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Dec 7, 2017

तेरे रास्ते पे हमने एक घर-कवि १९५४

फ़िल्मी नायक और नायिका चाहे कहानी के हिसाब से जितने गरीब हों
मगर वो आम आदमी से हमेशा रईस नज़र आते हैं. ऐसा क्यूँ है, क्या
बड़े परदे का इफेक्ट होता है या उनके पाउडर लिपस्टिक का? या फ़िल्मी
किरदार बाय डिफाल्ट नॉन-फटीचर ही होता है. फिल्म का नायक रईस है
और उसने नायिका के रास्ते पर घर बना लिया है, जाहिर है वो पैसे
वाला है. शायद १९६३ का वर्ष घर निर्माण के लिए प्रसिद्ध था बॉलीवुड में

फिल्म तेरे घर के सामने  सन १९६३ में ही आई और उस फिल्म के एक
गीत में भी नायक नायिका के घर के सामने एक घर बनाने का जिक्र कर
रहा है. वो तो पूरी फिल्म ही घर निर्माण पर थी. इस वर्ष एक फिल्म और
आई जिसका नाम है-घर बसा के देखो. गृहस्थी फिल्म को भी इसी साल
रिलीज़ होते देखा गया.

फिल्म कवि से एक सॉफ्ट मेलोडी सुनते हैं जिसे लता और तलत महमूद
ने गाया है. राजेंद्र कृष्ण की रचना है और सी रामचंद्र का संगीत.





गीत के बोल:

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है
तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है

आने से तेरे पहले आता है एक इशारा
आने से तेरे पहले आता है एक इशारा
सूरज से पहले जैसे इक रोशनी की धारा
आने से तेरे पहले आता है एक इशारा
सूरज से पहले जैसे इक रोशनी की धारा
हम ने वही इशारा दिल में बसा लिया है
हम ने वही इशारा दिल में बसा लिया है

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है

तेरे घर से दूर क्यों हों मेरी ज़िंदगी की राहें
मेरे दिल की धड़कनों में तेरे गीत तेरी आहें
तेरे घर से दूर क्यों हों मेरी ज़िंदगी की राहें
मेरे दिल की धड़कनों में तेरे गीत तेरी आहें
तेरी रोशनी से दिल का दीपक जला लिया है
तेरी रोशनी से दिल का दीपक जला लिया है

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है

तेरी पायलों की छम-छम मेरे गीत में समाई
तेरी पायलों की छम-धम मेरे गीत में समाई
मेरी आरज़ू ने कर दी तेरी नाम से सगाई
छोटी सी इस अदा को नग़मा बना लिया है

तेरे रास्ते पे हमने इक घर बना लिया है
तेरी मुस्कुराहटों से इस को सजा लिया है
………………………………………………………….
Tere raaste pe hamne-Kavi 1954

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Oct 18, 2016

मान करे क्या रंग रूप का-कवि १९५४

ईश्वर ने मनुष्य को दो आँखें तो दी हैं मगर मन की आँखों का
शटर बंद कर रखा है. इसे मनुष्य को अपने प्रयासों से खोलना
पढता है. जिसके ह्रदय में प्रेम बसता है उसके लिए अंतर्मन की
आँखें खोलना ज्यादा आसान है.

चमड़ी के रंग और ऊपरी सौंदर्य पर दुनिया मोहित होती है. ये भी
एक प्रकार का छलावा है जिससे अच्छे अच्छे नहीं बच पाए. इन
सब से जप परे हो जाता है असली सौंदर्य से साक्षात्कार उसी का
होता है.

राजेंद्र कृष्ण द्वारा रचित अच्छे दार्शनिक गीतों में से एक जिसे आपने
शायद कभी सुना हो, नहीं सुना तो आज सुन लें.



गीत के बोल:

तेरी इक इक अदा झूठी
वफ़ा झूठी हया झूठी
चलेगी ऐ हसीना कब तलक़
आखिर हवा झूठी

मान करे क्या रंग रूप का
तू काग़ज़ का फूल है
मान करे क्या रंग रूप का
तू काग़ज़ का फूल है
तुझ में खुशबू ढूंढ रही है
तुझ में खुशबू ढूंढ रही है
ये दुनिया की भूल है
मान करे क्या रंग रूप का
तू काग़ज़ का फूल है

तुझे देख के लाख बुझा ले
प्यास कोई अंखियन की
तुझे देख के लाख बुझा ले
प्यास कोई अंखियन की
बिना बास का फूल बनेगा
क्या शोभा बगियन की
डाल का फूल चढ़े मन्दिर में
डाल का फूल चढ़े मन्दिर में
तू रस्ते की धूल है
मान करे क्या रंग रूप का
तू काग़ज़ का फूल है
मान करे क्या रंग रूप का
तू काग़ज़ का फूल है

बिना ज्योत का दीपक है तू
बिना तेल की बाती
बिना ज्योत का दीपक है तू
बिना तेल की बाती
जब तन उजला और मन काला
फिर काहे इतराती
शबनम खुद को सागर समझे
शबनम खुद को सागर समझे
ये शबनम की भूल है

मान करे क्या रंग रूप का
तू काग़ज़ का फूल है
मान करे क्या रंग रूप का
तू काग़ज़ का फूल है
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Maan kare kya roop rang ka-Kavi 1954

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