Showing posts with label Manisha Koirala. Show all posts
Showing posts with label Manisha Koirala. Show all posts

Apr 21, 2016

तू मिले, दिल खिले-क्रिमिनल १९९५

सन १९९५ की फिल्म क्रिमिनल से एक मधुर गीत आज पेश है.
कुमार सानू के गाये हिट गीतों में इसकी गिनती होती है. ये
गीत महिला संस्करण में भी उपलब्ध है मगर सानू का वर्ज़न
ज्यादा सुना जाता है. दोनों वर्ज़न, वैसे मैं आपको बता दूं कि,
सुनने में बराबर आनंददायी हैं

अगर आप समझें गीतकार की भी भूमिका होती है गीत को
दमदार बनाने में तो इन्दीवर को आप क्रेडिट दे सकते हैं. ये
वही हैं जिन्होंने कई साहित्यिक अलंकारों वाले गीत भी लिखे
साथ में रोजी रोटी चलाने के लिए ८० के दशक में दिमाग के
तार झनझना देने वाले गीत भी लिखे जिनकी धुनों को सुन
कर शरीर का पुर्जा पुर्जा हिल जाता था. ये हिलाने वाली धुनें
अक्सर बप्पी की हुआ करती थीं.

प्रस्तुत गीत के संगीतकार हैं एम् एम् क्रीम जो एम् एम् कीरवानी
के नाम से भी जाने जाते हैं. ये दक्षिण के ख्यात संगीतकार हैं.
इनके कुछ गीत आपको सुनवा चुके हैं पहले.



गीत के बोल:


तू मिले, दिल खिले, और जीने को क्या चाहिए
ना हो तू उदास, तेरे पास-पास मैं रहूँगा ज़िन्दगी भर
सारे संसार का प्यार, मैंने तुझी में पाया
तू मिले, दिल खिले, और जीने को क्या चाहिए

चंदा तुझे देखने को निकला करता है
आईना भी दीदार को तरसा करता है
इतनी हसीं, कोई नहीं
हुस्न दोनों जहां का, एक तुझमें सिमट के आया

तू मिले, दिल खिले, और जीने को क्या चाहिए
ना हो तू उदास, तेरे पास-पास मैं रहूँगा ज़िन्दगी भर
सारे संसार का प्यार, मैंने तुझी में पाया
तू मिले, दिल खिले, और जीने को क्या चाहिए

प्यार कभी मरता नहीं, हम तुम मरते हैं
होते हैं वो लोग अमर, प्यार जो करते हैं
जितनी अदा, उतनी वफ़ा
एक नज़र प्यार से देख लो, फिर से ज़िंदा कर दो

तू मिले, दिल खिले, और जीने को क्या चाहिए
ना हो तू उदास, तेरे पास-पास मैं रहूँगा ज़िन्दगी भर
सारे संसार का प्यार, मैंने तुझी में पाया
तू मिले, दिल खिले, और जीने को क्या चाहिए

................................................................................................
Tu mile dil khile(male)-Criminal 1995

Read more...

Feb 21, 2016

तू ही रे-बॉम्बे १९९५

एक समय एक संगीत प्रेमी मिला जो हर गीत को लगभग
‘gem’ बोला करता. उसके बार बार ये बोलने पर हमें खाने
वाला “जैम” दिखाई देने लगता. एक दिन आखिर को हमने
पूछ ही लिया. तुम्हारे स्टॉक में खाली जैम ही है, अचार,
चटनी और मुरब्बा नहीं है ?

आपको आज रीयल जैम खिलवाते .... अर रा सुनवाते हैं .
ये है फिल्म बॉम्बे का गीत. इसे फिल्माया गया है दक्षिण
के नायक अरविन्द स्वामी और उत्तर की मनीषा कोइराला
पर.  विरह के भावों से शुरू होता ये गीत मिलन पर समाप्त
होता है. महबूब कोतवाल के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है
रहमान ने. इसे गाया है चित्रा और हरिहरन ने.



