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Mar 30, 2016

धक् धक् करने लगा-बेटा १९९२

जिस गीत ने माधुरी दीक्षित को धक् धक् गर्ल बनाया वो गीत
आज सुनेंगे और देखेंगे. उसके पहले तक वे १-२-३ गर्ल के नाम
से भी जानी जाती थीं. ये १-२-३ की गिनती वाला गीत भी बेहद
लोकप्रिय हुआ था जो फिल्म तेज़ाब में था. संयोग से इस फिल्म
में भी अनिल कपूर ही नायक थे माधुरी के साथ.

ऊह आह आउच सीरीज़ वाला ये गीत ज़बरदस्त हिट गीत है और
आज भी कभी कभी सुनाई दे जाता है. इसे जनता माइलस्टोन
सोंग कहती है. माइलस्टोन सोंग वो जो माइल-माइल किलोमीटर-
किलोमीटर पर बजता मिले. ये एक समय हर गली नुक्कड़ पर
बजा करता था.

गीत समीर ने लिखा है और इसकी तर्ज़ बनायीं है आनंद मिलिंद
ने. आनंद मिलिंद के लिए तो ९० का दशक शानदार रहा है और
ये फिल्म उनकी बड़ी हिट फिल्मों में से है. रोजी रोटी वाली फ़िल्में
उन्होंने बहुत की हैं, ये केक-पेस्ट्री वाली फिल्म थी.



गीत के बोल:


आउच
हो धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा
अरे रे धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा
सैंया बैंया छोड़ ना, कच्ची कलियाँ तोड़ ना
सैंया बैंया छोड़ ना, कच्ची कलियाँ तोड़ ना

दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
तू है मेरी दिलरुबा क्या लगती है, वाह रे वाह
तू है मेरी दिलरुबा क्या लगती है, वाह रे वाह

धक-धक करने लगा, हो मोरा जियरा डरने लगा

अपना कहा जो पिया तूने मुझे
मैं मीठे-मीठे सपने सजाने लगी
देखा मेरी रानी जब मैंने तुझे
मेरी सोई-सोई धड़कन गाने लगी
जादू तेरा छाने लगा
मेरी नस-नस में समाने लगा
ख़ुद को मैं भुलाने लगा
तुझे साँसों में बसाने लगा
रिश्ता, अब ये रिश्ता
साथी टूटेगा न तोड़े कभी

दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
अरे रे धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा

उलझी है काली-काली लट तेरी
ज़रा इन ज़ुल्फ़ों को सुलझाने तो दे
इतनी भी क्या है जल्दी तुझे
घड़ी अपने मिलन की तु आने तो दे
ऐसे न बहाने बना, मेरी रानी
अब तो बाहों में आ
ऐसे न निगाहें मिला
कोई देखेगा तो सोचेगा क्या
मस्ती छाई है मस्ती
आके लग जा गले से अभी

धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा
धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा

सैंया बैंया छोड़ ना, कच्ची कलियाँ तोड़ ना
सैंया बैंया छोड़ ना, कच्ची कलियाँ तोड़ ना

दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
तू है मेरी दिलरुबा क्या लगती है, वाह रे वाह
तू है मेरी दिलरुबा क्या लगती है, वाह रे वाह

धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा
दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
……………………………………………………….
Dhak dhak karne laga-Beta 1992

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Jan 18, 2016

बादल पे चल के आ-विजय १९८८

घोड़े पे बैठ के आना, पालकी में आना, पैदल आना ये
सब बातें इस गीत के आने के पहले थोड़ी ज्यादा सुहानी
लगा करती थीं. फिल्म विजय के गीत ने हमारे लिए बादल
पे चल के आने का रास्ता भी खोल दिया. हम कल्पना
में ही सही किस किस प्रकार के वाहन और कैसी कैसी
दुनिया में घूम आते हैं.

निदा फाजली के लिखे इस गीत की तर्ज़ बनाई है शिव हरी
की जोड़ी ने. इसे गाया है लता संग सुरेश वाडकर ने. जो
कलाकार परदे पर इस गीत को गा रहे हैं वो हैं-ऋषि कपूर
और सोनम. इसके अलावा इसमें एक और पेयर आपको
मिलेगा-अनिल कपूर संग मीनाक्षी शेषाद्री. इसको कहते हैं
इकोनोमी गीत. चार सितारों पर एक ही गीत फिल्माया लिया
गया है. उसके अलावा पर्यावरण प्रेमी गीत है. लगभग हर
मौसम के अलावा हरियाली जितने भी प्रकार की हो सकती है
इस गीत में आप देख सकते हैं. गीत में प्रयुक्त साइकिलों ने
भी कमाल का रोमांटिसिज्म दिखलाया है.




गीत के बोल:

बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
साँसों से मेरी निकल के आ
बाहों में मेरी मचल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
साँसों से मेरी निकल के आ
बाहों में मेरी मचल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
साँसों से मेरी निकल के आ
बाहों से मेरी मचल के आ

शाम होते लहराए मौसम हरे हरे
चांदी सा बरसाए बदल भरे भरे
शाखों पे लहराए मौसम हरे हरे
चांदी सा बरसाए बदल भरे भरे
भीगी हुई इन फिजाओं में
आँखों से संभल के

बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ

मैं हूँ तेरी ज़मीन तू मेरा आसमान
तू मेरी आरजू मैं तेरी जाने-जान
टूटती है खनक बन के अंगडाईयाँ
आ जा बाहों में भर ले तन्हाइयां
मैं हूँ तेरी ज़मीन तू मेरा आसमान
तू मेरी आरजू मैं तेरी जाने-जान
अंचल की चंचल हवाओं में
होंठों पे गीतों सा ढल के आ

बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ

शीशे सी बाहों पे बूँदें रुकी रुकी
पलकों पे शर्माए रातें झुकी झुकी
शीशे सी बाहों पे बूँदें रुकी रुकी
पलकों पे शर्माए रातें झुकी झुकी
जुल्फों की काली घटाओं से मुझ में
नशे सा पिघल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
साँसों से मेरी निकल के आ
बाहों से मेरी मचल के आ

बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
बादल पे चल के आ
सावन में ढल के आ
………………………………………………
Badal pe chalk ke aa-Vijay 1988

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Aug 17, 2015

कसम क्या होती है १-कसम १९८८

एक पुराना गीत है-कसमें वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या.
कुछ के लिए ये दिल्लगी भी हो सकती है तो कुछ के लिए सब
कुछ. कसम खाने का रिवाज फिल्मों में भी कम हो गया है. अब
मोबाइल युग में अधिकाँश ने झूठ बोलना शुरू कर दिया है और
उसके अलावा पुराने ज़माने की माँ कहाँ देखने को मिलती है अब
फिल्मों में. अब आधुनिक ज़माने की माँ है फिल्म में और बच्चे
भी प्रगतिशील हैं जिनकी प्रगति तो आगे की ओर जा रही है शील
कहीं पीछे छूटता जा रहा है. ऐसे में कसमे वस्में कौन खाए और
खा भी ले तो पचाना मुश्किल है.

आपको सुनवाते हैं कसम पर बना एक प्रमाणिक सा गीत, प्रमाणिक
इसलिए कि इसके बाद कसम के ऊपर बना इतना दमदार गीत मुझे
सुनाई नहीं दिया. हो सकता है बना हो मगर मेरे कानों तक नहीं
पहुंचा. वो तो मैंने इमानदारी से यहाँ लिख दिया, वरना, आप दूसरे
ब्लॉग पर इसकी उम्मीद ना करें. कोई भी अपनी अनभिज्ञता जाहिर
नहीं करता और अपनी कमियां ढांक के रखने की सलाह तो प्रसिद्ध
राजनीतिकार चाणक्य भी दे चुके हैं. आप अगर अलग अलग ब्लॉग
पढते होंगे तो ये ज़रूर महसूस करते होंगे कि जानकारियां अलग
अलग तरह से प्रस्तुत होती हैं सभी जगह. अगर कहीं पर एक गलती
है तो वो अधिकाँश जगह पर दोहराई हुई मिलेगी. वैसे आप फिल्म का
नाम कहीं पर Qasam तो कहीं पर Quasam लिखा हुआ पाएंगे.

गीत इन्दीवर का लिखा और बप्पी लहरी का स्वरबद्ध किया हुआ है.
इसे नितिन मुकेश और आशा भोंसले ने गाया है. ये नितिन मुकेश
वाला संस्करण है.





गीत के बोल:

कसम क्या होती है कसम वो होती है
जो तोड़ी ना जाए बिछोड़ा ना पाए
कसम क्या होती है कसम वो होती है
जो तोड़ी ना जाए बिछोड़ा ना पाए

यार बिछड़ने लगते हैं तो रब की आँख भी रोती है
कसम क्या, कसम क्या
कसम क्या होती है कसम वो होती है
जो तोड़ी ना जाए बिछोड़ा ना पाए

तेरी कसम तू हमसे जो रूठी जां से गुज़र जाएंगे ही
हो तेरी हाँ से जी उठेंगे ना से मर जाएंगे ही
बात बात में कसम क्या खाना कसम मज़ाक नहीं है
कसम है जितनी पाक चीज़ कोई उतनी पाक नहीं है
दिलों का संगम है हो कसम गंगाजल है
दिलों का संगम है हो कसम गंगाजल है
प्यार पे दाग जो लग जाए तो अपने लहू से धोती है
कसम क्या, कसम क्या
कसम क्या होती है कसम वो होती है
जो तोड़ी ना जाए बिछोड़ा ना पाए

दिलों के लिए ज़रूरी नहीं है दुनिया की मंज़ूरी
कसम प्यार की नहीं मानती जन्मों की भी दूरी
तन्हाई को महकाती है यादों की कस्तूरी
कसम है वो जो हर हालत में की जाती है पूरी
कसम इक गीता है कसम वो सीता है
कसम इक गीता है कसम वो सीता है
राजमहल के छोड़ के सुख जो अंगारों पे सोती है
कसम क्या, कसम क्या
कसम क्या होती है कसम वो होती है
जो तोड़ी ना जाए बिछोड़ा ना पाए
................................................................................
Kasam kya hoti hai-Kasam 1988

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Mar 9, 2015

यार बिना चैन कहाँ रे-साहेब १९८५

जिंदगी का फलसफा अजीब है, पेचीदा भी और टेढा मेढा भी.
जिसके पास चैन नहीं वो बेचैन . जिसके पास कार नहीं वो बेकार .
चैन ज़रूरी है जीवन में. बिना उसके सब बेकार है. आज आपको
चैन वाली थीम पर एक गीत सुनवा रहे हैं. गीत फिल्म साहेब से
है जिसे गा रहे हैं बप्पी लहरी और एस जानकी ने.

