गूगल के हाल ही में मिले प्रेम पत्र से हम इतने अभिभूत हैं कि
ब्लॉग लिखने की इच्छा ही खत्म हो गयी है. एडसेंस अपना अपार
प्रेम प्रदर्शित करता रहा है समय समय पर.
इस बार जो प्रशस्ति प्रदान की गयी है वो है- डिसेप्टिव साईट
नेविगेशन जिसका आशय समझ पाना टेढ़ी खीर है. मेरे ख्याल
से इसे समझने से अच्छा है कि चवन्नी-अठन्नी के मोह से
छुटकारा पा लिया जाए. इससे ज्यादा धन तो मंदिर के बाहर
कटोरा लेकर खड़े होने पर प्राप्त हो जाता है. उसमें नेट पैक की
ज़रूरत नहीं पढ़ती, आँखें नहीं फोडना पढ़ती और न ही कम्प्युटर
वगैरह काम आता है. केवल लयबद्ध तरीके से बक बक करो
और इनाम पाओ.
आज आपके लिए एक गीत पेश है फिल्म बारूद से जो सन
१९६० की फिल्म है.
'यादों की बारात चली है' कल इस ग़ज़ल को सुना मैंने कई दिन बाद। ये ग़ुलाम अली की गाई एक ग़ज़ल है। इसको सुनकर वाकई यादों की बारात सी निकलने लग जाती है। प्रस्तुत गीत के याद आने के पीछे बहुत से कारण हैं-1)अभिनेता राजकुमार, 2) मिटटी के दिए पर आधारित देसी सारंगी बजता हुआ एक अधेड़ उम्र युवक जो कल मिला और 3)लगभग कुमकुम जैसी कमनीय काया वाली एक बाला के सड़क पर गुज़रते हुए दर्शन हो जाना। इसके बाद थोड़ा दिमाग लगाया गया कि एक गीत है जिसमे तीनों तत्त्व मौजूद हैं। तो साहब पहुँच गए सर खुजाते हुए मुकाम पर और गीत याद आया सन १९५९ की फिल्म उजाला का जो है -तेरा जलवा जिसने देखा।
कुमकुम कि स्क्रीन प्रेजेंस पर पहले हम चर्चा कर चुके हैं। उनकी भाव भंगिमाओं के आगे उनकी समकालीन अभिनेत्रियाँ पानी भरती नज़र आतीं। किसी ने कुमकुम की तारीफ में लिखा है- हिप्नोटिक डांसर- सही है। इस गीत की वजह से फिल्म हमने सिनेमा हाल में जा कर २ बार देखी थी ।
गीत के बोल:
तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया
क्या देखा था तुझमे दिल तेरा हो गया ये सोचते ही सोचते सवेरा हो गया क्या देखा था तुझमे दिल तेरा हो गया ये सोचते ही सोचते सवेरा हो गया
है मुझमे भी ऐसा अनोखा सा जादू जो देखे वो होता है दिल से बेकाबू लगे तोसे नैना तो नैना ना लागे ख्यालों में डूबी हूँ तेरे ओ बाबू तू आया तो महफ़िल में उजाला हो गया मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया
तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया
तेरी एक झलक ने वो हालत बना दी मेरे तन-बदन में मुहब्बत जगा दी अभी भूल कर को इधर बहते पानी किनारे पे रहती हूँ फिर भी मैं प्यासी अब दिल का क्यूँ करें ग़म गया सो गया मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया
तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया
बुलाती हैं तुझको ये आंचल की छैयां जरा मुस्कुरा दे पडूं तोरे पैयाँ कसम है तुझे दिल की जाने तमन्ना तुझे हमने माना है अपना ही सैंया मैं अकेली वो तेरा ज़माना हो गया मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया
तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया मैं हो गई किसी की कोई मेरा हो गया क्या देखा था तुझमे दिल तेरा हो गया ये सोचते ही सोचते सवेरा हो गया ................................. Tera Jalwa Jisne Dekha-Ujala 1959
हमने बात की थी ख़य्याम के पंजाबी स्वाद वाले हिंदी गीतों
की। आइये सुना जाए एक गीत फिल्म बारूद से जो कि सन
१९६० की फिल्म है। अगर आप इस गीत में संजीव कुमार जैसे
दिख रहे कलाकार को पहचान जाएँ तो अपने आप को पक्का
फिल्म प्रेमी समझिये। परदे पर गीत गा रही हैं अभिनेत्री कुमकुम
जिनकी स्क्रीन प्रेजेंस ज़बरदस्त हुआ करती थी और शायद
ये बात उनकी समकालीन नायिकाओं के लिए इर्ष्या का विषय
हो । उनपर फिल्माए गए गीत फिल्म की मुख्य नायिका वाले
