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Jun 20, 2017

मेरे भैया मेरे चंदा काजल १९६५

फिल्म काजल से एक भाई-बहन गीत सुनते हैं. एक दिन
किसी अवसर पर डी जे वाला आराम फर्मा रहा था तब
इसे सुन रहा था. मुझे लगा या तो उसे अपनी बहन की
याद आ रही है या उसकी तबियत खराब है. थोड़ी देर
पहले वो धम-धम से भरपूर गीत बजा रहा था. खैर ऐसा
भी होता है.

साहिर लुधियानवी के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है रवि ने.
आशा भोंसले ने इसे गाया है. परदे पर इसे मीना कुमारी पर
फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

मेरे भैया  मेरे चंदा  मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं जमाने की कोई चीज़ ना लूं
मेरे भैया  मेरे चंदा  मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं जमाने की कोई चीज़ ना लूं

तेरी साँसोँ की कसम खा के  हवा चलती है
तेरे चेहरे की झलक पा के बहार आती है
एक पल भी मेरी नज़रों से जो तू ओझल हो
हर तरफ मेरी नज़र तुझको पुकार आती है

मेरे भैया  मेरे चंदा  मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं जमाने की कोई चीज़ ना लूं
मेरे भैया  मेरे चंदा  मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं जमाने की कोई चीज़ ना लूं

तेरे सेहरे की महकती हुई लड़ियों के लिए
अनगिनत फूल उम्मीदों के चुने हैं मैंने
वो भी दिन आये के उन ख्वाबों की ताबीर मिले
तेरी खातिर जो हंसीं ख्वाब बुने हैं मैंने

मेरे भैया  मेरे चंदा  मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं जमाने की कोई चीज़ ना लूं
मेरे भैया  मेरे चंदा  मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं जमाने की कोई चीज़ ना लूं
मेरे भैया
………………………………………………..
Mere bhaiya mere chanda-Kaajal 1965

Artists: Meena Kumari, ???

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Mar 6, 2017

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के-काजल १९६५

लिखने वाले ने भी क्या खूब लिखा है-जिस तरह से थोड़ी सी
तेरे साथ कटी है, बाकी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा.
ये बात साथ देने वाली चीज़ के लिए है, अब्वो कुछ भी हो
सकती है. चाहे गाडी का दूसरा पहिया हो या फिर गाडी ही
क्यूँ ना हो. एक पालतू कुत्ता भी हो सकता है. ये बाकी की
संभावनाएं खारिज हो जाती हैं तीसरे अंतरे में. खैर इन सब
के बावजूद इसमें जीवन दर्शन छुपा हुआ है.

दारू के हलक से नीचे उतरना शुरू होते ही दिमाग के दर्शन
बखान वाले कोने में घंटियाँ बजने लग जाया करती हैं. ये
अनुभव पीने वाले से ज्यादा सामने बेवकूफ सरीखे बैठे मनुष्य
को जल्दी समझ आते हैं और वो अपने आपको धन्य समझने
लगता है.



गीत के बोल:

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा
इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा

जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है
हाय, जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है
बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा

दुनिया की निगाहों में बुरा क्या है भला क्या
दुनिया की निगाहों में बुरा क्या है भला क्या
ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा
ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा

वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बरबाद किया है
होए, वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बरबाद किया है
इल्ज़ाम किसी और के सर जाए तो अच्छा

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा
बिखर जाए तो अच्छा
बिखर जाए तो अच्छा
……………………………………………………………..
Ye zulf agar khul ke bikhar-Kaajal 1965

Artists: Raj Kumar, Helen

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Aug 5, 2009

मेरे भैया मेरे चंदा -काजल १९६७

भाई बहनों को समर्पित ये गीत १९६७ की फ़िल्म काजल से है
इसको साहिर लुधियानवी ने लिखा है और स्वरबद्ध किया है
संगीतकार रवि ने ।

रवि को कई भारतीय त्योहारों और अवसरों के अमर गीत
बनाने का श्रेय जाता है । मीना कुमारी पर फिल्माया गया ये
गीत गया है आशा भोंसले ने ।फ़िल्म रिलीज़ हुई थी सन १९६५
में।



गाने के बोल:

मेरे भैया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं जमाने की कोई चीज ना लूं

तेरी साँसोँ की कसम खाके, हवा चलती है
तेरे चेहरे की झलक पाके, बहार आती है
एक पल भी मेरी नज़रों से जो तू ओझल हो
हर तरफ मेरी नज़र तुझको पुकार आती है

मेरे भैया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं जमाने की कोई चीज ना लूं

तेरे चेहरे की महकती हुई लडियोँ के लिए
अनगिनत फूल ऊम्मीदोँ के चुने हैं मैंने
वो भी दिन आये कि उन ख्वाबोँ के ताबीर मिले
तेरे खातिर जो हसीँ ख्वाब बुने हैं मैंने

मेरे भैया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं जमाने की कोई चीज ना लूं

मेरे भैया....
...............................................................................
Mere Bhaiya mere chanda-Kajal 1967

Artist: Meena Kumari

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