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Nov 16, 2010

आई हूँ बड़ी दूर से-सखी रोबिन १९५७

पिछले गीत में नायिका दूर से आयीं थी और इस गीत में भी
बड़ी दूर से आ रही है । पिछला अंदाज़ मजरूह का था तो ये
गीतकार योगेश का है। दोनों गीत सन १९५७ के हैं इनमे से
एक लोकप्रिय हुआ दूसरा नहीं। तुमसा नहीं देखा एक हिट
फिल्म थी और सखी-रोबिन गुमनामी के अंधेरों में कहीं खो गई।

रोबिन हुड के चरित्र से फिल्मकार काफी प्रभावित दिखे।
हॉलीवुड और बॉलीवुड में रोबिन हूड के ऊपर कई फिल्मों
का निर्माण हुआ। १९५७ में एक हिंदी फिल्म बनी-सखी रोबिन
इसमें रंजन रोबिन बने और शालिनी उनकी सखी। कहनियों को
रोचक बनाने के लिए उनमे सखियों के किरदार डाले जाते हैं
हैं। इस गीत में शीला वाज़ नमक नायिका परदे पर गीत गा
रही हैं। पार्श्वगायन किया है सुमन कल्यानपुर ने, गीत योगेश
का लिखा हुआ है और संगीत दिया है रोबिन बैनर्जी ने ।



गीत के बोल:

आई हूँ बड़ी दूर से
देखो न हमें घूर के

आई हूँ बड़ी दूर से
देखो न हमें घूर के, ओये होए
मेरे होंठों पे तराने
क्या क्या लायी हूँ खजाने
वई वई सुन लो ज़माने
वई वई सुन लो ज़माने

आई हूँ बड़ी दूर से
देखो न हमें घूर के, ओये होए
क्या क्या लायी हूँ खजाने
वई वई सुन लो ज़माने
वई वई सुन लो ज़माने

आई हूँ बड़ी दूर से

जहाँ से मैं आई हूँ
वो ख्वाबों की बस्ती है
रश्क करती है ज़िन्दगी
हर कदम पे मस्ती है

जहाँ से मैं आई हूँ
वो ख्वाबों की बस्ती है
रश्क करती है ज़िन्दगी
हर कदम पे मस्ती है

आई हूँ बड़ी दूर से
देखो न हमें घूर के, ओये होए
क्या क्या लायी हूँ खजाने
वई वई सुन लो ज़माने
वई वई सुन लो ज़माने

ये दुनिया की राहों में
ग़मों का ठिकाना है
दूर कहीं अम्बर तले
मेरा आशियाना है

ये दुनिया की राहों में
ग़मों का ठिकाना है
दूर कहीं अम्बर तले
मेरा आशियाना है

आई हूँ बड़ी दूर से
देखो न हमें घूर के, ओये होए
मेरे होंठों पे तराने
क्या क्या लायी हूँ खजाने
वई वई सुन लो ज़माने
वई वई सुन लो ज़माने

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Apr 5, 2009

तुम जो आओ तो प्यार-सखी रोबिन १९६२

कई बी ग्रेड और सी ग्रेड की फिल्मों में मधुर गीत गुम हो गए।
ऐसी ही एक फ़िल्म है सन १९६२ की सखी रोबिन। अंग्रेज़ी पात्र
'रोबिन हुड' पर बनाई गई फ़िल्म में रंजन और शालिनी हीरो
हिरोइन की भूमिका में हैं। इनमे से रंजन नाम के अभिनेता का

नाम ये चेहरे से आप वाकिफ होंगे। अगर हिन्दी में सुपरमेन फ़िल्म
बने तो उसमे सुपरमेन भी गाना गायेगा और उसकी प्रेमिका
भरत नाट्यम करेगी। इस गीत को लिखा है योगेश ने।

आश्चर्य है की योगेश ने इतनी पुरानी फिल्मों में गीत लिखे और
उनको प्रसिद्धि मिली राजेश खन्ना अभिनीत फ़िल्म आनंद के गानों
से। इस गीत की तर्ज़ बनाई है रोबिन बनर्जी ने। विचित्र संयोग है
कि फ़िल्म के नाम और संगीतकार दोनों के नाम में रोबिन शब्द
आता है।




गीत के बोल:


तुम जो आओ तो प्यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

क्या कहूँ तुमसे कह नहीं सकता
बिन तुम्हारे मैं रह नहीं सकता
क्या कहूँ तुमसे कह नहीं सकता
बिन तुम्हारे मैं रह नहीं सकता
तुमको गर ऐतबार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

तुम जो आओ तो प्यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

दिल पे मुझको तो ऐतबार नहीं
ये वो शय है जिसे करार नहीं
दिल पे मुझको तो ऐतबार नहीं
ये वो शय है जिसे करार नहीं
दिल पे गर इख्तियार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

तुम जो आओ तो प्यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

जब तमन्ना शबाब पर आए
हर तरफ़ इक खुमार सा छाए
जब तमन्ना शबाब पर आए
हर तरफ़ इक खुमार सा छाए
ज़ह- ऐ-किस्मत जो यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

तुम जो आओ तो प्यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए
..............................................................
Tum jo aao to pyar-Sakhi Robin 1962.

Artists: Ranjan, Shalini

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