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Jan 1, 2020

अच्छा जी माफ़ कर दो-मुसाफ़िरखाना १९५५

इस ब्लॉग के पाठकों को नववर्ष की शुभकामनाएं.

नया साल केवल रेसोल्यूशंस वाला हो ज़रूरी नहीं है.
पिछले साल के खोये-पाए का हिसाब और उसपर
डेफिनिटिव एक्शन का भी है. पुराना छोड़ने और
नया पकड़ने का भी है.

सुनते हैं मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा हुआ गीत
जिसे गीता दत्त और रफ़ी ने गाया है. इस गीत का
संगीत तैयार किया है ओ पी नैयर ने.

किसी ज़माने में बंदर और बंदरिया का नाच आपने
देखा होगा. मदारी नचाया करता था मजमा लगा कर.
जिस किसी ने नहीं देखा है वो मीडिया के कुछ एक
कार्यक्रम देख के समझ सकता है.



गीत के बोल:

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

तेरी नज़र तो दिल में कर के तूफ़ान गई
तेरी नज़र तो दिल में कर के तूफ़ान गई
तेरी अदा ही ठहरी अपनी तो जान गई
तेरी अदा ही ठहरी अपनी तो जान गई

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

चोरी से आये दिल में तुमने क़सूर किया
चोरी से आये दिल में तुमने क़सूर किया
देखा ना भाला क्यों जी इतना ग़ुरूर किया
देखा ना भाला क्यों जी इतना ग़ुरूर किया

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

सबसे कहूँगा तूने दिल बेक़रार किया
सबसे कहूँगा तूने दिल बेक़रार किया
मेरा ही बन के दिलबर मुझपे ही वार किया
मेरा ही बन के दिलबर मुझपे ही वार किया

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो

तूने वो चाल चल दी जिसका हिसाब नहीं
तूने वो चाल चल दी जिसका हिसाब नहीं
चोरी और सीनाज़ोरी तेरा जवाब नहीं
चोरी और सीनाज़ोरी तेरा जवाब नहीं

अच्छा जी माफ़ कर दो थोड़ा इन्साफ़ कर दो
दिल पर जो तीर चलाये उनका हिसाब कर दो
जाओ जी माफ़ किया हमने इन्साफ़ किया
इस दिल को दिल में रख के झगड़ा ही साफ़ किया
अच्छा जी माफ़ कर दो
………………………………………………
Achchha ji maaf kar do-Musafirkhana 1955

Artists: Karan Deewan, Shyama

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Aug 25, 2017

ज़रा सी बात का हुज़ूर ने-मुसाफिरखाना १९५५

ज़रा सी बात हिट्स के अंतर्गत अगला गीत पेश है जो
फिल्म मुसाफिरखाना से लिया गया है. पिछला गीत आपने
सुना था फिल्म सलाम मेमसाब से.

मुसाफिरखाना १९५९ की फिल्म है जिसमें श्यामा नायिका हैं.
गीत आपको सी आई डी के गीत ले के पहला पहला प्यार
का कज़िन सा सुनाई देगा. इस गीत को मजरूह ने लिखा
है और इसे आशा भोंसले ने गाया है.




गीत के बोल:

ज़रा सी बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
ऐसे रूठे हो जी सैयां के दीवाना कर दिया
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने

मुख से न बोली मैं तो यूँ ही ज़रा बन के
इतनी सी बात पे जी चल दिये तन के
मुख से न बोली मैं तो यूँ ही ज़रा बन के
इतनी सी बात पे जी चल दिये तन के
बस इतनी बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
बस इतनी बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
ऐसे रूठे हो जी
हो ऐसे रूठे हो जी सैयां के दीवाना कर दिया
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने

प्यार में तेरे ऐसा जिया मोरा धड़के
कहनी पड़ी है दिल की बात नज़र से
प्यार में तेरे ऐसा जिया मोरा धड़के
कहनी पड़ी है दिल की बात नज़र से
नज़र की बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
नज़र की बात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
ऐसे रूठे हो जी
हो ऐसे रूठे हो जी सैयां के दीवाना कर दिया
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने

जब से लगाई तोरे प्यार की बिंदिया
चैन दिनों का खोया रातों की निंदिया
जब से लगाई तोरे प्यार की बिंदिया
चैन दिनों का खोया रातों की निंदिया
मेरे दिन रात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
मेरे दिन रात का हुज़ूर ने फ़साना कर दिया
ऐसे रूठे हो जी
हो ऐसे रूठे हो जी सैयां के दीवाना कर दिया
ज़रा सी बात का हुज़ूर ने
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Zara si baat ka huzur ne-Musafirkhana 1955

Artist: Shyama

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