अच्छा जी माफ़ कर दो-मुसाफ़िरखाना १९५५
नया साल केवल रेसोल्यूशंस वाला हो ज़रूरी नहीं है.
पिछले साल के खोये-पाए का हिसाब और उसपर
डेफिनिटिव एक्शन का भी है. पुराना छोड़ने और
नया पकड़ने का भी है.
सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ गीत
जिसे गीता दत्त और रफ़ी ने गाया है. इस गीत का
संगीत तैयार किया है ओ पी नैयर ने.
किसी ज़माने में बंदर और बंदरिया का नाच आपने
देखा होगा. मदारी नचाया करता था मजमा लगा कर.
जिस किसी ने नहीं देखा है वो मीडिया के कुछ एक
कार्यक्रम देख के समझ सकता है.
गीत के बोल:
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो
तेरी नज़र तो दिल में कर के तूफ़ान गई
तेरी नज़र तो दिल में कर के तूफ़ान गई
तेरी अदा ही ठहरी अपनी तो जान गई
तेरी अदा ही ठहरी अपनी तो जान गई
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो
चोरी से आये दिल में तुमने क़सूर किया
चोरी से आये दिल में तुमने क़सूर किया
देखा ना भाला क्यों जी इतना ग़ुरूर किया
देखा ना भाला क्यों जी इतना ग़ुरूर किया
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो
सबसे कहूँगा तूने दिल बेक़रार किया
सबसे कहूँगा तूने दिल बेक़रार किया
मेरा ही बन के दिलबर मुझपे ही वार किया
मेरा ही बन के दिलबर मुझपे ही वार किया
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो
तूने वो चाल चल दी जिसका हिसाब नहीं
तूने वो चाल चल दी जिसका हिसाब नहीं
चोरी और सीनाज़ोरी तेरा जवाब नहीं
चोरी और सीनाज़ोरी तेरा जवाब नहीं
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो
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Achchha ji maaf kar do-Musafirkhana 1955
Artists: Karan Deewan, Shyama

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