वाब प्यार के
दिल तो निसार कर दिया
जान भी अब निसार कर
जीने में क्या मज़ा रहा
मौत का इंतज़ार कर
वो तो चले गये ऐ दिल
याद से उनकी प्यार कर
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Wo to chale gaye ae dil-Sangdil 1952
Artist: Madhubala

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