Showing posts with label Aitbaar. Show all posts
Showing posts with label Aitbaar. Show all posts

Jan 24, 2016

तुम और मैं और ये बेखुदी-ऐतबार १९८५

फिल्म ऐतबार से शायर हसन कमाल का लिखा हुआ एक
बढ़िया गीत आपको सुनवाया था कुछ साल पहले. आज सुनते
हैं एक और शायर फारूक कैसर का लिखा गीत. फारूक कैसर
ने बरसों पहले सन ५० के आस पास अपने लेखन की शुरुआत
की थी.

उन्होंने गीत लेखन में कई झंडे गाडे हैं. यूँ कहें उनके लिखे
कई गीत लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचे.

गीत में आप राज बब्बर को देखेंगे लीना दास के साथ. इस
फिल्म में राज बब्बर ने नकारात्मक भूमिका निभाई है. इस
गीत के बोल अलबत्ता अच्छे हैं. आशा भोंसले ने इस गाने
को गाया है. संगीत तैयार किया है बप्पी लहरी ने. बप्पी
ने एक अच्छी धुन बनाई है इस गीत के लिए. गीत हालाँकि
ज्यादा प्रचलित नहीं हुआ मगर लंबे समय तक सुनने लायक
है ये.



गीत के बोल:

तुम और मैं और ये बेखुदी
तुम और मैं और ये बेखुदी
नशीली रात है तुम्हारा साथ है
क्या बात है क्या बात है
तुम और मैं और ये बेखुदी

महकी हुई तन्हाईयां
बहकी हुई अंगडाईयाँ
महकी हुई तन्हाईयां
बहकी हुई अंगडाईयाँ
मुझे थाम लो मुझे थाम लो
मुझे थाम लो जाने जान जाने जान
तुम और मैं और ये बेखुदी

जादू भी हूँ टोना भी हूँ
चांदी भी हूँ सोना भी हूँ
जादू भी हूँ टोना भी हूँ
चांदी भी हूँ सोना भी हूँ
मुझे लूट लो मुझे लूट लो
मुझे लूट लो जाने जान जाने जान
तुम और मैं और ये बेखुदी

गोरा बदन खुशबू भरा
कहता है क्या सुन लो ज़रा
गोरा बदन खुशबू भरा
कहता है क्या सुन लो ज़रा
मुझे प्यार दो मुझे प्यार दो
मुझे प्यार दो जाने जान जाने जान
तुम और मैं और ये बेखुदी
नशीली रात है तुम्हारा साथ है
क्या बात है क्या बात है
तुम और मैं और ये बेखुदी
………………………………………………………
Tum aur main aur ye bekhudi-Aitbaar 1985

Read more...

Dec 20, 2009

खाली पीली प्यार से मेरा- एतबार १९८५

गीत शुरू होता है "खाली पीली" शब्दों से। ये गीत एक चाय समोसे
कि होटल वाला खूब बजाया करता। ये उन दिनों कि बात है जब यह
फिल्म नयी नयी सिनेमा हाल में लगी थी। खाली(रोटी) ,पीली(लस्सी)
हमारा वर्जन होता। बाकी के बोलों पर गौर नहीं किया था जब तक
फिल्म नहीं देखी।

हृष्ट पुष्ट अभिनेत्रियों का जिक्र पहले भी हो चुका है। इस गीत में
आपको हुमा खान नामक अभिनेत्री परदे पर गीत के साथ नाचती
दिखाई देंगी। गायिका हैं इला अरुण जिन्होंने इस द्विअर्थी से सुनाई
पड़ने वाले गीत को बहुत तबियत से गाया है। हालीवुड और बॉलीवुड
के कथानक में ऐसे मसालों का ही फर्क है।



गीत के बोल:

खाली पीली प्यार से मेरा होगा नहीं भला
हे थानेदार चद्दर नयी बिछा
रे थानेदार चद्दर नयी बिछा
रे मैं भी सोऊँगी, ओ हो
रे मैं भी सोऊँगी तू भी सोयेगा
पंखा झलेगी तेरी माँ
ओ थानेदार चद्दर नयी बिछा
रे थानेदार चद्दर नयी बिछा