गीत से तकरीबन हमेशा ही बेहतर नज़र आते। नारी सुलभ
अदाओं से भरपूर ये गीत रोचक है ।
सिनेमा हाल का पर्दा जंगी आकार का हुआ करता है और उस पर
नायक नायिका का आकार भी भीमकाय दिखा करता है। जब काया
बड़ी दिखेगी तो हंसी और आंसू भी बड़े दिखाई देंगे। शायद यही वजह
हो सिनेमा हॉल में हंसी का बगीचा पैदा होने और आंसुओं के तालाब
भरने के।
जिनको गीतों की श्रेणियां बनाने का शौक है उनके लिए सुझाव-
इस गीत को आप 'मटका' गीत की श्रेणी में रख सकते हैं। गीत
में १००-५० तो दिखाई दे ही रहे हैं ना।
गीत गाया है लता मंगेशकर और साथी कलाकारों ने। परदे पर
महिला मंडल के बीच आपको अभिनेत्री टुनटुन भी नज़र आ जाएँगी।
गीत लिखा है हसरत जयपुरी ने और तर्ज़ बनाई है ख़य्याम ने।
गीत के बोल:
रंग रंगीला सांवरा
रंग रंगीला सांवरा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, हो
रंग रंगीला सांवरा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, होए
नीर भरन को जब जब जाऊं
ताके चन्द्र चकोर
अररारारा ताके चन्द्र चकोर
आते जाते रोक ले रास्ता
ना माने चितचोर
अररारारा ना माने चितचोर
धागा हो तो तोर भी डालूँ
धागा हो तो तोर भी डालूँ
बीच पे किसका जोर
ननदिया छेड़े बीच बाज़ार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, हो
रंग रंगीला सांवरा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, होए
फूल से नाज़ुक नरम कलाई
जालिम ने दी मोड़
अररारारा जालिम ने दी मोड़
फँस गई मोरी जान गज़ब में
फँस गई मोरी जान गज़ब में
मैं भागी चुनरी छोड़
ननदिया छेड़े बीच बाज़ार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, हो
रंग रंगीला संवारा
मोहे मिल गयो जमुना पार
हुए बांके नैना चार
इब मैं का बोलूं सरकार
इब मैं का बोलूं, होए
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Rang rangeela sanwra-Barood 1960
मधुर गीतों की बौछार को निरंतर बनाते हुए एक दुर्लभ और मधुर गीत पेश है। सन १९९६ की फिल्म सौ साल बाद से इसे लिया गया है। इसका विडियो उपलब्ध नहीं है। किसी बन्धु ने इसका ऑडियो डाला है उसे धन्यवाद्। इस फिल्म में कुमकुम नायिका की भूमिका में हैं। कुमकुम ने कुछ भूतिया फिल्मों में अभिनय किया है। गीत की तर्ज़ से आप अनुमान लगा सकते हैं की कोई आत्मा इसे गुनगुना रही होगी परदे पर। आनंद बक्षी के लिखे गीत को तर्ज़ में बंधा है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने। उनको एक मधुर धुन बनाने के लिए कोटिशः धन्यवाद्। आवाज़ किसकी है शायद ये बताने की ज़रुरत नहीं है........
गीत के बोल:
ये रात भी जा रही है के गम की घटा छा रही है मेरे हमदम तू नहीं आया
ये रात भी जा रही है जा रही है जा रही है
नहीं जिस तरफ कोई भी मंजिल उसी राह पे चल रही हूँ तेरी याद में ओ सितमगर शमा की तरह जल रही हूँ जल रही हूँ शम्मा बुझी जा रही है मेरे हमदम तू नहीं आया
आ हा हो ओ ओ हा आ आ आ आ जा
कोई दुश्मनी आसमान की मोहब्बत की हर दास्तान से कहीं ये ना हो कि तू आये चले जाएँ हम इस जहाँ से इस जहाँ से
होंठों पे जान आ रही है मेरे हमदम तू नहीं आया ये रात भी जा रही है जा रही है जा रही है जा रही है
आपने बड़ी बहिन, छोटी बहिन इत्यादि फिल्मों का नाम
अवश्य सुना होगा। एक फिल्म है बड़ा भाई नाम से,जो सन
१९५७ कि फिल्म है। कुमकुम नाच रही हैं कुछ अजीब सी
जगह पे। होटल के अन्दर स्टेज जैसा कुछ बना हुआ है।
नायिका कि वेशभूषा देसी है, नृत्य भी थोडा देसी, थोडा विदेशी
है। गीत लिखा है एहसान रिज़वी ने और धुन बनाई है नाशाद ने।
कुमकुम के नृत्य में बिजली सी फुर्ती और गज़ब का आकर्षण
होता था. गीत में उनकी उपस्थिति से ही जान आ जाती थी.
