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Dec 27, 2019

सोच समझ ले ओ परवाने-अपना घर १९६०

ये जो फ़िल्में हैं जिनके नाम में घर शब्द आता है
उसे कहीं कहीं मैंने ghar की जगह ghur लिखा देखा.
हिंदी में घुर पढ़ने में आता. घर घर की कहानी बन
जाती घुर घुर की कहानी.

मधुमती, लक्ष्मी छाया, फरयाल इत्यादि के अलावा भी
कई ऐसी सहायक अभिनेत्रियां हैं जिन्होंने अपने होने
का आभास दिया फिल्म उद्योग को. प्रस्तुत गीत कम्मो
नाम की अभिनेत्री पर फिल्माया गया है.

गीत प्रेम धवन का है और इसकी धुन तैयार की है
रवि ने. गायिका को आप पहचान ही गए होंगे.



गीत के बोल:

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
मै इतनी तो नादान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं

फिर न कहना इन जुल्फों के फंदे में हम आ गये
बड़े बड़े दिल वाले इन नज़रों का धोखा खा गये
फिर न कहना इन जुल्फों के फंदे में हम आ गये
बड़े बड़े दिल वाले इन नज़रों का धोखा खा गये
कौन सा ऐसा दिल वाला है
कौन सा दिल वाला है जो मुझ पर कुर्बान नहीं

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं

जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गयी
मै इतनी तो नादाँ नहीं
सोच समझे ओ परवाने
जल जाना आसान नाही

इस महफ़िल में जो भी आया वो दीवाना हो गया
दुनिया तो क्या अपने से भी वो बेगाना हो गया
इस महफ़िल में जो भी आया वो दीवाना हो गया
दुनिया तो क्या अपने से भी वो बेगाना हो गया

ये भी अदायें ना जाने तू
ये भी अदायें ना जाने तू इतना तो अनजान नहीं

सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
तेरी नज़र पहचान गई
सोच समझ ले ओ परवाने
जल जाना आसान नहीं
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
.................................................................
Soch samajh le o parwane-Apna Ghar 1960

Artists: Kammo, Premnath

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Dec 26, 2019

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा-अपना घर १९६०

कहते हैं जो अपना स्वयं सम्मान नहीं करता उसका
सम्मान दूसरे भी नहीं करते. कुछ वैसे ही शरीर की
इन्द्रियों का भी उचित सम्मान आवश्यक है. ये तो
व्यक्ति पे स्वयं निर्भर है कि वो इनका उपयोग किस
प्रकार से और कितना करे..

शरीर की प्रमुख इन्द्रियों में आँखों को सबसे उच्च
स्थान दिया गया है. ग्रहण के दिन सूर्य और चन्द्रमा
को सीधे आँखों से ना देखें. धार्मिक दृष्टि से देखें या
वैज्ञानिक दृष्टि से, दोनों ही मामले से ये बात सटीक
है.

सुनते हैं फिल्म अपना घर से अगला गीत जिसे
मोहम्मद रफ़ी और आरती मुखर्जी ने गाया है.

प्रेम धवन की रचना है और रवि शंकर शर्मा उर्फ रवि
का संगीत.




गीत के बोल:

कोई न हो इस जग में दाता
आँखों से मजबूर
दुनिया में रह कर भी हम है
इस दुनिया से दूर

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
जिनसे जग उजियारा
अन्धों पर क्या गुज़रे
ये क्या जाने आँखों वाला
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

औरों की तो रात अँधेरी
अपना दिन भी अँधेरा
औरों की तो रात अँधेरी
अपना दिन भी अँधेरा
हम है जहाँ पर उस दुनिया में
कभी न हुआ सवेरा
सूरज चाँद सितारे सबको
सूरज चाँद सितारे सबको
देखा हमने काला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

कदम कदम पर ठोकर खाये
राह चली न जाये
कदम कदम पर ठोकर खाये
राह चली न जाये
फिरते है अपने कंधे पर
अपनी लाश उठाये
जीवन भी इक बोझ बना है
जीवन भी इक बोझ बना है
कब तक जाये संभाला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा

कब तक यूँ ही सहते जायें
दुनिया के तानों को

नूर तो छीना दाता बहरा भी कर दे कानों को
देख लिया जी भर के हमने
तेरा खेल निराला तेरा खेल निराला
देख लिया जी भर के हमने
तेरा खेल निराला

आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
बाबा बाबा बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
जिनसे जग उजियारा
अन्धों पर क्या गुज़रे
ये क्या जाने आँखों वाला
आँखे बड़ी हैं नेमत बाबा
…………………………………………….
Aankhen badi hain nemat-Apna Ghar 1960

Artists:

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Dec 24, 2019

कैसे भीगे भीगे-अपना घर १९६०

आइये सुनें एक साइकिल सोंग. साईकिल सोंग वो होता
है जिसमें साईकिल गाती है. श्रेणी बनाने वालों की साइटों
से हमने ऐसा ही समझा, क्या किया जाए. वो तो हमें
भी समझ आ रहा है गाना किसने गाया मगर जब श्रेणी
बनाने के तरीके देखते हैं तो सर चकराता है. किसी गीत
में नायक ने सीधा हाथ ऊपर उठाया उसके लिए अलग
श्रेणी, उल्टा हाथ ऊपर उठाया उसके लिए अलग श्रेणी.

नायक नायिका साइकिल पर चले जा रहे हैं. किसी ज़माने
में साईकिल भी स्टेटस सिम्बल हुआ करती थी. प्रीति सागर
के पिताजी मोती सागर को भी किसी ज़माने में अभिनय
का शौक हुआ करता था. मल्हार, मक्खीचूस, बर्मा रोड,
छोटी छोटी बातें और अपना घर उनके अभिनय वाली कुछ
उल्लेखनीय फ़िल्में हैं.

सुनते हैं सुमन कल्यानपुर और रफ़ी का गाया गीत जिसे
लिखा है प्रेम धवन ने और इसकी धुन रवि ने बनाई है.
गीत के अंतरे से आपको अनाड़ी फिल्म के गीत का
अंतरा याद आएगा-वो चाँद खिला वो तारे हँसे.



गीत के बोल:

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

तुम साथ रहो जो मेरे
मैं राहें नई बना लूं
तेरी राहों के कांटे
अपनी पलकों से उठा लूँ
तुम साथ रहो जो मेरे
मैं राहें नई बना लूं
तेरी राहों के कांटें
अपनी पलकों से उठा लूँ
तू मेरा प्यार मेरी बहार
मेरा सिंगार सजना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

इस दुनिया की नज़रों से
ओ दूर कहीं खो जाएँ
जी भर के जहां दिल झूमे
हम गीत मिलन के गायें
इस दुनिया की नज़रों से
ओ दूर कहीं खो जाएँ
जी भर के जहां दिल झूमे
हम गीत मिलन के गायें
सारे जग को छोड़
लिया तुझ से जोड़
जीवन ये मैंने अपना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

हम इक मंज़िल के राही
बिछड़ेंगे कभी न मिल के
दुनिया वाले क्या जानें
अरमान हमारे दिल के
हम इक मंज़िल के राही
बिछड़ेंगे कभी न मिल के
दुनिया वाले क्या जानें
अरमान हमारे दिल के
कहो दिल की बात
दिन हो या रात
रहूँ तेरे साथ सजना

कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे
आओ छेड़ दे तराने ज़रा प्यार के
देखो काली काली ये घटायें
चली जायें ना जी हमको पुकार के
कैसे भीगे भीगे प्यारे हैं नज़ारे

हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
हा आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
…………………………………………..
Kaise bheege bheege-Apna ghar 1960

Artists: Moti Sagar, Nanda

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Jul 18, 2018

तुमसे ही मेरी ज़िंदगी-अपना घर १९६०

गीता दत्त का कोई गीत सुने काफी दिन हो गए. आज सुनते हैं
एक युगल गीत मुकेश और गीता दत्त का गाया हुआ. सन १९६०
की फिल्म अपना घर के लिए इसे लिखा प्रेम धवन ने और इसकी
धुन तैयार की संगीतकार रवि ने.

फिल्म शबनम के गीत ‘किस्मत में बिछडना था’ और बावरे नैन के
गीत ‘ख्यालों में किसी के’ काफी लोकप्रिय गीत हैं जहाँ तक मुकेश
और गीता दत्त के गाये युगल गीतों का सवाल है. इन दोनों के गाये
युगल गीत लगभग १५-२० की संख्या में हैं. प्रस्तुत गीत भी लोकप्रिय
है जिसे आप लंबे समय तक सुन सकते हैं.



गीत के बोल:

तुमसे ही मेरी ज़िंदगी मेरी बहार तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी मेरी बहार तुम
अपने ही दिल से पूछ लो किसका हो प्यार तुम
तुम से ही मेरी ज़िंदगी

गाती हुई हवाओं में तेरा ही गीत है
तेरा ही गीत है
साजन मेरे निगाहों में तेरी ही प्रीत है
तेरी ही प्रीत है
चंदा का रूप चाँदनी मेरा श्रृंगार तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी

ये मुस्कुराता आसमान ये झूमती ज़मीं
ये झूमती ज़मीं
मुझको ज़रा संभालना खो जाऊँ ना कहीं
खो जाऊँ ना कहीं
ऐसे में अपना कह भी दो बस एक बार तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी

आती है ऐसी प्यार की घड़ियाँ नसीब से
घड़ियाँ नसीब से
ये दिल की धड़कनें ज़रा सुन लो क़रीब से
सुन लो क़रीब से
आये हो ले के प्यार के सपने हज़ार तुम

अपने ही दिल से पूछ लो किसका प्यार हो तुम
तुमसे ही मेरी ज़िंदगी
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Tumse hi meri zindagi-Apna ghar 1960

Artists: Premnath, Shyama

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