रे थानेदार घर में कुआँ खुदा
रे थानेदार घर में कुआँ खुदा
अरे मैं भी नहाऊँगी, ओ होए ओये
रे मैं भी नहाऊँगी, तू भी नहायेगा
पानी भरेगी तेरी माँ

रे थानेदार घर में कुआँ खुदा
रे थानेदार घर में कुआँ खुदा

खाली पीली प्यार से मेरा होगा नहीं भला
रे थानेदार घर में कुआँ खुदा

रे थानेदार ढोलक मुझे दिला
रे थानेदार ढोलक मुझे दिला
रे मैं भी बजूंगी, धरर धूम, धरर धूम
रे मैं भी बजूंगी, तू भी बजाएगा
हल्ला सुनेगी तेरी माँ
ओ थानेदार ढोलक मुझे दिला
रे थानेदार ढोलक मुझे दिला

खाली पीली प्यार से मेरा होगा नहीं भला
रे थानेदार ढोलक मुझे दिला

रे थानेदार ला दे मैनू घोडा
रे थानेदार ला दे मैनू घोडा
रे भी चदंगी, ओ हो, हम्म हम्म
रे भी चढ़ांगी , तू भी चढ़ेगा
पैदल चलेगी तेरी माँ
ओ थानेदार ला दे मैनू घोडा
रे थानेदार ला दे मैनू घोडा

रे थानेदार ला दे मुझे गन्ना
ओ थानेदार ला दे मुझे गन्ना
मैं भी चूसूंगी , आह ओह ऊंह आह
मैं भी चूसूंगी, तू भी चूसेगा
छिलके चुनेगी तेरी ...
माँ

Read more...

Jul 30, 2009

किसी नज़र को तेरा इंतज़ार-ऐतबार

बप्पी लाहिड़ी पर संगीत प्रेमी समय समय पर गानों की गुणवत्ता गिराने
का आरोप लगाते रहे हैं। गानों की गुणवत्ता का सम्बन्ध गाने के बोल और
फ़िल्म के डाईरेक्टर की इच्छा पर निर्भर होता है। बिना मांग के किसी
संगीत की कोई कीमत नहीं। स्वाभाविक तौर पर फ़िल्म संगीत के पतन
का सिलसिला ७० के दशक में शुरू हुआ। आग में घी का काम दक्षिण
के आए निर्माताओं ने किया जो ८० के दशक में देखने को मिला। ये बात
और है कि जब बप्पी की गाड़ी अच्छे संगीत से नहीं चली तो उन्होंने भी
परिस्थिति से समझौता करते हुए चालू किस्म की फिल्मों में संगीत दिया
और वो एकदम से प्रसिद्धि की सीढ़ी चढ़ते चले गए।

बप्पी ने बहुत मधुर संगीत की रचना भी की है। उनके कर्णप्रिय गीतों
में से एक है- फ़िल्म ऐतबार का -किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
जो आशा और भूपेंद्र ने गाया है। गाने के बोल हसन कमाल ने लिखे हैं।



गाने के बोल:

किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है
कहाँ हो तुम के ये दिल बेकरार आज भी है

वो वादियाँ, वो फ़जाएं के हम मिले थे जहाँ
मेरी वफ़ा का वहीँ पर मजार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

न जाने देख के क्यूँ उनको, ये हुआ अहसास
के मेरे दिल पे उन्हें इख्तियार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनिया
वफ़ा की राह में घायल वो प्यार आज भी है

वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनिया

यकीन नहीं है मगर आज भी ये लगता है
मेरी तलाश में शायद बहार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

न पूछ कितने मोहब्बत के ज़ख्म खाए हैं
के जिनको सोच के दिल सोग़वार आज भी है

वो प्यार जिसके लिए हमने छोड़ दी दुनिया
वफ़ा की राह में घायल वो प्यार आज भी है

हो ओ ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

Read more...

