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Oct 24, 2019

ऐसा लगा कोई सुरमा नजर मा-नमकीन १९८२

हिंदी फिल्मों के कई गीत भाई-बहन सरीखे लगते हैं.
कुछ सगे से लगते हैं तो कुछ कज़िन से. अब निकले
तो सभी सात सुरों के महासागर से हैं. भाईचारा तो
होगा ही. हम खामखां इंस्पिरेशन और कॉपी वगैरह
की बातें किया करते हैं. दृष्टिकोण व्यापक होना चाहिए.

सुनते हैं एक गीत जो महाराज फिल्म के आशा वाले
गीत की वजह से याद आया है.

ये गीत है अलका याग्निक का गाया हुआ १९८२ की
फिल्म नमकीन से. बोल गुलज़ार के हैं और संगीत
आर डी बर्मन का. परदे पर इसे किरण वैराले गा रही
हैं. गीत के शुरू के संगीत से आपको सारे जहाँ से
अच्छा...... भी याद आ सकता है.


   

गीत के बोल:

ऐसा लगा कोई सुरमा नज़र मां
आये नज़र तू ही तू हो सैयां
तू ही नज़र आये आये रे आये
ऐसा लगा कोई सुरमा नज़र मां
आये नज़र तू ही तू हो सैयां
तू ही नज़र आये आये रे आये
ऐसा लगा

हो जल जल के मैं कोयला हो गई
कोयला आँख लगाया
हो जल जल के मैं कोयला हो गई
कोयला आँख लगाया
हो जल जल के मैं कोयला हो गई
कोयला आँख लगाया
अरे आँख लगा जो कोयला मुआ फिर शोला भड़काया
हो सीने में जल गई
हो सीने में जल गई इस्क की ज्योति
ज्योति में तेरी खुसबू हो सैयां तेरी खुसबू आये
आये रे आये

ऐसा लगा कोई सुरमा नज़र मां
आये नज़र तू ही तू हो सैयां
तू ही नज़र आये आये रे आये
ऐसा लगा

हो तेरी खोज में दुनिया भटकी
भटकी द्वारे द्वारे
आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ
हो तेरी खोज में दुनिया भटकी भटकी
हो तेरी खोज में दुनिया भटकी
भटकी द्वारे द्वारे
अरे गांव शहर सब खोजे सैयां खोजे तीरथ सारे
तीरथ नज़र आये
हो तीरथ नज़र आये पग पग पे सैयां
आये नज़र नाही तू हो बलमा
कहाँ तू नज़र आये आये रे आये

ऐसा लगा कोई सुरमा नज़र मां
आये नज़र तू ही तू हो सैयां
तू ही नज़र आये आये रे आये
ऐसा लगा
…………………………………………………
Aisa laga koi surma nazar maan-Namkeen 1982

Artist: Kiran Vairale, Sanjeev Kumar

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Jun 23, 2009

राह पे रहते हैं-नमकीन १९८२

एक छन्न सी आवाज़ आती है तत्पश्चात लम्बी से ख़ामोशी
मानो कोई नया गीत शुरू होने वाला हो। क्षणों के लिए हम खो
जाते हैं और फिर एक ट्रोले के गर्जना भरे होर्न से हमारी तन्द्रा
भंग होती है। हम हाई-वे पर खड़े हैं और एक रूपये का सिक्का
जेब से निकल कर पतरे की बनी टेबल पर जा गिरा है। ये टेबल एक
ढाबे के बाहर पड़ी है जहाँ हम चाय पी रहे हैं। चाय पीते पीते एक गीत
याद आता है जो सफ़र से सम्बंधित है। फिल्म नमकीन का ये गीत
संजीव कुमार पर फिल्माया गया है जिसमे वे एक ट्रक में सफ़र कर
रहे हैं। संजीव कुमार को गुलज़ार की दो फिल्मों में हमने चाय पीते
देखा मौसम और नमकीन। गेरुलाल नाम का ये ट्रक ड्राईवर घुमावदार
सड़कों पर कैसी द्रिविंग करता है जानने के लिए देखें ये नमकीन गीत।



गीत के बोल:

हो, राह पे रहते हैं, यादों पे बसर करते है
खुश रहो एहले वतन हम तो सफ़र करते है

राह पे रहते हैं, यादों पे बसर करते है
खुश रहो एहले वतन हम तो सफ़र करते है

हाँ,जल गए जो धूप में तो साया हो गए
जल गए जो धूप में तो साया हो गए
आसमान का कोई कोना, थोडा सो गए
जो गुजर जाती हैं बस, हो, उस पे गुजर करते है

राह पे रहते हैं, यादों पे बसर करते है
खुश रहो एहले वतन हम तो सफ़र करते है

हो, उड़ते पैरो के तले जब बहती हैं जमीन
उड़ते पैरो के तले जब बहती हैं जमीन
मुड के हमने कोई मंजिल देखी ही नहीं
रात दिन राहों पे हम हो, शाम-ओ-सहर करते है

राह पे रहते हैं, यादों पे बसर करते है
खुश रहो एहले वतन हो, हम तो सफ़र करते है

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