अजीब सानेहा-गमन १९७९
अलग हट के कुछ करने की कोशिश करते हैं उन्हें वाह वाह ही
ज्यादा मिला करती है. संगीतकार जयदेव के साथ भी ऐसा ही
कुछ था. उन्होंने कई प्रतिभाओं को मौके दिए. एक नाम उनमें
है-हरिहरन.
सुनते हैं शहरयार का लिखा एक गीत फिल्म गमन से. इसे सुन
कर आपको फिल्म हम दोनों का एक गीत याद आएगा-कभी खुद
पे कभी हालत पे रोना आया.
गीत के बोल:
अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साये से
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
अजीब सानेहा
हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला
हर एक नक़्श तमन्ना का हो गया धुंधला
हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो
हर एक ज़ख़्म मेरे दिल का भर गया यारो
अजीब सानेहा
भटक रही थी जो
भटक रही थी जो कश्ती वो ग़क़र-ए-आब हुई
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया यारो
अजीब सानेहा
वो कौन था
वो कौन था वो कहाँ का था क्या हुआ था उसे
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो
सुना है आज कोई शख़्स मर गया यारो
अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो
अजीब सानेहा
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Ajeeb saneha-Gaman 1979

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