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Nov 2, 2019

उड़ते हुए पंछी-संजोग १९४३

देसी फिल्मों में चार्ली चैप्लिन जैसी मूंछें रखने वाले
काफी कलाकार हमने देखे हैं अभी तक. ३० और ४०
के दशक में एक कलाकार काफी चर्चित थे अपनी
भाव भंगिमाओं की वजह से-नूर मोहम्मद चार्ली. नाम
में आगे चार्ली लगा है इससे अनुमान लगाइए कि ये
चार्ली चैप्लिन के बड़े फैन रहे होंगे. गीत देख कर भी
आपको यकीन हो जायेगा इस बात पर.

कारदार निर्देशित इस फिल्म का संगीत नौशाद ने तैयार
किया है. प्रस्तुत गीत लिखा है दीनानाथ मधोक ने और
इसे गाया है नूर मोहम्मद चार्ली संग सुरैया ने. परदे पर
चार्ली के साथ मेहताब हैं.

सन १९३२ की एक फिल्म पाक दमन रक्कासा से शुरू
हुआ उनका कैरियर १९६३ की फिल्म अकेली मत जइयो
तक चला. बीच के समय में वे विभाजन के बाद पडोसी
देश भी रह आये. अंत समय उनका अमरीका में गुज़रा.

हिंदी सिनेमा के पहले स्टार कॉमेडियन नूर मोहम्मद की
आवाज़ भी जनता को पसंद थी और वे अपनी अदाओं और
गायकी दोनों के लिए चर्चित रहे.




गीत के बोल:

उड़ते हुए पंछी
कौन इनको बताये
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
दिल उनका हुआ जाये
उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
क्या तुझसे कहूँ हाय
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
वो हमको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी

मुंह की बातें सारी
झूठों के झूठे दिलासे
मुंह की बातें सारी
झूठों के झूठे दिलासे
कोई मर जाये उनकी बाला से
कोई मर जाये उनकी बाला से

उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
कौन इनको बताये
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
हम उनको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी

हो ओ ओ दिल है हसरतों से भरा रे
ये न लगी जाने ज़रा रे
हूँ
दिल है हसरतों से भरा
अरे अरे हाँ
ये न लगी जाने ज़रा
दिल में आ के देख मेरे
कौन खोटा कौन खरा
दिल में आ के देख मेरे
कौन खोटा कौन खरा

उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
क्या तुझसे कहूँ हाय
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
वो हमको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी.
……………………………………………
Udte hue panchhi-Sanjog 1943

Artists: Noor Mohammad Charlie, Mehtab

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May 26, 2018

तुमने मुझसे प्रेम जता कर-वापस १९४३

वापस चलते हैं फिल्म वापस के गीतों की तरफ. इसकी
विशेषता ये है कि इसमें आँख लगने के दोनों तरीकों का
प्रयोग किया गया है. कुछ गीतों में आपने ‘आग लगी’ के
दो प्रयोग देखे होंगे. उस अनूठा है.

मुंशी ज़ाकिर हुसैन इस गीत के लेखक हैं. मुंशी एक उपाधि
है. ये पुराने कुछ गीतकारों के नाम के आगे लगा करता था.
इसकी वजह कोई पुरा-संगीत-प्रेमी बतलायेगा ?

 

गीत के बोल:

तुमने मुझसे प्रेम जता कर
तुमने मुझसे प्रेम जता कर
दुनिया से बेगाना किया
दुनिया से बेगाना किया
दिल था इक सख दुःख का साथी
दिल था इक सख दुःख का साथी
उसको भी दीवाना किया
उसको भी दीवाना किया
तुमने मुझसे प्रेम जता कर
दुनिया से बेगाना किया

दिल का शीशा नाज़ुक शीशा
दिल का शीशा नाज़ुक शीशा
ठेस लगी बस चूर हुआ
ठेस लगी बस चूर हुआ
बीती जो कुछ मुझ पर बीती
बीती जो कुछ मुझ पर बीती
लोगों ने अफसाना किया
लोगों ने अफसाना किया

