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Oct 22, 2016

न हँसो हमपे ज़माने के हैं-गेटवे ऑफ इण्डिया १९५७

लता मंगेशकर क गीतों की बात चले और मदन मोहन का जिक्र
ना आये ये संभव नहीं है.

सुनते हैं फिल्म गेटवे ऑफ इण्डिया से एक मधुर गीत जिसमें
दर्द का पुट है. राजेंद्र कृष्ण के बोल हैं. एक कहानी की मानिंद
गीत जीवन के उतार चढ़ाव को बयां करता चलता है और एक
उम्मीद के साथ पूर्ण होता है. यही इसकी खूबसूरती है. उसके
अलावा जिस नायिका पर इसे फिल्माया गया है वो भी बेहद
खूबसूरत है.

एक्टिंग में दो चीज़ें होती हैं-ओवरएक्टिंग और अंडरप्ले. दोनों एक
दूसरे की विपरीत चीज़ें हैं. अंडरप्ले केवल मंजे हुए कलाकार के
बस में होता है. वैसे तो कभी कभी मंजे हुए कलाकार भी जबरिया
एक्टिंग करते नज़र आते हैं.

फ़िल्मी नायिकाओं में वहीदा रहमान और मधुबाला का कोई सानी
नहीं हैं अंडरप्ले के मामले में. गीत के आखरी अंतरे में जो भाव
हैं नायिका के चेहरे पर उससे आपको समझ आ जायेगा मैं क्या
कहना छह रहा हूँ.




गीत के बोल:

न हँसो हमपे ज़माने के हैं ठुकराए हुए
दर-ब-दर फिरते हैं तक़दीर के बहकाए हुए
न हँसो हमपे ज़माने के हैं ठुकराए हुए

क्या बताएँ तुम्हें कल हम भी चमन वाले थे
क्या बताएँ तुम्हें कल हम भी चमन वाले थे
ये न पूछो कि हैं वीराने में क्यों आए हुए

न हँसो हमपे ज़माने के हैं ठुकराए हुए

बात कल की है के फूलों को मसल देते थे
बात कल की है के फूलों को मसल देते थे
आज काँटों को भी सीने से हैं लिपटाए हुए

न हँसो हमपे ज़माने के हैं ठुकराए हुए

ऐसी गर्दिश में न डाले कभी क़िस्मत तुमको
ऐसी गर्दिश में न डाले कभी क़िस्मत तुमको
आपके सामने जिस हाल में हैं आए हुए

न हँसो हमपे ज़माने के हैं ठुकराए हुए

एक दिन फिर वही पहली सी बहारें होंगी
एक दिन फिर वही पहली सी बहारें होंगी
इस उम्मीद पे हम दिल को हैं बहलाए हुए

न हँसो हमपे ज़माने के हैं ठुकराए हुए
दर-ब-दर फिरते हैं तक़दीर के बहकाए हुए
.................................................................................
Na hanso hampe-Gateway of India 1957


Artists: Madhubala

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Jan 11, 2011

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे-गेटवे ऑफ़ इंडिया १९५७

आपने कफ़ सिरप ज़रूर एक ना एक बार पिया होगा आइये आज
पियें सौम्यता का सिरप। गीत है फिल्म 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' से।
इसे दो सौम्य कलाकारों पर फिल्माया गया है-भारत भूषण और
मधुबाला। इस गीत को उतने ही आहिस्ता से गाया भी गया है
जितनी आहिस्ता से ये दोनों कलाकार अपने संवाद बोलते हैं या
अदाएं दिखाते हैं । सितार की आवाज़ के साथ गायकों की आवाज़
का मेल 'सोने में सुहागा' जैसा है। अभी इसी उपमा से काम चलाइए,
दूसरी सूझ नहीं रही है।



गीत के बोल:

रफ़ी : दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
आशा :हम ज़माने से दूर जा बैठे

आशा : दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम ज़माने से दूर जा बैठे

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे

रफ़ी : भूल की उनका हमनशीं हो के
रोयेंगे दिल को उम्र भर खो के
भूल की उनका हमनशीं हो के
रोयेंगे दिल को उम्र भर खो के
हाय! क्या चीज़ थी गँवा बैठे

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे

आशा : दिल को एक दिन ज़रुर जाना था
वही पहुँचा जहां ठिकाना था
दिल को एक दिन ज़रुर जाना था
वही पहुँचा जहां ठिकाना था
दिल वही दिल जो दिल में जा बैठे

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे

रफ़ी : एक दिल ही था ग़मगुसार अपना
मेहरबां खास राज़दार अपना
एक दिल ही था ग़मगुसार अपना
मेहरबां खास राज़दार अपना
गैर का क्यों उसे बना बैठे

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे

आशा : गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ ही दे दिया नहीं होगा
गैर भी तो कोई हसीं होगा
दिल यूँ ही दे दिया नहीं होगा
देख कर कुछ तो चोट खा बैठे

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
हम जमाने से दूर जा बैठे

दो घड़ी वो जो पास आ बैठे
...................................................
Do ghadi wo jo paas aa baithe-Gateway of India 1957

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Dec 17, 2010

सपने में सजन से दो बातें-गेटवे ऑफ़ इंडिया १९५७

हिंदी फ़िल्में सभी नामों से बना करती हैं। प्याज़, आलू, मिर्च का
नाम शायद अभी तक फिल्मकारों के दिमाग में नहीं आया है।
वो शायद किसी पत्रकार के दिमाग में आये जो फिल्म बनाने की
तमन्ना रखता हो। गेट के नाम से दो फ़िल्में मेरे ध्यान में
आती हैं, 'गेटवे ऑफ़ इंडिया' और 'चाइना गेट'। बाकी के गेट
अभी शायद बाकी हैं । इस फिल्म से एक गीत सुनिए जो कि
राजेंद्र कृष्ण का लिखा हुआ है और संगीत मदन मोहन ने तैयार
किया है। लता मंगेशकर के गाये इस गीत को सुने काफी दिन
हो गए थे सोचा आपको भी सुनवा दिया जाए । ब्लॉग की सूची
में भी देखा तो यह गीत मौजूद नहीं था। इस गीत का विडियो
यू ट्यूब पर उपलब्ध नहीं है, ऑडियो सुन कर काम चला लें।

इतना  खूबसूरत गीत एडिटिंग टेबल पर उडा दिया गया। फिल्म
सिनेमा इतिहास के कई खूबसूरत गीत जनता को देखने को
नहीं मिले जैसे प्राण जाए पर वचन न जाए का आशा भोंसले
का गाया गीत-चैन से हमको कभी  ।



गीत के बोल:


सपने में सजन से दो बातें
इक याद रही इक भूल गए

सपने में सजन से दो बातें

इक रात मिलन की आई थी
और उस के बद जुदाई थी
ग़म और ख़ुशी की दो रातें
इक याद रही इक भूल गए

सपने में सजन से दो बातें

इक सावन रुत लाई झूले
दूजी में सजन हम को भूले
देखी हैं यही दो बरसातें
इक याद रही इक भूल गए

सपने में सजन से दो बातें

इक रोज़ तुम्हें दिल दे बेठे
फिर रोग बिरहा का ले बेठे
ये प्यार की हैं दो सौग़ातें
इक याद रही इक भूल गए

सपने में सजन से दो बातें
इक याद रही इक भूल गए

सपने में सजन से दो बातें
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Sapne mein sajan se do batein-Gateway of India 1957

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