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Apr 4, 2020

एक तरफ है माँ की छाया-आंधी और तूफ़ान १९६४

बिछुड़न और मिलन इस फिल्म की कहानी का मूल तत्व
है. ढेर सारे कलाकारों से भरी फिल्म में ढेर सारी घटनाएँ
हैं. कामरान फिल्म्स के बैनर तले इसका निर्माण हुआ और
फिल्म में कामरान स्वयं एक अहम भूमिका में हैं. फिल्म
का निर्देशन मोहम्मद हुसैन ने किया.

प्रस्तुत गीत फारूक कैसर ने लिखा है और इसका संगीत
तैयार किया है रॉबिन बैनर्जी ने. रफ़ी गायक कलाकार हैं.




गीत के बोल:

एक तरफ है माँ की छाया एक तरफ है ताज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज

राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज
एक तरफ है माँ की छाया एक तरफ है ताज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज

टूट गया है पल दो पल में सारी उमर का नाता
लुट गयी पूँजी मिट गया कोई देख रहा है दाता
देख रहा है दाता
उस आँगन को छोड़ चला क्यूँ जिसपे किया है राज़
एक तरफ है माँ की छाया एक तरफ है ताज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज

अपने लहू से जिसको सींचा काटा उस फुलवारी को
आग लगा दो दुनिया वालों ऐसी दुनियादारी को

ऐसी दुनियादारी को
चुपके चुपके रोये माली बाग हुआ तालाब
एक तरफ है माँ की छाया एक तरफ है ताज
राम लखन की जोड़ी देखो बिछड़ रही है आज
………………………………………………….
Ek taraf hai maa ki chhaya=Aandhi aur toofan 1964

Artists: Dara Singh, Kamran, Ratnamala

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Aug 9, 2016

हमें उन राहों पर चलना है-मासूम १९६०

सुबीर सेन और आरती मुखर्जी का गाया एक गीत सुनते हैं
जिसमें कोरस का भी गायन है. राजा मेहँदी अली खान के
लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है रॉबिन बैनर्जी ने. सन १९६०
की फिल्म मासूम का निर्देशन सत्येन बोस ने किया था.
फिल्म में सरोष ईरानी, हनी ईरानी, मनमोहन कृष्ण, मोहन
चोटी, केष्टो मुखर्जी, चमन पुरी जैसे कलाकार हैं.

सत्येन बोस ने इससे पहले सन १९५४ में बच्चों वाली फिल्म
बनायीं थी जागृति जो काफी चर्चित रही और उस फिल्म के
गीत तो आज भी आप सुन सकते हैं.सन१९५४ की ही एक
फिल्म के लिए उन्होंने संगीतकार शैलेश को मौका दिया था
जिन्हें बाद में सवेरा फिल्म का संगीत तैयार करने का भी
अवसर मिला. बोस ने रोबिन बैनर्जी से केवल यही फिल्म
मासूम करवाई. ७० के दशक में बोस की अधिकांश फिल्मों
में लक्ष्मी-प्यारे का संगीत है.

इस गीत में सुबीर सेन का उच्चारण काफी हद तक साफ़ है.
उनसे काफी रिहर्सल कराई होगी संगीत निर्देशक ने इस गीत
के लिए अन्यथा वो ‘दुर मेरी मंज़िल’ और ‘दिल हुआ घायिल’
जैसा कुछ गाते. तब भी ‘इन’ और ‘उन’ शब्दों का मिश्रण
है गीत में.



गीत के बोल:

हमें उन राहों पर चलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

जब तक न लगन हो सीने में
बेकार है ऐसे जीने में
जब तक न लगन हो सीने में
बेकार है ऐसे जीने में
चढ़ना है हमें चंदा की तरह
सूरज की तरह नहीं ढ़लना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम हैं दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

मैं पास रहूँ या दूर रहूँ
ये बात अभी तुम से कह दूँ
मैं पास रहूँ या दूर रहूँ
ये बात अभी तुम से कह दूँ
हँसना ही नहीं फूलों की तरह
दीपक की तरह हमें जलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है

आकाश से आती है ये सदा
ग़म आए अगर तो जी न ढला
आकाश से आती है ये सदा
ग़म आए अगर तो जी न ढला
कभी ग़म हैं यहाँ कभी हैं ख़ुशियाँ
हर हाल में हम को पलना है

हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
हम है दिये औरों के लिये
जिन्हें तूफ़ानों में जलना है
हमें उन राहों पर चलना है
जहाँ गिरना और संभलना है
.......................................................................
Hamen un rahon par-Masoom 1960

Honey Irani, Sarosh Irani, Manmohan Krishna

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Jul 22, 2016

इरादा न था आपसे प्यार का-आंधी और तूफ़ान १९६४

अनजान फिल्मों और गुमनाम फिल्मों से मधुर गीतों की
श्रृंखला में अगला गीत पेश है फिल्म आंधी और तूफान से
ये सन १९६४ की फिल्म है.