सन १९९६ में मुंबई में माइकल जैक्सन का कार्यक्रम हुआ था.
माइकल ने विशेष रूप से बप्पी को बुलाया था उस कार्यक्रम में.
माइकल को बप्पी के दो चीज़ें पसंद आयीं. एक तो डिस्को डांसर
का गाना-जिमी जिमी और दूसरी बप्पी के गले में पड़ी चेन. अब
आप समझ ही गए होंगे चेन सबको पसंद है. बप्पी लहरी की वो
चेन उनके लगभग सभी प्रशंसकों को पसंद है. सोना पहनना उनका
शौक है

साहेब १९८५ की फिल्म है जिसमें अनिल कपूर एक बेरोजगार मगर
फ़ुटबाल प्रेमी की भूमिका में हैं. उनके सामने वाले मकान में एक
खूबसूरत लड़की रहने आई है, वे उससे प्रेम करने लगते हैं. एक
अजीब थ्योरी के अनुसार बेरोजगारों को सबसे ज्यादा प्रेमरोग नामक
बीमारी होती है. ऐसा शायद इसलिए है कि करने के लिए कुछ और
होता नहीं है, प्रेम ही करो.

गीत लिखा है अनजान ने और धुन बप्पी लहरी ने बनाई है. ये गीत
अपने समय का हिट गीत माना जाता है.



गीत के बोल:

यार बिना चैन कहाँ रे
सोना नहीं चाँदी नहीं यार तो मिला
अरे प्यार कर ले

कोई नया सपना निगाहों में तो है
कोई नया साथी नयी राहों में तो है
दिल जो मिलेंगे तकदीर बनेगी
जिंदगी की नयी तस्वीर बनेगी
प्यार में ये दिल बेक़रार कर ले

यार बिना चैन कहाँ रे
सोना नहीं चाँदी नहीं यार तो मिला
अरे प्यार कर ले

यार हमें पैसा नहीं प्यार चाहिए
कोई मनचाहा दिलदार चाहिए
हीरे मोतियों से जहाँ दिल ना तुले
सपनों का ऐसा संसार चाहिए
ये भी होगा थोड़ा इंतज़ार कर ले

यार बिना चैन कहाँ रे
सोना नहीं चाँदी नहीं यार तो मिला
अरे प्यार कर ले
अरे प्यार कर ले
.............................
Yaar Bina Chain Kahan Re-Saheb 1985

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Oct 1, 2013

क्या खबर क्या पता-साहेब १९८५

फिल्म साहेब से एक दर्दीला और दर्शनवादी गीत प्रस्तुत
है आज. अनिल कपूर अभिनीत ये फिल्म साफ़ सुथरी
फिल्म है. नायक को जिंदगी का मकसद मिल जाता है
और नेपथ्य में ये गीत बज रहा है. दृश्य देखने लायक
है फिल्म का. जिंदगी के फलसफा अनजान के शब्दों में
सुनिए. किशोर कुमार के गाये इस गीत की धुन बप्पी
लहरी ने बनायीं है और उनकी बेहतर धुनों में से एक है.
गीत किशोर भक्तों द्वारा बहुत पसंद किया गया, इनमें वे
भी शामिल है जिनके मुंह से बप्पी के लिए तारीफ़ नहीं
के बराबर निकलती है.
   




गीत के बोल:

क्या खबर क्या पता क्या खुशी है गम है क्या
क्या खबर क्या पता क्या खुशी है गम है क्या
ले के आंसू जो हंसी दे गम के बदले जो खुशी दे
राज़ ये जाना उसी ने जिंदगी क्या है जिंदगी
क्या खबर क्या पता क्या खुशी है गम है क्या

अपने दिल का दर्द ये उम्र भर हंस कर पिए
जीना उसका जीना है जो औरों की खातिर जिए
अपने दिल का दर्द ये उम्र भर हंस कर पिए
जीना उसका जीना है जो औरों की खातिर जिए
काम ले जिंदादिली से यूँ ही खेले जिंदगी से
राज़ ये जाना उसी ने जिंदगी क्या है जिंदगी

क्या खबर क्या पता क्या खुशी है गम है क्या
ले के आंसू जो हंसी दे गम के बदले जो खुशी दे
राज़ ये जाना उसी ने जिंदगी क्या है जिंदगी
क्या खबर क्या पता क्या खुशी है गम है क्या
………………………………………
Kya Khabar Kya Pata-Saheb 1985

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Jun 12, 2011

रूठ न जाना-१९४२ ऐ लव स्टोरी १९९३

सभी फिल्म निर्देशक जब कोई पीरियड फिल्म या ऐतिहासिक
फिल्म बनाते हैं तो दावा करते हैं की उन्होंने उस समय पर काफी
रिसर्च की। ऐसा ही इस फिल्म के मामले में भी हुआ। उस समय के
माहौल, पहनावे इत्यादि पर भले ही रिसर्च की गई हो, कहीं कहीं
ऐसा महसूस होता है जैसे ये १९८४ का युग का कोई दृश्य १९४२ की
बनी हुई पालिश से पोत के पेश कर दिया गया हो।

विधु विनोद चोपड़ा की फिल्मों का छायांकन बढ़िया होता है। आइये
देखें और सुनें १९४२ एक प्रेम कथा फिल्म से तीसरा गीत जो कुमार सानू
की आवाज़ में है। जावेद अख्तर का लिखा गीत आर डी बर्मन द्वारा
संगीतबद्ध है।





गीत के बोल:

रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
तुम ये जानो या न जानो
तुम ये मानो या न मानो
मेरे जैसा दीवाना तुम पाओगे नहीं
याद करोगे मैं जो न हूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो

मेरी ये दीवानगी कभी न होगी कम
जितने भी चाहे तुम कर लो सितम
मुझसे बोलो या न बोलो
मुझको देखो या न देखो
ये भी माना मुझसे
मिलने आओगे नहीं
सारे सितम हंस के में सहूँ तो
रूठ न जाना तुमसे कहूं तो

प्रेम के दरिया में लहरें हज़ार
लहरों में जो भी डूबा हुवा वोही पार
प्रेम के दरिया में लहरें हज़ार
लहरों में जो भी डूबा हुवा वोही पार
ऊँची नीची, नीची ऊँची
नीची ऊँची ऊँची नीची
लहरों में तुम देखूं कैसे आओगे नहीं
में इन लहरों मैं जो रहूँ तो

रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
तुम ये जानो या न जानो
तुम ये मानो या न मानो
मेरे जैसा दीवाना तुम पाओगे नहीं
याद करोगे मैं जो न हूँ तो
रूठ न जाना तुम से कहूं तो
मैं इन आँखों में जो रहूँ तो
..................................
Rooth na jaana-1942 a love story

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May 19, 2011

बटाटा वडा-हिफाज़त १९८७

आपको सन १९४१ के गीत के जिक्र के वक़्त बताया था कि फिल्म निर्माण
की तकनीक ने इस कदर विकास किया कि ज़मीन पर रेंगते रेंगते गीत गाते
नायक नायिका हवा में उड़ कर भी गीत गाने लगे। विशेष प्रभावों के माध्यम
से ये संभव हुआ। प्रस्तुत गीत में भी एक ऐसा ही प्रभाव है।

लगभग सभी खाने पीने की चीज़ें गीतों के माध्यम से बोलिवुडियों ने याद
कर ली हैं। बॉलीवुड की उत्पत्ति हुई है बम्बई में तो बटाटा वडा कैसे
भुलाया जा सकता है। आम और ख़ास दोनों वर्गों को समान रूप से प्रिय
ये बम्बैया खाना आपको शहर में हर जगह आसानी से और उत्तम गुणवत्ता
वाला मिल जायेगा। इसे जनता नाश्ते और खाने में जैसे चाहे खाती है,
चटनी के साथ, बिना चटनी के।

फिल्म में कहानी कुछ यूँ है-नायक नायिका एक बटाटा वडे की दुकान
पर पहुँच जाते हैं, वहां बटाटा बड़े बनाने वाली महिला वडे के मसाले
में गलती से भांग डाल देती है। भांग वाले वडे खाने के बाद क्या होता है
वो इस गीत में आप देखिये। गीत का मसाला तैयार किया है आनंद बक्षी
ने और इसको धुन में तल कर स्वादिष्ट बनाया है आर डी बर्मन ने। गाने
वाले कलाकार हैं-एस पी बालसुब्रमण्यम और एस जानकी ।





गीत के बोल:

बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा

बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
प्यार नहीं करना था, करना पड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा

बटाटा वडा, बटाटा वडा

होते जो होश मं हम
ऐसे ना झूम जाते
अच्छा यही था पहले
हम तुम ना पास आते
हो ओ ओ ओ ओ
अब दूर जाना है मुश्किल बड़ा

बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, डा डा डा डा डा
बटाटा वडा

लगता है आज दिल के
अरमान निकाल रहे हैं
कैसी है आग जिस में
हम दोनों जल रहे हैं

जा ठन्डे पानी का
ले आ तू घड़ा

बटाटा वडा है
बटाटा वडा हा हा हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
हो हो हो हो हो हो हो

बटाटा वडा, बटाटा वडा

मस्ती में दिल की कश्ती
जाये ना डूब अपनी
डूबे के पार उतरे
जोड़ी है खूब अपनी
तू भी है कंवारी
मैं भी हूँ छडा, हा हा हा हा हा

बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा आ हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा, टा वडा
टा वडा

........................
Batata Wada-Hifazat 1987

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Apr 11, 2011

पीना हराम है ना पिलाना हराम है-चमेली की शादी १९८६

मार्च के महीने के अंत में दारू(विलायती, देसी) के ठेके अपने अंतिम
चरण में होते हैं। स्टॉक ख़त्म करने के चक्कर में पुराने ठेकेदार अपना
माल सस्ती दरों में भी बेच दिया करते हैं। उस समय तो साहब
दारुडियों का ये हाल होता है-पाँचों उँगलियाँ घी में, पैर चूल्हे में और
सर कढ़ाई में। कुछ कुछ लोग तो इस हिसाब से सेवन करते हैं मानो
एक साल की क़सर निकाल रहे हों।

आज आपको एक किशोर कुमार का गाया हुआ एक मस्त गीत सुनवाते
हैं, होली की क़सर जो निकालनी है। गीत फिल्म का निर्देशन बासु चटर्जी ने।
एक घासलेटी सी प्रेम कहानी जो हमारे इर्द गिर्द अक्सर सुनाई देती है अलग
अलग डेंसिटी में, उसका जीवंत और वास्तविक चित्रण इस फिल्म में है और
चाहे फिल्म समीक्षक इसको कोई भी दर्ज़ा प्रदान करें, इसे सिनेमा इतिहास
की सर्वाधिक मनोरंजक फिल्मों में गिना जाता है। फिल्म का निर्देशन बासु
चटर्जी ने किया है।

इस फिल्म के पहलुओं पर काफ़ी चर्चा होना बाकी है। पढ़ते रहिये ये ब्लॉग।
पर अनिल कपूर के अलावा जो अन्य कलाकार हैं उनके नाम हैं-हुमा खान
और अनु कपूर। गायक कलाकार हैं-अलका याग्निक और किशोर कुमार ।



गीत के बोल:

पीना हराम है ना पिलाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना , लडखडाना
हाँ लडखडाना हराम है

हाँ,पीना हराम है ना पिलाना हराम है
पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना , बहक जाना
डगमगाना हराम है

नशा,
नशा देखा लाल पानी में देखा अनूठा
नशा देखा लाल पानी में देखा अनूठा
पी के दो घूँट गला घोंट दो ग़मों का
घोंट दो गला
पीने के बाद नज़र आये ना धोखा
खुल जाये भेद दोस्तों दुश्मनों का
तू ही मेरा जिगरी यार है
तुझको जिसपे इतना प्यार है
प्यार ये दिल के आर पार है
दिल तुझपे लट्टू
आंख वही है नाक वही है
बाल वही है चाल वही है
हाँ तू नटवरलाल वही है
मेरा यार नट्टू, निखट्टू

मस्ती है जाम है
हाँ मस्ती है जाम है
हाँ कितना आराम है
हाँ मस्ती है जाम है
हाँ कितना आराम है
पीने के बाद प्यारे
तडफडाना, तिलमिलाना
छटपटाना हराम है

पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
तडफडाना, तडफडाना
तडफडाना हराम है

हो, जो पीना है तो प्यार के जाम पीना
जो पीना है तो प्यार के जाम पीना

नशा जिसका मरके भी उतरे कभी ना
क्या बात कही
जो ले डूबे तुझको वो पीना क्या पीना
बेहोश हो के भी जीना क्या जीना
सुबह भुला दे शाम भुला दे
दुनिया का हर काम भुला दे
क्या होगा अंजाम भुला दे
जाम का ये जादू
नाम बदल के दे जो झांसा
झांसे से कितनों को फांसा
आखिर उल्टा पढ़ गया पासा
बना तमाशा तू

मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ क्यूँ
हाँ, मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ पीना इलज़ाम है
हाँ, मय क्यूँ बदनाम है
क्यूँ पीना इलज़ाम है

पीने के बाद प्यारे
हडबड़ाना, गड़बढ़ाना
बडबडाना हराम है

पीना हराम ना पिलाना हराम है
पीने के बाद प्यारे
लडखडाना, ऐ तडफडाना
हो बडबडाना हराम है

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Nov 13, 2010

पायली चुनमुन चुनमुन-विरासत १९९७

चीख-पुकार, चिल्ला-पों वाली फ़िल्में बनाने के अलावा
प्रियदर्शन की कई खूबियाँ हैं। उनका फिल्मांकन हरे
चश्मे से होता है। हरे चश्मे से मतलब उनके द्वारा दिखाए
जाने वाले दृश्य दर्शक को सुन्दर और लुभावने दिखाई देते हैं।

उदाहरण के लिए ये गीत प्रस्तुत है जिसमे भी थोडा शोरगुल
मौजूद है लेकिन नायिका को उन्होंने उसकी कल्पना से कहीं
अधिक सुन्दर बना दिया है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें ये
पोस्ट- तारे हैं बाराती-विरासत १९९७

आइये अब विरासत के दूसरे गीत पर बात छेड़ी जाए जिसे
थोडा अलग हट के दिखने का भरसक प्रयत्न किया गया है।
इसकी ध्वनियाँ दक्षिण भारतीय प्रतीत होती हैं मगर बोल
उत्तर भारतीय हैं। इसी को तो हम कह सकते हैं गंगा-जमुना
का संगम।

गीत में तब्बू भी मौजूद हैं जो अभिनय के मामले में इस फिल्म
के नायक , सहनायक, सहनायिकाओं पर भारी पढ़ती हैं।
उनके चेहरे के भाव ऐसे हैं जैसे नर्सरी की क्लास का कोई बच्चा
"क का कि की" बोलना सीख रहा हो। थोड़ी देर बाद वाले भाव
ऐसे हैं जैसे कोई पड़ोस के सीट पर बैठा बच्चा उनके हाथ पर
बैठ गया हो। कहते हैं चेहरे पर भाव लाने में चेहरे की बनावट
और तीखे नाक नक्श सहायक होते हैं। साधारण से चेहरे मोहरे
वाली तब्बू पर ये बात लागू नहीं होती। उनको अभिनय क्षमता
शायद विरासत में मिली हुई है । गीत लिखा है जावेद अख्तर ने
और धुन तैयार की है अन्नू मालिक ने। इसको गया है कुमार सानू
और चित्रा ने।



गीत के बोल:

पायली चुनमुन चुनमुन
झांझरी रुनझुन रुनझुन

पायलें छुनमुन छुनमुन
झाँझरें रुनझुन रुनझुन
कितना मधुर है ये मिलन

छन छनन छन चूड़ी बोले
सन सनन सन पुरवा डोले
गूंजे ये धरती और गगन

पायलें छुनमुन छुनमुन
झाँझरें रुनझुन रुनझुन
कितना मधुर है ये मिलन

कभी चलती हो छम छम
कभी चलती हो थम थम
धड़कता दिल है धम धम
जो प्यार में
आ आ
नदी बहती है झर झर
आ आ आ
हवा कहती है सर सर
आ आ आ आ
है फैली बात घर घर
आ आ
बेकार में
आ आ
गोरिया गाये गुन गुन
साजना झूमे सुन सुन
प्यार में खोये है ये मन

पायलें छुनमुन छुनमुन
झाँझरें रुनझुन रुनझुन
कितना मधुर है ये मिलन

ये बैयाँ गोरी गोरी
मैं थामू चोरी चोरी
ज़रा सुन ओ री ओ री, सुन तो ज़रा
आ आ
रहे तू मेहेकी मेहेकी
आ आ आ
चले तू बहकी बहकी
आ आ आ आ
लगे तू लहकी लहकी
आ आ आ
सुन थो सदा
आ आ
लाऊं मैं कलियाँ चुन चुन
बाजे एक तारा थुन थुन
दोनों ही सुनके हों मगन