गीत के बोल:

तू ही रे, तू ही रे तेरे बिना मैं कैसे जियूं
आ जा रे आ जा रे यूँ ही तड़पा न तू मुझको
जान रे जान रे इन साँसों में बस जा तू
चाँद रे चाँद रे आ जा दिल की ज़मीन पे तू
चाहत है अगर आ के मुहसे मिल जा तू
या फिर ऐसा कर धरती से मिला दे मुझको

तू ही रे, तू ही रे तेरे बिना मैं कैसे जियूं
आ जा रे आ जा रे यूँ ही तड़पा न तू मुझको
इन साँसों का देखो तुम पागलपन के
आये नहीं इन्हें चैन
मुझसे ये बोलती मैं राहों में तेरी
अपने बिछा दूं ये नैन
इन ऊंचे पहाड़ों से जान दे दूंगा मैं
गर तुम ना आई कहीं
तुम उधर जान उम्मीद मेरी जो तोड़ो
इधर ये जहाँ छोड़ दूं मैं
मौत और जिंदगी तेरे हाथ में दे दिया रे

आई रे आई रे ले मैं आई हूँ तेरे लिए
तोड़ा रे तोड़ा रे हर बंधन को प्यार के लिए
जान रे जान रे आ जा तुझमें समां जाऊं मैं
दिल रे दिल रे तेरी साँसों में बस जाऊं मैं
चाहत है अगर आ के मुझसे मिल जा तू
या फिर ऐसा कर धरती से मिला दे मुझको

तू ही रे, तू ही रे तेरे बिना मैं कैसे जियूं
आ जा रे आ जा रे यूँ ही तड़पा न तू मुझको
आ  आ
सौ बार बुलाए मैं सौ बार आऊँ
एक बार जो दिल दिया
एक आँख रोये तो दूजी बोलो
सोयेगी कैसे भला
इन प्यार की राहों में पत्थर हैं कितने
उन सब को ही पार किया
एक नदी हूँ मैं चाहत भरी
आज मिलने सागर को आई यहाँ
सजना सजना आज आंसू भी मीठे लगे

तू ही रे, तू ही रे तेरे बिना मैं कैसे जियूं
आ जा रे आ जा रे यूँही तड़पा न तू मुझको
जान रे जान रे इन साँसों में बस जा तू
चाँद रे चाँद रे आ जा दिल की ज़मीन पे तू

पल पल पल पल वक्त तो बीता जाए रे
ज़रा बोल ज़रा बोल वक्त से के वो थम जाए रे

आई रे आई रे ले मैं आई हूँ तेरे लिए
जान रे जान रे आ जा तुझमें समां जाऊं मैं
……………………………………………………
Tu hi re-Bombay 1995

Read more...

Apr 11, 2015

ये दिल सुन रहा है-ख़ामोशी द म्यूजिकल १९९६

समय इतनी तेज़ी से गुज़रता है इसका आभास ही नहीं हो
पाता. कभी कभी तो मानो हथेली में से रेत की मानिंद भी
फिसल जाता है. फिल्म ख़ामोशी-द म्यूजिकल को बने पूरे
१९ साल हो गए हैं मगर ऐसा लगता है इसका संगीत सुन
कर मानो हाल की ही कोई फिल्म हो. इसके संगीत में जो
आकर्षण मौजूद है वही इस ख्याल की वजह हो सकता है.

प्रस्तुत है फिल्म का एक गीत मजरूह की कलम से निकला
हुआ और कविता कृष्णमूर्ति का गाया हुआ. गीत का संगीत
जतिन ललित की जोड़ी ने दिया है. संजय लीला भंसाली की
उल्लेखनीय फिल्मों में से एक है ख़ामोशी. वैसे तो समीक्षक
उनकी हर फिल्म को उल्लेखनीय बताने और साबित करने के
ढेरों बहाने ढूंढ ही लेते हैं चाहे वो वास्तविकता में कैसी भी हो.

इस फिल्म का कथानक तो वाकई अलग-हट-के था. बॉलीवुड
की कई अलग-हट-के बनी हुई फिल्मों पर मैंने शोध करने का
प्रयास किया है. समीक्षाओं की गुणवत्ता को देखते हुए सोचता
हूँ मैं भी समीक्षा लिखना शुरू कर दूं. पाठकों की क्या राय है
इस मामले में ?