गीत के बोल:
हो सैयां जादू डार गए
सैयां जादू डार गए
हो सैयां जादू डार गए
सैयां जादू डार गए
जादूगर जीते जी मार गए
हम दिल हार गए
सैयां जादू डार गए
जगी जगी अंखियों में डोरे गुलाबी
जगी जगी अंखियों में डोरे गुलाबी
मस्ती में झूमे जैसे शराबी
मस्ती में झूमे जैसे शराबी
मदभरी अंखियों से मार गए
हो, हम दिल हार गए
हम दिल हार गए
जादूगर जीते जी मार गए
सैयां जादू डार गए
सैयां जादू डार गए
भीगी भीगी रातें ऊंची घटायें
भीगी भीगी रातें ऊंची घटायें
नैना मिला के बिजली गिराएं
नैना मिला के बिजली गिराएं
काली काली जुल्फों से हार गए
हो, हम दिल हार गए
हम दिल हार गए
जादूगर जीते जी मार गए
सैयां जादू डार गए
सैयां जादू डार गए
गोरा गोरा मुखड़ा आँचल की ओट में
गोरा गोरा मुखड़ा आँचल की ओट में
चंदा का टुकड़ा बादल की ओट में
चंदा का टुकड़ा बादल की ओट में
सपने दिखा के जादू डार गए
हो हम दिल हार गए
हम दिल हार गए
जादूगर जीते जी मार गए
हम दिल हार गए
सैयां जादू डार गए
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Saiyan jadoo daar gaye-Bada bhai 1957
फिल्म 'मिस्टर एक्स इन बॉम्बे' का किशोर कुमार का गाया गीत बेहद चर्चित हुआ और सराहा गया। उस गीत की छांव में कई और नगमे छुप गए उनमे से एक है कुकुम पर फिल्माया गया ये गीत। इस गीत में कुमकुम का जीवंत नृत्य आपको देखने को मिलेगा। बोल आनंद बक्षी ने लिखे हैं और धुन बनाई है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने। इस गीत को गाया है लता मंगेशकर ने। इस गीत में बीन की आवाज़ भी आपको सुनाई देगी। गीत में बीन बजाने वाले कलाकार को घूंसे भी पढ़ते सुनाई देते हैं। ये मिस्टर एक्स का कमाल है जो अदृश्य हैं। मिस्टर एक्स की भूमिका में किशोर कुमार हैं। ......................
गीत के बोल
आ आ, जुल्मी हमारे सांवरिया हो राम जुल्मी हमारे सांवरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम जुल्मी हमारे सांवरिया हो राम जुल्मी हमारे सांवरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम
ना सोये कभी रातों में हम ना सोये कभी रातों में हम यूँ रोये बरसातों में हम हो, ओ, ओ क्यूँ खोये तेरी बातों में हम मन करती थी हाँ, मन करती थी सारी नगरिया हो राम मन करती थी सारी नगरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम
जुल्मी हमारे सांवरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम
अब आये, अब तक थे कहाँ अब आये, अब तक थे कहाँ क्या जानू क्या बीती यहाँ हो, ओ,क्या कोई सौतन थी वहां हमको भी हाँ, हमको भी तो हो कुछ खबरिया हो राम हमको भी तो हो कुछ खबरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम
जुल्मी हमारे सांवरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम
मुख पे है लट बिखरी हुई मुख पे है लट बिखरी हुई रुत भी है कुछ निखरी हुई हो ओ ओ, सब कुछ है पर कुछ है कमी जो ये देखे हाँ, जो ये देखे नहीं वो नजरिया हो राम जो ये देखे नहीं वो नजरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम
जुल्मी हमारे सांवरिया हो राम जुल्मी हमारे सांवरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम कैसे गुजरेगी हमरी उमरिया हो राम
आइये एक बार फ़िर से दस साल पीछे चला जाए यानि कि सन १९५९ में।
सुनते हैं एक और आँखों और कानों को सुकून पहुँचाने वाला गाना ।
कुमकुम के नृत्य और मनमोहक भाव भंगिमाओं से परिपूर्ण इस
गीत के प्रशंसक बहुतेरे हैं। गीत लता मंगेशकर की मधुर आवाज़
वाले इस गीत का संगीत तैयार किया है चित्रगुप्त ने। गीत के
