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Jun 15, 2015

जिया जिया रे-जब तक है जान २०१२

नयी पीढ़ी के संगीतकारों में रहमान ही एक ऐसे हैं जिन्होंने किसी
एक गायक गायिका के भरोसे अपनी गाडी नहीं धकाई. उन्होंने कई
गायकों की सेवाएं ली हैं और उनकी बदौलत कई प्रतिभाएं अपने
मुकाम तक पहुँच पाई हैं. इस बात से एक फायदा है कि संगीतकार
का मूल्य बना रहता है. काश पुराने ज़माने के संगीतकार भी ऐसा
कर पाते.

दूसरा पहलू ये भी है कि जैसा गाना हो वैसा गायक या गायिका. इससे
सहूलियत भी हो जाती है. एक कटु सत्य ये है कि किसी गीतकार या
संगीतकार को जनता तवज्जो नहीं देती जितना कि गायक या गायिका
को. ये ट्रेंड अब थोडा बदला है. जैसे जैसे हमारी शिक्षा प्रणाली में
सुधर होता जा रहा है वैसे वैसे जनता अब संगीतकारों को पहचानने
लगी है भले ही उसे अपने पडोसी राज्य की राजधानी का नाम याद न
हो.

आपने फिल्म शोले का एक गीत अवश्य सुना होगा जो डाकुओं के अड्डे
पर हेमा मालिनी फिल्म में गाती है-आ, जब तक है जान, जाने-जहाँ
मैं नाचूंगी. आपको इस फिल्म का नाम शोले के गाने में मिल जायेगा.

गीत गुलज़ार ने लिखा है और इसे गाया है नीति मोहन के साथ सोफिया
अशरफ ने. यकीन मानिये इस गीत को सुनने के पहले तक मुझे सिर्फ
नीति मोहन का नाम मालूम था , उनका गाया कोई गीत भी मुझे याद
नहीं था इसे सुनने के पहले तक.




गीत के बोल:

चली रे, चली रे
जुनूं को लिए
कतरा, कतरा
लम्हों को पीये
पिंजरे से उड़ा
दिल का शिकरा
खुदी से मैंने इश्क किया रे
जिया, जिया रे जिया रे

छोटे-छोटे लम्हों को
तितली जैसे पकड़ो तो
हाथों में रंग रह जाता है
पंखों से जब छोडो तो
वक़्त चलता है
वक़्त का मगर रंग
उतरता है अक्किरा
उड़ते-उड़ते फिर एक लम्हा
मैंने पकड़ लिया रे
जिया जिया रे जिया रे

हलके-हलके पर्दों में
मुस्कुराना अच्छा लगता है
रौशनी जो देता हो तो
दिल जलाना अच्छा लगता है
एक पल सही, उम्र भर इसे
साथ रखना अक्किरा
ज़िन्दगी से फिर एक वादा
मैंने कर लिया रे
जिया जिया रे जिया रे
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Jiya jiya re-Jab tak hai jaan 2012

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Jan 23, 2015

हीर हीर ना आँखों¬-जब तक है जान २०१२

ए. आर. रहमान और गुलज़ार की जुगलबंदी बन
गयी है कुछ सालों से. शुरूआती के दौर में रहमान
ने हिंदी गीतों के लिए महबूब और पी. के. मिश्रा
की सेवाएं ज्यादा लीं. ‘जय हो’ के हिट होने और
हिट करने(ऑस्कर) के बाद दोनों साथ में फिल्मों
में काम करते दिखाई देते हैं. गीतों के लिए गीतकार
और संगीतकार की ट्यूनिंग बहुत ज़रूरी है. आज
सुनते हैं दोनों के संयुक्त परिश्रम से तैयार एक नगमा
फिल्म जब तक है जान से. इसे गाया है नई गायिका
हर्षदीप कौर ने.



गीत के बोल:

हो हो ओ
हीर हीर ना आँखों अड़ियो
मैं ते साहेबा होई
घोड़ी ले के आवे लै जाए
घोड़ी ले के आवे लै जाए
हो मैनू लै जाए मिर्ज़ा कोई
लै जाए मिर्ज़ा कोई
लै जाए मिर्ज़ा कोई

हीर हीर ना आँखों अड़ियो
मैं ते साहेबा होई
घोड़ी ले के आवे लै जाए
घोड़ी ले के आवे लै जाए

ओहदे जे ही मैं, ते ओह मेरे वरगा
हंसदा-ए सजर-सवेरे वरगा
अन्खां बंद कर लै ते ठन्डे हनेरे वरगा
अन्खां बंद कर लै ते ठन्डे हनेरे वरगा

ओहदे जे ही मैं, ते ओह मेरे मिर्ज़ा वरगा
ओहदे जे ही मैं, ते ओह मेरे मिर्ज़ा वरगा

हो हीर हीर ना आँखों अड़ियो
मैं ते साहेबा होई
घोड़ी ले के आवे लै जाए
घोड़ी ले के आवे लै जाए
हो मैनू लै जाए मिर्ज़ा कोई
लै जाए मिर्ज़ा कोई
लै जाए मिर्ज़ा कोई


नाल नाल टुर ना ते विथ रखणा
हद रख लेणा विच दिल रखणा
छाँवे-छाँवे पावे असी तेरी पर छाँवे टुर ना
छाँवे-छाँवे पावे असी तेरी पर छाँवे टुर ना
ओहदे जे ही मैं ते ओ मिर्ज़ा मेरे वरगा
हीर हीर ना

हो हीर हीर ना आँखों अड़ियो
मैं ते साहेबा होई
घोड़ी ले के आवे लै जाए
घोड़ी ले के आवे लै जाए
लै जाए मिर्ज़ा कोई
लै जाए मिर्ज़ा कोई
लै जाए मिर्ज़ा कोई
……………………………………………………………
Heer- Jab Tak Hai Jaan 2012

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Jan 19, 2015

सांस में तेरी सांस-जब तक है जान २०१२

गीत गुलज़ार का हो तो सुन लिया करते हैं दोस्तों
हम भी खट्टी मीठी आँखों(गोलियों) के दीवाने हैं.


इससे ज्यादा साहित्यिक क़ाबलियत मुझमे नहीं है गुलज़ार के गीतों
पर बोलने की. इसलिए सीधे सीधे बिना सन्दर्भ सहित भावार्थ के
इसे सुन लिया जाए . २०१२ की फिल्म –जब तक है जान के लिए
इसे गवाया गया श्रेया घोषाल और मोहित चौहान से, संगीतकार
ऐ. आर. रहमान ने.

हमारे एक मित्र जो रजनीगन्धा और तुलसी के मिश्रण के शौक़ीन हैं
उनको ये गीत बहुत पसंद है. उनकी बीवी नेअलार्म लगाना बंद कर
दिया है. सुबह सुबह जब वे मिश्रण की एकफांकी लेने के बाद अपनी
श्रीमती जी के पास पहुँचते हैं, रजनीगन्धाकी सुगंध से उनकी बीवी
उठ जाती है. अब ये ना सोचने लगिये कि उनकी बीवी रजनीगन्धा
पिक्चर का गाना गाने लगती है. कतई नहीं, वो कभी कभी प्रवचन
अवश्य सुना दिया करती है उन्हें .



गीत के बोल:


सांस में तेरी सांस मिली तो
मुझे सांस आई
रूह ने छू ली जिस्म की खुश्बू
तू जो पास आई

कब तक होश संभाले कोई
होश उड़े तो उड़ जाने दो
दिल कब सीधी राह चला है
राह मुड़े तो मुड़ जाने दो
तेरे ख़याल में डूब के अक्सर
अच्छी लगी तन्हाई
सांस में तेरी


रात तेरी बाँहों में कटे तो
सुबह बड़ी हलकी लगती है
आँख में रहने लगे हो क्या तुम
क्यूँ छलकी-छलकी लगती है
मुझको फिर से छू के बोलो
मेरी कसम क्या खाई

सांस में तेरी सांस
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Saans mein teri-Jab Tak Hai Jaan 2012

Artists: Shahrukh Khan, Kaitrina Kaif

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