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May 7, 2020

सपनों का घरोंदा टूटा-हमसे बढ़ कर कौन १९८१

सपने देखने चाहिए ऐसा आशावादी कहते हैं. सपने ज़रूर
देखने चाहिए. ये स्पष्ट नहीं है कि कैसे देखने चाहिए. कैसे
सपने साकार होने की क्षमता रखते हैं और कैसे सपने पानी
में भैंस के माफिक डूब जाने की योग्यता ये तो समय ही
बतलाता है. कई थ्योरोटिकल सपनों को प्रेक्टिकल दुनिया
बालावस्था में ही मार देती है.

दर्द केवल पेट दर्द, कमर दर्द और हमदर्द का नाम नहीं
है. उच्छिन्न मन में दर्द की तरंगें उठती हैं. ये सूक्ष्म भी
हो सकती हैं और ज्वार भाटे के समान विकराल रूप की
भी. महसूस करने की क्षमता भी तो सभी की जुदा जुदा
है. चार्ली चैप्लिन के हास्य में छुपी दर्द की बारीक सी
लकीर को कितनों ने देखा और समझा.

खुशी ऊँगली के पोर पर टिकी पानी की बूँद के समान है
कब ढुलक जाए किसे पता. पानी की उस बूँद से जाने
कितनों ने जीवन के कैनवास पर खुशियों के बाग उकेरने
के प्रयास कर लिये. रंग भी घोल लिये लघु चित्त ने उसमें.

बड़ी मुश्किल से भावनाओं का सैलाब बैठता है और शान्ति
उभर के ऊपर आने को होती है तभी उसे फिर कोई आ के
घंघोल जाता है.

सुनते हैं रवींद्र रावल का लिखा हुआ गीत जिसे भूपेंद्र ने
गाया है. संगीत राम लक्ष्मण का है. राम लक्ष्मण के संगीत
में काफी ऊर्जा है मगर ये शायद राम लक्ष्मण के मन से
निकली आवाज़ है. ऊर्जा का रूपांतरण भी होता है ना.

राम लक्ष्मण के हाथों को चूमने की इच्छा होती है केवल
इसी एक गीत के लिए. भूपेंद्र ने बेसहारों और समय के मारों
के लिए एक अपना सा गीत दे दिया है. इसे सुन के अटके हुए
भाव और आँखों के लुब्रिकेशन को बाहर आने में मदद मिल
जाती है.



गीत के बोल:

बसते बसते बसा न के मन
बरसों में आबाद हुआ
एक सैयाद की नज़र लगी तो
पल भर में बरबाद हुआ

सपनों का घरोंदा टूटा
सपनों का घरोंदा टूटा
हालत के इस तूफां में
तिनके से तिनका छूटा
सपनों का घरोंदा टूटा
सपनों का घरोंदा टूटा

जाने अब ये नेक बने
या के बदी के शिकार बने
अपनी मंजिल पर पहुंचे
या राहों के खार बने
जाने अब ये नेक बने
या के बदी के शिकार बने
अपनी मंजिल पर पहुंचे
या राहों के खार बने
किस मोड़ पे मासूमों से
ममता का साया छूटा

सपनों का घरोंदा टूटा
सपनों का घरोंदा टूटा

दिल के टुकड़े भी खोये
मांग से लाली रूठ गई
दुःख की अगन में जाली दुखिया
कोयला बनी ना राख बनी
दिल के टुकड़े भी खोये
मांग से लाली रूठ गई
दुःख की अगन में जाली दुखिया
कोयला बनी ना राख बनी
आँचल का सुख भी खोया
काजल नैनों से रूठा

सपनों का घरोंदा टूटा
सपनों का घरोंदा टूटा
हालत के इस तूफां में
तिनके से तिनका छूटा
सपनों का घरोंदा टूटा
सपनों का घरोंदा टूटा
…………………………………………..
Sapnon ka gharonda toota-Hamse badh kar kaun 1981

Artist:

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Jul 19, 2011

तेरा चाँद सा चेहरा-हमसे बढ़ कर कौन १९९८

सन १९९८ की एक फिल्म से गीत सुनवाते हैं आपको। इसमें नायक
हैं सुनील शेट्टी और नायिका हैं दीप्ति भटनागर। संगीत विजू शाह का
है वही, फिल्म त्रिदेव में भी जिन्होंने संगीत दिया है। फिल्म त्रिदेव में
पैसेंजर ट्रेन और एक्सप्रेस ट्रेन की गति वाले गाने थे, ये है सुपरफास्ट
ट्रेन की स्पीड वाला. 'धूम छींक फटाक' वाली ताल पर गीत बना है.

नायक-नायिका दोनों मोटर साईकिल, कार और बोट पर सैर करते नज़र
आते हैं। श्रेणी बनाने वाले इसको बहुत सी श्रेणियों में रख सकते हैं।
दीपक आनंद इस फिल्म के निर्देशक हैं. बहुसितारा फिल्म में २ नायक और
२ नायिकाएं हैं। दूसरे नायक सैफ अली खान हैं और दूसरी दूसरी नायिका
हैं सोनाली बेंद्रे । फिल्म की नायिकाएं दोनों ही दुबली पतली हैं बस फर्क
इतना है कि दीप्ति का चेहरा थोडा बड़ा है सोनाली के चेहरे से.



गीत के बोल:

तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
आ हा हा आ हा हा आ हा हा
हाँ, तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
तो चांदनी को क्या देखें
तुझे देखने के बाद हम
अब और किसी को क्या देखें

तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
तो चांदनी को क्या देखें
तुझे देखने के बाद हम
अब और किसी को क्या देखें

तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
नज़र में रहे

आ तू है गुलाबों की परी
तेर हर अदा है मदभरी
मदहोश मैं तो हो गया
देखी जो तेरी दिलवरी
होश मेरे उड़ाने लगा

तेरे इश्क में खोये तो आशिक बने
आ हा हा आ हा हा आ हा हा
हाँ, तेरे इश्क में खोये तो आशिक बने
इस आशिकी को क्या देखें

तुझे देखने के बाद हम
अब और किसी को क्या देखें

तेरा चाँद सा चेहरा नज़र में रहे
नज़र में रहे
......................................
Tera chand sa chehra nazar mein rahe-Humse badhkar kaun 1998

Artists: Sunil Sheety, Deepti Bhatnagar

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