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Jul 10, 2011

हिंदी फ़िल्म में बरसात ६- रिमझिम रिमझिम-१९४२ ऐ लव स्टोरी १९९३

बारिश के मौसम में एक गीत और याद आ गया. सन १९४२ की
फ़िल्मी प्रेम कथा से अगला गीत पेश है.

फ़िल्मी बरसात वाला ये गीत अनिल कपूर और मनीषा कोइराला
पर फ़िल्माया गया है.जावेद अख्तर के बोल हैं और इसका संगीत
तैयार किया है राहुल देव बर्मन ने. गायक कलाकार हैं कुमार सानू
और कविता कृष्णमूर्ति.





गीत के बोल:

रिमझिम रिमझिम रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में तुम हम हम तुम
चलते हैं, चलते हैं

बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब
मोतियों जैसा जल बरसे
बूंदों की ये छड़ी लायी है वो घडी
जिसके लिए हम तरसे
हो हो हो,
बजता है जलतरंग टीन की छत पे जब
मोतियों जैसा जल बरसे
बूंदों की ये छड़ी लायी है वो घडी
जिसके लिए हम तरसे

हा हा हा रिमझिम रिमझिम रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं


बादल की चादरें ओढ़े हैं वादियाँ,
सारी दिशायें सोयी हैं
सपनों के गाँव में भीगी सी छाव में
दो आत्माएं खोयी हैं

हो बादल की चादरें ओढ़े हैं वादियाँ,
सारी दिशायें सोयी हैं

सपनों के गाँव में भीगी सी छाव
में दो आत्माएं खोयी हैं


रिमझिम रिमझिम ,ला ला
रुमझुम रुमझुम , ला ला
भीगी भीगी रुत में ,हा हा
तुम हम हम तुम

हो चलते हैं, चलते हैं


आयी हैं देखने झीलों के आईने,
बालों को खोले घटाएं
राह है धुंआ धुंआ जायेंगे हम कहाँ,
आओ यहीं रह जायें
हो हो हो आयी हैं देखने झीलों के आईने,
बालों को खोले घटाएं
राह है धुंआ धुंआ जायेंगे हम कहाँ,
आओ यहीं रह जायें


रिमझिम रिमझिम,रिमझिम
रुमझुम रुमझुम,रुमझुम
भीगी भीगी रुत में, हे हे
तुम हम हम तुम
हो चलते हैं, चलते हैं

रिमझिम रिमझिम
रिमझिम रिमझिम
रुमझुम रुमझुम
रुमझुम रुमझुम
भीगी भीगी रुत में
भीगी भीगी रुत में
हो चलते है, चलते है
.......................................................
Rimjhim rimjhim-1942 A Love Story

Artists: Manisha Koirala, Anil Kapoor

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Jul 8, 2011

दिल ने कहा चुपके से-१९४२ ऐ लव स्टोरी १९९३

सामान्य विवरण के साथ अगला गीत सुनिए फिल्म
१९४२ एक प्रेम कथा से.

नायिका: मनीषा कोइराला
गायिका-कविता कृष्णमूर्ति
गीतकार- जावेद अख्तर
संगीतकार- राहुल देव बर्मन



गीत के बोल :

दिल ने कहा चुपके से
ये क्या हुआ चुपके से

क्यूँ नए लग रहे हैं ये धरती गगन
मैंने पूछा तो बोली ये पगली पवन
प्यार हुआ चुपके से
ये क्या हुआ चुपके से
क्यूँ नए लग रहे हैं ये धरती गगन
मैंने पूछा तो बोली ये पगली पवन

प्यार हुआ चुपके से
ये क्या हुआ चुपके से

तितलियों से ये सुना
तितलियों से ये सुना
मैंने किस्सा बाग़ का
बाग़ में थी एक कली
शर्मीली अनछुई
एक दिन, मनचला भंवरा आ गया
खिल उठी वो कली पाया रूप नया
पूछती थी कली के मुझे क्या हुआ
फूल हँसे चुपके से
प्यार हुआ चुपके से

मैंने बादल से कभी
हो, मैंने बादल से कभी
ये कहानी थी सुनी
पर्वतों की एक नदी
मिलने सागर से चली
झूमती घूमती
हो, नाचती डोलती
खो गयी अपने सागर में जा के नदी
देखने प्यार की ऐसी जादूगरी
चाँद खिला चुपके से
प्यार हुआ चुपके से

क्यूँ नए लग रहे हैं ये धरती गगन
मैंने पूछा तो बोली ये पगली पवन

प्यार हुआ चुपके से
ये क्या हुआ चुपके से
क्यूँ नए लग रहे हैं ये धरती गगन
मैंने पूछा तो बोली ये पगली पवन
.................................
Dil ne kaha chupke se-1942 a love story

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Jun 12, 2011

रूठ न जाना-१९४२ ऐ लव स्टोरी १९९३

सभी फिल्म निर्देशक जब कोई पीरियड फिल्म या ऐतिहासिक
फिल्म बनाते हैं तो दावा करते हैं की उन्होंने उस समय पर काफी
रिसर्च की। ऐसा ही इस फिल्म के मामले में भी हुआ। उस समय के
माहौल, पहनावे इत्यादि पर भले ही रिसर्च की गई हो, कहीं कहीं
ऐसा महसूस होता है जैसे ये १९८४ का युग का कोई दृश्य १९४२ की
बनी हुई पालिश से पोत के पेश कर दिया गया हो।

विधु विनोद चोपड़ा की फिल्मों का छायांकन बढ़िया होता है। आइये
देखें और सुनें १९४२ एक प्रेम कथा फिल्म से तीसरा गीत जो कुमार सानू
की आवाज़ में है। जावेद अख्तर का लिखा गीत आर डी बर्मन द्वारा
संगीतबद्ध है।





गीत के बोल:

रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
तुम ये जानो या न जानो
तुम ये मानो या न मानो
मेरे जैसा दीवाना तुम पाओगे नहीं
याद करोगे मैं जो न हूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो

मेरी ये दीवानगी कभी न होगी कम
जितने भी चाहे तुम कर लो सितम
मुझसे बोलो या न बोलो
मुझको देखो या न देखो
ये भी माना मुझसे
मिलने आओगे नहीं
सारे सितम हंस के में सहूँ तो
रूठ न जाना तुमसे कहूं तो

प्रेम के दरिया में लहरें हज़ार
लहरों में जो भी डूबा हुवा वोही पार
प्रेम के दरिया में लहरें हज़ार
लहरों में जो भी डूबा हुवा वोही पार
ऊँची नीची, नीची ऊँची
नीची ऊँची ऊँची नीची
लहरों में तुम देखूं कैसे आओगे नहीं
में इन लहरों मैं जो रहूँ तो

रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
तुम ये जानो या न जानो
तुम ये मानो या न मानो
मेरे जैसा दीवाना तुम पाओगे नहीं
याद करोगे मैं जो न हूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
..................................
Rooth na jaana-1942 a love story

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Mar 6, 2010

एक लड़की को देखा तो-१९४२ ए लव स्टोरी १९९४

इस गीत को याद रखने की एक ख़ास वजह है। मेरी जानकारी
का एक व्यक्ति इसको यूँ गाया करता - "एक लुड़की को देखा तो
ऐसा लगा" । सही भी था, अक्सर प्यार में लोग लुड़क जाया करते
हैं। प्यार इश्क और मोहब्बत की खुमारी मदिरा की खुमारी से ज्यादा
चढ़ जाती है। वैसे इस गाने को याद रखने के पीछे और भी कारण हैं,
मसलन इसकी तुकबंदी, इसकी जुबान पर चढ़ जाने वाली धुन। ये गीत
फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत साबित हुआ। कुछ कुछ पुराने ज़माने
से संगीत के प्रभाव से लिप्त इस फिल्म का संगीत काफी लोकप्रिय हुआ।
इस गीत में कुमार सानू को "हो" करने का अच्छा मौका मिला है जिसे वे
विशेष अंदाज़ में गाते हैं। बोलों में अगर कोई विशेष चीज़ है तो वो है
"संदल की आग "


गीत के बोल:

हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
जैसे खिलता गुलाब
जैसे शायर का ख्वाब
जैसे उजली किरण
जैसे वन में हिरन
जैसे चांदनी रात
जैसे नगमे की बात
जैसे मंदिर में हो एक जलता दिया
हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा


हो एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
जैसे सुबहों का रूप
जैसे सर्दी की धूप
जैसे वीणा की तान
जैसे रंगों की जान
जैसे बलखाये बेल
जैसे लहरों का खेल
जैसे ख़ुशबू लिए आये, ठंडी हवा
हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा

हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
जैसे नाचता मोर
जैसे रेशम की डोर
जैसे परियों का राग
जैसे संदल की आग
जैसे सोला सिंगार
जैसे रस की फुहार
जैसे आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता नशा
हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा

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Jan 5, 2010

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर-१९४२ ए लव स्टोरी

१९४२ ए लव स्टोरी सन १९९४ की फिल्म है। फिल्म से ज्यादा
चर्चित इसका संगीत रहा। पुराने ज़माने के गीतों की झलक सुनाता
इसका संगीत काफी सुना गया। हेमंत कुमार के फिल्म जगत से
रिटायर होने के बाद उनके जैसी आवाज़ वाला कोई गायक सुनने को
नहीं मिला। वे जब हिंदी फिल्म जगत में सक्रीय थे तब उनकी आवाज़ से
मिलती जुलती आवाज़ वाले कुछ गायक जैसे द्विजेन मुखर्जी, सुबीर सेन
वगैरह सुनाई दे जाते थे। १९९४ की अनिल कपूर अभिनीत फिल्म में ये
गीत भी आपको हेमंत कुमार की याद दिलाएगा। स्पष्ट ना सही, धुंधली
ही सही। गायक हैं शिवाजी चट्टोपाध्याय। गीत लिखा है जावेद अख्तर ने
और धुन बनाई है राहुल देव बर्मन ने । गीत फिल्माया गया है जैकी श्रोफ
और मनीषा कोइराला पर। विधु विनोद चोपड़ा की इस फिल्म का छायांकन
भले ही बढ़िया हो, फिल्म कई जगह पर मंथर गति से चलती प्रतीत होती है।
आपको इस गीत में वायलिन का बजा टुकड़ा एक पुराने गीत की याद
दिलाएगा ।




गीत के बोल:

दिल नाउम्मीद तो नहीं, नाकाम ही तो है
लम्बी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र
ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र

नहीं रहनेवाली ये मुश्किलें
ये हैं अगले मोड़ पे मंजिलें
नहीं रहनेवाली ये मुश्किलें
ये हैं अगले मोड़ पे मंजिलें
मेरी बात का तू यकीन कर
मेरी बात का तू यकीन कर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र

कभी ढूंढ लेगा ये कारवां
वो नयी ज़मीन नया आसमान
कभी ढूंढ लेगा ये कारवां
वो नयी ज़मीन नया आसमान
जिसे ढूंढती है तेरी नज़र
जिसे ढूंढती है तेरी नज़र
ना उदास हो मेरे हमसफ़र

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र
ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र
ना उदास हो मेरे हमसफ़र

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