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May 14, 2017

इश्क का दर्द सुहाना-इशारा १९४३

फिल्म:इशारा
वर्ष:१९४३
गीतकार:दीनाहाथ मधोक
गायक:वसंत कुमठेकर
संगीतकार:खुर्शीद अनवर



गीत के बोल:

इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना

इश्क़ पहलू में दिया दिल तो दिया क्या तूने
इश्क़ पहलू में दिया दिल तो दिया क्या तूने
इस तरह दर्द को खाली है किया क्या तूने
इस तरह दर्द को खाली है किया क्या तूने
कभी दिल से जिगर में आना हो
दिल से जिगर में आना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना

क्यूँ तड़पता है ज़रा
क्यूँ तड़पता है ज़रा
उनके चल अब कानों से
क्यूँ नहीं मानता हाय
क्यूँ नहीं मानता हाय मेरे समझाने से
मेरे दिल को तुम्हीं समझाना हो
मेरे दिल को तुम्हीं समझाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना
………………………………………………
Ishq ka dard suhana-Ishara 1943

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Feb 23, 2017

पापी पपीहा रे-परवाना १९४७

आज सुनते हैं ‘नन्ही सी जान’ सीरीज़ से अगला गीत. इसे
आप पपीहा हिट भी कह सकते हैं. गीत फिल्माया गया है
सुरैया ने जिन्होंने इसे परदे पर और परदे के पीछे दोनों ही
जगह गया है. इसे आप कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना हिट
भी कह सकते हैं. नायिका भेड़ों की तरफ देखते देखते पपीहा
शब्द बोल रही है. नायिका के अत्यधिक मुस्कुराने की वजह
हो सकती है ये. हो सकता है पपीहा बड़े परदे पर साफ़ दिखाई
देता हो और हमें ना दिखाई दे रहा हो.

पपीहा सिम्बलिक भी हो सकता है. एक जनाब बांसुरी बजा
रहे हैं गीत में, हो सकता है उनके लिए ये शब्द इस्तेमाल
किया गया हो. ‘बैरी हिट’ मैंने इसलिए नहीं कहा क्यूंकि मुझे
साउथ अफ्रीका के मशहूर क्रिकेटर बैरी रिचर्ड्स याद आ जाते
हैं जब भी ये शब्द सुनता हूँ.

गनीमत है गीत में नायिका ने पपीता नहीं खाया वरना इसे
जनता पपीता हिट कह डालती. क्या करें भाई, हमें श्रेणी बनाने
वालों ने मजबूर कर दिया है और गूगल भाई साहब भी कुछ
इनोवेटिव मसलों पर जल्दी गौर फ़रमाया करते हैं. सर्च पर
से एक दिन हमारा ब्लॉग हिमालय की छोटी चढ जाता है तो
दूसरे ही दिन ऐसे उतरता है जैसे कोई आर्ट फिल्म फटीचर
सिनेमा हॉल से २-३ दिन में गुम हो के लावारिस हो जाती है.

गीत सुनते हैं जिसे दीनानाथ मधोक ने लिखा है और इसकी
धुन बनाई है खुर्शीद अनवर ने.




गीत के बोल:

पापी पपीहा रे पी पी न बोल
बैरी पी पी न बोल
नन्ही सी जान मेरी सुन के न जाये डोल
पी पी न बोल बैरी पी पी न बोल
पापी पपीहा रे पी पी न बोल
बैरी पी पी न बोल

उन को ये घमण्ड है
मैं दो नैना मारी रे
मोहे मान इस बात पर के
मैं साजन की प्यारी रे
भेद हमारे जी के पिया पास नही खोल
पी पी न बोल बैरी पी पी न बोल
पापी पपीहा रे पी पी न बोल
बैरी पी पी न बोल
………………………………………………………..
Papi papeeha re-Parwana 1947

Artists: Suraiya

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Jul 29, 2016

जब तुम ही नहीं अपने-परवाना १९४७

सुरैया का गाया हुआ एक मधुर गीत सुनते हैं फिल्म परवाना से.
ये सन १९४७ की फिल्म है जिस साल हमारे देश को आजादी
मिली थी.

खुर्शीद अनवर आजादी के बाद पाकिस्तान चले गए और वहाँ
की फिल्मों में संगीत देने लगे. विभाजन के पूर्व वे बॉलीवुड
की फिल्मों में संगीत दिया करते थे, तब फिल्म उद्योग भी एक
ही था. वे काफी प्रतिभाशाली संगीतकार थे. उन्होंने भी सभी
गायकों के लिए उल्लेखनीय धुनें बनायीं.

प्रस्तुत गीत डी एन मधोक ने लिखा था. फिल्म परवाना का
निर्देशन जे के नंदा ने किया था. जीत प्रोडक्शंस नाम संस्था ने
इसका निर्माण किया. इस फिल्म में सहगल और सुरैया प्रमुख
कलाकार हैं.





गीत के बोल:

जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है
जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है
उल्फ़त जिसे कहते हैं
इक झूठी कहानी है
उल्फ़त जिसे कहते हैं
इक झूठी कहानी है

जाते हुए क्यों तुमको
इस दिल का खयाल आता
जाते हुए क्यों तुमको
इस दिल का खयाल आता
तड़पा के चले जाना
इक रीत पुरानी है
तड़पा के चले जाना
इक रीत पुरानी है

जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है

परवाने के जलने पे
हँसना न तमाशाई
परवाने के जलने पे
हँसना न तमाशाई
हँसती हुई शमा भी
इक रात की रानी है
हँसती हुई शमा भी
इक रात की रानी है

जब तुम ही नहीं अपने
दुनिया ही बेगानी है
.................................................................
Jab tumhin nahin apne-Parwana 1947


Artist: Suraiya

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