May 17, 2009

आवाज़ दी है-एतबार १९८५

हसन कमाल के नाम से वो संगीत प्रेमी अवश्य परिचित होंगे जिन्होंने
गुलाम अली की ग़ज़लें सुनी हैं। उन्होंने फ़िल्म निकाह में एक गीत भी
लिखा था 'दिल के अरमान आंसुओं में बह गए' जिसे सलमा आगा ने
गाया है। गौतलब है की गुलाम अली की जो ग़ज़ल फ़िल्म निकाह में
इस्तेमाल की गई थी वो हसरत मोहानी की लिखी हुई है। फ़िल्म निकाह
को फ़िल्म संगीत में गजलों को पुनः स्थापित करने का श्रेय जाता है और
संगीतकार रवि इस प्रयास के लिए बधाई के पात्र हैं। ७० के दशक में ग़ज़लें
धीरे धीरे फिल्मों से गायब सी होने लगी थी।

हम कुछ ज्यादा ही टॉपिक से भटक गए हैं शायद। गीत की ओर वापस
चला जाए। फ़िल्म एतबार में सुरेश ओबेरॉय ने ग़ज़ल गायक की भूमिका
निभाई है। उनके हिस्से में दो ग़ज़लें आई हैं जिनको स्वर दिया है भूपेंद्र ने।
साथ में जनाना आवाज़ है आशा भोंसले की। एक ग़ज़ल का जिक्र शायद हम
पहले कर चुके हैं, अगर नहीं ! तो आगे अवश्य करेंगे. फिलहाल इसका
आनंद उठायें। संगीत है बंगाल के जादूगर बप्पी लहरी का। आशा भोंसले
उच्चारण दोष से इस गीत में भी मुक्त नहीं हुई हैं। वो एक जगह "खोई" को
"कोई" गा रही हैं।




गीत के बोल:

भूपेंद्र : आवाज़ दी है आज इक नज़र ने, या है ये दिल को गुमाँ
दोहरा रहीं हैं जैसे फ़ज़ायें, भूली हुई दास्ताँ
आवाज़ दी है आज इक नज़र ने, या है ये दिल को गुमाँ
दोहरा रहीं हैं जैसे फ़ज़ायें, भूली हुई दास्ताँ

आशा : लौट आयी हैं फिर रूठी बहारें, कितना हसीन है समा
दुनिया से कह दो न हम को पुकारे, हम खो गये हैं यहाँ
लौट आयी हैं फिर रूठी बहारें, कितना हसीन है समा
दुनिया से कह दो न हम को पुकारे, हम खो गये हैं यहाँ

भूपेंद्र: जीवन में कितनी वीरानियाँ थी, छायी थी कैसी उदासी
सुनकर किसी के कदमों की आहट, हलचल हुई है ज़रा सी
भूपेंद्र: जीवन में कितनी वीरानियाँ थी, छायी थी कैसी उदासी
सुनकर किसी के कदमों की आहट, हलचल हुई है ज़रा सी

सागर में जैसे लहरें उठीं हैं, टूटी हैं खामोशियाँ
दोहरा रहीं हैं जैसे फ़ज़ायें, भूली हुई दास्ताँ

आशा : तूफ़ान में खोई कश्ती को आखिर, मिल ही गया फिर किनारा
हम छोड़ आये ख्वाबों की दुनिया, दिल ने तेरे जब पुकारा
तूफ़ान में खोई कश्ती को आखिर, मिल ही गया फिर किनारा
हम छोड़ आये ख्वाबों की दुनिया, दिल ने तेरे जब पुकारा

कबसे खड़ी थी बाहें पसारे, इस दिल की तन्हाइयाँ
दुनिया से कह दो न हम को पुकारे, हम खो गये हैं यहाँ

भूपेंद्र: अब याद आया कितना अधूरा, अब तक था दिल का फ़साना
आशा: यूँ पास आ के दिल में समा के, दामन न हमसे छुड़ाना
भूपेंद्र: अब याद आया कितना अधूरा, अब तक था दिल का फ़साना
आशा:यूँ पास आ के दिल में समा के, दामन न हमसे छुड़ाना

आशा: जिन रास्तों पर तेरे कदम हों, मंजिल है मेरी वहाँ
दुनिया से कह दो न हम को पुकारे, हम खो गये हैं यहाँ
लौट आयी हैं फिर रूठी बहारें, कितना हसीन है समाँ
दुनिया से कह दो न हम को पुकारे, हम खो गये हैं यहाँ
...............................................................................................
Awaaz di hai-Aitbaar 1985

Artists: Raj Babbar, Suresh Oberoi, Dimple Kapadia

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP