हटो काहे को झूठी बनाओ बतियाँ-मंजिल १९६०
श्वेत श्याम युग में तो लंबे समय कायम रहा. रंगीन
युग में किशोर के गाये गाने भी देखने को मिले जो
महमूद पर फिल्माया गए हैं.
आज आपको सुनवाते हैं महमूद पर फिल्माया गया एक
बेहतर गीत. मंजिल फिल्म के लिए मजरूह के बोल और
एस दी बर्मन का संगीत है.
गीत के बोल:
ग़ैर का साथ है और रोज़ मुलाक़ातें हैं
प्यार है उस के लिये और हम से फ़क़त बातें हैं
अरे हटो काहे को झूठी बनाओ बतियाँ
हटो काहे को झूठी बनाओ बतियाँ
हटो काहे को झूठी
ये उड़ी उड़ी सी रंगत
ये खुले खुले से गेसू
तेरी सुबह कह रही है
तेरी रात का फ़साना
तेरी रात का फ़साना
देखो जी किसी का प्यार हमसे न छिपाओ
देखो जी किसी का प्यार हमसे न छिपाओ
सब हमें पता है प्यारे नैन न झुकाओ
नैन न झुकाओ
सुनो कहती है क्या क्या
क्या क्या तुम्हरी अखियाँ
हटो काहे को झूठी बनाओ बतियाँ
हटो काहे को झूठी बनाओ बतियाँ
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Hato kaahe ko jhoothi banao batiyan-Manzil 1960
Artist: Mehmood

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