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Mar 17, 2018

मैं ग्वालो रखवालो मैया-गैर फ़िल्मी गीत(रफ़ी)

मधुकर राजस्थानी की एक रचना सुनते हैं जिसका संगीत
तैयार किया है खय्याम ने.  इस गैर फ़िल्मी गीत को गाया
है रफ़ी ने.

ये एक कृष्ण भजन है जिसे पुराने गीतों के प्रेमियों ने ज़रूर
सुना होगा एक ना एक बार रेडियो पर.




गीत के बोल:

मैं ग्वालो रखवालो मैया
मैं ग्वालो रखवालो मैया
माखन नाहि चुरायो
माखन नाहि चुरायो

कौन कमी माखन की अपने जो मैं परघर जाऊँ
राज में तेरे चाहे जितनो खाऊँ और खिलाऊँ
चोर न होवे लाल तिहारो काहे मन भरमायो
काहे मन भरमायो

मैं ग्वालो रखवालो मैया
माखन नाहि चुरायो
माखन नाहि चुरायो

तू मैया है स्नेह की ज्योति हुम सब तेरि किरणें
तेरे आँचल की छाया में बहते सुख की झरने
तेरे चरणों की धूली में मैय्या स्वर्ग समायो
मैय्या स्वर्ग समायो

मैं ग्वालो रखवालो मैया
माखन नाहि चुरायो
माखन नाहि चुरायो

बृज को माखन मेरो माखन नाही ये बरजोरी
ये अधिकार जनम को मेरो कौन कहे ये चोरी
वो मूरख अज्ञानी जिसने मोहे चोर बतायो
मोहे चोर बतायो

मैं ग्वालो रखवालो मैया
माखन नाहि चुरायो
माखन नाहि चुरायो
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Main gwalo rakhwalo maiya-Non film song

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Feb 17, 2018

वो साथ हमारा दे न सके-गैर फ़िल्मी गीत

मधुकर राजस्थानी के नाम से गैर फ़िल्मी गीतों के प्रेमी
परिचित हैं. उन्होंने कई गीत लिखे हैं और उनके लिखे
लोकप्रिय गीतों की संख्या काफी है.

आज उनका लिखा हुआ एक गीत सुनते हैं हेमंत कुमार
की आवाज़ में जिसकी धुन हेमंत कुमार ने ही तैयार की है.



गीत के बोल:

वो साथ हमारा दे न सके हम नाम पे उनके जीते हैं
दो दिन तो ख़ुशी के पाये थे क्या कहिये कैसे बीते हैं
वो साथ हमारा दे न सके

तन्हाई बहारों से मिल कर जब उनकी याद दिलाती है
तन्हाई बहारों से मिल कर जब उनकी याद दिलाती है
उम्मीद के कच्चे धागे से ज़ख्मों को अपने सीते हैं
वो साथ हमारा दे न सके

जा और कहीं अब ऐ सावन क्यूँ ठण्डी आग लगाता है
जा और कहीं अब ऐ सावन क्यूँ ठण्डी आग लगाता है
हम लाएँ कहाँ से अब आँसू आँखों के सरोवर रीते हैं
वो साथ हमारा दे न सके

वो जितने हमसे दूर हुए इस दिल की तड़प उतनी ही बढ़ी
वो जितने हमसे दूर हुए इस दिल की तड़प उतनी ही बढ़ी
ले जाम उठा अब ऐ साक़ी हम खून-ए-तमन्ना पीते हैं

वो साथ हमारा दे न सके हम नाम पे उनके जीते हैं
दो दिन तो ख़ुशी के पाये थे क्या कहिये कैसे बीते हैं
वो साथ हमारा दे न सके
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Wo saath hamara de na sake-Non film song

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Sep 27, 2016

सुनियो अरज हमारी प्रभुजी-भजन

सुनते हैं एक भजन रफ़ी की आवाज़ में जिसे मधुकर राजस्थानी
ने लिखा है और जिसकी तर्ज़ बनाई है खैयाम ने. रफ़ी के गाये
भजन काफी लोकप्रिय हैं.

खैयाम ने रफ़ी से कई गैर फ़िल्मी गीत गवाए हैं. खैयाम ने संगीत
की लगभग सभी विधाओं पर दक्षता से काम किया और अनमोल
गीत श्रोताओं और संगीत रसिकों को दिए हैं जो बरसों तक उनको
आनंदित करते रहेंगे.



गीत के बोल:

सुनियो अरज हमारी प्रभुजी
सुनियो अरज हमारी
दुनिया की इस भरी सभा में
दुनिया की इस भरी सभा में
रखियो लाज मुरारी
सुनियो अरज हमारी

तोड़ दिया अंधे हाथों ने
राम नाम का प्याला
जल के राख हुई रे कान्हा
भक्तों की मधुशाला
सुनियो अरज हमारी प्रभुजी
सुनियो अरज हमारी

पाप के मन्दिर निस दिन बनते
झूठ की गंगा बहती
धर्म की आँखें अंधी हो गईं
पूजा हो गयी सस्ती
सुनियो अरज हमारी प्रभुजी
सुनियो अरज हमारी

हर मन में तुम बसे हुए हो
जाने ये संसारी
आस मिलन की जनम जनम तक
फिर भी रहे कुँवारी
सुनियो अरज हमारी प्रभुजी
सुनियो अरज हमारी
…………………………………………………………..
Suniyo araj hamari-Bhajan Non fim song

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Aug 22, 2015

सुलग रही है हुस्न की सिगड़ी-मदमस्त १९५३

नाक सुडकता और खांसता इश्क आना बाकी है फिल्मों में.
मौसम का मिजाज़ जैसे जैसे बदल रहा है, आगे जल्द ही
वो भी आएगा.

आइये सुनें एक हास्य रस से भरपूर गीत फिल्म मदमस्त से
जिसे मोहम्मद रफ़ी ने गाया है. मधुकर राजस्थानी की रचना
को संगीतबद्ध किया है संगीतकार वी बलसारा ने. गुमनामी
किस कदर दुखदायी होती है इसका एक अच्छा उदाहरण है
ये गीत. जिगर से बीडी जलती है और पूरे देश में लोकप्रिय
हो जाती है. हुस्न की सिगड़ी सुलगती है और किसी को भी
दिखलाई नहीं देती. विडम्बना है यही प्रारब्ध की. इस चमक
दमक वाली दुनिया में कई रत्न धूल खा रहे हैं.




गीत के बोल:

सुलग रही है हुस्न की सिगड़ी
आ जा पकाएं प्रेम की खिचड़ी
खायेंगे बैठ के राजा रानी
फिर नैनों की झगडा झगड़ी
दे पछाड धम धम धम
दे पछाड धम धम धम
दे पछाड दे पछाड
दे पछाड धम धम धम धम
दे पछाड धम धम धम

खुली है खिडकी कहाँ हो मैना
तक झांक कर मर गए नैना
खुली है खिडकी कहाँ हो मैना
ताक झांक कर मर गए नैना
कब तक सब्र करे ये मजनू
आ जा छम छम छम छम
कब तक सब्र करे ये मजनू
आ जा छम छम छम छम

दे पछाड धम धम धम धम
आ जा छम छम छम छम

प्यार में तेरे उल्टा का असर है
मैं बाहर हूँ टू भीतर है
प्यार में तेरे उल्टा का असर है
मैं बाहर हूँ टू भीतर है
तेरे बाप के जूते खा के
घुट गया मेरा दम
तेरे बाप के जूते खा के
घुट गया मेरा दम हाय

दे पछाड दे पछाड

दे पछाड धम धम धम धम

आ जा छम छम छम छम
घुट गया मेरा दम हाय

आ जा छम छम छम छम
घुट गया मेरा दम दम दम
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Sulag rahi hai husn ki sigdi-Madmast 1953

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