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Sep 8, 2015

सागर किनारे दिल ये पुकारे-सागर १९८४

गीत के साथ एक दिलचस्प आंकड़ा जुडा हुआ है. इस गीत के दृश्य
विशेष के १५० से ज्यादा रीटेक हुए थे. ऐसा उस समय के फ़िल्मी
मसाला अखबार और पत्रिकाओं में पढ़ने को मिला था. वो दृश्य था-
चुम्बन दृश्य. ये क्यूँ हुआ ये तो रमेश सिप्पी ही बेहतर बता सकते
हैं जो फिल्म के निर्देशक हैं. गौरतलब है ये फिल्म डिम्पल की दूसरी
पारी की पहली फिल्म थी.

ऋषि कपूर एक स्थापित सितारा बन चुके थे तब तक और ये इस जोड़ी
की फिल्म बॉबी के बाद दूसरी फिल्म है. फिल्म एक यादगार फिल्म है
और इसमें कमल हसन के अभिनय ने सबको चकित किया था. कमाल
हसन की ये दूसरी ऐसी फिल्म है हिंदी में जिसका ट्रेजिक अंत होता है.
पहली फिल्म थी-एक दूजे के लिए.

गीत मधुर है और इस गीत की धुन संगीतकार पहले एक फिल्म में ला
चुके हैं-गीत था-हमें रास्तों की ज़रूरत नहीं है जो नरम गरम फिल्म में
है. उस गीत की गायिका आशा भोंसले हैं. ऐसे कई वाकये हुए हैं हिंदी
फिल्म संगीत क्षेत्र में, जब किसी संगीतकार की अच्छी धुन अनसुनी
रह जाती है या जब संगीतकार को किसी धुन से विशेष लगाव हो, वो
उस धुन को बार बार प्रयोग में लाना चाहता है और लाता भी है. फिल्म
नरम गरम का संगीत अनुसना ही रह गया और उसकी बड़ी वजह-फिल्म
का न चल पाना. गोलमाल फिल्म का कथानक दर्शकों को नया लगता
है आज भी मगर फिल्म नरम-गरम का कथानक कमज़ोर साबित हुआ
गोलमाल के आगे.



गीत के बोल:

सागर किनारे, दिल ये पुकारे
तू जो नहीं तो मेरा कोई नहीं है
सागर किनारे

जागे नज़ारे, जागी हवायें
जब प्यार जागा, जागी फिज़ायें
पल भर तो दिल की दुनियाँ सोयी नहीं है
सागर किनारे, दिल ये पुकारे
तू जो नहीं तो मेरा कोई नहीं है
सागर किनारे

लहरों पे नाचे, किरनों की परियाँ
मैं खोयी जैसे, सागर में नदिया
तू ही अकेली तो खोयी नहीं है

सागर किनारे, दिल ये पुकारे
तू जो नहीं तो मेरा कोई नहीं है
सागर किनारे
.....................................................................
Sagar kinare dil ye pukare-Sagar 1984

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Dec 17, 2014

जीने दे ये दुनिया २- लावा १९८५

फिल्म लावा कुछ अच्छे गीतों से सजी फिल्म थी. फिल्म ज्यादा
नहीं चली. आज एक गीत का वो वाला तर्जुमा सुनवा रहे हैं जो
बहुत ही कम लोगों ने सुना होगा. ये है आशा भोंसले की आवाज़
में. गीत दर्दीला है और इसका ओर्केस्ट्रा भी वैसा ही है. राहुल देव
बर्मन ने जो भी गीत आशा के लिए बनाये हैं गुणवत्ता के हिसाब
से इसे आप टॉप टेन आशा-आर डी कॉम्बिनेशन में रख सकते हैं.
बोल और धुन लाजवाब हैं. पैसा वसूल गीत है ये. अपने प्रेमी से
बिछड़ने और मजबूरन एक खब्ती दबंग रईस से चिपकाए जाने की
मिली जुली प्रतिक्रिया इस गीत में व्यक्त हो रही है. नायिका झरने
के किनारे कड़ी लगभग ख़ुदकुशी करने के कगार पर है जब ये
गीत गा रही है. इसी जगह उसने अपने प्रेमी को पानी की
गहराईयों में खोते हुए देखा था. इसका वीडियो उपलब्ध नहीं है
सुन कर आनंद उठायें.




गीत के बोल:

जीने दे ये दुनिया चाहे मार डाले

कागज पे कुछ हो, लिखा तो मिटा दूं
सौदा किया हो हो तो कीमत चूका दूं
कागज पे कुछ हो, लिखा तो मिटा दूं   
सौदा किया हो हो तो कीमत चूका दूं
देखा हो सपना तो सपना भुला दूं
कैसा भुला दूं तुम्हें याद आने वाले
लोग हम निराले प्यार करने वाले

जीने दे ये दुनिया चाहे मार डाले

गजरा खुला था कजरा बहा था
कल रात मुझको तू याद आ रहा था
गजरा खुला था कजरा बहा था
कल रात मुझको तू याद आ रहा था

आँखों में बस जा मैंने कहा था
ये कब कहा था की नींदें चुरा ले
लोग हम निराले प्यार करने वाले

जीने दे ये दुनिया चाहे मार डाले
.............................................
Jeene de ye duniya(Asha version)-Laava 1985

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Jul 30, 2009

किसी नज़र को तेरा इंतज़ार-ऐतबार

बप्पी लाहिड़ी पर संगीत प्रेमी समय समय पर गानों की गुणवत्ता गिराने
का आरोप लगाते रहे हैं। गानों की गुणवत्ता का सम्बन्ध गाने के बोल और
फ़िल्म के डाईरेक्टर की इच्छा पर निर्भर होता है। बिना मांग के किसी
संगीत की कोई कीमत नहीं। स्वाभाविक तौर पर फ़िल्म संगीत के पतन
का सिलसिला ७० के दशक में शुरू हुआ। आग में घी का काम दक्षिण
के आए निर्माताओं ने किया जो ८० के दशक में देखने को मिला। ये बात
और है कि जब बप्पी की गाड़ी अच्छे संगीत से नहीं चली तो उन्होंने भी
परिस्थिति से समझौता करते हुए चालू किस्म की फिल्मों में संगीत दिया
और वो एकदम से प्रसिद्धि की सीढ़ी चढ़ते चले गए।

बप्पी ने बहुत मधुर संगीत की रचना भी की है। उनके कर्णप्रिय गीतों
में से एक है- फ़िल्म ऐतबार का -किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
जो आशा और भूपेंद्र ने गाया है। गाने के बोल हसन कमाल ने लिखे हैं।



गाने के बोल:

किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है

वो वादियाँ, वो फ़जाएं के हम मिले थे जहाँ
मेरी वफ़ा का वहीँ पर मजार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

न जाने देख के क्यूँ उनको, ये हुआ अहसास
के मेरे दिल पे उन्हें इख्तियार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनिया
वफ़ा की राह में घायल वो प्यार आज भी है

वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनिया

यकीन नहीं है मगर आज भी ये लगता है
मेरी तलाश में शायद बहार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

न पूछ कितने मोहब्बत के ज़ख्म खाए हैं
के जिनको सोच के दिल सोग़वार आज भी है

वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनिया
वफ़ा की राह में घायल वो प्यार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

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