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Dec 20, 2009

खाली पीली प्यार से मेरा- एतबार १९८५

गीत शुरू होता है "खाली पीली" शब्दों से। ये गीत एक चाय समोसे
कि होटल वाला खूब बजाया करता। ये उन दिनों कि बात है जब यह
फिल्म नयी नयी सिनेमा हाल में लगी थी। खाली(रोटी) ,पीली(लस्सी)
हमारा वर्जन होता। बाकी के बोलों पर गौर नहीं किया था जब तक
फिल्म नहीं देखी।

हृष्ट पुष्ट अभिनेत्रियों का जिक्र पहले भी हो चुका है। इस गीत में
आपको हुमा खान नामक अभिनेत्री परदे पर गीत के साथ नाचती
दिखाई देंगी। गायिका हैं इला अरुण जिन्होंने इस द्विअर्थी से सुनाई
पड़ने वाले गीत को बहुत तबियत से गाया है। हालीवुड और बॉलीवुड
के कथानक में ऐसे मसालों का ही फर्क है।



गीत के बोल:

खाली पीली प्यार से मेरा होगा नहीं भला
हे थानेदार चद्दर नयी बिछा
रे थानेदार चद्दर नयी बिछा
रे मैं भी सोऊँगी, ओ हो
रे मैं भी सोऊँगी तू भी सोयेगा
पंखा झलेगी तेरी माँ
ओ थानेदार चद्दर नयी बिछा
रे थानेदार चद्दर नयी बिछा

रे थानेदार घर में कुआँ खुदा
रे थानेदार घर में कुआँ खुदा
अरे मैं भी नहाऊँगी, ओ होए ओये
रे मैं भी नहाऊँगी, तू भी नहायेगा
पानी भरेगी तेरी माँ

रे थानेदार घर में कुआँ खुदा
रे थानेदार घर में कुआँ खुदा

खाली पीली प्यार से मेरा होगा नहीं भला
रे थानेदार घर में कुआँ खुदा

रे थानेदार ढोलक मुझे दिला
रे थानेदार ढोलक मुझे दिला
रे मैं भी बजूंगी, धरर धूम, धरर धूम
रे मैं भी बजूंगी, तू भी बजाएगा
हल्ला सुनेगी तेरी माँ
ओ थानेदार ढोलक मुझे दिला
रे थानेदार ढोलक मुझे दिला

खाली पीली प्यार से मेरा होगा नहीं भला
रे थानेदार ढोलक मुझे दिला

रे थानेदार ला दे मैनू घोडा
रे थानेदार ला दे मैनू घोडा
रे भी चदंगी, ओ हो, हम्म हम्म
रे भी चढ़ांगी , तू भी चढ़ेगा
पैदल चलेगी तेरी माँ
ओ थानेदार ला दे मैनू घोडा
रे थानेदार ला दे मैनू घोडा

रे थानेदार ला दे मुझे गन्ना
ओ थानेदार ला दे मुझे गन्ना
मैं भी चूसूंगी , आह ओह ऊंह आह
मैं भी चूसूंगी, तू भी चूसेगा
छिलके चुनेगी तेरी ...
माँ

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Jul 30, 2009

किसी नज़र को तेरा इंतज़ार-ऐतबार

बप्पी लाहिड़ी पर संगीत प्रेमी समय समय पर गानों की गुणवत्ता गिराने
का आरोप लगाते रहे हैं। गानों की गुणवत्ता का सम्बन्ध गाने के बोल और
फ़िल्म के डाईरेक्टर की इच्छा पर निर्भर होता है। बिना मांग के किसी
संगीत की कोई कीमत नहीं। स्वाभाविक तौर पर फ़िल्म संगीत के पतन
का सिलसिला ७० के दशक में शुरू हुआ। आग में घी का काम दक्षिण
के आए निर्माताओं ने किया जो ८० के दशक में देखने को मिला। ये बात
और है कि जब बप्पी की गाड़ी अच्छे संगीत से नहीं चली तो उन्होंने भी
परिस्थिति से समझौता करते हुए चालू किस्म की फिल्मों में संगीत दिया
और वो एकदम से प्रसिद्धि की सीढ़ी चढ़ते चले गए।

बप्पी ने बहुत मधुर संगीत की रचना भी की है। उनके कर्णप्रिय गीतों
में से एक है- फ़िल्म ऐतबार का -किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
जो आशा और भूपेंद्र ने गाया है। गाने के बोल हसन कमाल ने लिखे हैं।



गाने के बोल:

किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है

वो वादियाँ, वो फ़जाएं के हम मिले थे जहाँ
मेरी वफ़ा का वहीँ पर मजार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

न जाने देख के क्यूँ उनको, ये हुआ अहसास
के मेरे दिल पे उन्हें इख्तियार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनिया
वफ़ा की राह में घायल वो प्यार आज भी है

वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनिया

यकीन नहीं है मगर आज भी ये लगता है
मेरी तलाश में शायद बहार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

न पूछ कितने मोहब्बत के ज़ख्म खाए हैं
के जिनको सोच के दिल सोग़वार आज भी है

वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनिया
वफ़ा की राह में घायल वो प्यार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

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