जाने जां ढूँढता फिर रहा-जवानी दीवानी १९७२
गीत जो आगे ज़बरदस्त हिट भी बन गया और आज भी
रेडियो वाले-नए और पुराने दोनों तरह के-इसको चाव से
बजाते हैं.
१९७२ की फिल्म जवानी दीवानी कई मामलों में अलग सी
फिल्म है. अनकन्वेंशनल रिश्तेदारी तो इसका यूनीक फीचर
है ही, ७० के दशक की शुरुआत के हिसाब से गानों में भी
नयापन है.
इसी गीत को लीजिए इसमें नायि़क वाले हिस्से की कुछ
ध्वनियाँ ऐसी है मानो भूतिया फिल्म का कोई किरदार गा
रहा हो. ये प्रभाव स्केल-वेरिएशन की वजह से निर्मित हुआ
और इसकी ब्यूटी बन गया.
आनंद बक्षी की रचना है और आर डी बर्मन का संगीत.
परदे वाले कलाकारों को आप पहचानते ही हैं. इसे चित्रहार
पर ही कई बार देख लिया गया है.
एक बात इमानदारी से बतलाइए इस गीत की एक पंक्ति-
दिल में देखा नहीं देखा सारा जहां आपके ध्यान में है?
गीत के बोल:
जाने जां ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ
जाने जां ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ
मुझको आवाज़ दो छुप गये हो सनम
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ
जाने जां ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ
ओ मेरे हमसफ़र प्यार की राह पर
साथ चलें हम मगर क्या खबर
ओ मेरे हमसफ़र हा प्यार की राह पर हा
साथ चलें हा हम मगर हा क्या खबर हा
रास्ते में कहीं रह गये हमनशीं
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ
जाने जां ढूँढती फिर रही हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ
मुझको आवाज़ दो छुप गये हो सनम
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ
दिल मचलने लगा यूँ ही ढलने लगा
रंग भरा प्यार का ये समा
दिल मचलने लगा हे यूँ ही ढलने लगा हे
रंग भरा हे प्यार का हो ये समा
हाथ ऐसे में बस छोड़ कर चल दिये
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ
जाने जां ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ
पास हो तुम खड़े मेरे दिल में छुपे
और मुझे कुछ पता न चला
पास हो तुम खड़े हा मेरे दिल में छुपे हा
और मुझे हा कुछ पता हा न चला हा
दिल में देखा नहीं देखा सारा जहां
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ
जाने जां ढूँढता फिर रहा हूँ तुम्हें रात दिन
मैं यहाँ से वहाँ
मुझको आवाज़ दो छुप गये हो सनम
तुम कहाँ मैं यहाँ
तुम कहाँ मैं यहाँ
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Jaane jaan dhoondhta phir raha-Jawani Diwani 1972
Artists: Randhir Kapoor, Jaya Bhaduri
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