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Mar 22, 2010

लागी छूटे ना-काली टोपी लाल रुमाल १९५९

सदाबहार युगल गीतों की श्रृंखला में अगला गीत पेश है फिल्म
काली टोपी लाल रुमाल से । गीत मजरूह ने लिखा है और धुन
बनाई है चित्रगुप्त ने। फिल्म काली टोपी लाल रुमाल में कई
कर्णप्रिय गीत हैं। चंद्रशेखर और शकीला पर फिल्माया गया ये गीत
अपने एक बार ज़रूर ही सुना होगा। ये छाया गीत नाम के कार्यक्रम
में नियमित रूप से बजने वाला गीत है। गीत रात्रि के समय ज्यादा
लुभावना सुनाई पढ़ता है।



गीत के बोल:

लागी छूटे ना अब तो सनम
लागी छूटे ना अब तो सनम

चाहे जाए जिया तेरी कसम

लागी छूटे ना अब तो सनम
हो ओ ओ, ओ ओ ओ
तुझको पुकारे बनके दीवाना
ना माने ना जिया
तुझको पुकारे बनके दीवाना
ना माने ना जिया
हो जी प्यार किया तो करके निभाना
सुनो जी रसिया
हाय, प्यार किया तो
प्यार किया तेरी कसम

लागी छूटे ना
हाय, लागी छूटे ना अब तो सनम
चाहे जाए जिया तेरी कसम

लागी छूटे ना अब तो सनम

हो, ओ ओ ओ
दूर हूँ फिर भी
दिल के करीब निशाना है तेरा
दूर हूँ फिर भी
दिल के करीब निशाना है तेरा
हो जी हो, ओ ओ ओ
सोच ले फिर से
एक गरीब दीवाना है तेरा

हो ओ ओ
सोच लिया जी सोच लिया तेरी कसम

लागी छूटे ना
हाय, लागी छूटे ना अब तो सनम
चाहे जाए जिया तेरी कसम

लागी छूटे ना अब तो सनम

हो, ओ ओ ओ
जबसे लड़ी हैं तुमसे निगाह
तड़प रहा दिल
जबसे लड़ी हैं तुमसे निगाह
तड़प रहा दिल

हो जी हो, ओ ओ ओ
देख के चलना
प्यार की राह बड़ी है मुश्किल
हा आ आ,
देख लिया जी, देख लिया तेरी कसम

लागी छूटे ना
हाय, लागी छूटे ना अब तो सनम
चाहे जाए जिया तेरी कसम

लागी छूटे ना अब तो सनम

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Nov 27, 2009

दीवाना आदमी को बनाती हैं -काली टोपी लाल रुमाल १९५९

सबसे पहली इंसानी जरूरत है-दो वक्त की रोटी। दुनिया में सबसे ज्यादा
जद्दो-जेहद रोटी के लिए ही है।  इसपर भी एक गाना है हिन्दी फ़िल्म
संगीत के खजाने में।  ये एक दार्शनिक किस्म का गीत है और जीवन से
जुड़े हुए प्रमुख दृश्य इस गाने में समाहित हैं।  परदे पर इसको गुजरे
ज़माने के कलाकार गा रहे हैं। 

रोटियां क्या क्या नहीं करवा लेती मनुष्य से। कहते हैं इश्वर जीव के संसार
में आगमन के पूर्व ही उसके दाना पानी का इंतजाम कर देता है।  वो आएगी
किस जरिये से ये एक अबूझ पहेली होती है। कोई भूखा मरता है तो कोई
ज्यादा खा के।

मजरूह के लेखन पर जनता ने किताबें नहीं लिखी, प्रशंसा में हजारों पोस्ट
नहीं लिखे ब्लॉग पर। प्रसिद्धि भी शायद किस्मत का खेल है। मजरूह ने
जितना भी लिखा संतुलित लिखा। उनके लेखन में बेवजह की कड़वाहट या
जरूरत से ज्यादा दर्शनवाद कभी महसूस नहीं हुआ। जरा गौर कीजिये
इसके आखिरी अंतरे पर: इंसान को चाँद में नज़र आती हैं रोटियां...




<span style="font-weight: bold;">गाने के बोल:</span>

दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां
दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां
ख़ुद नाचती हैं सबको नचाती हैं रोटियाँ

दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां

बूढा चलाये खेल तो पापों से झूल के
बच्चा उठाये बोझ खिलौने को भूल के
बच्चा उठाये बोझ खिलौने को भूल के

देखा न जाए जो
देखा न जाए जो वो दिखाती हैं रोटियां
दिखाती हैं रोटियां

दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां
दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां

बैठी है जो ये चेहरे पर मलके जिगर का खून
दुनिया बुरा कहे इन्हे पर मैं तो ये कहूं

कोठे पे बैठ ओ,
कोठे पे बैठ आंख लड़ती हैं रोटियां

दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां
दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां

कहत अता एक फ़कीर के रखना ज़रा नज़र
रोटी को आदमी ही नहीं खाते बेखबर

अक्सर को आदमी को
अक्सर को आदमी को भी खाती हैं रोटियां
खाती हैं रोटियां

दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां
दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां

तुझको पते की बात बताऊँ मैं जानेमन
क्यूँ चाँद पे पहुँचने की है लगन

इंसान को चाँद में
इंसान को चाँद में नज़र आती हैं रोटियां

दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां
दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां

ख़ुद नाचती हैं सबको नचाती हैं रोटियाँ

दीवाना आदमी को बनाती हैं रोटियां
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Deewana aaadmi ko banati hain-Kali Topi Laal Rumal 1959

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Nov 22, 2009

दगा दगा वई वई वई-काली टोपी लाल रुमाल १९५९

आइये एक बार फ़िर से दस साल पीछे चला जाए यानि कि सन १९५९ में।
सुनते हैं एक और आँखों और कानों को सुकून पहुँचाने वाला गाना ।
कुमकुम के नृत्य और मनमोहक भाव भंगिमाओं से परिपूर्ण इस
गीत के प्रशंसक बहुतेरे हैं। गीत लता मंगेशकर की मधुर आवाज़
वाले इस गीत का संगीत तैयार किया है चित्रगुप्त ने। गीत के
बोल मजरूह सुल्तानपुरी के हैं । ये एक मस्ती भरा गीत है जिसको
आप कभी भी देख के बोर नहीं होंगे ।



गाने के बोल:

दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई

यूँही राहों में खड़े हैं तेरा क्या लेते हैं
देख लेते हैं जलन दिल की बुझा लेते हैं
यूँही राहों में खड़े हैं तेरा क्या लेते हैं
देख लेते हैं जलन दिल की बुझा लेते हैं
आए हैं दूर से हम
तेरे मिलने को सनम
चे कुनम, चे कुनम, चे कुनम
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई

जान जलती है नज़र ऐसे चुराया न करो
हो गरीबों के दुखे दिल को दुखाया न करो
जान जलती है नज़र ऐसे चुराया न करो
हो गरीबों के दुखे दिल को दुखाया न करो
आए थे दूर से हम
तेरे मिलने को सनम

चे कुनम, चे कुनम, चे कुनम
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई

हम करीब आते हैं तुम और जुदा होते हो
लो चले जाते हैं काहे को खफा होते हो
हम करीब आते हैं तुम और जुदा होते हो
लो चले जाते हैं काहे को खफा होते हो
अब नहीं आयेंगे हम
तेरे मिलने को सनम
चे कुनम, चे कुनम, चे कुनम
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई
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Daga daga vai vai-Kali topi Laal Rumal 1959

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