गीत में आपको नाना पाटेकर और हेलन भी नज़र आयेंगे.




गीत के बोल:

ये दिल सुन रहा है तेरे दिल की ज़ुबां
ऐ मेरे हमनशी मैं वहाँ तू जहाँ

मेरी सदा में बोले तू ये कोई क्या जाने
गीत में है साज में है तू ही तू नगमा कहाँ
ये दिल सुन रहा है

दर्द-ए-मोहब्बत के सिवा मैं भी क्या तू भी क्या
ये ज़मीं हम आसमां हम अब हमें जाना कहाँ
ये दिल सुन रहा है
........................................................
Ye Dil Sun Raha Hai - Khamoshi 1996

Read more...

Jul 8, 2011

दिल ने कहा चुपके से-१९४२ ऐ लव स्टोरी १९९३

सामान्य विवरण के साथ अगला गीत सुनिए फिल्म
१९४२ एक प्रेम कथा से.

नायिका: मनीषा कोइराला
गायिका-कविता कृष्णमूर्ति
गीतकार- जावेद अख्तर
संगीतकार- राहुल देव बर्मन



गीत के बोल :

दिल ने कहा चुपके से
ये क्या हुआ चुपके से

क्यूँ नए लग रहे हैं ये धरती गगन
मैंने पूछा तो बोली ये पगली पवन
प्यार हुआ चुपके से
ये क्या हुआ चुपके से
क्यूँ नए लग रहे हैं ये धरती गगन
मैंने पूछा तो बोली ये पगली पवन

प्यार हुआ चुपके से
ये क्या हुआ चुपके से

तितलियों से ये सुना
तितलियों से ये सुना
मैंने किस्सा बाग़ का
बाग़ में थी एक कली
शर्मीली अनछुई
एक दिन, मनचला भंवरा आ गया
खिल उठी वो कली पाया रूप नया
पूछती थी कली के मुझे क्या हुआ
फूल हँसे चुपके से
प्यार हुआ चुपके से

मैंने बादल से कभी
हो, मैंने बादल से कभी
ये कहानी थी सुनी
पर्वतों की एक नदी
मिलने सागर से चली
झूमती घूमती
हो, नाचती डोलती
खो गयी अपने सागर में जा के नदी
देखने प्यार की ऐसी जादूगरी
चाँद खिला चुपके से
प्यार हुआ चुपके से

क्यूँ नए लग रहे हैं ये धरती गगन
मैंने पूछा तो बोली ये पगली पवन

प्यार हुआ चुपके से
ये क्या हुआ चुपके से
क्यूँ नए लग रहे हैं ये धरती गगन
मैंने पूछा तो बोली ये पगली पवन
.................................
Dil ne kaha chupke se-1942 a love story

Read more...

Jun 12, 2011

रूठ न जाना-१९४२ ऐ लव स्टोरी १९९३

सभी फिल्म निर्देशक जब कोई पीरियड फिल्म या ऐतिहासिक
फिल्म बनाते हैं तो दावा करते हैं की उन्होंने उस समय पर काफी
रिसर्च की। ऐसा ही इस फिल्म के मामले में भी हुआ। उस समय के
माहौल, पहनावे इत्यादि पर भले ही रिसर्च की गई हो, कहीं कहीं
ऐसा महसूस होता है जैसे ये १९८४ का युग का कोई दृश्य १९४२ की
बनी हुई पालिश से पोत के पेश कर दिया गया हो।

विधु विनोद चोपड़ा की फिल्मों का छायांकन बढ़िया होता है। आइये
देखें और सुनें १९४२ एक प्रेम कथा फिल्म से तीसरा गीत जो कुमार सानू
की आवाज़ में है। जावेद अख्तर का लिखा गीत आर डी बर्मन द्वारा
संगीतबद्ध है।





गीत के बोल:

रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
तुम ये जानो या न जानो
तुम ये मानो या न मानो
मेरे जैसा दीवाना तुम पाओगे नहीं
याद करोगे मैं जो न हूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो

मेरी ये दीवानगी कभी न होगी कम
जितने भी चाहे तुम कर लो सितम
मुझसे बोलो या न बोलो
मुझको देखो या न देखो
ये भी माना मुझसे
मिलने आओगे नहीं
सारे सितम हंस के में सहूँ तो
रूठ न जाना तुमसे कहूं तो

