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Sep 30, 2015

लन्दन ठुमकदा-क्वीन २०१४

पिछले साल से इस साल तक बजने वाला एक लोकप्रिय गीत.
एक वजह तो है इसे देखने की-इस गीत में लड्डू और जलेबी
बनते देख सकते हैं आप. शादी का मौका है और उसके पहले
वाला नाच और गाना. हर्षोल्लास वाला गीत है ये. फील गुड है
जी, हैं जी! तो सुनते हैं फिल्म क्वीन का ये गीत जिसमें मुझे
केवल एक नायिका ही पहचान में आ रही हैं-कंगना राणावत.

पहली पंक्ति के वन टू टू का मतलब है-एक से दो होना. लड़की
की शादी होने वाली है इसलिए ये लाइन है गीत में. हाई हील
की चप्पल या सैंडल से होने वाली टुक टुक की आवाज़. गिट
पिट का मतलब ना समझ में आने वाला अंग्रेजी प्रलाप. घंटी
बिग बेन दी का मतलब बिग बेन टावर पर लगी हुई घंटी. इस
गीत में ट्राफलगार का भी जिक्र है जो लन्दन का एक पर्यटक
स्थल है. इतिहास में आपने इस जगह का नाम ज़रूर सुना होगा
जहाँ एक प्रसिद्द युद्ध लड़ा गया था. 

गीत लिखा है अन्विता दत्त गुप्तन ने जिन्होंने फिल्म बचना ऐ
हसीनों के गीत लिखे थे, आपको गर याद हो. वो सन २००८
की फिल्म थी. गीत गया है लभ जुनेजा, आरती कक्कड और
सोनू कक्कड ने.



गीत के बोल: 

तू हो गयी वन टू टू, ओ कुड़िये व्हाट टू डू
ओ हो गयी मुंडे दी, तू तुरु तुरु तुरु
पतंगा वर्गी तू ऐन्वई उड़ दी
ओ हो गयी मुंडे दी, तू तुरु तुरु तुरु
हिला दे चल दी टुक टुक तू करदी
मेक अप तू करदी यार
अंग्रेजी पढ दी, घिट पिट तू करदी
जिम्मे क्वीन साडी विक्टोरिया
तू घंटी बिग बेन दी, पूरा लन्दन ठुमकदा
ओ जद्दो नच्चे पेहन दी, पूरा लन्दन ठुमकदा
तू घंटी बिग बेन दी, पूरा लन्दन ठुमकदा
ओ जद्दो नच्चे पेहन दी, पूरा लन्दन ठुमकदा
हाए हाए हाय, आ हा आ हा आ हा

लट्ठे दी चादर उसपे हनीमून कर माहिया
आवो सामने, आवो सामने तेरा की साइज़ हैं वे डस माहिया
मलमल दा कुर्दा दिख दा हैं सब कुछ क्लियर माहिया
तेरे सामने, तेरे सामने लगदा हैं छोटा पलंग माहिया

ओ सियापा, ओए होए होए डेथ ही हो गयी
लाउडस्पीकर ते, मैडोना बजदी
हो लइके वर जींद, एथे उथे केहन्दी
अरे फेल करदे कबूतर वर्गी
ओ नेम्मा फिर दी गुटरगू कर दी
गुलाबी शेर डा, रंग हैं फिरंगी
राखी टी साँव के आर
सानु ते लगता, सौ साल तो चंगी
जगा कोई नहीं हैं बढ़िया
तू घंटी बिग बेन दी, पूरा लन्दन ठुमकदा
ओ जद्दो नच्चे पेहन दी, पूरा लन्दन ठुमकदा
तू घंटी बिग बेन दी, पूरा लन्दन ठुमकदा
ओ जद्दो नच्चे पेहन दी, पूरा लन्दन ठुमकदा

सर पे गिलास्सी रख लन्दन ठुमकदा
पंजाबी स्टाइल विच लन्दन ठुमकदा
लस्सी दा गिलास विच लन्दन ठुमकदा
ठुमकदा ठुमकदा  लन्दन ठुमकदा
ठुमकदा ठुमकदा ओए वाह जी वाह
तुनकदा तुनकदा तुम्बा तुनकदा
तुनकदा तुनकदा
ओए ओए ओए ओए ओए ओए बुर्र ओए शावा
ओए ओए ओए ओए ओए ओए ओए ओए ओए
ओए ओए ओए बल्ले
………………………………………………………………………………
London Thumakda-Queen 2014

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Jun 25, 2015

पाकीज़ा-ऊँगली २०१४

फिल्मों के नाम काफी लंबे समय से लीक से हट
कर रखे जाने लगे हैं. सन २००० के बाद तो नाम
ऐसे ऐसे सुनने को मिलते हैं कि आप दांतों तले
उँगलियाँ दबा लें. आज आपको ऊँगली फिल्म से
ही एक गीत सुनवाते हैं. ये सन २०१४ की फिल्म
है यानि पिछले साल की. गीत मनोज यादव ने
लिखा है और इसकी धुन के साथ गायकी भी की
है गुलराज सिंह ने.

