आज के शुभ अवसर पर सुनते हैं एक राम भजन जो
मन को शीतलता प्रदान करेगा. आज के दिन बॉलीवुड
में क्या हुआ और कैसे हुआ, क्या हो रहा है प्रासंगिक
नहीं लगता मुझे.
पंडित नरेन्द्र शर्मा का लिखा हुआ है और इसकी धुन
श्रीनिवास खाले ने तैयार की है. लता मंगेशकर ही वो
हस्ती हैं बॉलीवुड से जिनकी आवाज़ आज सुनाई दी.
बाकी के तो लगता है नींद से उठे ही नहीं या सोने का
उपक्रम कर रहे हैं..
गीत के बोल:
राम भजन कर मन
राम भजन कर मन
राम भजन कर मन
राम भजन कर मन
ओ मन रे कर तू
ओ मन रे कर तू
राम भजन कर मन
राम भजन कर मन
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Ram bhajan kar man-Bhajan
संतों की अमृतवाणी मानव को जीने की राह बतलाती है
और निर्लिप्त रहने की प्रेरणा भी देती है. अपने आप से
उदाहरण ले कर भी ये हमें काम की बहुत सी बातें
बतला जाते हैं.
कबीर की एक रचना सुनते हैं पंडित कुमार गन्धर्व की
आवाज़ में. इसे मन लगा कर सुनिए, ये चित्त को शांत
करेगा.
अवधूत का अर्थ भी सन्यासी होता है. योगी ध्यान योग
करने वालों को भी बोला जाता है. मढ़ी का अर्थ है घर
कुटीर, झोंपड़ी. इसका अर्थ अलग अलग सामाजिक स्तिथि
के अनुसार अलग अलग समझ सकते हैं. छोटे महलों को
भी कहीं कहीं मढ़ी बोला जाता है.
गीत के बोल:
युगन युगन हम योगी
युगन युगन हम योगी
अवधूत युगन युगन हम योगी
युगन युगन हम योगी
आवैना जाय
आवैना जाय मिटैना कबहूं सबद अनाहत भोगी
योगी योगी युगन युगन हम योगी
सभी ठौर जमात हमरी सबही ठौर पर मेला
हम सब में सब हैं हम मां हम है बहुरी अकेला
योगी योगी युगन युगन हम योगी
हम ही सिद्ध समाधि हम ही हम मौनी हम बोले
रूप सरूप अरूप दिखा के हम ही में हम तो खेलें
योगी योगी युगन युगन हम योगी
कहे कबीरा जो सुनो भई साधो नाहीं न कोई इच्छा
अपनी मढ़ी में आप मैं डोलूं खेलूँ सहज स्व-इच्छा
योगी योगी युगन युगन हम योगी
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Avhdhoot yugan yugan ham-Kabir Bhajan
आपको एक अफिल्मी गीत सुनवाते हैं चितलकर का गाया हुआ. ये एक
भजन है राधेश्याम का. इसे मैं काफ़ी सालों से सुन रहा हूँ. ये उन लोगों
के लिए है जिनके मन में काफी उथल पुथल हो रही है पिछलेकुछ दिन से.
इस ब्लॉग पर पता नहीं क्या ढूंढते रहते हैं दिन भर. ये पाठक नहीं है
इतना हम जानते हैं.
सर्वप्रथम ये समझ लें इस ब्लॉग के ज़रिये हमें रोटी प्राप्त नहीं होती है. ये
शौक के चलते हम अपनी आँखेंफोड रहे हैं. ना हमें कोई म्यूजिक कंपनी
या फिल्मलाईन वाला चवन्नी भी देता है ये सब लिखने के लिए.
ब्लॉगर और गूगल को धन्यवाद हमें अपने विचार और अनुभव साझा
करने देने के लिए. ऑरकुट एक बेहतर प्लेटफोर्म था जिसमें मर्यादित
गतिविधियां थीं. उसका बंद होना अफ़सोसजनक है.
इस साईट को और दूसरी ८-१० साइटों को पढ़ पढ़ के आप लोग इतने
ज्ञानी हुए. यहाँ तो खैर ज्यादा लोग टिप्पणी नहीं करते क्यूंकि उनको
अंग्रेजी में खाने और हगने की आदत पड़ी हुई है. बस, खाने का सामान
हिंदी वाला चाहिए.
शेखी बघारने के लिए वे अंग्रेजी में कमेन्ट करना पसंदकरते हैं. कोरोना
वायरस को भी तुम लोग अंग्रेजी गानेऔर निबंध क्यूँ नहीं सुना देते, हो
सकता है डर के मारेभाग जाए.
सर्वशक्तिमान अनेकों माध्यम से प्राणी को सन्देश भेजता रहता है मगर
प्राणी अपने अहम के चलते इन संकेतों को समझ नहीं पाता. जबरन
किसी के पीछे पड़ना ठीक नहीं, समझ लो, चाहे वो मनुष्य हो या जानवर.
कबीरदास जी कह गए हैं:
कबीर गर्व ना कीजिये उंचा देखि आवास
काल परौ भुईं लेटना उपर जमसी घास।
अर्थात अपने ऊंचे मकान पर घमंड ना कीजिये, कहीं ऐसा न हो समय
आपको ज़मीन पर ऐसी जगह सोने पर मजबूर कर दे जहाँ घाग उगती हो.
यहाँ कवि ने थोडा डिस्काउंट कर दिया है और शरीर को तकलीफ ना हो
इसलिए थोड़ी घास भी है. संभव है इससे बदतर स्तिथि में आप पहुँच जाएँ.
वर्त्तमान संकट का निमित्त कोई भी बना हो उसने मानव जाति को अच्छे से
समझा दिया कि उसकी औकात क्या है. एक सूक्ष्म जीव जिसे देखने के लिए
भी माइक्रोस्कोप की ज़रूरत पड़ती है अपने से कई गुना बड़े मानव को कैसे
परास्त कर सकता है. ये सब जो हो रहा है प्रकृति से अत्यधिक खिलवाड़ का
परिणाम है.
सोशल डिसटेंसिंग का सन्देश दिया जा रहा है मगर उसे कई लोग मानने
को तैयार नहीं मानो उन्हें कोरोना वायरस ने स्वयं वायरस-प्रूफ होने का
सर्टीफिकेट दे दिया हो.
गीत के बोल:
ना मैं रूप देखता ना मैं नाम देखता
ना मैं रूप देखता ना मैं नाम देखता
मैं तो जहाँ देखता वहां श्याम देखता
राधेश्याम देखता
ना मैं रूप देखता ना मैं नाम देखता
कहाँ नहीं उसकी परछाई
कण कण में है किशन कन्हाई
और कौन है इस धरती पर
जिसने समझी पीर पराई
ना मैं भोर देखता ना मैं शाम देखता
ना मैं भोर देखता ना मैं शाम देखता
मैं तो जहाँ देखता वहां राम देखता
सीताराम देखता
ना मैं रूप देखता ना मैं नाम देखता
डगर डगर पर इतना भटका
कहाँ कहाँ मैंने सर पटका
जहाँ गया मैं जिधर गया मैं
मन मेरा मोहन में अटका
मन मेरा मोहन में अटका
न मैं पंथ देखता ना मैं धाम देखता
न मैं पंथ देखता ना मैं धाम देखता
मैं तो जहाँ देखता वहां श्याम देखता
राधेश्याम देखता
ना मैं रूप देखता ना मैं नाम देखता
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Na main roop dekhta-Non filmi bhajan
रामनवमी के शुभ अवसर पर सुनते हैं एक भजन
हरिओम शरण की वाणी में. लोकप्रिय भजन है.
प्रभु पर विश्वास रहिये, वही बेड़ा पार लगायेंगे.
गीत के बोल:
हरि नाम सो ही जानिये जो सब दुःख हर ले
पल में पाप मिटाय कर चित्त शुद्ध कर दे
कृष्ण नाम तू ही जानिये जो आकर्षण कर ले
भक्तन के चित खींच कर चरण कमल धर ले
राम नाम सो ही जानिये जो रमता सकल जहान
घट घट में जो राम रहा उसको राम पहचान
तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार रे बेड़ा पार रे बेड़ा पार
तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे
तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे
काहे को डरे रे काहे को डरे काहे को डरे
काहे को डरे रे काहे को डरे
नैया तेरी राम हवाले लहर लहर हरि आप संभालें
नैया तेरी
नैया तेरी राम हवाले लहर लहर हरि आप संभालें
हरि आप ही उठायें तेरा भार उदासी मन काहे को करे
तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे रे
काहे को डरे रे काहे को डरे काहे को डरे
काहे को डरे रे काहे को डरे
तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे रे
काबू में मझधार उसी के हाथों में पतवार उसी के
काबू में रे
काबू में मझधार उसी के हाथों में पतवार उसी के
तेरी हार भी नहीं है तेरी हार उदासी मन काहे को करे
तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे रे
काहे को डरे रे काहे को डरे काहे को डरे
काहे को डरे रे काहे को डरे
तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे रे
सहज मिल जायेगा रे मिल जायेगा मिल जायेगा
परम सहारा मिल जायेगा
सहज मिल जायेगा परम सहारा मिल जायेगा
डोरी सौंप के तो देख एक बार उदासी मन काहे को करे
डोरी सौंप के तो देख एक बार उदासी मन काहे को करे
तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे रे
काहे को डरे रे काहे को डरे काहे को डरे
काहे को डरे रे काहे को डरे
तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार उदासी मन काहे को करे
मेरा राम जी मेरा राम जी
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Tera Ramji karenge beda paar-Hariom Sharan
फिल्म जॉनी मेरा नाम एक सम्पूर्ण मसाला फिल्म है. सम्पूर्ण इसे हमने इसलिए कहा क्यूंकि इसमें भजन भी है. सपेंस, थ्रिलर, रोमांस अपराध सभी जेनर का मिश्रण है फिल्म के कथानक में.
इन्दीवर के बोल हैं और लता मंगेशकर की आवाज़ वाले इस फ़िल्मी भजन की तर्ज़ बनाई है कल्याणजी आनंदजी ने.
हेमा मालिनी पर इसे फिल्माया गया है. हेमा मालिनी पर ही इस फिल्म का एक और मधुर गीत फिल्माया गया है-ओ बाबुल प्यारे. ये दोनों गीत फिल्म की रिलीज़ के बाद काफी साल नियमित रूप से बजते रहे रेडियो पर.
जय जय श्याम राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम जय जय श्याम राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम ऐ री ओ मोसे मेरा श्याम रूठा काहे मोरा भाग फूटा काहे मैंने पाप ढोए अंसुवन बीज बोए छुप-छुप मीरा रोए दर्द ना जाने कोए छुप-छुप मीरा रोए दर्द ना जाने कोए छुप-छुप मीरा रोए दर्द ना जाने कोए
ऐ री ओ मोसे मेरा श्याम रूठा जय जय श्याम राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम जय जय श्याम राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम
मैं ना जानूं तू ही जाने जो भी करूँ मैं मन ना माने पीड़ा मन की तू जो न समझे पीड़ा मन की तू जो न समझे क्या समझेंगे लोग बेगाने काँटों की सेज सोहे
छुप-छुप मीरा रोए दर्द ना जाने कोए छुप-छुप मीरा रोए दर्द ना जाने कोए
ऐ री ओ मोसे मेरा श्याम रूठा जय जय श्याम राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम जय जय श्याम राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम
विष का प्याला पीना पड़ा है मर कर भी मोहे जीना पड़ा है नैन मिलाए क्या गिरधर से नैन मिलाए क्या गिरधर से गिर गई जो अपनी ही नज़र से रो रो नैना खोए
छुप-छुप मीरा रोए दर्द ना जाने कोए छुप-छुप मीरा रोए दर्द ना जाने कोए
ऐ री ओ मोसे मेरा श्याम रूठा काहे मोरा भाग फूटा काहे मैंने पाप ढोए अंसुवन बीज बोए छुप-छुप मीरा रोए दर्द ना जाने कोए छुप-छुप मीरा रोए दर्द ना जाने कोए
जय जय श्याम राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम जय जय श्याम राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम
अमीरबाई कर्नाटकी की आवाज़ में एक भक्ति गीत सुनते हैं
फिल्म किस्मत से. इस गीत को सुनने के बाद आप महसूस
करेंगे कि इस गीत की धुन कुछ जानी पहचानी सी है. आगे
चल के कई गीतों में इस गीत की खुशबू आती है.
संभव है ये कोई पारंपरिक धुन हो जिसके आधार पर ये गीत
तैयार किया गया हो. फिल्मों में लोक संगीत को शामिल करने
की परंपरा शुरू से है. गीत कवि प्रदीप ने लिखा और इसका
संगीत तैयार किया अनिल बिश्वास ने.
गीत के बोल:
अब तेरे सिवा
अब तेरे सिवा कौन मेरा कृष्ण कन्हैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा
अब तेरे सिवा कौन मेरा कृष्ण कन्हैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा
मेरी खुशी की दुनिया बाबुल ने छीन ली
मेरे सुखों की कलियाँ किस्मत ने बीन लीं
मेरी खुशी की दुनिया बाबुल ने छीन ली
मेरे सुखों की कलियाँ किस्मत ने बीन लीं
अब तू ही बचा लाज मेरी बंसी बजैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा
पूजा नहीं है पूरी अधूरी है आरती
पूजा नहीं है पूरी अधूरी है आरती
ओ श्याम सलोने तुझे मीरा पुकारती
ओ श्याम सलोने तुझे मीरा पुकारती
तुझे मीरा पुकारती
सहती है बार बार वो ले ले के बलैयां
सहती है बार बार वो ले ले के बलैयां
भगवान भगवान
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा
अब तेरे सिवा कौन मेरा कृष्ण कन्हैया
भगवान किनारे से लगा दे मेरी नैया
अब तेरे सिवा
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Ab tere sinwa kaun mera-Kismat 1944
सुबोध मुखर्जी की फिल्म है दीवानगी जो सन १९७६ में
रिलीज़ हुई थी. इस फिल्म के लिए सचिन देव बर्मन ने
एक गाना रिकोर्ड किया. बाकी का काम रवींद्र जैन ने किया.
सचिन देव बर्मन के अवसान की वजह से इसका संगीत
अधूरा रह गया था. वो इकलौता गीत किशोर की आवाज़
में है.
फिल्म के बाकी गानों के लिए निर्देशक/निर्माता का चयन
सही था. ये बात दीगर है फिल्म नहीं चली और उसके
गाने भी कहीं खो से गए सिवाए सचिन देव बर्मन के भक्तों
के कलेक्शन के.
ये गीत जैसा कि रवींद्र जैन का शौक रहा-गायिकाओं से ऊंचे
स्केल पर गाने गवाने का, लता से भी काफी ऊंचे स्केल पर
उन्होंने गवाया है. ऊंचे स्केल पर सचिन देव बर्मन ने भी काफी
गीत गवाए लता से.
गीत के बोल:
पूजा की विधि ना जानूं ना जानूं महाराज
पूजा की विधि ना जानूं हे ना जानूं महाराज
मैं तज के सब संसार तेरे चरणों में आई आज
पूजा की विधि ना जानूं ना जानूं महाराज
मन मेरा तेरी आरती प्रीत की जिसमें आग
श्यामा रे श्यामा रे
मन मेरा तेरी आरती प्रीत की जिसमें आग
आती जाती सांस तो गाये
आती जाती सांस तो गाये
निस दिन तेरे राग
पूजा की विधि ना जानूं ना जानूं महाराज
न धन की न धाम की न दुनिया की चाह
कृष्णा रे कृष्णा रे
न धन की न धाम की न दुनिया की चाह
जिस पर चल के मन सुख पाए
जिस पर चल के मन सुख पाए
बतला दो वो राह
पूजा की विधि ना जानूं ना जानूं महाराज
कोई तेरे द्वार से खाली हाथ न जाए
दाता रे दाता रे
कोई तेरे द्वार से खाली हाथ न जाए
जग जिसे मारे तू उसे राखे
जग जिसे मारे तू उसे राखे
हर संकट से बचाए
पूजा की विधि ना जानूं हे ना जानूं महाराज
पूजा की विधि ना जानूं ना जानूं महाराज
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Pooja ki vidhi na jaanoon-Deewangi 1976
आज आपको सुनवाते हैं लक्ष्मी शंकर का गाया हुआ कबीर भजन.
एक समय रेडियो पर खूब बजा करता था ये. इसे ढेर सारे गायक
गा चुके हैं अपने अंदाज़ में. कबीर वाणी सदा से प्रेरणादायी रही है
और ये मनुष्य को ज़मीन से जुड़े रहने में मदद करती है.
गीत के बोल:
माटी कहे कुम्हार को तो क्या रौंदे मोहे
एक दिन ऐसा होएगा मैं रौंदूंगी तोहे
माटी कहे कुम्हार को तो क्या रौंदे मोहे
एक दिन ऐसा होएगा मैं रौंदूंगी तोहे
आये हैं तो जायेंगे राजा रंक फ़कीर
आये हैं तो जायेंगे राजा रंक फ़कीर
एक सिंहासन चढ़ी चले एक बंधे ज़ंजीर
दुर्बल को ना सताइए जाकी मोटी हाय
बिना जीव के सांस सों लौह भस्म होई जाए
चलती चाकी देख के दिया कबीर रोये
दो पाटन के बीच में बाकी बचा न कोए
बाकी बचा न कोए
दुःख में सुमिरन सब करें सुख में करे न कोए
जो सुख में सुमिरन करें तो दुःख काहे को होए
पत्ता टूटा डाली से ले गयी पवन उडाये
पत्ता टूटा डाली से ले गयी पवन उडाये
अब के बिछड़े कब मिलेंगे दूर पड़ेंगे जाए
कबीर आप ठगाइए और ना ठगिये कोए
आप ठगे सुख उपजे और ठगे दुःख होए
और ठगे दुःख होए
माटी कहे कुम्हार को तो क्या रौंदे मोहे
एक दिन ऐसा होएगा मैं रौंदूंगी तोहे
मैं रौंदूंगी तोहे
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Maati kahe kumhar se-Non films song
सुनते हैं एक भजन रफ़ी की आवाज़ में जिसे मधुकर राजस्थानी
ने लिखा है और जिसकी तर्ज़ बनाई है खैयाम ने. रफ़ी के गाये
भजन काफी लोकप्रिय हैं.
खैयाम ने रफ़ी से कई गैर फ़िल्मी गीत गवाए हैं. खैयाम ने संगीत
की लगभग सभी विधाओं पर दक्षता से काम किया और अनमोल
गीत श्रोताओं और संगीत रसिकों को दिए हैं जो बरसों तक उनको
आनंदित करते रहेंगे.
गीत के बोल:
सुनियो अरज हमारी प्रभुजी
सुनियो अरज हमारी
दुनिया की इस भरी सभा में
दुनिया की इस भरी सभा में
रखियो लाज मुरारी
सुनियो अरज हमारी
तोड़ दिया अंधे हाथों ने
राम नाम का प्याला
जल के राख हुई रे कान्हा
भक्तों की मधुशाला
सुनियो अरज हमारी प्रभुजी
सुनियो अरज हमारी
पाप के मन्दिर निस दिन बनते
झूठ की गंगा बहती
धर्म की आँखें अंधी हो गईं
पूजा हो गयी सस्ती
सुनियो अरज हमारी प्रभुजी
सुनियो अरज हमारी
हर मन में तुम बसे हुए हो
जाने ये संसारी
आस मिलन की जनम जनम तक
फिर भी रहे कुँवारी
सुनियो अरज हमारी प्रभुजी
सुनियो अरज हमारी
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Suniyo araj hamari-Bhajan Non fim song
आज एक कृष्ण भजन और सुनेंगे जो अनूप जलोटा का गाया
हुआ है. ये काफी लोकप्रिय भजन है जो ८०-९० के दशकों में
ज्यादा सुनाई देता था. गौरतलब है अनूप जलोटा को भजन
सम्राट के नाम से भी जाना जाता है.
अनूप जलोटा का गाया भजन-ऐसी लागी लगन भी काफी ज्यादा
लोकप्रिय है. उसे सुनेंगे और किसी दिन.
भजन के बोल:
जग में सुन्दर है दो नाम
चाहे कृष्ण कहो या राम
बोलो राम राम राम
बोलो श्याम श्याम श्याम
जग में सुन्दर है दो नाम
चाहे कृष्ण कहो या राम
बोलो राम राम राम
बोलो श्याम श्याम श्याम
माखन ब्रज में एक चुरावे
एक बेर भीलनी के खावे
प्रेम भाव से भरे अनोखे
दोनों के है काम
चाहे कृष्ण कहो या राम
जग में सुन्दर है दो नाम
चाहे कृष्ण कहो या राम
बोलो राम राम राम
बोलो श्याम श्याम श्याम
एक कंस पापी को मारे
एक दुष्ट रावण संहारे
दोनों दीन के दुःख हरत है
दोनों बल के धाम
चाहे कृष्ण कहो या राम
जग में सुन्दर है दो नाम
चाहे कृष्ण कहो या राम
बोलो राम राम राम
बोलो श्याम श्याम श्याम
एक ह्रदय में प्रेम बढावे
एक ताप संताप मिटावे
दोनों सुख के सागर है
और दोनों पूरण काम
चाहे कृष्ण कहो या राम
जग में सुन्दर है दो नाम
चाहे कृष्ण कहो या राम
बोलो राम राम राम
बोलो श्याम श्याम श्याम
एक राधिका के संग राजे
एक जानकी संग विराजे
चाहे सीता-राम कहो
या बोलो राधे-श्याम
चाहे कृष्ण कहो या राम
जग में सुन्दर है दो नाम
चाहे कृष्ण कहो या राम
बोलो राम राम राम
बोलो श्याम श्याम श्याम
जग में सुन्दर है दो नाम
चाहे कृष्ण कहो या राम
बोलो राम राम राम
बोलो श्याम श्याम श्याम
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Jag mein sundar hain do naam-Krishna Bhajan
आइये जन्माष्टमी के अवसर पर सुनें विक्रम हाजरा का गाया
एक कृष्ण भजन.
भजन में सारी भावनाएं उड़ेल दी गयी हैं. बहुत सुन्दर भजन
है जिसका सार ये है भगवान भाव के भूखे हैं. हर क्रिया को
भगवान से जोड़ दो फिर देखो आनंद ही आनंद है. समर्पित
कर दो अपने आप को उसके चरणों में, बिना किन्तु परन्तु के.
निस्वार्थ भाव जब जगता है तब प्रभु की कृपा स्वतः प्राप्त होना
शुरू होती है.
भजन के बोल:
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
कौन कहता है भगवान आते नहीं
तुम मीरा के जैसे बुलाते नहीं
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
कौन कहता है भगवान खाते नहीं
बेर शबरी के जैसे खिलाते नहीं
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
कौन कहता है भगवान सोते नहीं
माँ यशोदा के जैसे सुलाते नहीं
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
कौन कहता है भगवान नचाते नहीं
गोपियों की तरह तुम नचाते नहीं
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
राम नारायणं जानकी वल्लभं
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Achutam Keshawam-Krishna Bhajan
बिनाता चक्रवर्ती का गाया एक भजन सुनते हैं फिल्म
यात्रिक से. काफी डूब के गाया हुआ है ये भजन और
आप इसे सुनते ही रिलेक्स हो जायेंगे. पंकज मलिक
ने इसकी धुन बनाई है फिल्म यात्रिक के लिए. धुन
अलौकिक बन पड़ी है.
मीरा बाई से बड़ा कोई समर्पित भक्त नहीं हुआ कृष्ण
का. समर्पण और विश्वास अपने चरम पर है उनकी
भक्ति में. मीरा बाई के कथन की बड़ी सुन्दर व्याख्या
उपलब्ध है पंजाब केसरी के पन्नों पर इधर-
मीरा जी के अनुभव
फिल्म यात्रिक सन १९५२ की एक फिल्म है जिसका
निर्माण न्यू थिएटर्स ने किया और फिल्म के निर्देशक
हैं कार्तिक चटर्जी. फिल्म के प्रमुख कलाकारों में हैं
वसंत चौधरी, अभि भट्टाचार्य, मोलिना, मनोरमा,
माया मुखर्जी इत्यादि.
गीत के बोल:
मीरा कहे
बिना प्रेम से
नहीं मिले हे हे हे नंदलाला
प्रीत करना चाही
प्रेम लगाना चाही
भजन करना चाही
साधन करना चाही
भजन करना चाही
भजन करना चाही
प्रेम लगाना चाही रे मनवा
प्रीत करना चाही
प्रीत करना चाही
साधन करना चाही
भजन करना चाही
रस्सी पूजन से हरी मिलें तो
मैं पूजूं तुलसी ताड़
रस्सी पूजन से हरी मिलें तो
मैं पूजूं तुलसी ताड़
मैं पूजूं तुलसी ताड़
पत्थर पूजन से हरी मिलें तो
मैं पूजूं पहाड़
मैं पूजूं पहाड़
दूध पीने से हरी मिलें
दूध पीने से हरी मिलें तो
बहुत वत्स बाला
बहुत वत्स बाला
मीरा कहे बिना प्रेम से
मीरा कहे बिना प्रेम से
नहीं मिले नंदलाला
नहीं मिले नंदलाला
नहीं मिले नंदलाला
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Prem karma chahi re manwa-yatrik 1952
आज राम नवमी के शुभ अवसर पर एक भजन सुनते हैं
अनूप जलोटा की आवाज़ में.
सर्वशक्तिमान द्वारा किसी प्राणी से सहयोग लेना मनुष्य के
लिए एक सबक जैसा है कि प्रकृति के सभी जीव किसी न
किसी रूप में आपस में जुड़े हुए हैं.
किसी को ये भ्रम हो चला हो कि उसे किसी कि ज़रूरत नहीं
पड़ती तो बस इतना ही समझ ले, खाना पचाने में पेट के
अंदर छोटे छोटे जीव यानि के कीटाणु ही मदद करते हैं.
गीत के बोल:
कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े
कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े
कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े
जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े
अवध छोड़ प्रभु वन को धाये,
सिया राम लखन गंगा तट आये
केवट मन ही मन हर्षाये,
घर बैठे प्रभु दर्शन पाए
हाथ जोड़ कर प्रभु के आगे केवट मगन खड़े
प्रभु बोले तुम नाव चलाओ
अरे पार हमे केवट पहुँचाओ
केवट बोला सुनो हमारी
चरण धूल की माया भारी
मैं गरीब नैया मेरी नारी ना होए पड़े
चली नाव गंगा की धारा
सिया राम लखन को पार उतारा
प्रभु देने लगे नाव उतराई
केवट कहे नहीं रघुराई
पार किया मैंने तुमको, अब तू मोहे पार करे
केवट दौड़ के जल भर ले आया
चरण धोये चरणामृत पाया
वेद ग्रन्थ जिन के गुण गाये
केवट उनको नाव चढ़ाये
बरसे फूल गगन से ऐसे
भक्त के भाग्य जगे
……………………………………………………..
Kabhi kabhi bhagwan ko bhi-Ram bhajan
पंकज मलिक की रौबदार आवाज़ को सुने बहुत दिन हो गये।
आइये उनकी आवाज़ में एक ग़ैर फ़िल्मी गीत सुना जाये।
बी सी माथुर के लिखे इस गीत कि धुन भी पंकज मालिक ने
बनाई है। गीत बनके बिहारी को समर्पित है। गीत के साथ एक
उल्लेखनीय बात ज़रूर इधर लिखना चाहूँगा। यू ट्यूब पर एक
कमेन्ट है गीत के साथ-भजन के माध्यम से आप ईश्वर को
कुछ कहते हैं और ध्यान के माध्यम से आप उसकी वाणी सुनते
हैं । दोनों में वाकई यही फर्क है।
गीत के बोल :
मेरे हठीले श्याम
मेरे हठीले श्याम
मैं भी हठ से अड़ा हूँ
ठोकर लगा दे मैं तेरे रस्ते पे खड़ा हूँ
ओ भागनेवाले तुझे रुकना ही पड़ेगा
मुझको उठाने के लिए झुकना ही पड़ेगा
ओ भागनेवाले तुझे रुकना ही पड़ेगा
मुझको उठाने के लिए झुकना ही पड़ेगा
ज़ख़्मी हूँ, ज़ख़्मी हूँ
ज़ख़्मी हूँ तेरा तीर की नोकों से लड़ा हूँ
ठोकर लगा दे मैं तेरे रस्ते पे खड़ा हूँ
मेरे हठीले श्याम
मुझको उजाड़ा तुझको भी बसने नहीं दूँगा
जब तक न हँसूं मैं तुझे हँसने नहीं दूँगा
मुझको उजाड़ा तुझको भी बसने नहीं दूँगा
जब तक न हँसूं मैं तुझे हँसने नहीं दूँगा
तू सबसे बड़ा, तू सबसे बड़ा
तू सबसे बड़ा और मैं तुझसे भी बड़ा हूँ
ठोकर लगा दे मैं तेरे रस्ते पे खड़ा हूँ
मेरे हठीले श्याम
माना के तेरा और मेरा साथ नहीं है
पर याद भुलाना भी तेरे हाथ नहीं है
माना के तेरा और मेरा साथ नहीं है
पर याद भुलाना भी तेरे हाथ नहीं है
ऐ दरियादिल तू देख
ऐ दरियादिल तू देख मैं लहरों पे खड़ा हूँ
लहरों पे खड़ा हूँ
ठोकर लगा दे मैं तेरे रस्ते पे खड़ा हूँ
मेरे हठीले श्याम
मेरे हठीले श्याम
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Mere hatheele shyam-Non film song-Pankaj Mullick
आज सुनते हैं एक भजन। गायक हैं हरिओम शरण।
बहुत प्रसिद्ध भजन है ये। आपने अवश्य ही इसे एक ना
एक बार सुना होगा।
इसके संगीतकार हैं मुरली मनोहर स्वरुप।
भजन के बोल:
दाता एक राम
दाता एक राम
दाता एक राम
दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया
दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया,
राम एक देवता पुजारी सारी दुनिया
पुजारी सारी दुनिया
द्वारे पे उसके जा के कोई भी पुकारता,
द्वारे पे उसके जा के कोई भी पुकारता
परम कृपा दे अपनी भव से उबारता
परम कृपा दे अपनी भव से उबारता
ऐसे दीनानाथ पे
ऐसे दीनानाथ पे बलिहारी सारी दुनिया
बलिहारी सारी दुनिया
दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया
दाता एक राम
दो दिन का जीवन, प्राणी कर ले विचार तू
कर ले विचार तू
प्यारे प्रभु को अपने मन में निहार तू
प्यारे प्रभु को अपने मन में निहार तू
मन में निहार तू
बिना हरि नाम के
बिना हरि नाम के दुखियारी सारी दुनिया
दुखियारी सारी दुनिया
दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया
दाता एक राम
नाम का प्रकाश जब अंदर जगाएगा
नाम का प्रकाश जब अंदर जगाएगा
प्यारे श्रीराम का तू दर्शन पाएगा
प्यारे श्रीराम का तू दर्शन पाएगा
ज्योति से जिसकी है
ज्योति से जिसकी है उजियारी सारी दुनिया
उजियारी सारी दुनिया
दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया
दाता एक राम
दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया
दाता एक राम
दाता एक राम
दाता एक राम
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Daata ek Ram-Bhajan-Hariom Sharan
अलौकिक गायकी का प्रभाव ह्रदय के पोर पोर को आनंद से सराबोर कर देता है। फिल्म संगीत में समय समय पर शास्त्रीय संगीत के दिग्गजों ने अपनी छाप छोड़ी है। महानतम गायकों में से एक भीमसेन जोशी के एक भजन का आनंद लीजिये जो फिल्म अनकही के लिए गया गया है । भीमसेन जोशी की आवाज़ में ईश्वरीय चुम्बक है जिसका अनुभव आपको उनकी रचनाएँ और गायकी को गौर से सुनने के बाद महसूस होती है।
संत तुलसीदास की रचना को संगीतबद्ध किया है जयदेव ने । जयदेव फिल्म संगीत में शुद्धता बरकरार रखने के लिए जाने जाते हैं।
गीत के बोल:
रघुवर तुम को मेरी लाज सदा सदा मैं शरण टिहरी तुमहो गरीब निवाज रघुवर तुम हो तुमहो गरीब निवाज रघुवर तुम को मेरी लाज
पतित उद्धारण विरद तिहारो श्रवनन सुनी आवाज पतित उद्धारण विरद तिहारो श्रवनन सुनी आवाज हूँ तो पतित पुरातन करिए हूँ तो पतित पुरातन करिए हूँ तो पतित पुरातन करिए पार उतारो जहाज रघुवर पार उतारो जहाज रघुवर पार उतारो जहाज रघुवर तुम को मेरी लाज
अघ खंडन दुःख भंजन जन के अघ खंडन दुःख भंजन जन के यही तिहारो काज अघ खंडन दुःख भंजन जन के अघ खंडन दुःख भंजन जन के यही तिहारो काज रघुवर यही तिहारो काज तुलसीदास पर किरपा कीजे भक्ति दान देहु आज तुलसीदास पर किरपा कीजे तुलसीदास पर, हा आ आ तुलसीदास पर किरपा कीजे तुलसीदास पर किरपा कीजे तुलसीदास पर किरपा कीजे भक्ति दान देहु आज रघुवर भक्ति दान देहु आज रघुवर तुम को मेरी लाज रघुवर तुम को मेरी लाज
सदा सदा मैं शरण तिहारी सदा सदा मैं शरण तिहारी सदा सदा मैं शरण तिहारी तुम हो गरीब निवाज रघुवर तुमहो गरीब निवाज
रघुवर तुम को मेरी लाज रघुवर तुम को मेरी लाज रघुवर तुम को मेरी लाज रघुवर तुम को मेरी लाज रघुवर तुम को मेरी लाज रघुवर तुम को मेरी लाज
महाशिवरात्रि के अवसर पर एक गीत सुनिए फिल्म 'कुंवारा बाप' से।
इस गीत को गाया है लता और किशोर ने। महमूद, भारती और एक बच्चा
इस गीत में दिखाई दे रहे हैं। गीत का संगीत तैयार किया है राजेश रोशन ने।
किशोर कुमार ने चुनिन्दा भजन या धार्मिक गीत गाये हैं। यूँ कहें संगीतकारों
ने उनसे भजन ज्यादा नहीं गवाए। इसका क्या कारण है कोई किशोर कुमार
भक्त ही बतला सकता है।
गीत के बोल:
ॐ नमः शिवाय
ॐ
जय भोलेनाथ जय हो प्रभु
सब से जगत में ऊंचा है तू
जय भोलेनाथ जय हो प्रभु
सब से जगत में ऊंचा है तू
इस दर से छोटा बड़ा
कोई खाली ना गया
पर आँचल है खाली मेरा
जय भोलेनाथ जय हो प्रभु
सब से जगत में ऊंचा है तू
जय भोलेनाथ जय हो प्रभु
हर दाग धुलता है यहाँ,
धुलता यहाँ
हर भाग खुलता है यहाँ,
खुलता यहाँ
अरे, मैं भी उसी दर पे आया
बनती सबकी बिगड़ी जहाँ
हो, मैं भी उसी दर पे आया
बनती सबकी बिगड़ी जहाँ
ढूँढा ज़मीन आसमान
मेरा तो सब कुछ यहाँ
अब मैं जाऊं कहाँ
जय भोलेनाथ जय हो प्रभु
सब से जगत में ऊंचा है तू
जय भोलेनाथ जय हो प्रभु
अब आस दो मालिक तुम्हीं
हो मालिक तुम्हीं
कहीं चैन मुझे मिलता नहीं
हाँ मिलता नहीं
अरे दिन के उजाले में खोया
मेरे दिल का टुकड़ा कहीं
हो, दिन के उजाले में खोया
मेरे दिल का टुकड़ा कहीं
मुझपे भी हो तेरी छाँव
ना मुल्क चाहूं ना गाँव
दे दे मेरे बच्चे को पांव
जय भोलेनाथ जय हो प्रभु
सब से जगत में ऊंचा है तू
जय भोलेनाथ जय हो प्रभु
सब से जगत में ऊंचा है तू
जय भोलेनाथ जय हो प्रभु
सब से जगत में ऊंचा है तू
जय भोलेनाथ जय हो प्रभु
सब से जगत में ऊंचा है तू
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Jai Bholenath Jai ho prabhu-Kunwaara Baap 1974
पृथ्वीराज कपूर ने बहुत सी धार्मिक और पौराणिक फिल्मों
में अभिनय किय है। अपनी भारी और दबंग आवाज़ के चलते वो
किसी भी कथानक में फिट हो जाते थे। ये गीत हरिश्चंद्र तारामती
से लिया गया है जो सन १९६३ में आई थी। इसी नाम से २-३ फिल्में
और बन चुकी हैं। गीत लिखा और गाया है कविवर प्रदीप ने। अधिकतर
प्रेरणात्मक गीत उन्होंने स्वयं गाये हैं। संगीत है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
का जो उनकी शुरुआती फिल्मों में से एक है। फिल्म में संगीत सॉफ्ट
किस्म का है।
गाने के बोल:
टूट गई है माला
टूट गई है माला मोती बिखर चले
दो दिन रह कर साथ जाने किधर चले
टूट गई है माला
मिलन की दुनिया छोड़ चले ये आज बिरह में सपने
मिलन की दुनिया छोड़ चले ये आज बिरह में सपने
खोये-खोये नैनों में हैं उजड़े-उजड़े सपने
उजड़े-उजड़े सपने
व्याध की गठरी लिये झुकाये नज़र चले
दो दिन रह कर साथ जाने किधर चले
टूट गई है माला
अब तो ये जग में जियेंगे आँसू पीते-पीते
अब तो ये जग में जियेंगे आँसू पीते-पीते
जैसी इनपे बीती वैसी और किसी पे न बीते
और किसी पे न बीते
कोई मत पूछो इन्हें के ये किस डगर चले
दो दिन रह कर साथ जाने किधर चले
टूट गई है माला
मोती बिखर चले
दो दिन रह कर साथ जाने किधर चले