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Sep 14, 2017

बेताब दिल की तमन्ना-हंसते जख्म १९७३

इस फिल्म का नाम अलग सा है. सिसकते ज़ज्बात से एक
कदम आगे. दुनिया में जबरन हंसना भी पढता है लोगों को.
कुछ ऐसी ही कहानी है फिल्म की नायिका की. फिल्म जगत
की कई नायिकाओं को अभिनय के मामले में पीछे छोड़ने
वाली प्रिया राजवंश शाही अंदाज़ में संवाद बोला करती थीं.
इस लिहाज से हीर राँझा फिल्म की कास्टिंग परफेक्ट थी
जिसमें उनके साथ राजकुमार नायक थे.

गीत सुनते हैं फिल्म से जो कैफी आज़मी का लिखा हुआ है.
लता के गाये इस गीत की तर्ज़ मदन मोहन की है. उम्दा
गीत है और रोमांटिक गहराई वाला गीत कहा जा सकता
है इसे.



गीत के बोल:

बेताब दिल की तमन्ना यही है
बेताब दिल की तमन्ना यही है
तुम्हें चाहेंगे तुम्हें पूजेंगे
तुम्हें अपना ख़ुदा बनाएँगे
बेताब दिल की तमन्ना यही है

सूने सूने ख़्वाबों में जब तक तुम न आये थे
ख़ुशियाँ थीं सब औरों की ग़म भी सारे पराये थे
अपने से भी छुपाई थी धड़कन अपने सीने की
हम को जीना पड़ता था ख़्वाहिश कब थी जीने की
अब जो आ के तुमने हमें जीना सिखा दिया है
चलो दुनिया नई बसाएँगे

बेताब दिल की तमन्ना यही है

भीगी भीगी पलकों पर सपने इतने सजाए हैं
दिल में जितना अँधेरा था उतने उजाले आए हैं
तुम भी हमको जगाना ना बाहों में जो सो जाएँ
जैसे ख़ुश्बू फूलों में तुममे यूँ ही खो जाये
पल भर किसी जनम में कभी छूटे ना साथ अपना
तुम्हें ऐसे गले लगाएँगे

बेताब दिल की तमन्ना यही है

वादे भी हैं क़समें भी बीता वक़्त इशारों का
कैसे कैसे अरमाँ हैं मेला जैसे बहारों का
सारा गुलशन दे डाला कलियाँ और खिलाओ ना
हँसते हँसते रो दें हम इतना भी तो हँसाओ ना
दिल में तुम्हीं बसे हो रहा आँचल वो भर चुका है
कहाँ इतनी ख़ुशी छुपाएँगे

बेताब दिल की तमन्ना यही है
तुम्हें चाहेंगे तुम्हें पूजेंगे
तुम्हें अपना ख़ुदा बनाएँगे
बेताब दिल की तमन्ना यही है
.................................................................................
Betaab dil ki tamanna-hanste zakhm 1973

Artist: Priya Rajvansh, Navin Nishchal

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May 30, 2015

ये माना मेरी जाँ-हँसते ज़ख्म १९७३

हिंदी फिल्म संगीत जगत में मदन मोहन का विशिष्ट स्थान
है इसकी बहुत सारी वजहें हैं उनमें से एक लता मंगेशकर
द्वारा उनकी समय समय पर अतिरिक्त तारीफ किया जाना
भी है. उनका संगीत उल्लेखनीय है और रहेगा.

कव्वालियों के लिए रोशन ज्यादा प्रसिद्ध हैं और उनकी बनाई
कव्वालियां आज भी सुनी जाती हैं. कुछ दूसरे संगीत निर्देशकों
की कव्वालियां भी प्रसिद्ध हुई हैं जैसे कि प्रस्तुत कव्वाली जो
फिल्म हँसते ज़ख्म से है. इसे रफ़ी ने गाया है. कैफी आज़मी
ने इसके बोल लिखे हैं.



