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Jan 24, 2017

ओ फिरकी वाली-राजा और रंक १९६८

सन १९६८ की इस फिल्म की कहानी मार्क ट्वेन के एक
उपन्यास तक पहुँचती है. अच्छा टेस्ट है हमारे निर्माता
निर्देशकों का. इसे दक्षिण के के पी आत्मा ने निर्देशित
किया था. फिल्म का कथानक रोचक है और फ़िल्मी
मसलों से भरपूर भी. इस फिल्म के गाने इतने बजे
कि याद से हो गए. अब आप सोचिये रेडियो के ज़माने
में गाने याद हो जाएँ, कोई आसान काम नहीं है. ये
इसलिए नहीं के कान लगा के केवल एक ही काम बचा
था गाने याद करने का, बल्कि इतनी बार सुनाई दे गए
कि याद होते चले गए. वे ३ गाने गाने हैं जिनमें से
दो आप सुन चुके हैं अब तीसरा भी सुन लेते हैं.

संजीव कुमार और नाजिमा पर फिल्माया गया ये गीत
आनंद बक्षी की कलम से निकला है और फिल्म का
संगीत तैयार किया है लक्ष्मी प्यारे ने. गायक को आप
पहचानते ही हैं.




गीत के बोल:

ओ फिरकी वाली तू कल फिर आना
नहीं फिर जाना तू अपनी जुबान से
के तेरे नैना हैं ज़रा बेईमान से
मतवाली ये दिल क्यों तोड़ा
ये तीर काहे छोड़ा नजर की कमान से
के मर जाऊँगा मैं बस मुस्कान से
ओ फिरकी वाली...

पहले भी तूने इक रोज़ ये कहा था
पहले भी तूने इक रोज़ ये कहा था
आऊँगी तू ना आई
वादा किया था सैंया बन के बदरिया
छाऊँगी तू ना छाई
मेरे प्यासे मेरे प्यासे नैना तरसे
तू निकली ना घर से
कैसे बीती वो रात सुहानी
तू सुन ले कहानी ये सारे जहान से
के तेरे नैना हैं ज़रा बेईमान से

ओ फिरकी वाली तू कल फिर आना
नहीं फिर जाना तू अपनी जुबान से
के तेरे नैना हैं ज़रा बेईमान से

सोचा था मैंने किसी रोज़ गोरी हँस के
सोचा था मैंने किसी रोज़ गोरी हँस के
बोलेगी तू ना बोली
मेरी मोहब्बत भरी बातें सुन-सुन के
डोलेगी तू ना डोली
ओ सपनों में
ओ सपनों में आने वाली
रुक जा जाने वाली
किया तूने मेरा दिल चोरी
ये पूछ ले गोरी ज़मीं आसमान से
के तेरे नैना हैं ज़रा बेईमान से

ओ फिरकी वाली तू कल फिर आना
नहीं फिर जाना तू अपनी जुबान से
के तेरे नैना हैं ज़रा बेईमान से
के तेरे नैना हैं ज़रा बेईमान से
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O phirki wali too kal phir aana-Raja aur rank 1968

Artists: Sanjeev Kumar,Nazima

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Jan 18, 2017

तू कितनी अच्छी है-राजा और रंक १९६८

फिल्म आन मिलो सजना के लता के गाये गीत से यकायक
ये गीत याद आ गया. आखिर को उस फिल्म के संगीतकार भी
लक्ष्मी प्यारे जो हैं.

मदर्स डे पर इस गीत को एक बार याद कर लेते हैं. हालाँकि
इस गीत को पोस्ट करने का विचार कई बार मैंने बनाया, नहीं
पोस्ट कर पाया. दूसरे हृष्ट पुष्ट ब्लोगरों की तरह बादाम पिस्ते
खाने को नहीं मिलते. गरीबों की बादाम मूंगफली भी महँगी है.
चने का सहारा था वो भी कमबख्तों ने छीन लिया और उसे
स्टेटस सिम्बल बना दिया.

आजकल गुड ज्यादा फेसबुक और ट्विटर पर पाया जाता है
अतः गुड़ से चिपकने वाले जीव भी उधर ज्यादा दिखाई देने
लगे हैं. वैसे गुड़ से चिपकने वाले जीव एक हेय दृष्टि से देखी
जाने वाली जगह भी पाए जाते हैं.

सुनते हैं हिंदी सिनेमा की सबसे प्रभावशाली माँ निरुपा रॉय
पर फिल्माया गया ये गीत. जो बच्चा गीत गा रहा है उसका
नाम मुझे नहीं मालूम. बोल आनंद बक्षी के हैं और संगीत
लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का.



गीत के बोल:

तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है
प्यारी-प्यारी है
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ
तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है
प्यारी-प्यारी है
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ

ये जो दुनिया है ये बन है काँटों का
तू फुलवारी है
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ

दूखन लागी है माँ तेरी अँखियाँ
दूखन लागी है माँ तेरी अँखियाँ
मेरे लिए जागी है तू सारी-सारी रतियाँ
मेरी निंदिया पे अपनी निंदिया भी तूने वारी है
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ

अपना नहीं तुझे सुख-दुख कोई
अपना नहीं तुझे सुख-दुख कोई
मैं मुस्काया तू मुस्काई मैं रोया तू रोई
मेरे हँसने पे मेरे रोने पे तू बलिहारी है
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ

माँ बच्चों की जां होती है
माँ बच्चों की जां होती है
वो होते हैं क़िस्मत वाले जिनके माँ होती है
कितनी सुन्दर है कितनी शीतल है न्यारी-न्यारी है
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ

तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है
प्यारी-प्यारी है
ओ माँ ओ माँ ओ माँ ओ माँ
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Too kitni achchhi hai-Raja aur rank 1968

Artists: Nirupa Roy

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Jan 12, 2017

मेरा नाम है चमेली-राजा और रंक १९६८

बीकानेर को प्रसिद्ध करवाने में फिल्म राजा और रंक की चमेली
का भी थोडा बहुत योगदान है. ये अपने ज़माने का एक मशहूर
गीत है जो १९६८ से बजना शुरू हो कर ८० के दशक तक सुना
जाता रहा.

