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Jun 11, 2011

मैं तेरी हीर हूँ- रफ़्तार १९७५

इस फिल्म के संगीत के बारे में मुझे बहुत सालों से पता है कि
इसमें संगीत सोनिक-ओमी का है। कुछ पंजाबी स्वाद वाले
और कुछ मदन मोहन से प्रेरित संगीत वाले गीत रचने वाले
सोनिक ओमी ने कई यादगार धुनें रची हैं। अधिकतर समय
बी और सी ग्रैड की फिल्मों में संगीत देने की वजह से उनके
गीत ज्यादा ध्यान आकृष्ट नहीं कर पाए जनता का ।


ये है उनका संगीतबद्ध किया एक अपने ज़माने का हिट गीत ।
यहाँ हिट से मतलब जो उस समय के रेडुआ चैनल पर ज्यादा
बजा करता था। गीत में मौसमी चटर्जी को जीभ निकाल
के चिढाने का भरपूर मौका मिला है। बेचारे शरीफ से दिख रहे
प्रेमी के रोल में हैं-विनोद मेहरा। फिल्म का नाम है रफ़्तार
जिसका एक गीत आपको सुनवाया जा चुका है पहले इस ब्लॉग पर।

इस गीत की एक पंक्ति अच्छे से याद हो गई है-कभी होंगे ना जुदा हीरिये।
गौरतलब है सन १९७५ में एक फिल्म आई थी लैला मजनू। प्रसिद्ध प्रेमी
जोड़ों के ऊपर बनी फ़िल्में और उनके उल्लेख वाले गीत काफी लोकप्रिय
हैं। ये गीत अपनी आकर्षक धुन की वजह से लोकप्रिय हुआ और दूसरी
वजह हो सकती है इसमें नायिका को हीर नाम से संबोधित किया जाना।
आप खोजें और कोई वजह है क्या ?




गीत के बोल:

वे सुन हानिया ओये सुन जानिया

साली कचरा कर दिया सब के सामने

वे सुन हानिया ओये सुन जानिया

रानी की बच्ची इतना मारूंगा कि
नानी याद आ जाएगी

अरे बुद्धू बापू ने कहा है
मैं तेरी हीर हूँ तेरी तकदीर हूँ
मैं तेरी हीर हूँ तेरी तकदीर हूँ

नि रुक मर जानिये नि सुन रानिये
मैं तेरा यार हूँ, तेरा दिलदार हूँ
मैं तेरा यार हूँ, तेरा दिलदार हूँ

दिल का लगाना दिलदार जनता
फूलों की कदर गुलज़ार जनता
हो, अरे एक दिल नहीं क्या जानता
हो यार के दिल को है यार जानता
मानता

आ लग जा गले गोरिये
मैं तेरा यार हूँ, तेरा दिलदार हूँ
मैं तेरा यार हूँ, तेरा दिलदार हूँ

सुना है निगाहों का मिलाना है बुरा
किसी दूसरे का बान जाना है बुरा
दिल दे के अँखियाँ चुराना है बुरा
हो दे के हाथ हाथ में छुड़ाना है बुरा
हो दिल दे के
कभी छाड़ के ना जाये सजना
मैं तेरी हीर हूँ तेरी तकदीर हूँ
मैं तेरी हीर हूँ तेरी तकदीर हूँ

एक बात बोलता हूँ मैं बालम से
प्यार मेरा अमर है तेरे दम से
बिछाद ना जाना मिल के हमसे
ओये मर ही ना जाऊं कहीं इस गम से
हाय गम से
कभी होंगे ना हुदा हीरिये
मैं तेरा यार हूँ, तेरा दिलदार हूँ
मैं तेरा यार हूँ, तेरा दिलदार हूँ

वे सुन हानिया ओये सुन जानिया
मैं तेरी हीर हूँ तेरी तकदीर हूँ
मैं तेरी हीर हूँ तेरी तकदीर हूँ