दारा सिंह की पहलवानी फिल्मों में से एक है ये और इसमें
दारा सिंह के साथ मुमताज़ हैं. भगवान, जीवन और कामरान
बाकी के प्रमुख कलाकार हैं. कामरान फिल्म्स के लिए इसका
निर्देशन मोहम्मद हुसैन ने किया.

गीतों के वीडियो उपलब्ध नहीं है यू-ट्यूब पर अलबत्ता पूरी
फिल्म देखने के लिए ज़रूर मिल जायेगी.

गीत फारूक कैसर का लिखा हुआ है जिसकी तर्ज़ बनाई है
रोबिन बैनर्जी ने. इसे रफ़ी और सुमन कल्याणपुर ने गाया
है.





गीत के बोल:

इरादा न था आपसे प्यार का
मगर हो गया दिल ये सरकार का
मगर हो गया दिल ये सरकार का
हमेशा रहे लब पे इनकार ही
मज़ा जब ही आता है इकरार का
मज़ा जब ही आता है इकरार का 

इरादा न था आपसे प्यार का
मगर हो गया दिल ये सरकार का
मगर हो गया दिल ये सरकार का
हमेशा रहे लब पे इनकार ही
मज़ा जब ही आता है इकरार का
मज़ा जब ही आता है इकरार का 

इरादा न था

ये महफ़िल नई और ये जलवे तेरे
रहूँ होश में ये खुदा ना करे
दुआ कर रही हूँ यही हर घडी
ये नज़रों की बिजली भी मुझ पर गिरे
मुझ पर गिरे
निगाहों में था बेनजारा नहीं
मगर दिल में है अरमान है दीदार का
मगर दिल में है अरमान है दीदार का

इरादा न था

तुझे क्या बताऊँ मैं ए नाजनीन
हजारों में लाखों में तू है हसीं
ये जाम-ए-नज़र की कसम है मुझे
मैं पीता हूँ लेकिन शराबी नहीं
शराबी नहीं
घटायें ना बहला सकेंगी मुझे
मैं दीवाना हूँ जुल्फ-ए-दिलदार का
मैं दीवाना हूँ जुल्फ-ए-दिलदार का 

इरादा न था
................................................
Irada na tha-Aandhi aur toofan 1964

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Jun 22, 2016

आँखों आँखों में हर एक रात-मार्वल मैन १९६४

गुमनाम फिल्मों और अनजान कलाकारों के चर्चे आगे बढ़ाते
हुए एक गीत सुनते हैं सन १९६४ की फिल्म मार्वल मैन से.
रोबिन बैनर्जी के संगीत से सजी इस फिल्म में महेश कुमार,
शकीला बानो भोपाली, राजन कपूर, धनराज और पोल्सन ने
काम किया. उसके अलावा और भी रहे होंगे कई ऐसे कलाकार
जिन्हें हम नहीं पहचानते हैं.

इंडो-अफ्रिका प्रोडक्शंस बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन
बी जे पटेल साहब ने किया था.

प्रस्तुत गीत योगेश का लिखा हुआ है और इसे गाया है एक
प्रतिभावान मगर कम अवसर प्राप्त गायिका मुबारक बेगम ने.
योगेश ने भी सरल शब्दों के जमावड़े में विश्वास रखा और यूँ
रखा कि उन्हें ज्यादा लच्छों और तुकबंदियों की ज़रूरत नहीं
पड़ी. सारा खेल शब्दों की जमावट का है, शब्द वही होते हैं
मगर तरीके बदल जाते हैं. कहीं ये भाषण हो जाते हैं तो कहीं
प्रवचन.   



गीत के बोल:

आँखों आँखों में हर इक रात गुज़र जाती है
आँखों आँखों में हर इक रात गुज़र जाती है
तुम नहीं आते हो तो याद भी क्यों आती है
आँखों आँखों में हर इक रात गुज़र जाती है

हम खयालों में बुला लेते हैं अक्सर तुमको
हम खयालों में बुला लेते हैं अक्सर तुमको
जब तबियत ज़रा तन्हाई से घबराती है
जब तबियत ज़रा तन्हाई से घबराती है

आँखों आँखों में हर इक रात गुज़र जाती है

हर इक आहट पे यूँ हम चौंक उठा करते हैं
हर इक आहट पे यूँ हम चौंक उठा करते हैं
जिस तरह बिजली घटाओं में चमक जाती है
तुम नहीं आते हो तो याद भी क्यों आती है

आँखों आँखों में हर इक रात गुज़र जाती है
..............................................................
Ankhon ankhon mein hare k raat-Marvel Man 1964

Artist-Shakeela Bano Bhopali

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Nov 16, 2010

आई हूँ बड़ी दूर से-सखी रोबिन १९५७

पिछले गीत में नायिका दूर से आयीं थी और इस गीत में भी
बड़ी दूर से आ रही है । पिछला अंदाज़ मजरूह का था तो ये
गीतकार योगेश का है। दोनों गीत सन १९५७ के हैं इनमे से
एक लोकप्रिय हुआ दूसरा नहीं। तुमसा नहीं देखा एक हिट
फिल्म थी और सखी-रोबिन गुमनामी के अंधेरों में कहीं खो गई।