ऊँगली फिल्म के निर्माता करन जौहर हैं. इसमें
इमरान हाशमी, कंगना रानावत और रणदीप हूडा
जैसे कलाकार हैं.




गीत के बोल:

ओ पाकीज़ा रे
नैनों से ये दिल गिरा रे
ओ पाकीज़ा रे

अब दिल में तू ही घिरा रे
बातें तेरी लब पहने तो
लबों से कई सजदे हों
इश्क़ तेरा मेरा रब से ज़्यादा
इश्क़ तेरा मेरा पाकीज़ा है ना
इश्क़ तेरा मेरा रब से ज़्यादा
तुझसे ही ये चाह है पाकीज़ा
पाकीज़ा, पाकीज़ा

नूर सी हँसी ये कहीं जो बरसाये तू
रूह की खुशी तू ये जी ना सहलाये तू
हश्र मेरा तू इब्तिदा, उन्स तेरा जावेदा
हो ज़िन्दगी कुछ नहीं तेरे बिना
इश्क़ तेरा..
ओ पाकीज़ा रे
................................
Pakeezah-Ungli 2014

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Jun 11, 2015

मैं वहाँ जहाँ पे तू है ओ जाना-राज़ २ २००९

आज आपको सुनवाते हैं राज़ २ फिल्म से एक गीत. ये गीत
ऊंचे सुर वाले गायक के के ने गाया है.

फिल्मस्टार इमरान हाशमी को सीरियल किसर कहा जाता है.
ये सुन कर उनको कैसा लगता है मालूम नहीं मगर कई
दर्शकों को ईर्ष्या अवश्य होती है उनकी किस्मत पर. शायद
फिल्म उद्योग के कुछ नायक भी ईर्ष्या के शिकार हों. कुछ
लोगों को ये शिकायत हो सकती है कि उन्हें इमरान जैसे रोल
क्यूँ नहीं मिले. ये ज़रूर है उनके परिवार वाले उनकी इस तरह
के प्रसिद्धि से खुश नहीं हैं. लेकिन, दर्शक उन्हें इसी रूप में
देखना चाहते हैं. वे नहीं होते तो कोई और होता. आज की पीढ़ी
के कई कलाकार उनके पद-चिन्हों पर चल पढ़े हैं.

ये तो समय की बात है. कुछ बॉलीवुड बोल्ड हो चला है और
कुछ हमारे देश का कल्चर. कभी कभी तो ऐसा प्रतीत होता
है ये कल्चर मानो खच्चर का भाई हो. सिम्बलिक है. खच्चर
बीच की प्रजाति का होता है-ना गधा ना घोडा.

राजनीति के साथ साथ कल्चर भी संक्रमण काल के दौर से
गुजर रहा है. वाइरल इन्फेक्शन की तरह ये अपने चरम पर
पहुंचेगा उसके बाद ही कुछ सुधार के लक्षण दिखलाई देना
प्रारंभ होंगे.

गीत कंगना रानावत और इमरान हाशमी पर फिल्माया गया
है. इसे सईद कादरी ने लिखा है और इसकी धुन बनाई है
राजू सिंह ने. फिल्म के संगीत विभाग में पांच संगीतकारों
ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है.





गीत के बोल:

मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है
ओ जाना ओ जाना
मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है ओ जाना
हर वक्त तू ही तू है हर सितम तू ही तू है ओ जाना
तू साथ मेरे हमदम चाहे कहीं भी हो ओ जाना
मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है ओ जाना

दिन रात सोचता हूँ तुझे इतना प्यार मैं दूं
जो कभी उतर ना पाए तुझे वो खुमार दूं
मुझे ऐसा तू मिला है जैसे कि कोई दुआ है
तुझपे कोई आंच आये तो मैं खुद को भी जला लूं

हर दिन मुझी में तू है हर शब् बुझी में तू है
हर दिन मुझी में तू है हर शब् बुझी में तू है ओ जाना
मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है
ओ जाना ओ जाना

हर पल तुझे सम्भालूँ तेरे सारे गम उठा लूं
मेरा दिल तो यही चाहे तुझे रूह में सजा लूं
तेरा अक्स नूर सा है तू एक सुरूर सा है
दिलकश तेरी अदा का हर लम्हा मैं चुरा लूं
हर दम खुदी में तू है मेरी बेखुदी में तू है
हर दम खुदी में तू है मेरी बेखुदी में तू है
ओ जाना ओ जाना
ओ जाना ओ जाना
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Main wahan jahan pe too hai-Raaz 2 2009

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