..............................
Main teri heer hoon-Raftaar 1975

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Nov 8, 2010

संसार है एक नदिया-रफ़्तार १९७५

प्यानो के जादू के बाद आइये आपको वायलिन का आनंद
दिलवाते हैं। दूर का राही फिल्म के गीत में जो कोरस
की ध्वनि है उसे सुनकर हमेश रफ़्तार फिल्म का गीत
दिमाग में आता है।

मदन पुरी को लोग खलनायक और चरित्र भूमिकाओं से
पहचानते हैं। खलनायकों के लिए स्वाभाविक तौर पर कोई
अच्छी भावनाएं नहीं होतीं दर्शकों के दिल में। मेरे साथ भी
ऐसा ही होता था पहले जब मुझे इनके बारे में जानकारी नहीं
हुआ करती थी। मैं भी आम दर्शक की तरह प्रतिक्रिया दिया
करता।

मदन पुरी को मैंने दो फिल्मों के बाद ढंग से पहचाना-'रफ़्तार'
और 'पूरब और पश्चिम'। दोनों फिल्मों में उन्होंने ढर्रे से हट
कर भूमिकाएं निभायीं हैं।

प्रस्तुत गीत मेरे सबसे पसंदीदा गीतों में शामिल है. इसे
अभिलाष ने लिखा है और इसकी धुन बनाई है सोनिक ओमी
ने। पंजाबी मूल के संगीतकार जोड़ी सोनिक ओमी के सर्वश्रेष्ठ
गीतों में आप इसे शामिल कर सकते हैं। राग शिवरंजिनी पर
आधारित इस गीत में गायक मुकेश ने अपना सब कुछ उड़ेल
दिया है । वैसे भी कौन सा ऐसा गीत है जिसमे मुकेश ने अपनी
आत्मा ना निचोड़ी हो। गीत में आशा भोंसले ने भी उनका साथ
दिया है उस हिस्से में जिसे परदे पर युवा मौसमी चटर्जी गा रही
हैं। ऐसे गंभीर गीत गाती युवा अभिनेत्रियाँ थोड़ी अजीब सी लगती
हैं।




गीत के बोल:

संसार है एक नदिया
दुःख सुख दो किनारे हैं

ना जाने कहाँ जाएँ हम
बहते धारे हैं

संसार है एक नदिया
दुःख सुख दो किनारे हैं

ना जाने कहाँ जाएँ हम
बहते धारे हैं

संसार है एक नदिया

चलते हुए जीवन की
रफ़्तार में एक ले है
चलते हुए जीवन की
रफ़्तार में एक लय है

एक राग में एक सुर में
संसार कि हर शय है
संसार कि हर शय है

एक ताल पे गर्दिश में
ये चाँद सितारे हैं

ना जाने कहाँ जाएँ
हम बहते धारे हैं

धरती पे अम्बर की
आँखों से बरसती हैं
इक रोज़ यही बूँदें,
फिर बादल बनती हैं
फिर बादल बनती हैं

इस बनने बिगड़ने के
दस्तूर में सारे हैं

ना जाने कहाँ जाएँ
हम बहते धारे हैं

कोई भी किसी के लिए,
अपना ना पराया है
कोई भी किसी के लिए,
अपना ना पराया है
रिश्तों के उजाले में,
हर आदमी साया है
हर आदमी साया है

कुदरत के भी देखो तो,
ये खेल निराले हैं

ना जाने कहाँ जाएँ
हम बहते धारे हैं

संसार है एक नदिया

है कौन वो दुनिया में,
ना पाप किया जिसने
है कौन वो दुनिया में,
ना पाप किया जिसने
बिन उलझे काँटों से,
हैं फूल चुने किसने
हैं फूल चुने किसने

बेदाग़ नहीं कोई,
यहाँ पापी सारे हैं

ना जाने कहाँ जाएँ
हम बहते धारे हैं

संसार है एक नदिया
दुःख सुख दो किनारे हैं

ना जाने कहाँ जाएँ
हम बहते धारे हैं
हम बहते धारे हैं
....................................................................
Sansar hai ek nadiya-Raftaar 1975

Artists: Madan Puri, Mausami Chatterji

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