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Sep 3, 2017

दिल डूबा-खाकी २००४

सोनू निगम और श्रेया घोषाल का गाया एक युगल गीत सुनते
हैं फिल्म खाकी से. इसे समीर ने लिखा है और गीत की तर्ज़
बनाई है राम संपत ने.

फिल्म एक बहुसितारा फिल्म है जिसमें नायक ढेर सारे हैं और
नायिकाएं कम हैं.



गीत के बोल:

हे ला ला लई ओ हे ला ला लई ओ 
हे ला ला लई ओ हे ला ला लई ओ
दिल डूबा दिल डूबा नीली आँखों में ये दिल डूबा
महबूबा महबूबा बस ये जान ले महबूबा
दिल डूबा दिल डूबा नीली आँखों में ये दिल डूबा
महबूबा महबूबा बस ये जान ले महबूबा
आशिक हूँ दीवाना हूँ तेरे लिए कुछ भी कर जाऊंगा
इश्क में तेरे जीता हूँ तेरे लिए ही मर जाऊंगा
मैं तेरे झांसे में ना आऊँगी ओ रे दीवाने जा
क्यों
ऐसी वैसी बना के बातें मुझे ना तू उलझा रे
लुट जाऊँगा मिट जाऊंगा दिल तेरा जीत के दिखलाऊंगा
पीछा ना छोडूंगा चाहे जितना तड़पा
दिल डूबा दिल डूबा नीली आँखों में ये दिल डूबा
महबूबा महबूबा बस ये जान ले महबूबा
आशिक हूँ दीवाना हूँ तेरे लिए कुछ भी कर जाऊंगा
इश्क में तेरे जीता हूँ तेरे लिए ही मर जाऊंगा

हे ला ला लई ओ हे ला ला लई ओ 
हे ला ला लई ओ हे ला ला लई ओ

बड़ी तड़प है बड़ी कशिश है मेरी तो चाहत में
हाय
हज़ार मजनू बने हैं पागल मेरी तो मोहब्बत में
हो हो तुझे एक दिन जानेमन प्यार की लड़ियाँ पहनाऊंगा
देखेगा सारा जहां तुझे ले जाऊँगा

दिल डूबा दिल डूबा नीली आँखों में ये दिल डूबा
महबूबा महबूबा बस ये जान ले महबूबा
आशिक हूँ दीवाना हूँ तेरे लिए कुछ भी कर जाऊंगा
इश्क में तेरे जीता हूँ तेरे लिए ही मर जाऊंगा

हे ला ला लई ओ हे ला ला लई ओ 
हे ला ला लई ओ हे ला ला लई ओ 
हे ला ला लई ओ हे ला ला लई ओ 
हे ला ला लई ओ हे ला ला लई ओ 
हे ला ला लई ओ हे ला ला लई ओ 
महबूबा महबूबा
..............................................................
Dil dooba-Khaki 2004

Artists: Akshay, Aishwarya

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Apr 15, 2016

दिल आज कल मेरी सुनता-पुरानी जीन्स २०१४

फिल्म पुरानी जींस में पुराने जींस ढूँढने की कोशिश कर सकते
हैं आप. हम कितने भी विलायती हो जाएँ अगर अपनी जड़ों से
कभी अलग नहीं हो पाएंगे. धन्यवाद नयी पीढ़ी के निर्माता
निर्देशकों का, वे कुछ सामान देसी अवश्य छोड़ते हैं फिल्मों में
जिसे जूने पुराने दर्शक पसंद कर सकें.

प्रस्तुत गीत में “दिल हैज गोन आउट ऑफ कंट्रोल”  वाला भाव
है. दिल एक कीवर्ड ही गीतों का. जब आपको कोई शब्द न सूझ
रहा हो तो दिल शब्द का सहारा ले लें. वैसे भी सयाने कहते हैं
दिल की सुनें. गीत प्रशांत इंगोले का लिखा हुआ है जिसकी
धुन बनायीं है राम संपत ने और इसे के के ने गाया है जिनका
पूरा नाम है कृष्ण कुमार कुन्नथ. के के के गाये उम्दा गीतों में
से एक मान सकते हैं आप इसे.



गीत के बोल:

दिल आज कल मेरी सुनता नहीं
दिल आज कल पास रहता नहीं
ये तुझसे ही मिलने को चाहे
ये तेरी ही करता है बातें
क्या तुम हो, क्या तुम हो वही
दिल आज कल मेरी सुनता नहीं
दिल आज कल मेरी सुनता नहीं

तेरी आँखों के रस्ते ये चले जाता है
जो बुलाऊँ मैं कभी, लौट आता नहीं
बेखबर ये ज़माने से टकराता है
बेधड़क मुझसे कहता है, मैं हूँ यूँ ही
ये तुझसे ही मिल के हुआ है
जो तेरी नज़र ने छुआ है
क्या तुम हो, क्या तुम हो वही
दिल आज कल मेरी सुनता नहीं
दिल आज कल मेरी सुनता नहीं

है हुनर एक नया इसको तुझसे मिला
मुस्कुरा के ये मिलता है सबसे अभी
आधी रातों में मुझको ये देता उठा
मुझसे पूछे ये रातें क्यूं कटते नहीं
ये तुझसे ही मिलने को चाहे
ये तेरी ही करता है बातें
क्या तुम हो, क्या तुम हो वही

दिल आज कल मेरी सुनता नहीं
दिल आज कल मेरी सुनता नहीं
ये तुझसे ही मिलने को चाहे
ये तेरी ही करता है बातें
क्या तुम हो, क्या तुम हो वही
दिल आज कल मेरी सुनता नहीं
दिल आज कल मेरी सुनता नहीं
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Dil aaj kal meri suntan nahin-Purani Jeans 2014

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Feb 17, 2016

जिया लागे ना तुम बिन-तलाश २०१२

हिंदी फिल्म संगीत में आपने पुराने ज़माने के राम गांगुली,
रामलाल और हुस्नलाल-भगतराम का नाम अवश्य सुना होगा.
एक और राम इस क्षेत्र से जुड़े-राम संपत. ये नयी पीढ़ी के
संगीतकार हैं.

विज्ञापन के क्षेत्र में काफी काम कर चुके राम संपत का फ़िल्मी
कैरियर शुरू हुआ एक अंग्रेजी फिल्म से २००३ में. उसके बाद
उन्होंने राजकुमार संतोषी की खाकी(२००४) में संगीत दिया.

फिल्म का नाम है तलाश. एक तलाश १९६९ वाली थी, ये सन
२०१२ की तलाश है. गीत लिखा है जावेद अख्तर ने और इसे
गाया भी नए कलाकारों ने है-सोना महापात्रा और रवींद्र उपाध्याय
ने. फिल्म के कलाकार ज़रूर जाने पहचाने हैं-आमिर खान
और रानी मुखर्जी. फिल्म के तीन निर्माताओं में से एक आमिर
भी हैं.



गीत के बोल:

मन तेरा जो रोग हैं मोहे समझ ना आये
पास हैं जो सब छोड़ के दूर को पास बुलाये
जिया लागे ना तुम बिन मोरा

क्या जाने क्यों हैं  क्या जाने कैसी
अनदेखी सी डोर
जो खींचती है  जो ले चली है
अब यूँ मुझे तेरी ओर

मैं अंजानी  हूँ वो कहानी
होगी ना जो पूरी
पास आओगे  तो पाओगे
फिर भी है इक दूरी
जिया लागे ना तुम बिन मोरा

मन अब तक जो  बूझ ना पाया
तुम वो पहेली हो
कोई ना जाने, क्या वो रहस्य है
जिसकी सहेली हो

मैं मुस्काऊं सबसे छुपाऊं
व्याकुल हूँ दिन रैन
कब से ना आई नैनों में निंदिया
मन में ना आया चैन
जिया लागे ना तुम बिन मोरा
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Jiya laage na tum bin-Talaash 2012

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