बीकानेर की चुनरी ओढ़ी-प्राण जाए पर वचन ना जाए १९७३
अंतर्गत आने वाला. बीकानेर शहर का नाम कुछ गीतों में आया
है. फिल्म का नाम है प्राण जाए पर वचन न जाए.
अक्सर आपने गीतों में बीकानेर की चुनरी का जिक्र सुना होगा.
बीकानेर की चुनरी ओढ़ी-इस गीत की ही पंक्ति है. कभी आपने
किसी गीत में बीकानेर की भुजिया खाई नहीं सुना होगा. ये एक
विशेष प्रकार की नमकीन सेव होती है जिसकी इजाद इसी शहर
में हुई है. इसके निर्माण में मोठ और लोंगिया मिर्ची का प्रयोग
होता है.
एस एच बिहारी के गीत को गाया है आशा भोंसले ने नैयर के
संगीत निर्देशन में.
गीत के बोल:
बीकानेर की चुनरी ओढ़ी लहँगा पहना जयपुर का
हाथ में चूड़ी फ़ैज़ाबादी और मेरठ का गजरा
हो गजरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
गजरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
बीकानेर की चुनरी ओढ़ी लहँगा पहना जयपुर का
हाथ में चूड़ी फ़ैज़ाबादी और मेरठ का गजरा
हो गजरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
गजरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
चोली मेरी अम्बाले वाली झिलमिल जिसमें रेशम की जाली
चोली मेरी अम्बाले वाली झिलमिल जिसमें रेशम की जाली
जाली से तन चमके चमकेगा
मुखड़ा मेरा दमके अरे दमकेगा
बात बरेली वाला डाला दोनों आँखों में कजरा
हो कजरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
हो कजरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
बीकानेर की चुनरी ओढ़ी लहँगा पहना जयपुर का
हाथ में चूड़ी फ़ैज़ाबादी और मेरठ का गजरा
हो गजरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
गजरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
छलके छलके सावर ये आँखों के डूबे जिनमें ईमान लाखों के
छलके छलके सावर ये आँखों के डूबे जिनमें ईमान लाखों के
ऐसे न दिल मचले मचलेंगे
काहे को ना तड़पे तड़पेंगे
चाल जवानी की मस्तानी धरम करम ये नखरा
हो नखरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
हो नखरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
बीकानेर की चुनरी ओढ़ी लहँगा पहना जयपुर का
हाथ में चूड़ी फ़ैज़ाबादी और मेरठ का गजरा
हो गजरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
हो गजरा डाल के तेरे दिल पर मैं नाचूँ
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Bikaner ki chunri odhi-Pran jaaye par vachan na jaaye 1973
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