गीत के बोल:

तौबा तौबा ये जवानी का गुरूर
इश्क के सामने फिर भी सर झुकाना ही पड़ा
कैसे कहते थे न आएँगे
मगर दिल ने इस तरह पुकारा
तुम्हें आना ही पड़ा

ये माना मेरी जाँ मोहब्बत सजा है
मज़ा इसमें इतना मगर किसलिए है
वो इक बेकरारी जो अब तक इधर थी
वो ही बेकरारी उधर किसलिए है
अभी तक तो इधर थी उधर किसलिए है

बहलना न जाने, बदलना न जाने
तमन्ना मचल के संभालना न जाने
करीब और आओ, कदम तो बढ़ाओ
झुका दूं न मैं सर तो, सर किसलिए है
ये माना मेरी जाँ मोहब्बत सजा है
मज़ा इसमें इतना मगर किसलिए है

नज़ारे भी देखे, इशारे भी देखे
कई खूबसूरत सहारे भी देखे
नाम क्या चीज़ है, इज्ज़त क्या है
सोने चांदी की हकीकत क्या है
लाख बहलाए कोई दौलत से
प्यार के सामने दौलत क्या है
जो मैखाने जा के, मैं सागर उठाऊं
तो फिर ये नशीली नज़र किसलिए है
ये माना मेरी जाँ मोहब्बत सजा है
मज़ा इसमें इतना मगर किसलिए है

तुम्हीं ने संवारा, तुम्हीं ने सजाया
मेरे सूने दिल को तुम्हीं ने बसाया
जिस चमन से भी तुम गुजार जाओ
हर कली पर निखार आ जाये
रूठो जाओ तो रूठ जाये खुदा
और जो हँस दो, बहार आ जाये
तुम्हारे कदम से है घर में उजाला
अगर तुम नहीं तो ये घर किसलिए है

ये माना मेरी जाँ मोहब्बत सजा है
मज़ा इसमें इतना मगर किसलिए है
..........................................................
Ye maana meri jaan-Hanste zakhm 1973

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Oct 20, 2009

आज सोचा तो आंसू भर आए-हँसते ज़ख्म १९७३

ऐसे गाने जिनके साथ कहानियाँ और किस्से जुड़े हैं आपने
जरूर सुने होंगे। एक ऐसा ही गीत है फ़िल्म हँसते ज़ख्म का
जिसका शुमार लता मंगेशकर के गाये सर्वश्रेष्ठ दर्द भरे गीतों
में किया जाता , वो है-"आज सोचा तो आंसू भर आए "
इस गाने से जुड़ा हुआ वाक्या यूँ है कि लता मंगेशकर इस गाने की
रिकॉर्डिंग करते वक्त इतनी ज्यादा दुखी हों गयीं कि उनकी स्वयं
की आँखों में से आंसू निकलने लगे। संगीतकार मदन मोहन ने
रिकॉर्डिंग रुकवाई। गाने की रिकॉर्डिंग बाद में की गई। इसके बोल
लिखे हैं कैफी आज़मी ने। फ़िल्म में गीत प्रिया राजवंश पर फिल्माया
गया है। देखने में ये उतना दुखी नहीं करता है जितना सुनने में।



गाने के बोल :

आज सोचा तो आंसू भर आए
मुद्दतें हों गई मुस्कुराये

हर कदम पर उधर मुड़कर देखा
हर कदम पर उधर मुड़कर देखा

उनकी महफिल से हम उठ तो आए

आज सोचा तो आंसू भर आए....

रह गई ज़िन्दगी दर्द बन के
दर्द दिल में हैं छुपाये छुपाये

आज सोचा तो आंसू भर आए.....

दिल की नाज़ुक रगें टूटती हैं
याद इतना भी कोई न आए

आज सोचा तो आंसू भर आए
मुद्दतें हों गई मुस्कुराये

आज सोचा तो आंसू भर आए

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