रोबिन हुड के चरित्र से फिल्मकार काफी प्रभावित दिखे।
हॉलीवुड और बॉलीवुड में रोबिन हूड के ऊपर कई फिल्मों
का निर्माण हुआ। १९५७ में एक हिंदी फिल्म बनी-सखी रोबिन
इसमें रंजन रोबिन बने और शालिनी उनकी सखी। कहनियों को
रोचक बनाने के लिए उनमे सखियों के किरदार डाले जाते हैं
हैं। इस गीत में शीला वाज़ नमक नायिका परदे पर गीत गा
रही हैं। पार्श्वगायन किया है सुमन कल्यानपुर ने, गीत योगेश
का लिखा हुआ है और संगीत दिया है रोबिन बैनर्जी ने ।



गीत के बोल:

आई हूँ बड़ी दूर से
देखो न हमें घूर के

आई हूँ बड़ी दूर से
देखो न हमें घूर के, ओये होए
मेरे होंठों पे तराने
क्या क्या लायी हूँ खजाने
वई वई सुन लो ज़माने
वई वई सुन लो ज़माने

आई हूँ बड़ी दूर से
देखो न हमें घूर के, ओये होए
क्या क्या लायी हूँ खजाने
वई वई सुन लो ज़माने
वई वई सुन लो ज़माने

आई हूँ बड़ी दूर से

जहाँ से मैं आई हूँ
वो ख्वाबों की बस्ती है
रश्क करती है ज़िन्दगी
हर कदम पे मस्ती है

जहाँ से मैं आई हूँ
वो ख्वाबों की बस्ती है
रश्क करती है ज़िन्दगी
हर कदम पे मस्ती है

आई हूँ बड़ी दूर से
देखो न हमें घूर के, ओये होए
क्या क्या लायी हूँ खजाने
वई वई सुन लो ज़माने
वई वई सुन लो ज़माने

ये दुनिया की राहों में
ग़मों का ठिकाना है
दूर कहीं अम्बर तले
मेरा आशियाना है

ये दुनिया की राहों में
ग़मों का ठिकाना है
दूर कहीं अम्बर तले
मेरा आशियाना है

आई हूँ बड़ी दूर से
देखो न हमें घूर के, ओये होए
मेरे होंठों पे तराने
क्या क्या लायी हूँ खजाने
वई वई सुन लो ज़माने
वई वई सुन लो ज़माने

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Apr 5, 2009

तुम जो आओ तो प्यार-सखी रोबिन १९६२

कई बी ग्रेड और सी ग्रेड की फिल्मों में मधुर गीत गुम हो गए।
ऐसी ही एक फ़िल्म है सन १९६२ की सखी रोबिन। अंग्रेज़ी पात्र
'रोबिन हुड' पर बनाई गई फ़िल्म में रंजन और शालिनी हीरो
हिरोइन की भूमिका में हैं। इनमे से रंजन नाम के अभिनेता का

नाम ये चेहरे से आप वाकिफ होंगे। अगर हिन्दी में सुपरमेन फ़िल्म
बने तो उसमे सुपरमेन भी गाना गायेगा और उसकी प्रेमिका
भरत नाट्यम करेगी। इस गीत को लिखा है योगेश ने।

आश्चर्य है की योगेश ने इतनी पुरानी फिल्मों में गीत लिखे और
उनको प्रसिद्धि मिली राजेश खन्ना अभिनीत फ़िल्म आनंद के गानों
से। इस गीत की तर्ज़ बनाई है रोबिन बनर्जी ने। विचित्र संयोग है
कि फ़िल्म के नाम और संगीतकार दोनों के नाम में रोबिन शब्द
आता है।




गीत के बोल:


तुम जो आओ तो प्यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

क्या कहूँ तुमसे कह नहीं सकता
बिन तुम्हारे मैं रह नहीं सकता
क्या कहूँ तुमसे कह नहीं सकता
बिन तुम्हारे मैं रह नहीं सकता
तुमको गर ऐतबार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

तुम जो आओ तो प्यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

दिल पे मुझको तो ऐतबार नहीं
ये वो शय है जिसे करार नहीं
दिल पे मुझको तो ऐतबार नहीं
ये वो शय है जिसे करार नहीं
दिल पे गर इख्तियार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

तुम जो आओ तो प्यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

जब तमन्ना शबाब पर आए
हर तरफ़ इक खुमार सा छाए
जब तमन्ना शबाब पर आए
हर तरफ़ इक खुमार सा छाए
ज़ह- ऐ-किस्मत जो यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए

तुम जो आओ तो प्यार आ जाए
ज़िंदगी में बहार आ जाए
..............................................................
Tum jo aao to pyar-Sakhi Robin 1962.

Artists: Ranjan, Shalini

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