तुमने मुझसे प्रेम जता कर
दुनिया से बेगाना किया

हा आ आ आ आ आ आ आ आ
तुमसे जो उस दिन आँख लगी
अब तक न हमारी आँख लगी
ही ही ही तुमसे जो उस दिन आँख लगी
अब तक न हमारी आँख लगी
दर्द का सौदा मोल लिया
दर्द का सौदा मोल लिया
सुख चैन तुम्हें नज़राना किया
सुख चैन तुम्हें नज़राना किया

तुमने मुझसे प्रेम जता कर
दुनिया से बेगाना किया
दुनिया से बेगाना किया
.......................................................................................
Tumne mujse prem hata kar-Wapas 1943

Artist: Asit Baran

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May 22, 2018

मनवा काहे फिर तड़पाए-वापस १९४३

सुनते हैं सन १९४३ की फिल्म वापस से एक गीत सुप्रोवा
सरकार का गाया हुआ.  अख्तर चुघताई ने इसे लिखा है
और संगीत है आर. सी. बोराल का. परदे पर होंठ हिलाए
हैं भारती देवी ने.

जिन लोगों को जूनी पुरानी फिल्मों की जानकारी है उन्हें
बॉलीवुड वालों से गोल्ड मेडल मिलना चाहिए. ३० और ४०
के दशक की अधिकाँश और बाद के दशकों की भी ढेर
सारी फिल्मों का विवरण उपलब्ध नहीं है. खोज जारी है
और कुछ ऊर्जावान, समर्थ व्यक्ति जिन्हें विंटेज शब्द से
लगाव है वे कर रहे हैं सार्थक प्रयास. उन सबको एडवांस
में शुभकामनाएं.





गीत के बोल:

मनवा काहे फिर तड़पाए
मनवा काहे फिर तड़पाए
भूल गयी थी जो बरसातें
भूल गयी थी जो बरसातें
चांदनी रातें प्यार की बातें
चांदनी रातें प्यार की बातें
अब क्यूँ रह रह कर हाय
मन को उनकी याद सताए
मनवा काहे फिर तड़पाए

जाग उठे क्यूँ नींद के मारे
कहे रे सपने रिश्ते नाते
छोड़ चुकी थी जिस जीवन को
छोड़ चुकी थी जिस जीवन को
काहे याद में आऐ
मनवा काहे फिर तड़पाए

याद किसी की दिल में आई
नैनन ने फिर झड़ी लगायी
याद किसी की दिल में आई
नैनन ने फिर झड़ी लगायी
मन का पंछी क्यूँ मन में है
मन का पंछी क्यूँ मन में है
भूले राग सुनाये मनवा
भूले राग सुनाये
मनवा काहे फिर तड़पाए
............................................................................
Manwa kaah tadpaaye-Wapas 1943

Artist: Bharti Devi

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May 21, 2018

अलबेला मस्ताना-वापस १९४३

४० के दशक के पूर्वार्ध की फिल्म वापस से एक उम्दा
गीत सुनते हैं. सुप्रोवा नाम की गायिका की आवाज़ में
ये गीत है. उनकी गायकी तो अपने समकालीनों की
ही तरह है मगर आवाज़ स्पष्ट है.

गीत पंडित भूषण का है और संगीत राय चंद्र बोराल का.
उस समय दो वर्ज़न रेकोर्ड किये जाते थे. फिल्म के लिए
सुप्रोवा सरकार/चटर्जी ने गाया है और ७८ चकरी के लिए
बिनोता रॉय ने.