पायलें छुनमुन छुनमुन
झाँझरें रुनझुन रुनझुन
कितना मधुर है ये मिलन
.....................................................
Payli chunmun chunmun-Virasat 1997

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Nov 3, 2010

दिल का पंछी बोले कू कू कू कू -अंदाज़ १९९३

मानव ह्रदय के साथ कवियों ने तरह तरह की कल्पनाएँ जोड़ीं हैं।
अक्सर आपने पढ़ा सुना होगा दिल का तोता- मयूर, दिल का पंछी,
इत्यादि। कभी अपने दिल का गधा ,दिल का कुत्ता, दिल का हाथी या
दिल का दरियाई घोडा शब्द नहीं सुने होंगे। मानव ह्रदय तकरीबन
३०० ग्राम वजन का होता है। वैसे इसके अन्दर समाने की इच्छा कई
गीतों में ज़ाहिर हो चुकी है। किसी गीत में तो इसको खाली कमरा बताकर
इसके भीतर आने का निवेदन किया गया है। दिल में पंछी को जगह दी
गई, इसमें किसी चौपाहे के लिए जगह नहीं है। एक्स्ट्रा लार्ज आकार के
पक्षी जैसे सारस, पेंगुइन और ओस्त्रिच के लिए भी इसमें जगह नहीं है।
इसकी एक वजह ये भी हो सकती है की हिंदी फ़िल्मी कवि कभी न्यूजीलैंड
या अन्टार्क्टिका नहीं गया होगा। आइये एक गीत सुनें इसमें दिल का
पंछी कैसी आवाजें निकाल रहा है गौर फरमाएं। इस गाने में इतनी ज्यादा
कू कू कू है कि इसको सुनकर फिल्म खलनायक का वो चर्चित चोली गीत
भी शर्मा जाए।



गीत के बोल:

कू कू कू कू कू
कू कू कू कू कू
कू कू कू कू कू

दिल का पंछी बोले कू कू कू कू
साँसों की बंसी बोले कू कू कू कू
तेरा भी दिल बोले कू कू कू कू
मेरा भी दिल बोले कू कू कू कू

मुझको पसंद तेरी कू कू कू कू
तुझको पसंद मेरी कू कू कू कू
जो था ख्वाब में है वो सामने
रोज करेंगे हम कू कू कू कू कू कू कू

दिल का पंछी बोले कू कू कू कू
साँसों की बंसी बोले कू कू कू कू
तेरा भी दिल बोले कू कू कू कू
मेरा भी दिल बोले कू कू कू कू

मैं तो मैं हूँ सारा जहाँ चाहे तुझे
अच्छा है नसीब मेरा पाया तुझे
मैं तो मैं हूँ सारा जहाँ चाहे तुझे
अच्छा है नसीब मेरा पाया तुझे

आ गई अदा तेरी पसंद मुझे
कर लिया तूने रजामंद मुझे

जब ख्वाब में है वो सामने
रोज करेंगे हम कू कू कू कू कू कू कू

दिल का पंछी बोले कू कू कू कू
साँसों की बंसी बोले कू कू कू कू
तेरा भी दिल बोले कू कू कू कू
मेरा भी दिल बोले कू कू कू कू

मुझको पसंद तेरी कू कू कू कू
तुझको पसंद मेरी कू कू कू कू
बीना था ख्वाब में है वो सामने
रोज करेंगे हम कू कू कू कू कू कू कू

दिल का पंछी बोले कू कू कू कू
साँसों की बंसी बोले कू कू कू कू

कू कू कू कू कू कू कू कू कू कू
कू कू कू कू कू कू कू कू कू कू

तेरे बिना ज़िन्दगी अधूरी मेरी
कर दे तू हर कमी पूरी
तेरे बिना ज़िन्दगी अधूरी मेरी
कर दे तू हर कमी पूरी

तेरे लिए कुछ भी मैं कर जाऊं
जीना तो जीना है कहे मर जाऊं

जो था ख्वाब में है वो सामने
रोज करेंगे हम कू कू कू कू कू कू कू

दिल का पंछी बोले कू कू कू कू
साँसों की बंसी बोले कू कू कू कू
तेरा भी दिल बोले कू कू कू कू
मेरा भी दिल बोले कू कू कू कू

मुझको पसंद तेरी कू कू कू कू
तुझको पसंद मेरी कू कू कू कू
जो था ख्वाब में है वो सामने
मिल के करेंगे हम कू कू कू कू कू कू कू

दिल का पंछी बोले कू कू कू कू
साँसों की बंसी बोले कू कू कू कू
तेरा भी दिल बोले कू कू कू कू
मेरा भी दिल बोले कू कू कू कू

कू कू कू कू कू कू कू कू कू कू
कू कू कू कू कू कू कू कू कू कू

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Mar 6, 2010

एक लड़की को देखा तो-१९४२ ए लव स्टोरी १९९४

इस गीत को याद रखने की एक ख़ास वजह है। मेरी जानकारी
का एक व्यक्ति इसको यूँ गाया करता - "एक लुड़की को देखा तो
ऐसा लगा" । सही भी था, अक्सर प्यार में लोग लुड़क जाया करते
हैं। प्यार इश्क और मोहब्बत की खुमारी मदिरा की खुमारी से ज्यादा
चढ़ जाती है। वैसे इस गाने को याद रखने के पीछे और भी कारण हैं,
मसलन इसकी तुकबंदी, इसकी जुबान पर चढ़ जाने वाली धुन। ये गीत
फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत साबित हुआ। कुछ कुछ पुराने ज़माने
से संगीत के प्रभाव से लिप्त इस फिल्म का संगीत काफी लोकप्रिय हुआ।
इस गीत में कुमार सानू को "हो" करने का अच्छा मौका मिला है जिसे वे
विशेष अंदाज़ में गाते हैं। बोलों में अगर कोई विशेष चीज़ है तो वो है
"संदल की आग "