फिल्म राजा और रंक में इसे फिल्माया गया है कुमकुम पर. इसे
लिखा है आनंद बक्षी ने और धुन बनाई लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.
के पी आत्मा निर्देशित फिल्म के इस गीत में कुमकुम ने आत्मा
डाल दी है. गीत गाया है लता मंगेशकर ने.



गीत के बोल:

मेरा नाम है चमेली मैं हूं मालन अलबेली
चली आई मैं अकेली बीकानेर से
मेरा नाम है चमेली मैं हूं मालन अलबेली
चली आई मैं अकेली बीकानेर से
ओ दारोगा बाबू बोलो ज़रा दरवज्जा तो खोलो
खड़ी हूं मैं दरवज्जे पे बड़ी देर से
मेरा नाम है चमेली मैं हूं मालन अलबेली
चली आई मैं अकेली बीकानेर से

मैं बागों से चुन चुन के लाई चम्पा की कलियाँ
मैं बागों से चुन चुन के लाई चम्पा की कलियाँ
ये कलियाँ बिछा के मैं सजा दूँ तेरी गलियाँ
रे अँखियाँ मिला मेरी अँखियों से
ओ मैं फूलों की रानी मैं बहारों की सहेली

मेरा नाम है चमेली मैं हूं मालन अलबेली
चली आई मैं अकेली बीकानेर से
ओ दारोगा बाबू बोलो ज़रा दरवज्जा तो खोलो
खड़ी हूं मैं दरवज्जे पे बड़ी देर से

मेरा मनवा ऐसे धडके जैसे डोले नैया
मेरा मनवा ऐसे धडके जैसे डोले नैया
ओ बेदर्दी ओ हरजाई ओ बांके सिपहिया
रे घूंघट मेरा तैने क्यूँ खोला
मैं ऐसे शरमाई जैसे दुल्हन नई नवेली

मेरा नाम है चमेली मैं हूं मालन अलबेली
चली आई मैं अकेली बीकानेर से
ओ दारोगा बाबू बोलो ज़रा दरवज्जा तो खोलो
खड़ी हूं मैं दरवज्जे पे बड़ी देर से
मेरा नाम है चमेली मैं हूं मालन अलबेली
चली आई मैं अकेली बीकानेर से
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Mera naam hai chameli-Raja aur rank 1968

Artists: Sanjeev Kumar, Kumkum

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Jan 22, 2011

रंग बसंती छा गया-राजा और रंक १९६८

लता और रफ़ी के गाये लगभग ४३० युगल गीतों में से अभी
आपको कुछ ही सुनवाए हैं। आइये अब सुनते हैं एक लोकप्रिय
युगल गीत फिल्म राजा और रंक से। टी वी पर एक पेंट कंपनी
के विज्ञापन को देख कर आज दिमाग में ये गीत कौंधा।
गुलज़ाराना अंदाज़ में पोस्ट की कोंपलें दिमाग से फूटने लगीं और
शब्द पत्तों की मानिंद टपकना शुरू हो गए, पतझड़ का मौसम जो
है। बिखरे हुए अधखाये, साबुत बेरों को बटोर कर आपके लिए
छाप दिए हैं ।

तुरही की आवाज़ कुछ अलग सुनाई पढ़ती है और उससे अंदाज़ा
लगाया जा सकता है कि गीत किसी पीरियड या ऐतिहासिक फिल्म
से है। साथ में बांसुरी का भी बढ़िया प्रयोग है इस गीत में।

आनंद बक्षी के लिखे हुए गीत की तर्ज़ बनाई है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
ने।




गीत के बोल:

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
मस्ताना मौसम आ गया

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
मस्ताना मौसम आ गया

धरती का है आँचल पीला झूमे अम्बर नीला-नीला
सब रंगों से है रंगीला, रंग बसंती

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
मस्ताना मौसम आ गया
लहराए ये तेरा आँचल सावन के झूलों जैसा
दिल मेरा ले गया है ये तेरा रूप गोरी
सरसों के फूलों जैसा
ओ लहराए ये तेरा आँचल सावन के झूलों जैसा
दिल मेरा ले गया है ये तेरा रूप गोरी
सरसों के फूलों जैसा

जब देखूं जी चाहे मेरा
नाम बसंती रख दूं तेरा
छोडो-छेड़ो न
हो हो हो ओ ओ ओ

तेरी बातें राम दुहाई मनवा लूटा नींद चुराई
सैयां तेरी प्रीत से आई, तंग बसंती

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
o मस्ताना मौसम आ गया

हो हो हो ओ सुन लो देशवासियों
सुन लो देशवासियों
आज से इस देश में
छोटा-बड़ा कोई न होगा सारे एक सामान होंगे
सुन लो देशवासियों
कोई न होगा भूखा-प्यासा पूरी होगी सबकी आशा
हम हैं राजा
तुम हो कौन नगर के राजे छोटा मुंह बड़ी बात न साजे
झूमो नाचो गाओ बाजे, चंग बसंती

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
मस्ताना मौसम आ गया

संग बसंती, अंग बसंती, रंग बसंती छा गया
मस्ताना मौसम आ गया
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Rang basanti-Raja aur rank 1968

Artists: Sanjeev Kumar,  Nazima, 

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