हसीनों की दुनिया-बेरहम १९८०
की गाथा हमेशा अधूरी रहती है अतः एक गीत और
सुन लेते हैं आज.
८० के दशक में माला सिन्हा पर कोई गीत फिल्माया
गया हो आश्चर्य सा लगता है.
वर्मा मलिक का लिखा हुआ गीत है जिसे लक्ष्मी प्यारे
ने धुन से संवारा है. लक्ष्मी प्यारे ने लता मंगेशकर से
तकरीबन ६०० से ऊपर गाने गवाए जो उल्लेखनीय है
और आंकड़ों के मामले में सबसे ज्यादा है किसी भी
संगीतकार के लिए.
गीत के बोल:
कहने को हम जवानियों के ख्वाब है
नाज़-ओ-अदा में खेलते शबाब हैं
रंग है बहार हैं गुलाब हैं
जवाब नहीं है कोई लाजवाब हैं
लेकिन
हसीनों की दुनिया खुदगर्ज़ है
हसीनों की दुनिया खुदगर्ज़ है
इतना कहना मेरा फर्ज है
आदाब अर्ज़ है आदाब अर्ज़ है
आदाब अर्ज़ है
हसीनों की दुनिया खुदगर्ज़ है
इतना कहना मेरा फर्ज है
इतना कहना मेरा फर्ज है
आदाब अर्ज़ है आदाब अर्ज़ है
आदाब अर्ज़ है
जो इक बार दिल इनसे टकरायेगा
वो इनको बरसों भुला पायेगा
इन्हें प्यार करना बड़ा है गुनाह
इन्हें प्यार करना बड़ा है गुनाह
खुदा ही बचाये खुदा की पनाह
खुदा ही बचाये खुदा की पनाह
बड़ा बोझ है ये बड़ा क़र्ज़ है
इतना कहना मेरा फर्ज है
आदाब अर्ज़ है आदाब अर्ज़ है
आदाब अर्ज़ है
ये नज़रें हैं खंजर ये क़ातिल अदा
लुट जाओगे इनसे बचना ज़रा
बचना ज़रा बचना ज़रा
है फितरत मेरी ये के लिखा सितम
रहमदिल के परदे में है बेरहम
किसी से ना इनको कोई गर्ज़ है
इतना कहना मेरा फर्ज है
आदाब अर्ज़ है आदाब अर्ज़ है
आदाब अर्ज़ है
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Haseeno ki duniya-Beraham 1980
Artists: Mala Sinha, Sanjeev Kumar

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