बोल मजरूह सुल्तानपुरी के हैं । ये एक मस्ती भरा गीत है जिसको
आप कभी भी देख के बोर नहीं होंगे ।
गाने के बोल:
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई
यूँही राहों में खड़े हैं तेरा क्या लेते हैं
देख लेते हैं जलन दिल की बुझा लेते हैं
यूँही राहों में खड़े हैं तेरा क्या लेते हैं
देख लेते हैं जलन दिल की बुझा लेते हैं
आए हैं दूर से हम
तेरे मिलने को सनम
चे कुनम, चे कुनम, चे कुनम
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई
जान जलती है नज़र ऐसे चुराया न करो
हो गरीबों के दुखे दिल को दुखाया न करो
जान जलती है नज़र ऐसे चुराया न करो
हो गरीबों के दुखे दिल को दुखाया न करो
आए थे दूर से हम
तेरे मिलने को सनम
चे कुनम, चे कुनम, चे कुनम
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई
हम करीब आते हैं तुम और जुदा होते हो
लो चले जाते हैं काहे को खफा होते हो
हम करीब आते हैं तुम और जुदा होते हो
लो चले जाते हैं काहे को खफा होते हो
अब नहीं आयेंगे हम
तेरे मिलने को सनम
चे कुनम, चे कुनम, चे कुनम
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई
दगा दगा वई वई वई
हो गई तुमसे उल्फत हो गई
दगा दगा वई वई वई
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Daga daga vai vai-Kali topi Laal Rumal 1959
कुमकुम को परदे पर देखना , विशेषकर गानों में, सुखद
अनुभव होता था। उनके ऊपर फिल्माए गए गाने दर्शकों
को बांधे रखते थे। इस गीत में किशोर कुमार भी कलाबाजी
खाते नज़र आ जायेंगे आपको। फ़िल्म का नाम ही शरारत है।
इसमे खटिया के ऊपर जो गुलाटी मारी है किशोर कुमार ने ,
वो उम्मीद है किसी डुप्लीकेट कलाकार ने नहीं की होगी।
फ़िल्म सन १९५९ में आई थी। सेंसर के जाल में उलझने वाली
फिल्मों में से एक शरारत थोड़ी विलम्ब से प्रदर्शित हुई थी। ये
गीत शैलेन्द्र का लिखा हुआ है और इसकी धुन है शंकर जयकिशन
की। गीत की पञ्च लाइन मेरे हिसाब से यूँ है-उलझे नैन, मैं बेचैन............
अब आप ये भी बोल सकते है-यार इस गीत को सुन के तो उजाला
का "तेरा जलवा जिसने देखा " गीत याद आता है. उस गीत में भी
कुमकुम ने चुम्बकीय नृत्य किया है, उसे भी लता ने गाया है और
उसका संगीत भी शंकर जयकिशन ने तैयार किया है.
गाने के बोल:
तेरा तीर ओ बे-पीर दिल के आर पार है
जाने किसकी जीत है ये जाने किसकी हार है
तेरा तीर ओ बे-पीर दिल के आर पार है
जाने किसकी जीत है ये जाने किसकी हार है
रातों को निंदिया न दिन को करार है
कोई कहे प्रीत है ये कोई कहे प्यार है
भूल से मैं एक बार तेरी गली आ गई
लड़ गए नैना नज़र टकरा गई
रसिया की रंग भरी बातों में आ गई
दिल दे बैठी हाय मैं धोखा खा बैठी
हो, दिल दे बैठी हाय मैं धोखा खा बैठी
उलझे नैन, मैं बेचैन, दिल भी बेकरार है
जाने किसकी जीत है ये जाने किसकी हार है
तेरा तीर ओ बे-पीर दिल के आर पार है
जाने किसकी जीत है ये जाने किसकी हार है
लाख मैंने चाहा मैं प्यार छुपाऊँगी
तूने मुझे छेड़ा मैं तुझको सताऊंगी
नैन डोर बाँध के इशारों पे नचाऊँगी
मुझ क्या ख़बर थी मैं ख़ुद बाँध जाऊंगी
हो, मुझ क्या ख़बर थी मैं ख़ुद बाँध जाऊंगी
तेरी प्रीत तेरे गीत, तू है तो बहार है
जाने किसकी जीत है ये जाने किसकी हार है
तेरा तीर ओ बे-पीर दिल के आर पार है
जाने किसकी जीत है ये जाने किसकी हार है
रातों को निंदिया न दिन को करार है
कोई कहे प्रीत है ये कोई कहे प्यार है
...........................................................
Tera teer o be-peer-Shararat 1959