गीत के बोल:

हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
जैसे खिलता गुलाब
जैसे शायर का ख्वाब
जैसे उजली किरण
जैसे वन में हिरन
जैसे चांदनी रात
जैसे नगमे की बात
जैसे मंदिर में हो एक जलता दिया
हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा


हो एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
जैसे सुबहों का रूप
जैसे सर्दी की धूप
जैसे वीणा की तान
जैसे रंगों की जान
जैसे बलखाये बेल
जैसे लहरों का खेल
जैसे ख़ुशबू लिए आये, ठंडी हवा
हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा

हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा
जैसे नाचता मोर
जैसे रेशम की डोर
जैसे परियों का राग
जैसे संदल की आग
जैसे सोला सिंगार
जैसे रस की फुहार
जैसे आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता नशा
हो, एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा

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Jan 30, 2010

हेड या टेल -दीवाना मस्ताना १९९७

कहते हैं ब्लॉग जगत में-बिन टिप्पणी सब सून। सही भी है। जहाँ ज्यादा
चटके लगे हों, वो जगह ज्यादा प्रसिद्ध मानी जाती है। किसी ने सुझाव
दिया कि ब्लॉग पर गुड चिपकाओ तब मक्खियाँ आएँगी। उस सुझाव पर
अमल करते हुए हमने भी ब्लॉग की पोषाक बदल डाली। अभी तक किसी
भी प्रतिक्रिया के प्राप्त ना होने कि अवस्था में हम ये मान लेते हैं कि पचास
फ़ीसदी को पोषक पसंद आई, पचास को नहीं। मतलब ये कि सिक्का खड़ा
है अभी तक।

हेड या टेल पर भी एक गाना है हिंदी फिल्म में। वो है दीवाना मस्ताना
में, जो एक कॉमेडी फिल्म है अनिल कपूर और गोविंदा की। जूही चावला
ने फिल्म में नायिका की भूमिका निभाई है। फिल्म का सार एक लाइन में-
"एक अनार दो बीमार " का मिश्रण "everything is fair in love and war"
के साथ। दिमाग के तार झनझना देता है ये गीत। नए गायकों में से एक जो
बुलंद आवाज़ के स्वामी हैं-विनोद राठोड वो इस गाने को गाना शुरू
करते हैं। प्रस्तुत गीत के संगीतकार हैं-लक्षीकान्त प्यारेलाल। दुसरे
गायक हैं उदित नारायण। अनिल कपूर शायद मिस्टर इंडिया ब्रांड टोपी
से मुक्त नहीं हो पाएंगे। उनके अलावा ऐसी टोपी सिर्फ राज कपूर के सर
पे जंचा करती थी। जी नहीं हम चार्ली चैप्लिन की बात नहीं कर रहे हैं
क्यूंकि ये हिंदी फिल्मों वाला ब्लॉग है। चार्ली एक बहुत महान कलाकार
थे और उनके सर की टोपी का मुकाबला करने वाले संपूर्ण विश्व के सिनेमा
में इक्का दुक्का हुए हैं जिनमे हमारे देश का कोई भी नहीं है। इसपर चर्चा
फिर कभी, फिलहाल इस गीत को सुनिए।





गीत के बोल:

ला रा ला, इश्क हज़ारों करते हैं पर
आशिक सब का नाम नहीं
ये सब के बस का काम नहीं

हेड या टेल, हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
इस खेल में कोई है पास
इस खेल में कोई है पास
कोई है पास तो कोई है फ़ैल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
इस खेल में कोई है पास
इस खेल में कोई है पास
कोई है पास तो कोई है फ़ैल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल

दो दिलों के बीच में जो आएगा, आएगा
मुफ्त में बेमौत मारा जाएगा
दो दिलों के बीच में जो आएगा, आएगा
मुफ्त में बेमौत मारा जाएगा
देखता ही राह जाएगा विल्लेन
देखता ही राह जाएगा विल्लेन
हीरो हिरोइन को ले जाएगा
हो आज हो या कल
होगा दो दिलों का मेल
होगा दो दिलों का मेल

हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
हेड या टेल, हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
इस खेल में कोई है पास
इस खेल में कोई है पास
कोई है पास तो कोई है फ़ैल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल

बड़े बड़े हार गए इस खेल में
इस खेल में
थोड़े पागलखाने गए थोड़े जेल में
थोड़े जेल में
अरे बड़े बड़े हार गए इस खेल में
थोड़े पागलखाने गए थोड़े जेल में
दरिया में डूब गया था महिवाल
दरिया में डूब गया था महिवाल
रांझे का हो गया था मजनू सा हाल
रोमियो का हो गया था हार्ट फ़ैल
हो गया था हार्ट फ़ैल

हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
इस खेल में कोई है पास
इस खेल में कोई है पास
कोई है पास तो कोई है फ़ैल
हेड या टेल हेड या टेल
प्यार मोहब्बत दिल का खेल
हेड या टेल हेड टेल

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Nov 18, 2009

नैना ये बरसें -मोहब्बत १९८५

गाँव की पृष्ठभूमि पर बनी ये फ़िल्म हास्य दृश्यों से भरपूर थी। ये गीत
एक दर्द भरा गीत है और नायिका जिस पर फिल्माया गया है वो हैं
विजेयता पंडित। सुलक्षणा पंडित की छोटी बहन विजेयता कुछ फिल्मों
में आई और गायब हो गई। फ़िल्म लव स्टोरी में वे कुमार गौरव की
नायिका थीं ।

लव स्टोरी के बाद उनकी कोई फ़िल्म आई हो मुझे ध्यान नहीं पढता। इस
फ़िल्म में निर्देशक ने उनको रोते हुए ज्यादा दिखाया है । गीत की धुन
आकर्षक है और दृश्यावली भी सुन्दर है जिसे और बेहतर बनाया जा
सकता था ।



गाने के बोल:

नैना ये बरसें, मिलने को तरसें
सही जाए न जुदाई, हो

नैना ये बरसें, मिलने को तरसें
सही जाए न जुदाई, हो

ख़ुद को भुला देंगे, तब तुझे भूलेंगे हम

हो, नैना ये बरसें, मिलने को तरसें
सही जाए न जुदाई, हो

हमदम माना तुझसे मिल न पायेंगे हम
हो, प्यार फ़िर भी न होगा तुझसे कम

हमदम माना तुझसे मिल न पायेंगे हम
हो, प्यार फ़िर भी न होगा तुझसे कम

ख़ुद को भुला देंगे, तब तुझे भूलेंगे हम

हो, नैना ये बरसें, मिलने को तरसें
सही जाए न जुदाई, हो

मोहब्बत, मोहब्बत, मोहब्बत
मोहब्बत, मोहब्बत

ऐसे हम को तुम भुला ही देना ऐसे
हो, भूले, सपनों को सवेरा जैसे

ऐसे हम को तुम भुला ही देना ऐसे
हो, भूले, सपनों को सवेरा जैसे

ख़ुद को भुला देंगे, तब तुझे भूलेंगे हम

हो, नैना ये बरसें, मिलने को तरसें
सही जाए न जुदाई, हो

ख़ुद को भुला देंगे, तब तुझे भूलेंगे हम


हो, नैना ये बरसें, मिलने को तरसें
सही जाए न जुदाई, हो
..................................................................
Naina ye barsen-Mohabbat 1985

Artists: Vijeyta Pandit, Anil Kapoor

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Nov 17, 2009

तारे हैं बाराती -विरासत १९९७

अन्नू मलिक ने दूसरे संगीतकारों की भांति सभी प्रकार का
संगीत दिया है, बुरा भी और अच्छा भी। फ़िल्म विरासत में
उन्होंने कुछ अच्छी धुनें बनाई हैं।

प्रियदर्शन को, सिनेमा के फ्रेम को सुंदर कैसे बनाया जाए, उसकी
बहुत गहरी समझ है। ये उनकी लगभग सभी फिल्मों में मैंने
महसूस किया है। उनकी फिल्मों की एक और विशेषता है कि
शोरगुल इतना होता है कि सिनेमा हाल के दर्शकों के लिए वे
शोर करने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ते ।

प्रस्तुत गीत में उनका 'वन पॉइंट प्रोग्राम' – अभिनेत्री पूजा बत्रा
को सुंदर दिखाना सफल रहा है। वैसे भी लाल जोड़े में सामान्य
सी दिखने वाली बालाएं भी सुंदर दिखाई देने लगती हैं। गीत
गाया है कुमार सानू और जसपिंदर नरूला ने और गीतकार हैं
जावेद अख्तर !!




गाने के बोल:


अँखियाँ मिला के चन्ना
आवी न जुदाई वे

देवे न तारी मेनू
सारी खुदाई वे
अँखियाँ मिला के

तारे हैं बाराती,चाँदनी है यह बारात
सातों फेरे होंगे अब हाथो में लेकर हाथ
सातों फेरे होंगे अब्ब हाथो में लेकर हाथ
जीवन साथी हम दिया और बाती हम
रे जीवन साथी हम दिया और बाती हम

तारे हैं बाराती,चाँदनी है यह बारात
सातों फेरे होंगे अब हाथो में लेकर हाथ
सातों फेरे होंगे अब हाथो में लेकर हाथ
जीवन साथी हम दिया और बाती हम
जीवन साथी हम दिया और बाती हम

तारे हैं बाराती,चाँदनी है यह बारात

सातो फेरे होंगे अब हाथो में लेकर हाथ
जीवन साथी हम दिया और बाती हम

गंगा जमुना से भी पावन
तेरा मेरा बंधन
तेरा प्रेम फुलवारी और मेरा प्रेम है अगन
जन्मो जन्मो का ही सजनी तेरा मेरा साथ

सातों फेरे होंगे अब हाथो में लेकर हाथ
जीवन साथी हम दिया और बाती हम
जीवन साथी हम दिया और बाती हम

तू है जीवन में जो प्रीतम
सुख नही मांगूं दूजा
आरती नैनों से करती हूँ मन से तेरी पूजा
में तो धर्म ही समझूं तेरी कही हुई हर बात

सातों फेरे होंगे अब हाथो में लेकर हाथ
जीवन साथी हम दिया और बाती हम
जीवन साथी हम दिया और बाती हम

तारे हैं बाराती,चाँदनी है यह बारात

सातो फेरे होंगे अब हाथो में लेकर हाथ
जीवन साथी हम दिया और बाती हम

अँखियाँ मिला के चन्ना
आवी न जुदाई वे

देवे न तारी मेनू
सारी खुदाई वे
अँखियाँ मिला के
........................................................
Taare hain baarati-Virasat 1997

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