गीत के बोल:

अलबेला मस्ताना
इक हंसों का जोड़ा
अलबेला मस्ताना
नीले आकाश में दूर दूर तक
उड़ता पंख पसार
उड़ता पंख पसार
नीले आकाश में दूर दूर तक
उड़ता पंख पसार
उड़ता पंख पसार
अलबेला मस्ताना
इक हंसों का जोड़ा
अलबेला मस्ताना

मधुर किलोले करता फिरता
मधुर किलोले करता फिरता
मस्ती भरी हवाओं में
मस्ती भरी हवाओं में
झूम झूम झूम
चूम चूम चूम
झूम झूम मुख चूम चूम कर
उड़ता उड़ता दसों दिशाओं में
उड़ता दसों दिशाओं में
तारों से कुछ गुपचुप कहता
प्रेम नशे में डूबा रहता
तारों से कुछ गुपचुप कहता
प्रेम नशे में डूबा रहता
चाँद से चोंच मिलाता जा कर
मेघ से करता प्यार
मेघ से करता प्यार

अलबेला मस्ताना
इक हंसों का जोड़ा
अलबेला मस्ताना

धरती पर जो कभी उतरता
बच्चों का दम हरदम हरता
धरती पर जो कभी उतरता
बच्चों का दम हरदम हरता
उनकी खातिर जान लड़ाता
खोज खोज कर वो ही लाता
रंग उमंग भरी दुनिया में
रंग उमंग भरी दुनिया में
करता मौज बहार
करता मौज बहार

अलबेला मस्ताना
इक हंसों का जोड़ा
अलबेला मस्ताना
………………………………………………………….
Albela mastana-Wapas 1943

Artst: Bharti Devi

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Apr 6, 2018

आ जा बिछड़े हुए साजन-नई कहानी १९४३

आपको १९४३ की फिल्म नई कहानी से एक गाना सुनवाया था
कुछ साल पहले. अब दूसरा सुनते हैं. इतने गीत हैं और इतनी
फ़िल्में कि याद रख पाना मुश्किल होता है कौन सा गीत पोस्ट
हुआ और कौनसा रह गया. वो तो आज संगीतकार श्याम सुन्दर
वाले गीतों की लिस्ट देखी तो मालूम हुआ कि ये बचा हुआ है.

वली साहब के बोल हैं और इसे जी एम दुर्रानी ने गाया है. रफ़ी
के फिल्म संगीत क्षेत्र में पदार्पण के पूर्व जी एम दुर्रानी काफी
लोकप्रिय हुआ करते थे. रफ़ी और लता के संगीत क्षेत्र में आने
के बाद फिल्म संगीत के सारे समीकरण ही बदल गए.




गीत के बोल:

आ जा आ जा आ जा
आ आ आ आ जा
आ जा आ जा आ जा
आ आ आ आ जा
बिछड़े हुए साजन
बिछड़े हुए साजन जिस देस गया है
जिस देस गया है
उस देस का रस्ता सपने में दिखा जा
आ जा आ जा आ जा
आ आ आ आ जा

बिरहा ने कलेजा यूँ कर दिया छलनी
बिरहा ने कलेजा यूँ कर दिया छलनी
जैसे कोई बन्सी
जैसे कोई बन्सी जंगल में पड़ी हो
आहों से भरी हो
होंठों से लगा के
होंठों से लगा के आहों में समा के
तू गीत बना जा
आ जा आ जा आ जा
आ आ आ आ जा

हो नैन में ऐसे
हो नैन में ऐसे ज्यूँ सीप में मोती
और प्राण में ऐसे ज्यूँ दीप में ज्योति
और प्राण में ऐसे ज्यूँ दीप में ज्योति
सोता हुआ दीपक पल भर को जगा जा
आ जा खा जा आ जा
आ आ आ आ जा
………………………………………………
Aa ja bichhde hue sathi-Nai Kahani 1943

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Jul 22, 2017

अब तेरे सिवा कौन मेरा-किस्मत १९४४

अमीरबाई कर्नाटकी की आवाज़ में एक भक्ति गीत सुनते हैं
फिल्म किस्मत से. इस गीत को सुनने के बाद आप महसूस
करेंगे कि इस गीत की धुन कुछ जानी पहचानी सी है. आगे
चल के कई गीतों में इस गीत की खुशबू आती है.

संभव है ये कोई पारंपरिक धुन हो जिसके आधार पर ये गीत
तैयार किया गया हो. फिल्मों में लोक संगीत को शामिल करने
की परंपरा शुरू से है. गीत कवि प्रदीप ने लिखा और इसका
संगीत तैयार किया अनिल बिश्वास ने.



गीत के बोल:

अब तेरे सिवा
अब तेरे सिवा कौन मेरा कृष्ण कन्हैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा
अब तेरे सिवा कौन मेरा कृष्ण कन्हैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा

मेरी खुशी की दुनिया बाबुल ने छीन ली
मेरे सुखों की कलियाँ किस्मत ने बीन लीं
मेरी खुशी की दुनिया बाबुल ने छीन ली
मेरे सुखों की कलियाँ किस्मत ने बीन लीं
अब तू ही बचा लाज मेरी बंसी बजैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा

पूजा नहीं है पूरी अधूरी है आरती
पूजा नहीं है पूरी अधूरी है आरती
ओ श्याम सलोने तुझे मीरा पुकारती
ओ श्याम सलोने तुझे मीरा पुकारती
तुझे मीरा पुकारती
सहती है बार बार वो ले ले के बलैयां
सहती है बार बार वो ले ले के बलैयां
भगवान भगवान
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया

अब तेरे सिवा
अब तेरे सिवा कौन मेरा कृष्ण कन्हैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा
..........................................................................
Ab tere sinwa kaun mera-Kismat 1944

Artists: Ashok Kumar, Mumtaz Shanti

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May 14, 2017

इश्क का दर्द सुहाना-इशारा १९४३

फिल्म:इशारा
वर्ष:१९४३
गीतकार:दीनाहाथ मधोक
गायक:वसंत कुमठेकर
संगीतकार:खुर्शीद अनवर



गीत के बोल:

इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना

इश्क़ पहलू में दिया दिल तो दिया क्या तूने
इश्क़ पहलू में दिया दिल तो दिया क्या तूने
इस तरह दर्द को खाली है किया क्या तूने
इस तरह दर्द को खाली है किया क्या तूने
कभी दिल से जिगर में आना हो
दिल से जिगर में आना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना

क्यूँ तड़पता है ज़रा
क्यूँ तड़पता है ज़रा
उनके चल अब कानों से
क्यूँ नहीं मानता हाय
क्यूँ नहीं मानता हाय मेरे समझाने से
मेरे दिल को तुम्हीं समझाना हो
मेरे दिल को तुम्हीं समझाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना हो
इश्क़ का दर्द सुहाना
………………………………………………
Ishq ka dard suhana-Ishara 1943

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Aug 13, 2016

रुमझुम रुमझुम चाल-तानसेन १९४३

फिल्म तानसेन से सहगल का गाया एक क्लासिक गीत सुनते
हैं जिसे खेमचंद प्रकाश ने संगीतबद्ध किया है पंडित इन्द्र के
बोलों पर.

फिल्म तानसेन के प्रमुख कलाकार के एल सहगल और खुर्शीद
थे. १६ वीं शताब्दी में मुग़ल बादशाह अकबर के दरबार में
नवरत्नों में से एक तानसेन संगीत के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक
और प्रसिद्ध हस्ती थे. हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में उनका
स्थान उच्च है और रहेगा. उन्होंने कई राग-रागिनियों की
रचना भी की. उनके संगीत से जुडी कई किवदंतियां पीढ़ी-दर
पीढ़ी चली आ रही हैं.

फिल्म में कुल जमा १३ गीत हैं जो कि पंडित इन्द्र ने लिखे.
फिल्म सन १९४३ की सबसे सफल फिल्मों में से एक है और
इसके गीत भी सुपर डुपर हिट हुए.

फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से ये गीत मतवाले हाथी को
काबू में करने के लिए गाया जा रहा है.



गीत के बोल:

रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
काहे भई मतवारी
रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
काहे भई मतवारी
बलिहारी बलिहारी
बलिहारी बलिहारी
ऐरावत बलिहारी
बलिहारी बलिहारी
ऐरावत बलिहारी
रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
काहे भई मतवारी
रुमझुम

तुम्हरी चाल जो चले कामनी
तुम्हरी चाल जो चले कामनी
पिया मन भावे वो गज गामिनी
पिया मन भावे वो गज गामिनी
बिसरत काहे बिरज आपनो
यह अचरज है भारी
रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
काहे भई मतवारी
रुमझुम

बलिहारी बलिहारी
बलिहारी बलिहारी
ऐरावत बलिहारी
रुमझुम रुमझुम चाल तिहारी
काहे भई मतवारी
रुमझुम

……………………………………………………….
Rumjhu rumjhum chal-Tansen 1943

Artists: KL Saigal, Khursheed

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Jul 6, 2016

अब राजा भये मोरे बालम-तानसेन १९४३

दीना नाथ मधोक का लिखा हुआ और खेमचंद प्रकाश के
संगीत निर्देशन में तैयार और खुर्शीद का गाया हुआ एक
मधुर गीत सुनते हैं फिल्म तानसेन से. फिल्म का निर्माण
रणजीत नमक संस्था ने किया. फिल्म में सहगल, कमला
चटर्जी, खुर्शीद, केसरी, भगवान और रमन जैसे कलाकारों
ने काम किया था.

खेमचंद प्रकाश के गीत सहज रूप से आपका ध्यान आकृष्ट
करते हैं. इस गीत का ध्वनि संयोजन भी कुछ वैसा ही है
कि आप एक बार इसे सुनने को मजबूर हो जायेंगे.




गीत के बोल:

अब राजा भये मोरे बालम वो दिन भूल गए
अब राजा भये मोरे बालम वो दिन भूल गए

मेरी गली में सांझ सवेरे
मेरी गली में सांझ सवेरे
मारे सौ सौ फेरे
मारे सौ सौ फेरे
आँख में आंसू भर भर बोले
आँख में आंसू भर भर बोले
जी न लगे बिन तेरे, हे हे हे हे
जी न लगे बिन तेरे
वो दिन भूल गए

अब राजा भये मोरे बालम वो दिन भूल गए
अब राजा भये मोरे बालम वो दिन भूल गए

गा गा के वो हमें सुनाएँ
गा गा के वो हमें सुनाएँ
मन की राम कहानी
गा गा के वो हमें सुनाएँ
मन की राम कहानी
रो रो कर जब मैं ये बोलूं
रो रो कर जब मैं ये बोलूं
जानो प्रीत निभानी
जानो प्रीत निभानी
वो दिन भूल गए

अब राजा भये मोरे बालम वो दिन भूल गए
अब राजा भये मोरे बालम वो दिन भूल गए
...................................................................
Ab raja bhaye more balam-Tansen 1943

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Feb 23, 2016

आँख मिलते ही मोहब्बत हो गई-आँख की शर्म १९४३

सन १९४३ का गीत है,फिल्म का नाम आँख की शर्म
है. गायिका का नाम है मीनाक्षी. गीत लिखा है पंडित
इन्द्र ने, और साहब क्या लिखा है, एक बार आप इसे
सुन लें तो इसके मुरीद बन जायेंगे. हाँ, वो धैर्य और
हौसला ज़रूरी है ४० के दशक के गीत सुनने के लिए.
ये स्विच ओवर हर किसी के बस की बात नहीं कि
“कमबख्त इश्क” सुनते सुनते वो “ऐ कातिब-ए-तकदीर “
सुन कर वाह वाह करने लग जाए.

पंडित इन्द्र एक व्यस्त गीतकार होते थे उस ज़माने में.
उनके गीत काफी आला दर्जे के हैं. ये पुराने संगीत प्रेमी
बखूबी जानते हैं. वो समय था जब साहित्य क्षेत्र की
हस्तियाँ फ़िल्मी गीत लेखन को दोयम दर्जे का माना
करती थीं(आज भी करती हैं, वो तो) उसके अलावा दोनों
क्षेत्रों के बीच काफी दूरी हुआ करती थी. बावजूद इसके
अच्छे साहित्यिक सोच और समझ वाले व्यक्ति फिल्म
उद्योग से जुड़े रहे और ये इसी का परिणाम है कि अच्छी
चीज़ें भी फिल्मों में मिल जाया करती हैं. 

गीत का संगीत तैयार किया है वसंत देसाई ने.



गीत के बोल:

आँख मिलते ही मोहब्बत हो गई
हाँ, आँख मिलते ही मोहब्बत हो गयी
प्यार करने की तबियत हो गयी
प्यार करने की तबियत हो गयी


किसलिए तिरछी नज़र ने

बाकी के बोल पब्लिक डिमांड पर.
........................................................
Aankh milte hi mohabbat-Aankh ki sharm 1943

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Jul 11, 2011

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे-नई कहानी १९४३

गायक - जी एम् दुर्रानी
गीतकार-वली साहब
संगीतकार -श्याम सुन्दर
फिल्म -नई कहानी
वर्ष-१९४३




गीत के बोल:

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे
नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे
लहरों की
लहरों की गोदी में जैसे
आँख मिचौली खेले तारे
आँख मिचौली खेले तारे

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे

मन दोनों के खिल जाने दो
इक दूजे से मिल जाने दो
मन दोनों के खिल जाने दो
इक दूजे से मिल जाने दो
देखते हैं बेचैन बेचारे
नैन तुम्हारे नीर हमारे

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे

नर्गिस को शरमाते हैं वो
जल में आग लगाते हैं ये
नर्गिस को शरमाते हैं वो
जल में आग लगाते हैं ये
दोनों हैं बदनाम बेचारे
ज़ख़्म हमारे तीर तुम्हारे

नींद हमारे ख़्वाब तुम्हारे
कितने मीठे कैसे प्यारे
.................................
Neend hamari khwab tumhare-Nai Kahani 1943

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Jun 29, 2011

घटा घनघोर घोर-तानसेन १९४३

आज आपको 'घटा' पर दो गीत सुनवाता हूँ। दोनों पुराने ज़माने के हैं
हैं। सबसे पहले मेरी पसंद का गीत सुन लीजिये उसके बाद पड़ोसी
की पसंद वाला गीत भी सुनवा दूंगा।

गायिका खुर्शीद का ४० के दशक में बोलबाला था। सधी हुई और मीठी
आवाज़ वाली खुर्शीद के कुछ भक्त मुझे नेट की दुनिया पर मिले और
लगभग वे सभी श्वेत श्याम युग के गीतों के प्रेमी निकले। उनके बारे
में फिर कभी। फिलहाल इस लोकप्रिय गीत का आनंद उठाइए।

गीत में घोड़े पर सवार तानसेन की भूमिका में के. एल. सहगल
नज़र आते हैं जो गीत के अंत में उतर कर नायिका से कुछ कहते हैं।



गीत के बोल:

घटा घनघोर घोर
घटा घनघोर घोर
मोर मचावे शोर
मोरे सजन आजा
आ जा मोरे सजन आ जा

घटा घनघोर घोर
मोर मचावे शोर
मोरे सजन आजा
आ जा मोरे सजन आ जा

एक मौज का नाम जवानी
इक आये इक जाये
एक मौज का नाम जवानी
इक आये इक जाये
मौज में मौज ना ली जिसने वो
फिर काहे पछताये
मौज में मौज ना ली जिसने वो
फिर काहे पछताये
बड़ा दुःख देवे जिया
बड़ा दुःख देवे जिया
माने ना हाय पिया हाय
बड़ा दुःख देवे जिया
माने ना हाय पिया
माने ना हाय पिया
इसे समझा जा
आ जा इसे समझा जा
इसे समझा जा

घटा घनघोर घोर
मोर मचावे शोर
मोरे सजन आजा
आ जा मोरे सजन आ जा

सब लग फिरूँ खोज में तेरे
पिया खोये खोये
सब लग फिरूँ खोज में तेरे
पिया खोये खोये
जो लागी ना जाने मेरी
उनका भला ना होये
जो लागी ना जाने मेरी
उनका भला ना होये
फिरूँ मैं द्वारे द्वारे
फिरूँ मैं द्वारे द्वारे
दो नैनवा के मारे, हाय
फिरूँ मैं द्वारे द्वारे
दो नैनवा के मारे
दो नैनवा के मारे
मुख दिखला जा
आ जा मुख दिखला जा

घटा घनघोर घोर
मोर मचावे शोर
मोरे सजन आजा
आ जा मोरे सजन आ प्रेमी
.....................................................
Ghata ghanghor ghor-Tansen 1943

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Nov 23, 2010

पनघट को चली पनिहारी -पनघट १९४३

संगीतकार एस. एन. त्रिपाठी की बतौर स्वतंत्र संगीतकार पहली
फिल्म थी चन्दन(१९४१)। सन ४३ में आई फिल्म पनघट ने उन्हें
प्रसिद्धि दिलाई और फिल्म संगीत क्षेत्र में पैर ज़माने का मौका दिया।
ये फिल्म विजय भट्ट द्वारा प्रोड्यूस की गई थी । ये वही विजय भट्ट
हैं जिन्होंने गूँज उठी शहनाई का निर्देशन किया है। विजय भट्ट ने
जितना भी योगदान दिया फिल्म जगत को, वो उच्च कोटि का एवं
प्रशंसनीय है। विजय भट्ट की तरह ही एस. एन. त्रिपाठी को धार्मिक,
पौराणिक एवं ऐतिहासिक विषयों में काफी दिलचस्पी रही।

एस एन त्रिपाठी पर चर्चा हम आगे करते रहेंगे, पढ़ते रहिये
ये ब्लॉग।



गीत के बोल:

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

कमर पर घड़ा धरे मतवारी
कमर पर घड़ा धरे मतवारी
मतवारी रे
कमर पर घड़ा धरे मतवारी
पनिहारी रे

पनिहारी लचक ना जाना
पनिहारी ओ पनिहारी
पनिहारी लचक ना जाना
घड़ा है तेरा भरी रे
पनिहारी रे
घड़ा है तेरा भरी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

जिस पनघट लहराए है
सवान बारह है मॉस
उस पनघट प्यासी कड़ी
पिया मिलन की आस
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
अभी तो कुंवारी रे
पनिहारी रे
क्यूँ पहना गुलाबी दुपट्टा
अभी तो कुंवारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

मैं हूँ छोटी सी
मैं हूँ छोटी सी
छोटी गगरिया
मैं हूँ छोटी सी
मैं हूँ छोटी सी
छोटी गगरिया

खोजूं पीछू बाबुल की नगरिया
खोजूं पीछू बाबुल की नगरिया

मोहे पनघट मैं पनघट की प्यारी रे
मोहे पनघट मैं पनघट की प्यारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे

धीरे खींचो बदन में हौले
धीरे खींचो
धीरे खींचो बदन में हौले
घबरावे है नाज़ुक जवानी
घबरावे है नाज़ुक जवानी

देख ढूंढें ननदिया किनारी
देख ढूंढें ननदिया किनारी रे
पनिहारी रे

पनघट को चली पनिहारी
पनघट को चली पनिहारी
पनिहारी रे
......................................
Panghat ko chali panihari-Panghat 1943

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