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Nov 19, 2010

हम भी हैं जोश में -जोश २०००

एक नया गीत देखा जाए जो फुल ढिशुम ढिशुम वाले अंदाज़ में
गाया जा रहा है। कुछ नया सा है, अलग हट के है वगैरह वगैरह।
अनु मालिक का संगीत है, शाहरुख़ अभिनीत फिल्म जोश से ये
गीत लिया गया है। तरह तरह की आवाजें हैं गीत में साईकिल की
चैन, डब्बे की खड खड , रेलगाड़ी के चलने की आवाजों से मिलती
जुलती कुछ आवाज़, कुल मिलकर जो भी है सुर ताल में है। गीत
युवा पीढ़ी को बहुत पसंद आया था। गीत लिखा है समीर ने, इसे
गाया है सुरेश पीटर और मानो ने।



गीत के बोल:

हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
यूँ ना ऑंखें दिखा

सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे

हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
यूँ ना ऑंखें दिखा

सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे

देखे हैं तेरे जैसे, तेरा इरादा क्या है बता
जा रे यहाँ ना आ रे, ना हमसे करना कोई खता
देखे है तेरे जैसे, तेरा इरादा क्या है बता
जा रे यहाँ ना आ रे, ना हमसे करना कोई खता
तू बोल दे चल भूल जा
बाते ना कर, यूँ ना डरा
सुन बेखबर, जो दम है अगर
आ रूबरू, करें जुंग शुरू
समझा है तुने क्या
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे

यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या रे
हे
यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या रे
हा
यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या रे
हो
यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या यय्या रे

बच के, ज़रा सा बच के, तू रहना हमसे, प्यारे यहाँ
हट के, ज़रा सा हट के, है डरता हमसे, सारा जहाँ
बचके, ज़रा सा बच के, तू रहेना हमसे, प्यारे यहाँ
हटके, ज़रा सा हट के, है डरता हमसे, सारा जहाँ
यूँ सोचकर है लड़ना अगर, तो मैदान में आ, ना सर को छुपा
खबरदार हूँ, मैं तैयार हूँ, औकात क्या, तेरी जात क्या
ये तो मुझे बता

सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
हम भी हैं जोश में बातें कर होश में
यूँ ना ऑंखें दिखा

सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
सैला रु सैला रे क्या बोला फिर बोल रे
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Saila ru saila re kya bola fir-Josh 2000

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Dec 31, 2009

जादू भरी आँखों वाली सुनो-दस्तक १९९६

सुष्मिता सेन के मिस यूनीवर्स बनते ही सबसे पहले लाभ उठाया सौंदर्य
प्रसाधन बनाने वाली कंपनियों और प्रायोजकों ने। इस अवसर को फिल्मों
में सबसे पहले भुनाने की कोशिश करी महेश भट्ट ने जिन्होंने सुष्मिता सेन
के साथ शरद कपूर को लेके एक फिल्म बनायीं-'दस्तक'। १९९६ में आई ये
फिल्म लोग ज्यादातर इसलिए देखने गए कि नयी मिस यूनीवर्स कैसी दिखती
है। इस गीत में वो सारे लटके झटके शामिल किये गए हैं जो मिस यूनिवर्स
प्रतियोगिता के प्रतिस्पर्धी स्टेज पर दर्शाते हैं । महेश भट्ट के कथानक में
अक्सर एक मानसिक रूप से बीमार किरदार होता है ।इस फिल्म में भी ,जो
युवक मिस यूनिवर्स पे आसक्त है, वो मानसिक रूप से अस्थिर एक बुद्धिजीवी
है। फिल्म की पटकथा लिखी थी विक्रम भट्ट ने और उसमे सचिन भौमिक
(आराधना-१९६९ की कहानी लिखने वाले ) ने भी योगदान दिया। समीर के
बोलों को आवाज़ दी है उदित नारायण ने और धुन बनाई है राजेश रोशन ने।



गीत के बोल:

मुह्ज्को जब ऐसे देखती हो तुम
रंग भर जाते हैं फिजाओं में
कसमसाती है आरजू दिल में
गीत घुल जाते हैं हवाओं में

जादू भरी आँखों वाली सुनो
जादू भरी आँखों वाली सुनो
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो

जादू भरी आँखों वाली सुनो
जादू भरी आँखों वाली सुनो
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो

फिर मैं कोई उम्मीद करूं
फिर मुझे कोई अरमां हो
फिर मैं कोई उम्मीद करूं
फिर मुझे कोई अरमां हो
तुम शायद मेरी बन जाओ
फिर दिल को ऐसा गुमान हो
पर ऐसा ना हो तो अच्छा है
इन बातों में क्या रक्खा है
मुझको ऐसी उम्मीद ना दो

जादू भरी आँखों वाली सुनो
जादू भरी आँखों वाली सुनो
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो

फिर धड़कन में तुम बस जाओ
फिर कोई ग़ज़ल में गाऊँ
फिर धड़कन में तुम बस जाओ
फिर कोई ग़ज़ल में गाऊँ
फिर चाँद में तुमको मैं देखूं
फूल में तुमको पाऊँ
पर ऐसा ना हो तो अच्छा है
इसका अंजाम जो होता है
वो दर्द ही देता है दिल को

जादू भरी आँखों वाली सुनो
जादू भरी आँखों वाली सुनो
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो
तुम ऐसे मुझे देखा ना करो

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