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Nov 18, 2015

कैसे दिन बीते-अनुराधा १९६०

हिंदी फिल्म संगीत जगत में कई शास्त्रीय संगीत के
दिग्गजों ने भी संगीत में योगदान दिया है. ५० के
दशक में अल्लारखा कुरैशी, ६० के दशक में सितार
वादक पंडित रविशंकर, ८० के दशक में प्रसिद्ध संतूर
वादक पंडित शिव कुमार शर्मा और बांसुरी वादक
हरिप्रसाद चौरसिया की जोड़ी. इनके अलावा भी कई
संगीतज्ञ सिनेमा से जुड़े समय समय पर.

आज आपको सन १९६० की फिल्म अनुराधा से एक
गीत सुनवाते हैं. इसे लता मंगेशकर ने गाया है. एक
गीत इस फिल्म से आप पूर्व में सुन चुके हैं. फिल्म
की नायिका हैं लीला नायडू जो मिस इण्डिया रह चुकी
हैं.



गीत के बोल:

कैसे दिन बीते, कैसे बीती रतियाँ
पिया जाने ना

नेहा लगा के मैं पछताई
सारी सारी रैना, निंदिया ना आई
जान के देखो, मेरे जी की बतियाँ
पिया जाने ना

रुत मतवाली आ के चली जाए
मन में ही मेरे मन की रही जाए
खिलने को तरसे, नन्ही नन्ही कलियाँ
पिया जाने ना

कजरा ना सोहे, गजरा ना सोहे
बरखा ना भाए, बदरा ना सोहे
क्या कहूँ जो पूछे, मोसे मोरी सखियाँ
पिया जाने ना

कैसे दिन बीते, कैसे बीती रतियाँ
पिया जाने ना
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Kaise din beete-Anuradha 1960

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Aug 3, 2011

जाने कैसे सपनों में-अनुराधा १९६१

श्वेत श्याम युग से एक मधुर गीत पेश है सन १९६१ से। फिल्म का
नाम है अनुराधा। इस फिल्म के साथ जो हस्तियाँ जुडी हुई हैं उनके
बारे में थोड़ी बकर बकर कर लेते हैं।

फिल्म के संगीतकार हैं प्रख्यात सितार वादक पंडित रविशंकर। फिल्म
कि नायिका हैं ख्यात सुंदरी लीला नायडू जिन्होनें गिनी चुनी फ़िल्में कीं
फिल्म के नायक है बलराज साहनी जिन्होंने फिल्म में एक डॉक्टर की
भूमिका निभाई है। फिल्म का निर्देशन प्रख्यात निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी
ने किया है। फिल्म के गीत लिखे है शैलेन्द्र ने।




गीत के बोल:

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

अजब दीवानी भई मोसे अन्जानी भई
अजब दीवानी भई मोसे अन्जानी भई
पल में पराई देखो हो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

मन उजियारा छाया, जग उजियारा छाया
मन उजियारा छाया, जग उजियारा छाया
जगमग दीप संजो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

कोई मन भा गया जलवा जला गया
कोई मन भा गया जलवा जला गया
मन के दो मोतिया पिरो गयी अँखियाँ


जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां
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Jaane kaise sapnon mein-Anuradha 1961

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