Showing posts with label Balraj Sahni. Show all posts
Showing posts with label Balraj Sahni. Show all posts

Jun 20, 2015

कोई आया धडकन कहती है-लाजवंती १९५८

आशा भोंसले ने अपनी अलग पहचान बनाई या यूँ कहें कि उनकी
एक अलग शैली विकसित हुई ५० के दशक के उत्तरार्ध में. उनकी
आवाज़ में खूबियां तो पहले से थीं मगर उन्हें पहचान कर तराशने
वाले उन्हें मिले बाद में. जनता ओ पी नैय्यर को श्रेय देती है मगर
मेरा अनुमान है कि उन्हें और संगीतकारों ने भी आवाज़ निखारने के
अवसर दिए जिनमें प्रमुख है एस डी बर्मन का नाम. फिल्म लाजवंती
के चारों गीत उन्होंने गाये हैं. गीत एक से बढ़ कर एक हैं.

आशा भोंसले को बर्मन साहब ने सर्वप्रथम अवसर दिया सन १९५३ की
फिल्म अरमान में. इस फिल्म में उनके गाये तीन गीत हैं. सन १९५३
की ही एक और फिल्म शहंशाह में उन्होंने दो गीत गाये बर्मन के लिए.
उसके बाद सन १९५४ की फिल्म राधा कृष्ण में भी उन्हें दो गीत गाने
का अवसर मिला.

आज आपको फिल्म का मजरूह साहब का लिखा हुआ गीत सुनवाते हैं.
गौर तलब है इस फिल्म में नायिका हैं नर्गिस जिनके ऊपर अधिकतर
लता के गीत फिल्माए गए हैं. उनके साथी कलाकार हैं अभिनय का अपना
अलग ही मुकाम बनाने वाले बलराज साहनी.

बलराज साहनी फिल्म उद्योग के ऐसे कलाकार रहे हैं जिनकी तुलना किसी
से नहीं की जाती. मौलिक कलाकारों में उनके बाद की पीढ़ी में संजीव कुमार
का नाम आता है. स्मिता पाटिल भी उसी श्रेणी की अदाकारा थीं. ये सभी
कलाकार अपने समकालीनों पर भारी पढ़े और साथी कलाकारों को दांतों तले
उँगलियाँ दबाने के अनेकानेक अवसर प्रदान करते.



गीत के बोल:

कोई आया धड़कन कहती है
धीरे से पलकों की ये गिरती उठती
चिलमन कहती है
कोई आया धड़कन कहती है

होने लगी किसी आहट की फुलकारियाँ
परवाने बनके उडी दिल की चिन्गारियाँ
झूम गया झिलमिलाता दिया

चाँद हंसा ले के दर्पण मेरे सामने
घबरा के मैं लट उलझी लगी थामने
छेड़ गयी मुझे चंचल हवा

आ ही गया मीठी मीठी सी उलझन लिए
खो ही गई मैं तो शरमाई चितवन लिए
गोरे बदन से पसीना बहा
……………………………………………………..
Koi aaya dhadkan kehti hai-Lajwanti 1958

Read more...

Aug 3, 2011

जाने कैसे सपनों में-अनुराधा १९६१

श्वेत श्याम युग से एक मधुर गीत पेश है सन १९६१ से। फिल्म का
नाम है अनुराधा। इस फिल्म के साथ जो हस्तियाँ जुडी हुई हैं उनके
बारे में थोड़ी बकर बकर कर लेते हैं।

फिल्म के संगीतकार हैं प्रख्यात सितार वादक पंडित रविशंकर। फिल्म
कि नायिका हैं ख्यात सुंदरी लीला नायडू जिन्होनें गिनी चुनी फ़िल्में कीं
फिल्म के नायक है बलराज साहनी जिन्होंने फिल्म में एक डॉक्टर की
भूमिका निभाई है। फिल्म का निर्देशन प्रख्यात निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी
ने किया है। फिल्म के गीत लिखे है शैलेन्द्र ने।




गीत के बोल:

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

अजब दीवानी भई मोसे अन्जानी भई
अजब दीवानी भई मोसे अन्जानी भई
पल में पराई देखो हो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

मन उजियारा छाया, जग उजियारा छाया
मन उजियारा छाया, जग उजियारा छाया
जगमग दीप संजो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

कोई मन भा गया जलवा जला गया
कोई मन भा गया जलवा जला गया
मन के दो मोतिया पिरो गयी अँखियाँ


जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां
...................................
Jaane kaise sapnon mein-Anuradha 1961

Read more...

Jan 20, 2010

ये कैसा न्याय तेरा-छोटी बहन १९५९

हिंदी फिल्मों में केवल इश्क मोहब्बत के गीत ही नहीं वरन
दर्शन, धर्म और समाज की विसंगतियों पर भी कई गीत बने
हैं। कुछ बेबसी को दर्शाते तो कुछ सामाजिक व्यवस्थाओं पर
कटाक्ष करते गीत, सभी कुछ मिलेगा आपको इस खजाने में।

एक गीत है फिल्म छोटी बहन से जो नंदा पर फिल्माया गया
है. इसको गाया है लता मंगेशकर ने। गीत लिखा है शैलेन्द्र ने
और धुन बनाई है शंकर जयकिशन ने ।



गीत के बोल:

ये कैसा न्याय तेरा, दीपक तले अँधेरा
ये कैसा न्याय तेरा, दीपक तले अँधेरा

किसी को दी निगाह राह छीन ली
किसी को राह दी निगाह छीन ली

किसी को दी निगाह राह छीन ली
किसी को राह दी निगाह छीन ली

ये कैसा न्याय तेरा, दीपक तले अँधेरा
ये कैसा न्याय तेरा, दीपक तले अँधेरा

तकदीर हमसे रूठी, अपने हुए पराये
तकदीर हमसे रूठी, अपने हुए पराये
जाने कहाँ चले हैं, जाने कहाँ से आये
चारों तरफ अँधेरा, बरबादियों ने घेरा
किसी को दी निगाह राह छीन ली
किसी को राह दी निगाह छीन ली

ये कैसा न्याय तेरा दीपक तले अँधेरा

हमने ना होए जाना, दुःख चैन क्या ख़ुशी क्या
हमने ना होए जाना, दुःख चैन क्या ख़ुशी क्या
है रात उम्र भर की, अंधों की ज़िन्दगी क्या
दिल पूछता है मेरा है कौन ये लुटेरा
किसी को दी निगाह राह छीन ली
किसी को राह दी निगाह छीन ली

ये कैसा न्याय तेरा दीपक तले अँधेरा
ये कैसा न्याय तेरा दीपक तले अँधेरा

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP