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Sep 5, 2017

ऐ डिंग डोंग डो तुम्हें हम चाहें-पागलपन २००१

बहन भाई वाले गीत नई फिल्मों में कम देखने को मिलते हैं.
एक गीत है सन २००१ की फिल्म पागलपन से जिसे समीर
ने लिखा है और इसके संगीतकार हैं राजू सिंह.

गायक कलाकार हैं-उदित नारायण, सुनिधि चौहान, जावेद अली,
विक्की और हार्वर्ड. मधुर गीत है और इसे हम गुनगुना सकते
हैं आसानी से.



गीत के बोल:

ऐ डिंग डांग डो तुम्हें हम चाहें
जो तुम कह दो हँस के मर जाएं
हमारी जां है प्यारी बहना
बिना तेरे कहीं कभी हमको न रहना
खुशी और ग़म हमें मिल के है सहना
हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे
हो हो हो हो हो हो हो हो हो
ऐ डिंग डांग डो तुम्हें हम चाहें
जो तुम कह दो हँस के मर जाएं
हमारी जां है प्यारी बहना
बिना तेरे कहीं कभी हमको न रहना
खुशी और ग़म हमें मिल के है सहना
हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे
हो हो हो हो हो हो हो हो हो

अक्कड बक्कड़ बम्बे बो अस्सी नब्बे पूरे सौ
जिसको मिल गया हो भाई तेरे जैसा
उसको फिर किसी से क्या लेना
करती हूँ यही गॉड से मैं तो प्रेयर
ऐसे ही ब्रदर मुझको देना
मैने तुमको ही सब कुछ है माना
लगे बेमाना सारा जहां

ऐ डिंग डांग डो तुम्हें हम चाहें
जो तुम कह दो हँस के मर जाएं
हमारी जां है प्यारी बहना
बिना तेरे कहीं कभी हमको न रहना
खुशी और ग़म हमें मिल के है सहना
हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे
हो हो हो हो हो हो हो हो हो


हूं मिल के हम उठाएंगे डोली जो तुम्हारी
आँखों से तो आँसू बहेंगे
तू जायेगी दुल्हन बनके इक दिन यहां से
अकेले हम कैसे रहेंगे
संग हमने है बचपन गुजारा
साथ में हम हुए हैं जवां

ऐ डिंग डांग डो तुम्हें हम चाहें
जो तुम कह दो हँस के मर जाएं
हमारी जां है प्यारी बहना
बिना तेरे कहीं कभी हमको न रहना
खुशी और ग़म हमें मिल के है सहना
हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे हे
हो हो हो हो हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो हो हो हो हो
हो हो हो हो हो हो हो हो हो
............................................................
Ae ding dong do-Pagalpan 2001

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Jun 11, 2015

मैं वहाँ जहाँ पे तू है ओ जाना-राज़ २ २००९

आज आपको सुनवाते हैं राज़ २ फिल्म से एक गीत. ये गीत
ऊंचे सुर वाले गायक के के ने गाया है.

फिल्मस्टार इमरान हाशमी को सीरियल किसर कहा जाता है.
ये सुन कर उनको कैसा लगता है मालूम नहीं मगर कई
दर्शकों को ईर्ष्या अवश्य होती है उनकी किस्मत पर. शायद
फिल्म उद्योग के कुछ नायक भी ईर्ष्या के शिकार हों. कुछ
लोगों को ये शिकायत हो सकती है कि उन्हें इमरान जैसे रोल
क्यूँ नहीं मिले. ये ज़रूर है उनके परिवार वाले उनकी इस तरह
के प्रसिद्धि से खुश नहीं हैं. लेकिन, दर्शक उन्हें इसी रूप में
देखना चाहते हैं. वे नहीं होते तो कोई और होता. आज की पीढ़ी
के कई कलाकार उनके पद-चिन्हों पर चल पढ़े हैं.

ये तो समय की बात है. कुछ बॉलीवुड बोल्ड हो चला है और
कुछ हमारे देश का कल्चर. कभी कभी तो ऐसा प्रतीत होता
है ये कल्चर मानो खच्चर का भाई हो. सिम्बलिक है. खच्चर
बीच की प्रजाति का होता है-ना गधा ना घोडा.

राजनीति के साथ साथ कल्चर भी संक्रमण काल के दौर से
गुजर रहा है. वाइरल इन्फेक्शन की तरह ये अपने चरम पर
पहुंचेगा उसके बाद ही कुछ सुधार के लक्षण दिखलाई देना
प्रारंभ होंगे.

गीत कंगना रानावत और इमरान हाशमी पर फिल्माया गया
है. इसे सईद कादरी ने लिखा है और इसकी धुन बनाई है
राजू सिंह ने. फिल्म के संगीत विभाग में पांच संगीतकारों
ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है.





गीत के बोल:

मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है
ओ जाना ओ जाना
मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है ओ जाना
हर वक्त तू ही तू है हर सितम तू ही तू है ओ जाना
तू साथ मेरे हमदम चाहे कहीं भी हो ओ जाना
मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है ओ जाना

दिन रात सोचता हूँ तुझे इतना प्यार मैं दूं
जो कभी उतर ना पाए तुझे वो खुमार दूं
मुझे ऐसा तू मिला है जैसे कि कोई दुआ है
तुझपे कोई आंच आये तो मैं खुद को भी जला लूं

हर दिन मुझी में तू है हर शब् बुझी में तू है
हर दिन मुझी में तू है हर शब् बुझी में तू है ओ जाना
मैं वहाँ जहाँ पे तू है मेरा इश्क तो जूनून है
ओ जाना ओ जाना

हर पल तुझे सम्भालूँ तेरे सारे गम उठा लूं
मेरा दिल तो यही चाहे तुझे रूह में सजा लूं
तेरा अक्स नूर सा है तू एक सुरूर सा है
दिलकश तेरी अदा का हर लम्हा मैं चुरा लूं
हर दम खुदी में तू है मेरी बेखुदी में तू है
हर दम खुदी में तू है मेरी बेखुदी में तू है
ओ जाना ओ जाना
ओ जाना ओ जाना
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Main wahan jahan pe too hai-Raaz 2 2009

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