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Jan 20, 2019

हाय रे वो दिन क्यूँ ना आये-अनुराधा १९६०

फिल्म की नायिका एक प्रतिभाशाली गायिका है. एक
डॉक्टर से उसे प्रेम हो जाता है और शादी के बाद वो
डॉक्टर के साथ गांव आ जाती है जहाँ डॉक्टर अपनी
प्रेक्टिस करता है. धीरे धीरे डॉक्टर व्यस्त होता चला
जाता है और नायिका की भूमिका एक कामकाजी घरेलू
महिला तक सीमित रह जाती है.

गीत में नायिका हाय हाय करते हुए अपने सुनहरे दिन
याद कर रही है. शैलेन्द्र के लिखे गीत की तर्ज़ तैयार
की है सितार वादक पंडित रविशंकर ने. लता मंगेशकर
ने इसे गाया है. सिंगल हाय और डबल हाय में फर्क
होता है और दोनों के एक्सप्रेशन भी अलग अलग होते
हैं. परदे पर गीत गाने वाली नायिका हैं लीला नायडू.



गीत के बोल:

हाय रे वो दिन क्यों ना आये
जा जा के ऋतु लौट आये
हाय रे वो दिन क्यों ना आये

झिलमिल वो तारे कहाँ गये सारे
मन बाती जले बुझ जाये

हाय रे वो दिन क्यों ना आये

सूनी मेरी बीना संगीत बिना
सपनों की माला मुरझाये

हाय रे वो दिन क्यों ना आये
जा जा के ऋतु लौट आये
हाय रे वो दिन क्यों ना आये
………………………………………………….
Haye re wo din kyun na aaye-Anuradha 1960

Artists: Leela Naidu, Balraj Sahni, Nazir Hussain

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Jan 3, 2017

सांवरे सांवरे-अनुराधा १९६०

फिल्म अनुराधा का संगीत सितार वादक उस्ताद रविशंकर
ने तैयार किया था. इसमें ३-४ गाने हैं लता के, जो संगीत
प्रेमी काफी पसंद करते हैं विशेषकर वे जो पुराने गीतों के
शौक़ीन हैं, उसके अलावा शास्त्रीय संगीत के श्रोता भी इनका
लुत्फ़ उठाते हैं.

अनुराधा की नायिका हैं लीला नायडू जो अपने ज़माने की
विश्व स्तर पर प्रसिद्ध सुंदरी थीं. लीला नायडू की एक और
उल्लेखनीय फिल्म है-ये रास्ते हैं प्यार के.

गीत शैलेन्द्र ने लिखा है. फिल्म का निर्देशन किया था एक
नामचीन निर्देशक ने-हृषिकेश मुखर्जी. गीत राग भैरवी पर
आधारित है.



गीत के बोल:

सांवरे सांवरे
सांवरे सांवरे
जाओ सांवरे सांवरे
काहे मोसे करो जोरा-जोरी
बैय्याँ ना मरोड़ो मोरी
दूँगी दूँगी
गारी हटो जाओ जी
सांवरे सांवरे

संग ना सहेली पाय के अकेली
संग ना सहेली पाय के अकेली
अब ना जा तू हे मोरे श्याम
रोको ना डगर मोरी

सांवरे सांवरे
जाओ सांवरे सांवरे
काहे मोसे करो जोरा-जोरी
बैय्याँ ना मरोड़ो मोरी
दूँगी दूँगी
गारी हटो जाओ जी
सांवरे सांवरे जाओ सांवरे

गोपी ग्वाले देखने वाले
गोपी ग्वाले देखने वाले
बिन बेचारे कहेंगे सारे
पकड़ी राधा की चोरी

सांवरे सांवरे
जाओ सांवरे सांवरे
काहे मोसे करो जोरा-जोरी
बैय्याँ ना मरोड़ो मोरी
दूँगी दूँगी
गारी हटो जाओ जी
सांवरे सांवरे

मुरली बजाओ गैया चराओ
मुरली बजाओ गैया चराओ
हमरी गली छोड़ो हे छैल
मिलो जब आवे होरी

सांवरे सांवरे
सांवरे सांवरे
………………………………………………………….
Sanwre sanwre-Anuradha 1960

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Nov 18, 2015

कैसे दिन बीते-अनुराधा १९६०

हिंदी फिल्म संगीत जगत में कई शास्त्रीय संगीत के
दिग्गजों ने भी संगीत में योगदान दिया है. ५० के
दशक में अल्लारखा कुरैशी, ६० के दशक में सितार
वादक पंडित रविशंकर, ८० के दशक में प्रसिद्ध संतूर
वादक पंडित शिव कुमार शर्मा और बांसुरी वादक
हरिप्रसाद चौरसिया की जोड़ी. इनके अलावा भी कई
संगीतज्ञ सिनेमा से जुड़े समय समय पर.

आज आपको सन १९६० की फिल्म अनुराधा से एक
गीत सुनवाते हैं. इसे लता मंगेशकर ने गाया है. एक
गीत इस फिल्म से आप पूर्व में सुन चुके हैं. फिल्म
की नायिका हैं लीला नायडू जो मिस इण्डिया रह चुकी
हैं.



गीत के बोल:

कैसे दिन बीते, कैसे बीती रतियाँ
पिया जाने ना

नेहा लगा के मैं पछताई
सारी सारी रैना, निंदिया ना आई
जान के देखो, मेरे जी की बतियाँ
पिया जाने ना

रुत मतवाली आ के चली जाए
मन में ही मेरे मन की रही जाए
खिलने को तरसे, नन्ही नन्ही कलियाँ
पिया जाने ना

कजरा ना सोहे, गजरा ना सोहे
बरखा ना भाए, बदरा ना सोहे
क्या कहूँ जो पूछे, मोसे मोरी सखियाँ
पिया जाने ना

कैसे दिन बीते, कैसे बीती रतियाँ
पिया जाने ना
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Kaise din beete-Anuradha 1960

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Aug 3, 2011

जाने कैसे सपनों में-अनुराधा १९६१

श्वेत श्याम युग से एक मधुर गीत पेश है सन १९६१ से। फिल्म का
नाम है अनुराधा। इस फिल्म के साथ जो हस्तियाँ जुडी हुई हैं उनके
बारे में थोड़ी बकर बकर कर लेते हैं।

फिल्म के संगीतकार हैं प्रख्यात सितार वादक पंडित रविशंकर। फिल्म
कि नायिका हैं ख्यात सुंदरी लीला नायडू जिन्होनें गिनी चुनी फ़िल्में कीं
फिल्म के नायक है बलराज साहनी जिन्होंने फिल्म में एक डॉक्टर की
भूमिका निभाई है। फिल्म का निर्देशन प्रख्यात निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी
ने किया है। फिल्म के गीत लिखे है शैलेन्द्र ने।




गीत के बोल:

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

अजब दीवानी भई मोसे अन्जानी भई
अजब दीवानी भई मोसे अन्जानी भई
पल में पराई देखो हो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

मन उजियारा छाया, जग उजियारा छाया
मन उजियारा छाया, जग उजियारा छाया
जगमग दीप संजो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां

कोई मन भा गया जलवा जला गया
कोई मन भा गया जलवा जला गया
मन के दो मोतिया पिरो गयी अँखियाँ


जाने कैसे सपनों मैं खो गयी अँखियां
मैं तो हूँ जागी मोरी सो गयी अँखियां
...................................
Jaane kaise sapnon mein-Anuradha 1961

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