प्रेम के दरिया में लहरें हज़ार
लहरों में जो भी डूबा हुवा वोही पार
प्रेम के दरिया में लहरें हज़ार
लहरों में जो भी डूबा हुवा वोही पार
ऊँची नीची, नीची ऊँची
नीची ऊँची ऊँची नीची
लहरों में तुम देखूं कैसे आओगे नहीं
में इन लहरों मैं जो रहूँ तो

रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
तुम ये जानो या न जानो
तुम ये मानो या न मानो
मेरे जैसा दीवाना तुम पाओगे नहीं
याद करोगे मैं जो न हूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
..................................
Rooth na jaana-1942 a love story

Read more...

Dec 11, 2010

सागर से गहरा है प्यार हमारा- मझधार १९९४

एक महानुभाव से मैं कल एक मसाज-अरंजेर पर बात कर रहा था ।
जी हाँ सारे मेसेंजर दिमाग और आँखों की अच्छी मसाज जो करते
हैं सो इनका इससे बेहतर नाम मुझे नहीं सूझ रहा। उसपर वार्तालाप
के दौरान एक गीत पर चर्चा हुई-गुटुर गुटुर-फिल्म दलाल के। मेरे
मित्र ने कहा-अच्छे गीत भी सुना करो। मैंने उदाहरण पूछा तो झट
उन्होंने नाम लिया इस गीत का-सागर से गहरा है प्यार हमारा।
खैर मेरे वो मित्र मेरे संगीत प्रेम से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं। उनकी
खातिर मैं ये गीत यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ। इस गीत की स्वर लहरियां
मुझे पसंद है और जब भी कहीं सुनाई देता है कोशिश करता हूँ इसको
पूरा सुनने की। वार्तालाप के बाद मेरे मित्रा मुझे फिल्म मझधार का
ये गीत बतलाने के पश्चात मुझे चैट की मझधार में छोड़ गए। गीत
फिल्माया गया है मनीषा कोइराला और राहुल रॉय पर। राहुल रॉय
अपनी एक्टिंग से ज्यादा अपने केश विन्यास की वजह से पहचाने
गए हैं।



गीत के बोल:

सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा,
आ आ आ , तुम्हारा

सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा
आ आ आ , तुम्हारा

सागर से गहरा है प्यार हमारा

सीने में दिल दिल में धड़कन
धड़कन में तू है समाया
सीने में दिल दिल में धड़कन
धड़कन में तू है समाया
कितने दिनों तड़पी हूँ मैं
तब जा के है तुझको पाया

मेरे दिल पे मेरे यार
अब है तेरा इख्तियार
अब है तेरा इख्तियार

सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा

ऐ मेरे दोस्त किस्मत मेरी
देखो है क्या रंग लायी
ऐ मेरे दोस्त किस्मत मेरी
देखो है क्या रंग लायी
अपने मिलन की रुत हसीं
बरसों के है बाद आई

दूरियों को अब मिटा
आ गले से लग जा
आ गले से लग जा

सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा

शाम-ओ-सहर मेरी नज़र
करती है दीदार तेरा
शाम-ओ-सहर मेरी नज़र
करती है दीदार तेरा

तेरे बिना क्या ज़िन्दगी
तू ही है संसार मेरा
अब ना चाहत होगी कम
मैंने ली है ये कसम
मैंने ली है ये कसम

सागर से गहरा है प्यार हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
हम मर जायेंगे जी नहीं पायेंगे
साथ कभी छूटा जो तुम्हारा
आ आ आ , तुम्हारा

सागर से ......... हमारा
सागर से गहरा है प्यार हमारा
...............................................
Sagar se gehra hai pyaar hamara-Majhdhaar 1994

Read more...

Oct 12, 2010

आज मैं ऊपर-ख़ामोशी १९९६

आइये थोडा ध्यान भटकाया जाए। पिछले दो गीत आपने सुने वो दर्द
भरे थे। अब एक गीत सुनते हैं जो नयी फिल्म ख़ामोशी से है । इतनी
नयी भी नहीं है ये। सन १९९६ में आई थी दर्शकों के सम्मुख । संजय
लीला भंसाली की फिल्म कहलाती है ये। दर्शकों ने इसको पसंद किया
और इसके गीत भी जम कर सुने। ये गीत जो आप देखेंगे वो झाड़ू डांस
के साथ चालू होता है। झाड़ू सुन्दर भी दिख सकती है गर उसको सुन्दर
से घर में, सुन्दर हाथों में दिखाया जाए। संजय लीला भंसाली का कमाल
है ये। आशा है इसे देख कर गृहिणियों ने झाड़ू से घृणा करना ज़रूर बंद
किया होगा । गीत का फिल्मांकन सलमान खान और मनीषा कोइराला
पर किया गया है। इसे गाया है कुमार शानू और कविता कृष्णमूर्ति ने।
बोल मजरूह साहब के हैं और धुन है जतिन ललित की ।
...................



गीत के बोल:

आज मैं ऊपर आसमान नीचे
आज मैं आगे ज़माना है पीछे
आज मैं ऊपर आसमान नीचे
खामोही मैं आगे ज़माना है पीछे
Tell me ओ खुदा
अब मैं क्या करूं
सीधी कि उलटी चलूँ

आज मैं ऊपर आसमान नीचे
आज मैं आगे ज़माना है पीछे
Tell me ओ खुदा
अब मैं क्या करूं
चलूँ सीधी कि उलटी चलूँ
आज मैं ऊपर आसमान नीचे

यूंही बिन बात के छलके जाए हंसी
डोले जब हवा लागे गुदुगुदी
यूंही बिन बात के छलके जाए हंसी
डोले जब हवा लागे गुदुगुदी
सम्भलूं गिर पडूं
अरे अरे अरे अरे अरे तौबा क्या करूं
चलूँ सीधे कि उलटी चलूँ

आज मैं ऊपर आसमान नीचे
आज मैं आगे ज़माना है पीछे
आज मैं ऊपर आसमान नीचे
आज मैं आगे ज़माना है पीछे
Tell me ओ खुदा
अब मैं क्या करूं
सर के बल या कदम से चलूँ
आज मैं ऊपर आसमान नीचे

हे हे हे हे हे ला ला ला ला ला ला

झूमे जा मौज में, रुकना न जानेजां
देखूं ये तरंग, रूकती है कहाँ
झूमे जा मौज में, रुकना न जानेजां
देखूं ये तरंग, रूकती है कहाँ
मैं भी तेरे संग
इन लहरों पे चलूँ
सर के बल या कदम से चलूँ

आज मैं ऊपर आसमान नीचे
आज मैं आगे ज़माना है पीछे
आज मैं ऊपर आसमान नीचे
आज मैं आगे ज़माना है पीछे
Tell me ओ खुदा
अब मैं क्या करूं
चलूँ सीधी कि उलटी चलूँ
......................................
Aaj main oopar-Khamoshi 1996

Read more...

Mar 6, 2010

एक लड़की को देखा तो-१९४२ ए लव स्टोरी १९९४

इस गीत को याद रखने की एक ख़ास वजह है। मेरी जानकारी
का एक व्यक्ति इसको यूँ गाया करता - "एक लुड़की को देखा तो
ऐसा लगा" । सही भी था, अक्सर प्यार में लोग लुड़क जाया करते
हैं। प्यार इश्क और मोहब्बत की खुमारी मदिरा की खुमारी से ज्यादा
चढ़ जाती है। वैसे इस गाने को याद रखने के पीछे और भी कारण हैं,
मसलन इसकी तुकबंदी, इसकी जुबान पर चढ़ जाने वाली धुन। ये गीत
फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत साबित हुआ। कुछ कुछ पुराने ज़माने
से संगीत के प्रभाव से लिप्त इस फिल्म का संगीत काफी लोकप्रिय हुआ।
इस गीत में कुमार सानू को "हो" करने का अच्छा मौका मिला है जिसे वे
विशेष अंदाज़ में गाते हैं। बोलों में अगर कोई विशेष चीज़ है तो वो है
"संदल की आग "


गीत के बोल:

हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
जैसे खिलता गुलाब
जैसे शायर का ख्वाब
जैसे उजली किरण
जैसे वन में हिरन
जैसे चांदनी रात
जैसे नगमे की बात
जैसे मंदिर में हो एक जलता दिया
हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा


हो एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
जैसे सुबहों का रूप
जैसे सर्दी की धूप
जैसे वीणा की तान
जैसे रंगों की जान
जैसे बलखाये बेल
जैसे लहरों का खेल
जैसे ख़ुशबू लिए आये, ठंडी हवा
हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा

हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
जैसे नाचता मोर
जैसे रेशम की डोर
जैसे परियों का राग
जैसे संदल की आग
जैसे सोला सिंगार
जैसे रस की फुहार
जैसे आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता नशा
हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा

Read more...

Jan 5, 2010

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर-१९४२ ए लव स्टोरी

१९४२ ए लव स्टोरी सन १९९४ की फिल्म है। फिल्म से ज्यादा
चर्चित इसका संगीत रहा। पुराने ज़माने के गीतों की झलक सुनाता
इसका संगीत काफी सुना गया। हेमंत कुमार के फिल्म जगत से
रिटायर होने के बाद उनके जैसी आवाज़ वाला कोई गायक सुनने को
नहीं मिला। वे जब हिंदी फिल्म जगत में सक्रीय थे तब उनकी आवाज़ से
मिलती जुलती आवाज़ वाले कुछ गायक जैसे द्विजेन मुखर्जी, सुबीर सेन
वगैरह सुनाई दे जाते थे। १९९४ की अनिल कपूर अभिनीत फिल्म में ये
गीत भी आपको हेमंत कुमार की याद दिलाएगा। स्पष्ट ना सही, धुंधली
ही सही। गायक हैं शिवाजी चट्टोपाध्याय। गीत लिखा है जावेद अख्तर ने
और धुन बनाई है राहुल देव बर्मन ने । गीत फिल्माया गया है जैकी श्रोफ
और मनीषा कोइराला पर। विधु विनोद चोपड़ा की इस फिल्म का छायांकन
भले ही बढ़िया हो, फिल्म कई जगह पर मंथर गति से चलती प्रतीत होती है।
आपको इस गीत में वायलिन का बजा टुकड़ा एक पुराने गीत की याद
दिलाएगा ।




गीत के बोल:

दिल नाउम्मीद तो नहीं, नाकाम ही तो है
लम्बी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र
ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र

नहीं रहनेवाली ये मुश्किलें
ये हैं अगले मोड़ पे मंजिलें
नहीं रहनेवाली ये मुश्किलें
ये हैं अगले मोड़ पे मंजिलें
मेरी बात का तू यकीन कर
मेरी बात का तू यकीन कर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र

कभी ढूंढ लेगा ये कारवां
वो नयी ज़मीन नया आसमान
कभी ढूंढ लेगा ये कारवां
वो नयी ज़मीन नया आसमान
जिसे ढूंढती है तेरी नज़र
जिसे ढूंढती है तेरी नज़र
ना उदास हो मेरे हमसफ़र

ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र
ये सफ़र बहुत है कठिन मगर
ना उदास हो मेरे हमसफ़र
ना उदास हो मेरे हमसफ़र

Read more...

Jul 8, 2009

कहना ही क्या-बॉम्बे १९९५

इस गाने के बोल सुनकर लिखना टेडी खीर है, तब भी
मैं कोशिश करूंगा एक बार जरूर। हम लोगों ने हारमोनियम
की बात की थी. इस गाने में भी सुंदर प्रयोग हुआ है इस
वाद्य यन्त्र का। १९९५ में आई इस लीक से हट कर बनी
फ़िल्म में संगीत है ऐ. आर. रहमान का । इस गाने को
गाया है चित्रा ने जो दक्षिण भारत की प्रसिद्ध गायिका हैं ।
चित्रा ने बॉम्बे फ़िल्म के पहले भी कई हिन्दी गीत गाये हैं
लेकिन सबसे ज्यादा लोकप्रियता उनके इस गाने को ही
प्राप्त हुई है। फ़िल्म में मुख्य भूमिका में अरविन्द स्वामी
और मनीषा कोइराला हैं। ऐ. आर. रहमान इस फ़िल्म तक
दक्षिण भारतीय प्रभाव से मुक्त नहीं हुए हैं। आगे जब हम
ताल फ़िल्म के गाने पर चर्चा करेंगे तब इस पहलू पर गौर
करेंगे। फिलहाल इस गाने का आनंद उठायें।






गीत के बोल:



गुमसुम गुमसुम गुप चुप गुमसुम गुप चुप

गुमसुम गुमसुम गुप चुप गुमसुम गुप चुप

गुमसुम गुमसुम गुप चुप गुमसुम गुप चुप
हलचल हलचल हो गयी तेरी होंठ हैं क्यूँ चुप
हलचल हलचल हो गयी तेरी बैठे हैं गुप चुप
प्यारे प्यारे चेहरे ने करते हैं इशारा
देखा तेरी आँखों ने है सपना कोई प्यारा
हमसे गोरी न तू शर्मा कह दे हमसे ज़रा
हमसे गोरी न तू शर्मा कह दे हमसे ज़रा
कहना ही क्या ये नैन एक अनजान से जो मिले
चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिले
अरमान नए ऐसे दिल में खिले
जिनको कभी मैं न जानूं
वो हमसे हम उनसे कभी न मिले
कैसे मिले दिल न जानूं
अब क्या करें क्या नाम लें
कैसे उन्हें मैं पुकारूँ
कहना ही क्या ये नैन एक अनजान से जो मिले
चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिले
अरमान नए ऐसे दिल में खिले
जिनको कभी मैं न जानूं
वो हमसे हम उनसे कभी न मिले
कैसे मिले दिल न जानूं
अब क्या करें क्या नाम लें
कैसे उन्हें मैं पुकारूँ
पहली ही नज़र में कुछ हम कुछ हम
हो जाते हैं यूँ गुम
नैनों से बरसे रिमझिम रिमझिम
हमपे प्यार का सावन
शर्म थोड़ी थोड़ी हमको आये तो नज़रें झुक जाएँ
सितम थोडा थोडा हमपे शोख हवा भी कर जाएँ
ऐसी चले आँचल उठे दिल में एक तूफ़ान उठे.
हम तो लुट गए खड़े ही खड़े
कहना ही क्या ये नैन एक अनजान से जो मिले
चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिले
अरमान नए ऐसे दिल में खिले
जिनको कभी मैं न जानूं
वो हमसे हम उनसे कभी न मिले
कैसे मिले दिल न जानूं
अब क्या करें क्या नाम लें
कैसे उन्हें मैं पुकारूँ
गुमसुम गुमसुम गुप चुप गुमसुम गुप चुप
गुमसुम गुमसुम गुप चुप गुमसुम गुप चुप
हलचल हलचल हो गयी, तेरी होंठ हैं क्यूँ चुप
हलचल हलचल हो गयी, तेरी बैठे हैं गुप चुप
प्यारे प्यारे चेहरे ने करते हैं इशारा
देखा तेरी आँखों ने है सपना कोई प्यारा
हमसे गोरी न तू शर्मा कह दे हमसे ज़रा
हमसे गोरी न तू शर्मा कह दे हमसे ज़रा
इन होंठों ने माँगा सरगम सरगम
तू और तेरा ही प्यार है
आज ढूंढें है जिसको हरदम हरदम
तू और तेरा ही प्यार है
महफ़िल में भी तनहा है दिल ऐसे दिल ऐसे
तुझको खो न दे डरता है ये ऐसे ये ऐसे
आज मिली ऐसी खुशी झूम उठी दुनिया ये मेरी
तुमको पाया तो पायी जिंदगी
कहना ही क्या ये नैन एक अनजान से जो मिले
चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिले
अरमान नए ऐसे दिल में खिले
जिनको कभी मैं न जानूं
वो हमसे हम उनसे कभी न मिले
कैसे मिले दिल न जानूं
अब क्या करें क्या नाम लें
कैसे उन्हें मैं पुकारूँ
कहना ही क्या ये नैन एक अनजान से जो मिले
चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिले
कहना ही क्या
................................................................................
Kehna hi kya-Bombay 1995

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP